Wednesday, March 25, 2026

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देरी से संसद पहुंचने पर नहीं लगेगी हाजिरी, सांसदों को सैलरी भी गंवानी पड़ेगी

नई दिल्ली/सर्वोदय न्यूज़:- संसद के बजट सत्र से लोकसभा सचिवालय सांसदों की हाजिरी व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। अब सांसदों की उपस्थिति केवल सदन के भीतर अपनी निर्धारित सीट पर बैठकर ही डिजिटल माध्यम से दर्ज हो सकेगी। सदन के बाहर हाजिरी रजिस्टर की व्यवस्था पूरी तरह खत्म की जाएगी।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि यदि कोई सांसद देरी से सदन में पहुंचता है और उससे पहले ही हंगामे या किसी अन्य कारण से सदन पूरे दिन के लिए स्थगित हो जाता है, तो उस दिन उनकी हाजिरी दर्ज नहीं होगी। ऐसे में संबंधित सांसद को एक दिन के वेतन और भत्तों से भी हाथ धोना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि अब तक कुछ सांसद बाहर रजिस्टर में हाजिरी लगाकर चले जाते थे या सदन स्थगित होने के बाद पहुंचते थे, लेकिन नई व्यवस्था में ऐसा संभव नहीं होगा। हाजिरी के लिए सदन में उपस्थित रहना अनिवार्य होगा।

संसद में बढ़ेगा AI का इस्तेमाल

ओम बिरला ने बताया कि संसद की कार्यवाही पहले ही डिजिटल हो चुकी है और अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रयोग परीक्षण के तौर पर किया जा रहा है। फिलहाल वक्ताओं के भाषणों के अनुवाद में AI का इस्तेमाल हो रहा है, जिसकी सटीकता लगभग 80 प्रतिशत है। आईटी कंपनियों की मदद से इसे पूरी तरह सटीक बनाने के प्रयास जारी हैं।

उन्होंने कहा कि लक्ष्य है कि मानसून सत्र से अनुवाद व्यवस्था को पूरी तरह AI आधारित कर दिया जाए। इससे कार्यवाही का विवरण वेबसाइट पर अपलोड करने में लगने वाला समय चार घंटे से घटकर करीब आधा घंटा रह जाएगा। इसके अलावा संसदीय शोध कार्यों में भी AI का उपयोग किया जाएगा।

विपक्ष को चर्चा में रखनी चाहिए अपनी बात

जेल जाने पर मंत्रियों को पद से हटाने से जुड़े विधेयक पर बनी संसदीय समिति में विपक्ष की गैरमौजूदगी को लेकर पूछे गए सवाल पर बिरला ने कहा कि यदि विपक्ष अब अपने सुझाव रखना चाहता है तो उन्हें शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार और विपक्ष, दोनों की जिम्मेदारी है कि सदन सुचारु रूप से चले और विपक्ष को चर्चा के माध्यम से अपनी बात रखनी चाहिए।

विधानसभाओं के लिए न्यूनतम 30 दिन सत्र का सुझाव

लोकसभा अध्यक्ष ने लखनऊ में चल रहे पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन का जिक्र करते हुए कहा कि देश की अधिकांश विधानसभाएं साल में 30 दिन भी नहीं चल पा रही हैं। सम्मेलन में यह संकल्प पारित करने की तैयारी है कि सभी विधानसभाओं के सत्र न्यूनतम 30 दिन जरूर चलें।

स्पीकर के अधिकारों पर भी चर्चा

ओम बिरला ने कहा कि विभिन्न बैठकों में यह भी चर्चा हुई है कि स्पीकर के अधिकार असीमित नहीं होने चाहिए और इस विषय पर संतुलन जरूरी है।

पेपरलेस सदन की दिशा में देश

उन्होंने बताया कि संसद के अलावा देश की लगभग सभी विधानसभाएं पेपरलेस हो चुकी हैं और कई विधानसभाओं की कार्यवाही यूट्यूब पर लाइव दिखाई जा रही है। इस साल सभी विधानसभाओं का पूर्ण डिजिटलीकरण करने का लक्ष्य रखा गया है।

महाभियोग पर रिपोर्ट का इंतजार

जस्टिस वर्मा के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को लेकर ओम बिरला ने कहा कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी। बजट सत्र में इस पर चर्चा होगी या नहीं, फिलहाल कुछ कहा नहीं जा सकता।

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