अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब नया मोड़ सामने आया है। इस मामले के आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के भाई दिनेश यादव पहली बार मीडिया के सामने आए और उन्होंने मंदिर ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। दिनेश यादव का दावा है कि उनके भाई को जानबूझकर इस मामले में फंसाया गया है, जबकि असली जिम्मेदार खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
‘मेरे भाई को बनाया गया बलि का बकरा ‘
दिनेश यादव ने कहा कि उनके भाई टिन्नू यादव पिछले करीब 20 वर्षों से मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लोगों के साथ काम कर रहे थे और उनका रिकॉर्ड पूरी तरह साफ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा अपने ऊपर आने वाले सवालों से बचने के लिए टिन्नू यादव को निशाना बना रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि दानपेटियों की व्यवस्था पूरी तरह एक व्यक्ति के हाथ में नहीं थी। उनके अनुसार, एक चाबी टिन्नू यादव के पास रहती थी, जबकि दूसरी संबंधित बैंक अधिकारियों के पास होती थी। ऐसे में अकेले टिन्नू यादव पर पूरी जिम्मेदारी डालना उचित नहीं है।
एसआईटी ने बढ़ाई जांच की सीमा
उधर, मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अपनी जांच का दायरा और विस्तृत कर दिया है। जानकारी के अनुसार, ट्रस्ट के पिछले पांच वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड और ऑडिट की दोबारा समीक्षा कराई जाएगी। राज्य सरकार ने एसआईटी को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 15 जुलाई तक का अतिरिक्त समय भी दिया है।
आरोपियों के ठिकानों से नकदी और जेवर बरामद
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी अविनाश, लवकुश और करुणेश के ठिकानों पर छापेमारी कर नकदी, आभूषण और कुछ संदिग्ध संदूक बरामद किए हैं। इन बरामदगी को जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है।
ट्रस्ट कार्यालय प्रभारी ने बैंक पर उठाए सवाल
राम मंदिर ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने इस मामले में बैंक की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट और बैंक के बीच हुए समझौते के अनुसार दानपेटियों से धन निकालने, उसकी गणना करने और बैंक में जमा कराने की जिम्मेदारी बैंक की थी।
प्रकाश गुप्ता का कहना है कि बैंक ने पर्याप्त सत्यापन किए बिना कर्मचारियों की नियुक्ति कर दी, जिससे पूरी व्यवस्था प्रभावित हुई। उन्होंने साथ ही चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव का बचाव करते हुए कहा कि उनकी ईमानदारी पर संदेह करना उचित नहीं है।
ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी भी जांच के घेरे में
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी अब केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है, बल्कि ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी गहन पूछताछ कर रही है। पूछताछ के दौरान अनिल मिश्रा ने चोरी की जिम्मेदारी टिन्नू यादव पर डालते हुए खुद को निर्दोष बताया है। हालांकि उन्होंने निगरानी व्यवस्था में कमी होने की बात स्वीकार की है।
एसआईटी अब ट्रस्ट के निर्माण कार्यों, वित्तीय लेन-देन, भुगतान प्रक्रिया और दान में मिले आभूषणों के रिकॉर्ड की भी विस्तार से जांच कर रही है। जांच एजेंसी का उद्देश्य पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने लाना और यदि किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय करना है।



