Wednesday, February 11, 2026

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यूपी में किराएदार और मकान मालिकों को बड़ी राहत, योगी कैबिनेट ने बदले रेंट एग्रीमेंट के नियम

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश सरकार ने किराएदारों और मकान मालिकों को बड़ी राहत देते हुए रेंट एग्रीमेंट और संपत्ति पंजीकरण से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इन प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

सरकार के फैसले से न सिर्फ रेंट एग्रीमेंट को लेकर विवाद कम होंगे, बल्कि परिवारों के बीच संपत्ति के बंटवारे की प्रक्रिया भी आसान और कम खर्चीली हो जाएगी।

किराया रजिस्ट्रेशन हुआ सस्ता, 90% तक शुल्क में कटौती

योगी सरकार ने रेंट एग्रीमेंट के पंजीकरण को सरल बनाते हुए स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क में 90 प्रतिशत तक की कटौती की है। नई व्यवस्था के तहत अलग-अलग किराया अवधि और वार्षिक किराया श्रेणियों में शुल्क को काफी कम कर दिया गया है।

इससे अब आम नागरिक बिना ज्यादा खर्च के रेंट एग्रीमेंट का कानूनी पंजीकरण करा सकेंगे, जिससे मकान मालिक और किराएदार के बीच होने वाले मनमुटाव और कानूनी विवादों में कमी आएगी।

5000 रुपये में अपनों के नाम हो सकेगी औद्योगिक व व्यावसायिक संपत्ति

कैबिनेट ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए औद्योगिक और व्यावसायिक संपत्तियों को भी पारिवारिक सदस्यों के बीच मात्र 5000 रुपये के स्टांप शुल्क पर ट्रांसफर करने की सुविधा दे दी है। इसके साथ संपत्ति मूल्य का केवल 1 प्रतिशत निबंधन शुल्क देना होगा।

यह सुविधा तीन पीढ़ियों से अधिक पारंपरिक वंशजों के बीच लागू होगी। इससे पारिवारिक संपत्ति को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवादों में कमी आने की उम्मीद है।

पहले केवल आवासीय और कृषि संपत्तियों को थी छूट

स्टांप तथा न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल ने बताया कि अगस्त 2023 में जारी अधिसूचना के तहत पहले यह छूट केवल आवासीय और कृषि संपत्तियों तक सीमित थी। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे औद्योगिक और व्यावसायिक संपत्तियों तक भी बढ़ा दिया है।

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उन्होंने बताया कि भारतीय स्टांप अधिनियम-1899 के तहत पहले दान विलेखों पर संपत्ति के मूल्य के अनुसार स्टांप शुल्क देना पड़ता था, लेकिन अब पारिवारिक दान को काफी सस्ता कर दिया गया है।

संपत्ति बंटवारे की प्रक्रिया होगी आसान और पारदर्शी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि वर्ष 2022 से पहले यदि कोई व्यक्ति परिवार के सदस्य को संपत्ति देता था, तो उसे शहरों में 7 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 5 प्रतिशत स्टांप शुल्क देना पड़ता था। नई व्यवस्था के लागू होने के बाद अब 5000 रुपये के स्टांप पर ही संपत्ति का बंटवारा संभव होगा।

यह सुविधा अधिसूचना जारी होने की तिथि से प्रभावी होगी और इससे पारिवारिक संपत्ति के मामलों में सरलता, पारदर्शिता और कम खर्च सुनिश्चित होगा।

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