Wednesday, February 11, 2026

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12 राज्यों और 3 UTs में शुरू हुआ SIR 2.0 अभियान: BLO घर-घर पहुंचकर बांट रहे फॉर्म, तैयार रखें ये जरूरी डॉक्यूमेंट्स

भारत के चुनाव आयोग ने आज से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR 2.0) का दूसरा चरण शुरू कर दिया है। यह अभियान देश की वोटर लिस्ट को अपडेट और साफ करने के लिए चलाया जा रहा है। इसमें 9 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं — तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप।

इस चरण में करीब 51 करोड़ मतदाताओं का डेटा वेरिफाई किया जाएगा। अभियान का एन्यूमरेशन स्टेज 4 दिसंबर 2025 तक चलेगा, जबकि ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल 9 दिसंबर को जारी होगा।
फाइनल वोटर लिस्ट 7 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी।

BLO घर-घर पहुंच रहे — वेरिफिकेशन शुरू

उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में BLOs ने घर-घर जाकर वोटर्स की गिनती और वेरिफिकेशन शुरू कर दिया है। ‘शुद्ध निर्वाचक नामावली – मजबूत लोकतंत्र’ थीम के तहत यह अभियान चलाया जा रहा है।

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BLO (Booth Level Officers) मतदाताओं के विवरण की जांच करेंगे, नए वोटर्स से फॉर्म-6 और डिक्लेरेशन फॉर्म इकट्ठा करेंगे, और सभी डिटेल्स इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) को जमा करेंगे।

तैयार रखें ये जरूरी डॉक्यूमेंट्स

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया केवल उन्हीं नागरिकों पर लागू होगी जो पिछले SIR रिकॉर्ड में खुद या अपने परिवार का नाम नहीं ढूंढ पाए हैं।
ऐसे वोटर्स को अपने नागरिकता और पहचान साबित करने के लिए नीचे दिए गए डॉक्यूमेंट्स में से कोई एक दिखाना अनिवार्य होगा:

  1. सरकारी कर्मचारी या पेंशनर का पहचान पत्र/पेंशन ऑर्डर
  2. 01.07.1987 से पहले जारी कोई सरकारी प्रमाण पत्र
  3. जन्म प्रमाण पत्र
  4. पासपोर्ट
  5. शिक्षा बोर्ड या यूनिवर्सिटी द्वारा जारी प्रमाण पत्र
  6. स्थायी निवास प्रमाण पत्र
  7. वन अधिकार प्रमाण पत्र
  8. जाति प्रमाण पत्र (OBC/SC/ST)
  9. नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिज़न्स (NRC)
  10. परिवार रजिस्टर (राज्य/स्थानीय निकाय द्वारा तैयार)
  11. भूमि या मकान आवंटन प्रमाण पत्र
  12. 01.07.2025 के संदर्भ में बिहार SIR की मतदाता सूची
  13. आधार कार्ड (सिर्फ पहचान के लिए, नागरिकता प्रमाण के रूप में नहीं)

SIR का उद्देश्य

SIR 2.0 का मुख्य लक्ष्य अवैध विदेशी मतदाताओं की पहचान कर उन्हें वोटर लिस्ट से हटाना है। यह 2002-04 के बाद से अब तक का नौवां स्पेशल रिवीजन है। बिहार में हाल ही में हुए पहले SIR के बाद 68 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे।

राज्यों में विवाद और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

तमिलनाडु सरकार ने SIR 2.0 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग इस प्रक्रिया के ज़रिए “असली वोटर्स को हटाने की कोशिश” कर रहा है।

बिहार में पहले चरण के दौरान भी कई राजनीतिक दलों ने इसे लेकर विरोध जताया था। हालांकि, आयोग ने यह भरोसा दिलाया कि कोई भी योग्य नागरिक वोटर लिस्ट से बाहर नहीं होगा।

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