न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- वृंदावन के प्रसिद्ध और पूज्य संत प्रेमानंद महाराज अपने सरल लेकिन गहरे आध्यात्मिक विचारों के लिए जाने जाते हैं। उनके प्रवचन और एकांतित वार्तालाप लाखों लोगों के मन को शांति देते हैं। श्रद्धालु उनसे जीवन, धर्म और आचरण से जुड़े सवाल पूछते हैं, जिनके उत्तर सीधे हृदय को छू जाते हैं।
हाल ही में हुए एक एकांतित संवाद के दौरान एक महिला श्रद्धालु ने प्रेमानंद महाराज से ऐसा प्रश्न पूछा, जो लगभग हर व्यक्ति के मन में कभी न कभी जरूर आता है। महिला ने जानना चाहा कि गलती और पाप में क्या अंतर है और इनका प्रायश्चित कैसे करना चाहिए। इस सवाल पर प्रेमानंद महाराज ने बेहद सहज और भावपूर्ण उत्तर दिया।
गलती और पाप में क्या है अंतर?
प्रेमानंद महाराज ने समझाया कि यदि कोई कार्य बिना सोचे-समझे, अचानक या अनजाने में हो जाए, जिसमें न कोई पूर्व संकल्प हो और न कोई दुर्भावना, तो वह गलती कहलाती है। उदाहरण के तौर पर यदि चलते समय किसी से टक्कर लग जाए, तो वह गलती है क्योंकि उसमें कोई इच्छा या योजना शामिल नहीं होती।
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वहीं दूसरी ओर, जब कोई व्यक्ति जानबूझकर, सोच-समझकर और संकल्प के साथ गलत कार्य करता है, तो वह पाप की श्रेणी में आता है। जैसे चोरी करना, किसी के प्रति बुरी भावना रखना या अनैतिक आचरण करना। प्रेमानंद महाराज ने कहा कि जो कर्म पहले मन में विचार करके, इच्छा से किया जाए, वही पाप होता है।
गलती और पाप का प्रायश्चित कैसे करें?
प्रेमानंद महाराज के अनुसार गलती और पाप—दोनों का ही प्रायश्चित संभव है। इसके लिए सबसे पहले दृढ़ संकल्प लेना जरूरी है कि उस गलती या पाप को दोबारा नहीं दोहराएंगे। इसके बाद भगवान के नाम का जप और कीर्तन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भगवान के नाम का स्मरण, जप और कीर्तन सभी प्रकार के पापों का नाश करता है। सच्चे मन से नाम जप करने से आत्मा शुद्ध होती है और व्यक्ति को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।



