न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- Tamil Nadu में मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay के नेतृत्व वाली Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) सरकार ने गुरुवार को अपना पहला मंत्रिमंडल विस्तार किया। सरकार बनने के करीब दो सप्ताह बाद हुए इस विस्तार में कुल 23 नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। हालांकि सबसे ज्यादा चर्चा कांग्रेस के दो विधायकों को मंत्री बनाए जाने को लेकर हो रही है।
कांग्रेस विधायकों ने ली मंत्री पद की शपथ
लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल Rajendra Vishwanath Arlekar ने नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
मंत्री पद की शपथ लेने वालों में TVK के कई विधायक शामिल रहे, वहीं कांग्रेस के S. Rajesh Kumar और P. Viswanathan भी मंत्री बनाए गए।
पी. विश्वनाथन मदुरै जिले की मेलूर सीट से विधायक हैं, जबकि राजेश कुमार कन्याकुमारी जिले की किल्लियूर सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं।
DMK से दूरी के बाद कांग्रेस को सत्ता में हिस्सेदारी
कांग्रेस ने हाल ही में Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) से नाता तोड़कर TVK के साथ गठबंधन किया था। ऐसे में कांग्रेस विधायकों को मंत्री बनाए जाने को राजनीतिक गलियारों में “गठबंधन का इनाम” माना जा रहा है।
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तमिलनाडु की राजनीति में यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि राज्य में लंबे समय तक द्रविड़ दलों — DMK और All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (AIADMK) — ने अपने सहयोगी दलों को सरकार में ज्यादा हिस्सेदारी नहीं दी थी।
दशकों बाद तमिलनाडु सरकार में कांग्रेस की वापसी
राज्य की राजनीति में कांग्रेस की यह वापसी ऐतिहासिक मानी जा रही है। 1967 में C. N. Annadurai के नेतृत्व में बनी पहली गैर-कांग्रेस सरकार के बाद से तमिलनाडु की राजनीति द्रविड़ दलों के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है।
कांग्रेस महासचिव K. C. Venugopal ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि पार्टी के दो विधायक मंत्रिमंडल में शामिल होंगे।
सहयोगी दलों को भी ऑफर
TVK के वरिष्ठ नेता और लोक निर्माण एवं खेल विकास मंत्री Aadhav Arjuna ने बुधवार को कहा था कि कांग्रेस, Viduthalai Chiruthaigal Katchi (VCK) और Indian Union Muslim League (IUML) को भी सरकार में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विजय चाहते हैं कि सहयोगी दलों को सरकार में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले।
विजय सरकार पर CBI जांच की मांग
इसी बीच Supreme Court of India में एक याचिका दायर कर मुख्यमंत्री विजय पर विश्वास मत हासिल करने में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। याचिका में मामले की CBI जांच की मांग की गई है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विजय ने 13 मई को विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव के दौरान 144 वोट हासिल किए थे, जबकि उनके विरोध में 22 वोट पड़े थे।



