न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:-वृंदावन के विख्यात संत श्री प्रेमानंद जी महाराज ने हाल ही में एक ऐसी गूढ़ बात साझा की है, जिसे जानकर किसी की भी जिंदगी की दिशा बदल सकती है। उन्होंने अपनी डायरी में दर्ज उस एक रहस्य का जिक्र किया है, जो जीवन और अध्यात्म का मूल मंत्र बन सकता है।
डायरी से निकला जीवन का गूढ़ सूत्र
प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि वे हमेशा संत-महापुरुषों की बातों को अपनी डायरी में नोट करते हैं, लेकिन हाल ही में उन्हें एक ऐसी बात मिली जिसने उनके मन को झकझोर कर रख दिया। वह बात थी:“जैसा आप सोचते हैं, वैसा ही आप बन जाते हैं।”
सकारात्मक सोच की शक्ति
महाराज जी के अनुसार, अगर आप ठान लें कि आपको इस जीवन में भगवत प्राप्ति करनी है, और संकल्प के साथ उस दिशा में बढ़ें, तो वह अवश्य संभव है — चाहे इस जन्म में नहीं, तो अगले जन्म में जरूर।
वे कहते हैं:”अगर आपने मन में ठान लिया है, और उस पर पूरा विश्वास है, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।“
मन के हारे हार है, मन के जीते जीत
प्रेमानंद जी बार-बार यह बात दोहराते हैं कि जीवन में सबसे पहली शुरुआत आपके “मन” से होती है।
- नकारात्मक सोच = जीवन में रुकावट
- सकारात्मक सोच = जीवन में सफलता और आत्मिक उन्नति
वे यह भी कहते हैं कि अगर आप सोचते हैं — “भगवत प्राप्ति नामुमकिन है”, तो वो सच में नामुमकिन हो जाएगी।
महाराज जी का यह विचार आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक है। यदि हम अपने विचारों को बदल लें, तो हमारा भाग्य, परिस्थितियाँ और जीवन की दिशा भी बदल सकती है। यह सिर्फ आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी सिद्ध है कि आपकी सोच आपकी हकीकत गढ़ती है।



