Friday, April 17, 2026

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महिला आरक्षण के बाद 6 राज्यों में होंगी 400 पार सीटें, तय करेंगे पूरा लोकसभा चुनाव

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने की तैयारी के बीच सीटों के संभावित पुनर्गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। प्रस्तावित बदलाव के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर करीब 816 किए जाने की बात सामने आ रही है, जिससे कई बड़े राज्यों का प्रभाव और बढ़ सकता है।

6 राज्यों में 400 से ज्यादा सीटें

नई व्यवस्था के मुताबिक Uttar Pradesh, Maharashtra, West Bengal, Bihar, Tamil Nadu और Madhya Pradesh जैसे राज्यों में सीटों की संख्या में बड़ा इजाफा होगा। इन छह राज्यों की कुल सीटें मिलाकर 400 के आंकड़े को पार कर सकती हैं, जो केंद्र की सत्ता तय करने में निर्णायक साबित होंगी।

अगर संभावित आंकड़ों पर नजर डालें, तो उत्तर प्रदेश में सीटें 80 से बढ़कर 120, महाराष्ट्र में 48 से 72, पश्चिम बंगाल में 42 से 63 और बिहार में 40 से 60 हो सकती हैं। वहीं मध्य प्रदेश में 29 से बढ़कर 44 सीटें होने का अनुमान है।

दक्षिणी राज्यों की स्थिति भी मजबूत

सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि दक्षिण भारत के राज्यों की स्थिति में कोई कटौती नहीं होगी। गृह मंत्री Amit Shah के अनुसार Karnataka में सीटें 28 से बढ़कर 42, Andhra Pradesh में 25 से 38 और Kerala में 20 से 30 तक पहुंच सकती हैं।

‘दिल्ली का रास्ता’ अब भी बड़े राज्यों से

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि “लखनऊ से दिल्ली का रास्ता” तय होने वाली कहावत आगे भी बरकरार रह सकती है। बड़े राज्यों की बढ़ती सीटें चुनावी समीकरणों को पहले की तरह ही प्रभावित करती रहेंगी।

महिला आरक्षण का गणित

महिला आरक्षण लागू होने के बाद लोकसभा की कुल सीटों में से एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। उदाहरण के तौर पर, उत्तर प्रदेश में 120 सीटों में से 40 सीटों पर महिला उम्मीदवार चुनी जाएंगी। इसी तरह बिहार में लगभग 20 सीटें महिलाओं के हिस्से में आ सकती हैं।

यह आरक्षण रोटेशन प्रणाली के तहत लागू किया जाएगा, जबकि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की महिलाओं को उनके कोटे के भीतर ही 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।

विपक्ष की मांग

विपक्षी दलों का कहना है कि महिला आरक्षण में ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं के लिए भी अलग से प्रावधान किया जाना चाहिए, ताकि सभी वर्गों को समान प्रतिनिधित्व मिल सके।

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