Thursday, June 25, 2026

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तेल बाजार को राहत: ट्रंप बोले- होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान नहीं लगाएगा कोई शुल्क

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- वैश्विक तेल बाजार के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिका को आश्वस्त किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर किसी प्रकार का टोल, बीमा शुल्क या अन्य अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान ने अमेरिका को स्पष्ट रूप से बताया है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में सकारात्मक संकेत देखने को मिले हैं।

वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का शुल्क या बाधा वैश्विक ऊर्जा कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच आया बयान

यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर वार्ता चल रही है। दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, परमाणु कार्यक्रम और समुद्री सुरक्षा जैसे विषयों पर बातचीत हो रही है। ट्रंप ने कहा कि यह व्यवस्था फिलहाल लागू है, हालांकि 60 दिनों की वार्ता अवधि के बाद स्थिति क्या होगी, इस पर उन्होंने कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया।

ईरान का अलग रुख

हालांकि ईरान पहले यह कह चुका है कि वह जहाजों से टोल नहीं बल्कि समुद्री प्रशासनिक सेवाओं, सुरक्षा और नेविगेशन सहायता के बदले शुल्क लेने की संभावना पर विचार कर रहा है। ईरान और ओमान ने हाल ही में एक संयुक्त बयान में कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी प्रशासनिक सेवाओं के लिए संभावित शुल्क व्यवस्था का अध्ययन किया जाएगा।

तेल बाजार पर पड़ सकता है सकारात्मक असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बिना किसी अतिरिक्त शुल्क और व्यवधान के जारी रहती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति स्थिर बनी रह सकती है। इससे कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम होगा और ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है।

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