लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़ : उत्तर प्रदेश में अगले छह महीनों में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ऐलान को लेकर सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा इस घोषणा पर सवाल उठाए जाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पलटवार किया है। योगी ने कहा कि सरकार नियुक्ति पत्र देने की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ा रही है और निर्धारित लक्ष्य से कम नहीं, बल्कि उससे अधिक युवाओं को नौकरी देने की दिशा में काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को विभिन्न विभागों के चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। 19 सितंबर को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में कुल 818 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए। इनमें व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास, उद्योग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा आयुष विभाग से जुड़े पद शामिल हैं।
अखिलेश के तंज पर योगी का जवाब
एक लाख सरकारी नौकरियां देने की घोषणा पर अखिलेश यादव ने सवाल उठाते हुए कहा था कि जनवरी के बाद आचार संहिता लागू होने की स्थिति में इतनी बड़ी संख्या में नियुक्तियां कैसे की जाएंगी।
इसके जवाब में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सरकार की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया पहले से चल रही है। उन्होंने कहा कि लोग नियुक्तियों की संख्या गिनते रहें और सरकार युवाओं को नियुक्ति पत्र देती रहेगी।
योगी ने दावा किया कि अब तक करीब साढ़े नौ लाख युवाओं को विभिन्न विभागों में नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि आगामी महीनों में भी अलग-अलग भर्ती प्रक्रियाओं के परिणाम आने के बाद चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्तियां दी जाएंगी।
पुलिस, होमगार्ड और दूसरे विभागों में भर्ती का जिक्र
मुख्यमंत्री ने आगामी नियुक्तियों का विवरण देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस में करीब 36 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जाने हैं और संबंधित अभ्यर्थियों की मेडिकल प्रक्रिया चल रही है।
उन्होंने होमगार्ड भर्ती का भी जिक्र किया। इसके अलावा अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के जरिए अगले छह महीनों में करीब 25 से 30 हजार युवाओं को अवसर मिलने की बात कही।
योगी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग के माध्यम से अगले तीन से चार महीनों में लगभग 20 से 25 हजार युवाओं को अवसर मिलने की उम्मीद है। वहीं, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं के परिणाम आने के बाद करीब 15 से 16 हजार अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जाने की बात उन्होंने कही।
मुख्यमंत्री ने इन आंकड़ों के आधार पर कहा कि सरकार का लक्ष्य एक लाख नियुक्तियों से कम नहीं है और यह संख्या इससे अधिक भी हो सकती है।
818 अभ्यर्थियों को दिए गए नियुक्ति पत्र
19 सितंबर को लखनऊ के लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के कुल 818 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इनमें 48 अनुदेशक, उद्योग विभाग के 9 सहायक सांख्यिकीय अधिकारी, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के 357 एक्सरे टेक्नीशियन और आयुष विभाग के 404 विभिन्न पदों पर चयनित अभ्यर्थी शामिल हैं।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कुछ चयनित अभ्यर्थियों को स्वयं नियुक्ति पत्र दिए, जबकि अन्य अभ्यर्थियों को संबंधित विभागों के माध्यम से नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए।
योगी ने पिछली सरकारों की भर्ती व्यवस्था पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में पूर्ववर्ती सरकारों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि 2017 से पहले प्रदेश में सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और इससे युवाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता था।
योगी ने दावा किया कि उस दौर में भर्ती आयोगों और बोर्डों की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठते थे। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर दिया और युवाओं को बिना भेदभाव के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया।
‘यूपी की युवा शक्ति को अवसर में बदला’
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की बड़ी युवा आबादी को सरकार ने चुनौती के बजाय प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए अवसर के रूप में देखा है। उनके मुताबिक, युवाओं को रोजगार और भर्ती के अवसर उपलब्ध कराने के साथ प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को भी गति देने का प्रयास किया गया है।
योगी ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पिछले वर्षों में बदलाव आया है और प्रदेश को देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला राज्य बताया।
2027 के चुनाव से पहले रोजगार बना बड़ा मुद्दा
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले रोजगार और सरकारी भर्ती का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की घोषणा के बाद विपक्षी दलों ने इसके समय और क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए हैं।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से नियुक्ति पत्र वितरण और विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं का हवाला देते हुए लक्ष्य पूरा करने की बात कही जा रही है। ऐसे में आने वाले महीनों में सरकारी भर्तियों और नियुक्तियों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी रहने की संभावना है।


