न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले निषाद आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर सियासी चर्चा में आ गया है। निषाद पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने बीजेपी नेतृत्व से इस मुद्दे पर जल्द ठोस कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आरक्षण के मामले में ज्यादा देरी हुई तो इससे निषाद समाज के हित प्रभावित हो सकते हैं।
एक कार्यक्रम में पार्टी समर्थकों को संबोधित करते हुए संजय निषाद ने परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह से भी इस मुद्दे पर समाज की आवाज को गंभीरता से लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से जल्द बातचीत कर निषाद आरक्षण को लागू कराने की दिशा में ठोस पहल होनी चाहिए।
‘कहीं आरक्षण के फैसले में देर न हो जाए’
संजय निषाद ने चिंता जताते हुए कहा कि सरकार को निषाद समाज की लंबे समय से चली आ रही मांग पर जल्द फैसला लेना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि अगर आरक्षण के मुद्दे पर फैसला लेने में देरी हुई तो इसका असर समाज के हितों पर पड़ सकता है।
उन्होंने पार्टी नेताओं से बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के सामने इस मांग को मजबूती से रखने और जल्द समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की।
क्या है संजय निषाद की मांग?
संजय निषाद लंबे समय से निषाद समाज और उससे जुड़ी कई उपजातियों को अनुसूचित जाति यानी SC श्रेणी में शामिल करने की मांग करते रहे हैं।
उनकी मांग में केवट, मल्लाह, बिंद, मझवार और अन्य मछुआरा समुदायों को मौजूदा OBC श्रेणी से हटाकर SC सूची में शामिल करने का मुद्दा प्रमुख है।
निषाद पार्टी ने इस मांग को लंबे समय से अपने प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल किया हुआ है। चुनावों के दौरान भी पार्टी की ओर से इसे प्रमुखता से उठाया जाता रहा है।
चुनाव से पहले क्यों बढ़ी हलचल?
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए निषाद आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर महत्वपूर्ण हो गया है। निषाद समुदाय की बड़ी आबादी पूर्वांचल के कई इलाकों में मौजूद है, ऐसे में राजनीतिक दल इस वर्ग को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करते रहे हैं।
संजय निषाद अब बीजेपी सरकार पर आरक्षण के मुद्दे को लेकर दबाव बढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि समाज की लंबे समय से चली आ रही मांग का समाधान जल्द होना चाहिए।
मुकेश सहनी भी उठा रहे निषाद आरक्षण का मुद्दा
दूसरी ओर बिहार की विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी भी उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ा रहे हैं। वह भी निषाद आरक्षण के मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं।
ऐसे में संजय निषाद की ताजा मांग को उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों नेताओं की सक्रियता से निषाद समाज के आरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में यूपी की राजनीति में और जोर पकड़ सकता है।
बीजेपी के सामने बढ़ेगी चुनौती?
संजय निषाद की मांग ऐसे समय सामने आई है जब चुनाव से पहले सहयोगी दलों और सामाजिक समूहों की अपेक्षाएं भी चर्चा में हैं। निषाद पार्टी बीजेपी की सहयोगी है और ऐसे में आरक्षण का मुद्दा दोनों दलों के बीच राजनीतिक बातचीत का अहम विषय बन सकता है।
अब देखना होगा कि बीजेपी नेतृत्व निषाद आरक्षण को लेकर क्या कदम उठाता है और संजय निषाद की मांग पर सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।



