RMLIMS में उन्नत घाव बंद करने की तकनीकों पर CME, 70 से अधिक डॉक्टरों ने लिया हिस्सा

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़- डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (RMLIMS) के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की ओर से स्त्री रोग संबंधी सर्जरी में आधुनिक घाव बंद करने की तकनीकों को लेकर सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय “Closing the Gaps Through Advanced Wound Closure Techniques– Expert Opinion on Advancing Patient Healing and Experience in Gynaecological Surgeries” रहा।

कार्यक्रम का आयोजन विभागाध्यक्ष डॉ. नीतू सिंह के नेतृत्व में किया गया। उद्घाटन सत्र में संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) सी.एम. सिंह और कार्यकारी रजिस्ट्रार डॉ. सबुत चंद्र समेत वरिष्ठ अधिकारी और संकाय सदस्य मौजूद रहे। कार्यक्रम में डॉ. पूजा, डॉ. मालविका, डॉ. देवयानी, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के अन्य चिकित्सक, रेजिडेंट डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ ने भी भाग लिया।

70 से अधिक चिकित्सकों ने लिया हिस्सा

CME में 70 से अधिक चिकित्सकों, संकाय सदस्यों, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और नर्सिंग स्टाफ ने सहभागिता की। RMLIMS के अलावा KGMU, SGPGI, AIIMS रायबरेली और HIMS बाराबंकी समेत कई संस्थानों के विशेषज्ञ कार्यक्रम में शामिल हुए।

दिल्ली स्थित रेनबो हॉस्पिटल की विशेषज्ञ डॉ. जयश्री सुंदर ने अतिथि वक्ता के रूप में अपने चिकित्सकीय अनुभव साझा किए और आधुनिक घाव बंद करने की तकनीकों से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर जानकारी दी।

सर्जरी में सही स्यूचर तकनीक पर जोर

CME का मुख्य उद्देश्य स्त्री रोग संबंधी सर्जरी में आधुनिक घाव बंद करने की तकनीकों की उपयोगिता और महत्व पर चर्चा करना था। विशेषज्ञों ने बताया कि सही प्रकार के स्यूचर का चयन और उचित तकनीक से घाव को बंद करना मरीज के बेहतर रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, बेहतर स्यूचर तकनीक से घाव भरने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जा सकता है। साथ ही संक्रमण और ऑपरेशन के बाद होने वाली संभावित जटिलताओं को कम करने में भी मदद मिल सकती है। इससे मरीज के आराम और उपचार के अनुभव में सुधार की संभावना रहती है।

विभिन्न सर्जरी में स्यूचर के इस्तेमाल पर चर्चा

कार्यक्रम के दौरान स्यूचर के अलग-अलग प्रकार और स्त्री रोग संबंधी विभिन्न सर्जरी में उनके उचित इस्तेमाल पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किया गया। इसके बाद “Closing the Gap: Advanced Wound Closure Strategies in OBGYN Surgeries” विषय पर पैनल डिस्कशन हुआ।

पैनल चर्चा में अलग-अलग चिकित्सा संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। इस दौरान आधुनिक सर्जिकल तकनीकों और घाव बंद करने की नई विधियों के व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

हैंड्स-ऑन स्यूचरिंग वर्कशॉप रहा आकर्षण

CME का प्रमुख आकर्षण हैंड्स-ऑन स्यूचरिंग वर्कशॉप रहा। इसमें स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और प्रतिभागी चिकित्सकों को विशेषज्ञों की निगरानी में स्यूचरिंग पैड पर विभिन्न प्रकार की टांका लगाने की तकनीकों का अभ्यास कराया गया।

प्रतिभागियों ने टिश्यू हैंडलिंग, सही स्यूचर का चयन और प्रभावी घाव बंद करने की तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। विशेषज्ञों ने कहा कि केवल सैद्धांतिक जानकारी से सर्जिकल कौशल पूरी तरह विकसित नहीं किया जा सकता। इसके लिए नियमित अभ्यास और विशेषज्ञों की निगरानी में व्यावहारिक प्रशिक्षण जरूरी है।

मरीज-केंद्रित उपचार पर जोर

कार्यक्रम के समापन पर विशेषज्ञों ने साक्ष्य-आधारित और मरीज-केंद्रित सर्जिकल उपचार को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक और उचित घाव बंद करने की तकनीकों के इस्तेमाल से बेहतर घाव भरने, संभावित जटिलताओं में कमी और तेजी से रिकवरी में मदद मिल सकती है।

CME को RMLIMS में प्रसूति एवं स्त्री रोग के क्षेत्र में कौशल आधारित प्रशिक्षण, चिकित्सकीय ज्ञान के आदान-प्रदान और गुणवत्तापूर्ण मरीज देखभाल को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया।

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