ग्लोबल पेन अवेयरनेस मंथ पर RMLIMS में निःशुल्क BMD जांच शिविर शुरू, दर्द और ऑस्टियोपोरोसिस को लेकर जागरूकता पर जोर

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़: ग्लोबल पेन अवेयरनेस मंथ के तहत डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RMLIMS), लखनऊ में निःशुल्क बोन मिनरल डेंसिटी (BMD) जांच शिविर की शुरुआत की गई। संस्थान के पेन मेडिसिन ओपीडी में आयोजित इस शिविर का उद्घाटन संस्थान के निदेशक प्रो. सी.एम. सिंह ने किया।

शिविर का उद्देश्य लोगों को लंबे समय तक रहने वाले दर्द यानी क्रॉनिक पेन और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति जागरूक करना है। इसके साथ ही जोखिम वाले लोगों में हड्डियों की कमजोरी की समय रहते पहचान कर उचित उपचार और बचाव के उपायों के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी इस पहल का प्रमुख लक्ष्य है।

लंबे समय तक रहने वाला दर्द बन सकता है गंभीर समस्या

विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार बना रहने वाला दर्द केवल किसी बीमारी का लक्षण नहीं होता, बल्कि कई मामलों में यह अपने आप में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन सकता है। लंबे समय तक दर्द रहने से व्यक्ति की रोजमर्रा की गतिविधियां, नींद, काम करने की क्षमता और जीवन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

इसके बावजूद कई लोग लंबे समय तक दर्द को उम्र या सामान्य शारीरिक समस्या मानकर नजरअंदाज करते रहते हैं। ऐसे में विशेषज्ञों ने लगातार बने रहने वाले दर्द की स्थिति में समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने पर जोर दिया।

ऑस्टियोपोरोसिस को बताया ‘साइलेंट’ बीमारी

कार्यक्रम में ऑस्टियोपोरोसिस को लेकर भी लोगों को जागरूक किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, हड्डियों की यह बीमारी कई बार तब तक स्पष्ट नहीं होती, जब तक व्यक्ति को फ्रैक्चर न हो जाए। खासतौर पर बुजुर्गों और रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में हड्डियों की मजबूती कम होने का जोखिम अधिक हो सकता है।

भारतीय अध्ययनों पर आधारित एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-एनालिसिस में रजोनिवृत्ति के बाद की महिलाओं में काठ की रीढ़ और फीमर की गर्दन में ऑस्टियोपोरोसिस का संयुक्त प्रसार करीब 29 प्रतिशत बताया गया है। हालांकि, अलग-अलग अध्ययन और आबादी के आधार पर यह आंकड़ा अलग हो सकता है।

विशेषज्ञों ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस के कारण होने वाले फ्रैक्चर से तेज दर्द, चलने-फिरने में परेशानी, लंबे समय तक रहने वाली शारीरिक दिक्कत और आत्मनिर्भरता में कमी जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

‘दर्द को उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर न सहें’

RMLIMS की पेन मेडिसिन यूनिट की प्रभारी प्रो. शिवानी रस्तोगी ने कहा कि लंबे समय तक दर्द को उम्र बढ़ने की सामान्य प्रक्रिया मानकर सहते रहना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि ऑस्टियोपोरोसिस भी लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के बढ़ सकता है और कई बार इसका पता हड्डी टूटने के बाद चलता है। BMD जांच शिविर के माध्यम से लोगों को हड्डियों की सेहत के प्रति जागरूक करने और जोखिम वाले लोगों में बीमारी की जल्द पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रो. रस्तोगी के मुताबिक, पेन मेडिसिन के माध्यम से लंबे समय से दर्द से परेशान मरीजों के लिए वैज्ञानिक और बहुआयामी उपचार उपलब्ध कराए जाते हैं। लगातार कमर दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, ऑस्टियोपोरोसिस से जुड़े फ्रैक्चर तथा अन्य लंबे समय तक रहने वाली दर्द की समस्याओं में दर्द के मूल कारण की पहचान जरूरी है।

‘क्रॉनिक पेन समाज के लिए बड़ा स्वास्थ्य बोझ’

इंडियन सोसाइटी फॉर स्टडी ऑफ पेन (ISSP) के मानद सचिव एवं CEO डॉ. अनुराग अग्रवाल ने कहा कि क्रॉनिक पेन समाज में मौजूद एक बड़ा स्वास्थ्य बोझ है, लेकिन कई बार इस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।

उन्होंने कहा कि बहुत से लोग लंबे समय तक दर्द झेलते रहते हैं, जबकि उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि विशेषज्ञ पेन मेडिसिन के माध्यम से उनकी समस्या का उपचार संभव है। ISSP का उद्देश्य दर्द से संबंधित जागरूकता बढ़ाने के साथ वैज्ञानिक पेन मेडिसिन की पहुंच को व्यापक बनाना है।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि संस्था का संदेश है कि जो लोग लंबे समय से दर्द से परेशान हैं, उन्हें पेन फिजिशियन से सलाह लेनी चाहिए। उनके मुताबिक, आधुनिक पेन मेडिसिन में पुराने दर्द के उपचार के लिए साक्ष्य-आधारित चिकित्सा, इंटरवेंशनल तकनीक और कम से कम चीर-फाड़ वाली प्रक्रियाओं का भी इस्तेमाल किया जाता है, जहां मरीज के लिए उपयुक्त हो।

पेन मेडिसिन को सुपर-स्पेशियलिटी के रूप में विकसित करने पर जोर

कार्यक्रम के दौरान पेन मेडिसिन को एक समर्पित सुपर-स्पेशियलिटी के तौर पर विकसित करने की जरूरत पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्षेत्र में तेज दर्द, लंबे समय से जारी दर्द, न्यूरोपैथिक दर्द, कैंसर से संबंधित दर्द और मांसपेशियों तथा हड्डियों से जुड़े जटिल दर्द की जांच, निदान और उपचार किया जाता है।

RMLIMS की पेन मेडिसिन यूनिट की ओर से आयोजित BMD जांच शिविर को इसी व्यापक जागरूकता अभियान का हिस्सा बताया गया है।

2026 में न्यूरोपैथिक दर्द पर विशेष फोकस

सितंबर माह को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दर्द के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से मनाया जाता है। वर्ष 2026 में ग्लोबल पेन अवेयरनेस मंथ के दौरान न्यूरोपैथिक दर्द के प्रभाव, इसकी पहचान, उपचार और शोध के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

RMLIMS में आयोजित यह शिविर भी इसी अभियान से जुड़ा है। इसके जरिए लोगों को दर्द और हड्डियों से संबंधित समस्याओं की शुरुआती पहचान तथा समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

ISSP का संदेश—लंबे समय से दर्द है तो विशेषज्ञ से मिलें

इंडियन सोसाइटी फॉर स्टडी ऑफ पेन ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से दर्द से परेशान है तो वह पेन फिजिशियन से परामर्श ले। संस्था जागरूकता, शिक्षा, शोध, प्रशिक्षण और बेहतर मरीज देखभाल के माध्यम से पेन मेडिसिन को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है।

ISSP के अनुसार, उसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपचार योग्य पुराने दर्द के साथ किसी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक जीवन न बिताना पड़े।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest Articles