Wednesday, June 17, 2026

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दो-तिहाई बहुमत की तलाश में NDA, TMC और उद्धव गुट में संभावित टूट से कितना बदलेगा संसद का गणित?

नई दिल्ली/सर्वोदय न्यूज़:- संसद में परिसीमन, ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ और महिला आरक्षण जैसे बड़े संवैधानिक बदलावों को लागू करने के लिए केंद्र सरकार को दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत है। ऐसे में भाजपा नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) लगातार अपने संख्याबल को मजबूत करने की कोशिशों में जुटा हुआ है।

अप्रैल 2026 में लोकसभा में पेश 131वां संविधान संशोधन विधेयक आवश्यक समर्थन नहीं जुटा पाने के कारण पारित नहीं हो सका था। इसके बाद से सत्तापक्ष संसद में अपना आंकड़ा बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

संविधान संशोधन के लिए कितना चाहिए समर्थन?

संविधान संशोधन पारित कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन के साथ-साथ सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत भी जरूरी होता है।

लोकसभा की मौजूदा प्रभावी संख्या 540 सदस्यों की है, जबकि तीन सीटें रिक्त हैं। ऐसे में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा लगभग 360 सदस्यों के आसपास माना जा रहा है। वर्तमान में NDA के पास 292 सांसदों का समर्थन है।

TMC में संभावित टूट से बदल सकता है समीकरण

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ सांसद पार्टी लाइन से अलग रुख अपना सकते हैं। दावों के मुताबिक यदि 20 सांसद अलग गुट बनाकर NDA को समर्थन देते हैं तो लोकसभा में गठबंधन की संख्या बढ़कर 312 तक पहुंच सकती है।

हालांकि इन दावों पर अभी तक संबंधित पक्षों की ओर से कोई अंतिम आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। यदि ऐसा होता है तो भी NDA दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से काफी दूर रहेगा।

संभावित गणित

  • NDA की वर्तमान ताकत: 292
  • संभावित TMC समर्थन: 20
  • कुल संख्या: 312

महाराष्ट्र में भी नजरें ‘ऑपरेशन टाइगर’ पर

महाराष्ट्र की राजनीति में भी हलचल तेज है। चर्चाएं हैं कि उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना-UBT) के कुछ सांसद सत्तापक्ष के संपर्क में हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने टूट की खबरों को खारिज किया है।

यदि भविष्य में शिवसेना (UBT) के 7 सांसद NDA का समर्थन करते हैं, तो गठबंधन की संख्या बढ़कर 319 तक पहुंच सकती है।

  • TMC समर्थन के बाद संख्या: 312
  • संभावित शिवसेना (UBT) समर्थन: 7
  • कुल संभावित संख्या: 319

क्या इससे मिल जाएगा दो-तिहाई बहुमत?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार जवाब फिलहाल ‘नहीं’ है। दोनों संभावित घटनाक्रमों के बावजूद NDA का आंकड़ा 360 से काफी नीचे रहेगा। ऐसे में गठबंधन को अभी भी करीब 41 अतिरिक्त सांसदों के समर्थन की आवश्यकता पड़ सकती है।

राज्यसभा में भी चुनौती बरकरार

उच्च सदन में भी NDA अभी लक्ष्य से पीछे है। राज्यसभा में गठबंधन की ताकत करीब 149 सदस्यों की बताई जा रही है, जबकि दो-तिहाई बहुमत के लिए लगभग 164 सदस्यों का समर्थन जरूरी है।

यानी राज्यसभा में भी NDA को करीब 15 अतिरिक्त सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी।

सरकार के एजेंडे में शामिल हैं बड़े सुधार

संसद में पर्याप्त संख्या बल जुटाना सरकार के लिए इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कई बड़े विधायी और संवैधानिक प्रस्ताव इसी पर निर्भर हैं।

1. परिसीमन विधेयक

जनगणना के बाद लोकसभा सीटों के नए सिरे से निर्धारण का प्रस्ताव सरकार के प्रमुख एजेंडों में शामिल है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि भविष्य में लोकसभा सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

2. वन नेशन, वन इलेक्शन

लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के लिए संविधान के कई अनुच्छेदों में संशोधन की आवश्यकता होगी, जिसके लिए विशेष बहुमत जरूरी है।

3. महिला आरक्षण का क्रियान्वयन

नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रभावी लागू होने की प्रक्रिया भी परिसीमन और नई जनगणना से जुड़ी हुई है।

कांग्रेस का भाजपा पर हमला

विपक्षी दल इन राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए विपक्षी दलों में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि सरकार विपक्षी दलों को कमजोर कर अपनी संख्या बढ़ाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि अप्रैल 2026 में संविधान संशोधन विधेयक पारित न हो पाने के बाद सत्तापक्ष लगातार नए समीकरण बनाने में जुटा हुआ है।

हालांकि भाजपा की ओर से इन आरोपों पर अब तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मानसून सत्र पर रहेगी नजर

आने वाले संसद के मानसून सत्र में संख्या बल का यह पूरा गणित बेहद अहम रहने वाला है। राजनीतिक दलों की रणनीति, संभावित गठबंधन और सांसदों के रुख पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या NDA अपने बड़े विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक समर्थन जुटा पाता है या नहीं।

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