लखनऊ में दलित बुजुर्ग के साथ अमानवीय व्यवहार पर सियासी घमासान, विपक्ष ने योगी सरकार को घेरा

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के काकोरी थाना क्षेत्र में एक दलित बुजुर्ग के साथ मंदिर परिसर में पेशाब चटवाने जैसी अमानवीय घटना ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। पीड़ित बुजुर्ग के साथ हुए इस शर्मनाक व्यवहार के खिलाफ विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।

घटना बीती सोमवार रात की है जब 70 वर्षीय रामपाल, जो कि श्वास रोगी हैं, शीतला माता मंदिर के पास से गुजर रहे थे। तबीयत बिगड़ने पर वे मंदिर की सीढ़ियों पर बैठ गए, तभी अनजाने में पेशाब हो गया। इस पर पास की दुकान के मालिक स्वामीकांत उर्फ पम्मू ने न केवल बुजुर्ग के साथ अभद्रता की, बल्कि जबरन पेशाब चटवाया और मंदिर धुलवाने के बाद लात मारकर भगा दिया।

पीड़ित रामपाल ने बताया, “डर के मारे मैंने उसकी हर बात मानी। पहले पेशाब चटवाया, फिर मंदिर साफ किया और अंत में उसने मुझे मारा भी।”

इस बर्बर घटना के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने योगी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स पर वीडियो साझा करते हुए लिखा, “किसी की गलती की सज़ा अमानवीय नहीं हो सकती। परिवर्तन ही परिवर्तन लाएगा।”

बसपा प्रमुख मायावती ने भी घटना की निंदा करते हुए कहा, “यह केवल एक अपराध नहीं, बल्कि संविधान और मानवता पर हमला है। प्रदेश सरकार को चाहिए कि कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित करे।”

कांग्रेस के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा, “यह घिनौनी घटना समाज के लिए शर्मनाक है। यह केवल अपराध नहीं, बल्कि सत्ताधारी दलों की दलित विरोधी मानसिकता का परिचायक है।”

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वहीं, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने तीखा हमला करते हुए कहा, “भाजपा राज में दलित होना ही सबसे बड़ा अपराध बन चुका है। इस बुजुर्ग के साथ जानवरों जैसा बर्ताव किया गया।” पार्टी का प्रतिनिधिमंडल पीड़ित से मिलने जा रहा है, जिसमें प्रदेश के वरिष्ठ नेता शामिल हैं।

आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने भी घटना को दलित विरोधी मानसिकता का खुला प्रदर्शन बताया। उन्होंने कहा, “यह घटना केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि समाज के सबसे कमजोर तबके के खिलाफ साजिश है।”

पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद कौशल किशोर व विधायक अमरेश रावत ने पीड़ित से मुलाकात कर न्याय का भरोसा दिलाया और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

यह घटना ऐसे वक्त में सामने आई है जब हाल ही में प्रयागराज में भी एक दलित युवक की मामूली विवाद में हत्या कर दी गई थी। मायावती ने इन दोनों घटनाओं को प्रदेश की बिगड़ती कानून-व्यवस्था का गंभीर संकेत बताया।

अब यह देखना होगा कि योगी सरकार इस पर क्या सख्त कदम उठाती है और क्या पीड़ित को न्याय मिल पाता है या यह मामला भी सिर्फ राजनीति तक सीमित रह जाएगा।

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