Yogendra Yadav on Modi: ‘अभी मोदी का इस्तीफा नहीं चाहते लोग’, योगेंद्र यादव ने आंदोलन को लेकर कही बड़ी बात

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:-मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन के बीच स्वराज इंडिया के प्रमुख और राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने आंदोलन के उद्देश्य को लेकर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि फिलहाल इस आंदोलन की मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस्तीफा या सत्ता परिवर्तन नहीं है। उनके मुताबिक, आंदोलन में शामिल आम लोग निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव चाहते हैं, इसलिए इसकी मांग को इसी मुद्दे तक सीमित रखना चाहिए।

वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम को दिए इंटरव्यू में योगेंद्र यादव ने कहा कि किसी जनआंदोलन की दिशा केवल उसके नेतृत्व की इच्छा से तय नहीं होती, बल्कि उसमें शामिल लोगों की साझा मांग सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बात को रखने के लिए उन्हें आलोचना और गालियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन अपनी राजनीतिक समझ के आधार पर यह बात कहना उनकी जिम्मेदारी है।

‘अभी आंदोलन की मांग सत्ता परिवर्तन नहीं’

योगेंद्र यादव ने कहा कि मौजूदा आंदोलन का तात्कालिक लक्ष्य सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना होना चाहिए। उनके अनुसार, आंदोलन को व्यापक समर्थन देने वाले लोग अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से आते हैं, लेकिन उनकी साझा चिंता चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता है।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग मोदी सरकार के आलोचक हैं, कुछ विपक्षी दलों से जुड़े हैं और कुछ व्यवस्था में व्यापक बदलाव चाहते हैं। वहीं, ऐसे लोग भी आंदोलन के साथ हैं जिनकी मांग केवल इतनी है कि चुनाव में कथित गड़बड़ियां नहीं होनी चाहिए।

यादव के मुताबिक, आंदोलन की रणनीति तय करते समय उन सभी लोगों की न्यूनतम साझा सहमति को प्राथमिकता देनी चाहिए, जो इस मुद्दे पर एकजुट हुए हैं।

‘यह बात कहने पर पहले भी गालियां पड़ीं’

योगेंद्र यादव ने माना कि आंदोलन की मांग को सीमित रखने की बात से कुछ लोग नाराज हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक असहमति के जवाब में तर्क देने के बजाय गाली-गलौज की प्रवृत्ति बढ़ रही है।

उन्होंने अपने इंटरव्यू में कहा कि पहले भी इस तरह की राय रखने पर उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन के उद्देश्य और उसकी रणनीति को लेकर अपनी बात दोहराई।

उनका कहना था कि किसी आंदोलन में शामिल हर व्यक्ति की राजनीतिक इच्छा अलग हो सकती है, लेकिन आंदोलन की दिशा तय करते समय सभी की साझा मांग को समझना जरूरी है।

रेजीम चेंज के दो अर्थ, योगेंद्र यादव ने समझाया अंतर

योगेंद्र यादव ने ‘रेजीम चेंज’ यानी सत्ता व्यवस्था में बदलाव के संदर्भ में कहा कि इस शब्द के दो अर्थ हो सकते हैं। एक अर्थ चुनाव के जरिए सरकार बदलना है, जबकि दूसरा अर्थ तख्तापलट से जुड़ा है।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए सत्ता परिवर्तन की मांग करना गलत या गैरकानूनी नहीं है। उन्होंने 1977 और 2014 के चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि चुनाव के माध्यम से सत्ता परिवर्तन लोकतंत्र का हिस्सा है।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के जरिए सरकार बदलने और चुनावी प्रक्रिया से बाहर जाकर तख्तापलट करने के बीच स्पष्ट अंतर समझना चाहिए।

प्रशांत भूषण और कांग्रेस के संदर्भ में क्या बोले?

इंटरव्यू में योगेंद्र यादव ने कहा कि उनके अनुसार प्रशांत भूषण ने सड़क के जरिए चुनाव के बिना सरकार बदलने की मांग नहीं की है। उन्होंने कांग्रेस की ओर से भी इस विषय पर स्पष्टीकरण दिए जाने का उल्लेख किया।

यादव ने भाजपा पर आरोप लगाया कि ‘रेजीम चेंज’ से जुड़े बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। उनका कहना था कि किसी बयान का मूल्यांकन उसके वास्तविक संदर्भ में किया जाना चाहिए।

फिलहाल, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन में चुनावी सुधार और निष्पक्ष चुनाव की मांग के साथ अलग-अलग राजनीतिक विचार सामने आ रहे हैं। योगेंद्र यादव की टिप्पणी ने आंदोलन के उद्देश्य, उसकी रणनीति और सत्ता परिवर्तन की मांग को लेकर बहस को नया आयाम दिया है।

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