Saturday, March 28, 2026

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उत्तराखंड में एंट्री पर लगेगा ग्रीन सेस, 80 से 700 रुपये तक चुकाने होंगे शुल्क; पूरी डिटेल यहां

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तराखंड में नए साल से बाहर के राज्यों से आने वाले वाहनों को राज्य में प्रवेश के लिए ग्रीन सेस देना होगा। वाहन की श्रेणी के अनुसार यह शुल्क 80 रुपये से लेकर 700 रुपये तक तय किया गया है। गुरुवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परिवहन विभाग को इस व्यवस्था को जल्द लागू करने के निर्देश दिए। साथ ही, ग्रीन सेस योजना को लेकर बीते दो वर्षों से हुई देरी पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की कड़ी आलोचना भी की। परिवहन विभाग का दावा है कि यह व्यवस्था 1 जनवरी 2025 से लागू कर दी जाएगी।

दो साल से लटकी योजना, 100 करोड़ के नुकसान का अनुमान

सचिवालय में वर्ष 2025-26 की राजस्व प्राप्तियों की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग के कमजोर प्रदर्शन पर नाराजगी जताई। उल्लेखनीय है कि ग्रीन सेस योजना फरवरी 2024 में लागू की गई थी और दरों में संशोधन भी हुआ, लेकिन अब तक इसे प्रभावी रूप से लागू नहीं किया जा सका। सरकार के अनुसार, इस देरी के कारण राज्य को लगभग 100 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के विकास के लिए राजस्व बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि खनन सुधारों से राज्य को 200 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई है और वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 24,015 करोड़ रुपये का कर लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इन वाहनों को नहीं देना होगा ग्रीन सेस

ग्रीन सेस से कई श्रेणियों के वाहनों को पूरी तरह छूट दी गई है। इनमें शामिल हैं— दूसरे राज्यों के दो पहिया वाहन, केंद्र और राज्य सरकार के वाहन, अन्य राज्यों के सरकारी वाहन, ट्रैक्टर, ट्रेलर, रोड रोलर, कंबाइन हार्वेस्टर, शव वाहन, एंबुलेंस, फायर टेंडर और सेना के वाहन इसके साथ ही इलेक्ट्रिक, सोलर, हाइब्रिड और CNG से चलने वाले वाहन |

किस वाहन पर कितना देना होगा शुल्क

सरकार ने वाहन श्रेणी के अनुसार ग्रीन सेस की दरें तय की हैं—

  1. भारी वाहन: एक्सेल के अनुसार 450 से 700 रुपये, भारी निर्माण उपकरण वाहन: 250 रुपये
  2. मालवाहक वाहन: 7.5 से 18.5 टन: 250 रुपये, 3 से 7.5 टन: 120 रुपये, 3 टन तक की डिलीवरी वैन: 80 रुपये
  3. यात्री वाहन: 12 सीट से अधिक की बसें: 140 रुपये, मोटर कैब, मैक्सी कैब और पैसेंजर कार: 80 रुपये
  4. एक बार दिया गया ग्रीन सेस पूरे दिन के लिए मान्य होगा। 20 गुना शुल्क पर 3 माह एवं 60 गुना शुल्क पर 1 वर्ष की वैधता मिलेगी।

फास्टैग से होगी ग्रीन सेस की वसूली

बाहरी राज्यों से उत्तराखंड में प्रवेश करने वाले वाहनों से फास्टैग के माध्यम से ग्रीन सेस वसूला जाएगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर 10 बॉर्डर चेक पोस्ट तैयार किए जा चुके हैं, जबकि 6 अन्य पर कार्य जारी है।
प्रमुख सीमाओं पर लगाए गए ANPR कैमरों के जरिए फास्टैग से सीधे शुल्क कटेगा। सरकार को इससे सालाना करीब 50 करोड़ रुपये के अतिरिक्त राजस्व की उम्मीद है, जिसे पर्यावरण संरक्षण और विकास कार्यों पर खर्च किया जाएगा।

बुनियादी ढांचे और सख्त निगरानी पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती के लिए पूंजीगत निवेश को बढ़ावा दे रही है। पूंजीगत व्यय में 34 प्रतिशत की वृद्धि से बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि-प्रत्येक विभागाध्यक्ष और जिलाधिकारी नियमित रूप से राजस्व की समीक्षा करें

  • कर चोरी रोकने के लिए AI आधारित तकनीक का अधिक उपयोग हो
  • रजिस्ट्रेशन और निबंधन से जुड़े सभी कार्यों का पूर्ण डिजिटलीकरण किया जाए
  • रजिस्ट्री के दौरान संपत्ति के सही मूल्यांकन के लिए स्थानीय निरीक्षण अनिवार्य हो
  • तराई क्षेत्र में व्यावसायिक पौधरोपण और जड़ी-बूटी उत्पादन के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए

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