न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित बॉन्डी बीच पर हुए भीषण हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हमले में पिता-पुत्र की जोड़ी ने अंधाधुंध फायरिंग कर 16 लोगों की जान ले ली, जबकि करीब 40 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना उस समय हुई, जब यहूदी समुदाय के लोग हनुका उत्सव में शामिल थे।
हमले से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि बीच पर मौजूद लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे हैं और हमलावर एक-एक कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। दोनों आरोपी काले कपड़ों में थे और बीच के पास बने एक ऊंचे ब्रिज से फायरिंग कर रहे थे, जिससे उन्हें साफ तौर पर बढ़त मिल रही थी।
6 minutes of unrelenting shooting at #bondibeach #bondi pic.twitter.com/NqoDcDn2F9
— sniffs_ (@sniffsonX) December 14, 2025
वीडियो और चश्मदीदों के बयान से यह भी सामने आया है कि हमलावरों का इरादा खास तौर पर यहूदी समुदाय को निशाना बनाने का था। फायरिंग के दौरान जब कुछ अन्य लोग उस दिशा में बढ़े, तो एक हमलावर उन्हें वहां से हटने का इशारा करता नजर आया। इससे साफ होता है कि हमला पूरी तरह लक्षित था।
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आरोपियों की पहचान 50 वर्षीय साजिद अकरम और उसके 24 वर्षीय बेटे नवीद अकरम के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों करीब 6 से 10 मिनट तक लगातार गोलियां चलाते रहे। इस दौरान वे बेहद शांत दिखाई दे रहे थे और उनमें किसी तरह का डर नजर नहीं आया। घटना ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वीडियो में कैद हुआ हमले का मंजर
प्रत्यक्षदर्शी द्वारा बनाए गए एक वीडियो में दिखता है कि साजिद अकरम ब्रिज की सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए फायरिंग करता है, जबकि उसका बेटा नवीद पीछे और दाईं ओर खड़े लोगों को दूर जाने का इशारा करता है। इसके बाद वह दोबारा पार्क की ओर मुड़कर भीड़ पर गोलियां चलाने लगता है। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में पहले साजिद को गोली लगी और वह गिर पड़ा, लेकिन इसके बावजूद नवीद कुछ देर तक फायरिंग करता रहा। बाद में उसे भी गोली लगी।
कैसे काबू में आए हमलावर
चश्मदीदों के अनुसार हमला करीब 10 मिनट तक चला, इस दौरान सैकड़ों लोग बीच और आसपास की सड़कों पर जान बचाकर भागते नजर आए। शाम करीब 6:45 बजे फायरिंग की सूचना मिलने पर इमरजेंसी सेवाएं मौके पर पहुंचीं। दोनों हमलावरों के घायल होने के बाद कुछ साहसी लोगों ने उनके पास जाकर हथियार छीन लिए। इसके बाद गुस्साई भीड़ ने उन्हें पकड़ लिया, जिसे बाद में पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इस घटना को आतंकी हमला घोषित किया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और हमले के पीछे की पूरी साजिश को जल्द उजागर किया जाएगा।



