EC के अल्टीमेटम के बावजूद ‘वोट चोरी’ पर राहुल गांधी ने नहीं सौंपा हलफनामा, अब क्या होगा?

नई दिल्ली/सर्वोदय न्यूज़:- लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग (EC) द्वारा दिए गए सात दिन के अल्टीमेटम के बावजूद ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर कोई हलफनामा या साक्ष्य आयोग को नहीं सौंपा है। इससे यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि अब आगे क्या कदम उठाए जाएंगे?

क्या है मामला?

राहुल गांधी ने हाल ही में कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों में भाजपा और चुनाव आयोग पर मिलीभगत के आरोप लगाते हुए मतदाता सूची में गड़बड़ी और ‘वोट चोरी’ के गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद 17 अगस्त को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल से इन दावों को प्रमाणित करने के लिए हलफनामा दाखिल करने की मांग की थी।

डेडलाइन खत्म, जवाब नहीं

चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित सात दिन की डेडलाइन 24 अगस्त को समाप्त हो गई, लेकिन राहुल गांधी या उनके किसी प्रतिनिधि ने कोई दस्तावेज या हलफनामा आयोग को नहीं सौंपा है।

 EC अधिकारी का बयान: “दूसरा विकल्प स्वतः वैध”

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ चुनाव आयोग अधिकारी ने कहा,”चूंकि कोई सबूत या हलफनामा नहीं आया, अब दूसरा विकल्प — यानी राहुल गांधी के आरोपों का अमान्य होना — अपने आप वैध हो गया है।“

इसका मतलब यह हुआ कि अब इन आरोपों पर आयोग द्वारा कोई आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी।

आयोग ने औपचारिक बयान क्यों नहीं दिया?

चुनाव आयोग की ओर से इस पर अभी तक कोई औपचारिक प्रेस रिलीज़ या नोटिस जारी नहीं हुआ है। जानकारों के मुताबिक, आयोग इसे राजनीतिक बयानबाजी मानते हुए आधिकारिक प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं समझ रहा।

CEC ने क्या कहा था?

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 17 अगस्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था:”यदि कोई व्यक्ति तय समय में शिकायत नहीं करता और फिर निराधार आरोप लगाता है, तो यह मतदाताओं को गुमराह करना और संविधान का उल्लंघन है।” उन्होंने यह भी कहा था कि: “एक झूठ, चाहे जितनी बार बोला जाए, सच नहीं बन जाता।“

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