Friday, July 3, 2026

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: अविनाश शुक्ला पुलिस रिमांड पर, सामने आएंगे नए राज

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। इस मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों में शामिल अविनाश शुक्ला को पुलिस ने पूछताछ के लिए कस्टडी रिमांड पर लिया है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि उससे पूछताछ के दौरान मामले से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।

शुक्रवार सुबह पुलिस टीम जेल पहुंची और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद अविनाश शुक्ला को अपने साथ ले गई। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाले विशेष न्यायाधीश ने आरोपी की 13 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर की है। हालांकि जांच अधिकारी और पुलिस क्षेत्राधिकारी आशुतोष तिवारी ने पूछताछ और बरामदगी के लिए 48 घंटे की रिमांड की मांग की थी।

आरोपी के पास से लाखों रुपये और विदेशी मुद्रा बरामद

जांच के दौरान अविनाश शुक्ला के पास से 20.39 लाख रुपये से अधिक नकदी, करीब 1,000 अमेरिकी डॉलर तथा लगभग 170 ग्राम सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए गए थे। पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े अन्य साक्ष्य और चोरी का सामान बरामद करने के लिए आरोपी से विस्तृत पूछताछ जरूरी है।

विवेचक की ओर से कोर्ट में दाखिल आवेदन में पूरे घटनाक्रम का क्रमवार उल्लेख करते हुए कहा गया था कि आरोपी की निशानदेही पर कई महत्वपूर्ण साक्ष्य और सामान बरामद किया जा सकता है। इसके अलावा चोरी के पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित ठिकानों की जानकारी भी मिल सकती है।

जेल में पूछताछ के दौरान मिले अहम सुराग

रिमांड पर सुनवाई के दौरान पुलिस ने अदालत को बताया कि जेल में हुई शुरुआती पूछताछ के दौरान अविनाश शुक्ला ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। पुलिस को आरोपी की बाइक भी बरामद करनी है और कुछ अन्य तथ्यों की पुष्टि के लिए उससे आमने-सामने पूछताछ आवश्यक है।

सूत्रों के अनुसार, पुलिस अब चोरी की रकम, संभावित बरामदगी और पूरे मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच करेगी। आवश्यकता पड़ने पर जांच टीम आरोपी को उसके प्रतापगढ़ स्थित पैतृक गांव भी ले जा सकती है।

जांच में अविनाश शुक्ला की भूमिका अहम

जांच एजेंसियां अविनाश शुक्ला को इस कथित चोरी का प्रमुख किरदार मान रही हैं। अब तक की कार्रवाई में सबसे अधिक नकदी और आभूषण उसी के पास से बरामद हुए हैं। ऐसे में पुलिस को उम्मीद है कि कस्टडी रिमांड के दौरान पूछताछ से मामले के कई अनसुलझे पहलुओं से पर्दा उठ सकता है।

जांचकर्ताओं का मानना है कि पूछताछ के दौरान आरोपी उन लोगों के बारे में भी जानकारी दे सकता है, जिनकी भूमिका अब तक सामने नहीं आई है। इसके अलावा अन्य गिरफ्तार आरोपियों की कथित मिलीभगत और पूरे घटनाक्रम में उनकी जिम्मेदारी भी स्पष्ट हो सकती है। यदि नए साक्ष्य मिलते हैं, तो जांच के दायरे में कुछ और लोगों के नाम भी शामिल किए जा सकते हैं।

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