न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- केंद्र सरकार ने देश के श्रम कानूनों में व्यापक बदलाव करते हुए शुक्रवार को चार नई लेबर कोड (श्रम संहिताएँ) जारी कर दी हैं। इनमें मजदूरी संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य तथा कार्य परिस्थितियाँ संहिता 2020 शामिल हैं। इन सुधारों से कर्मचारियों को कई नई सुविधाएँ और कानूनी सुरक्षा मिलेंगी। आइए जानते हैं प्रमुख प्रावधान क्या हैं और इनका कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा—
मजदूरी संहिता 2019
- यह संहिता संगठित-असंगठित सभी तरह के कामगारों के लिए न्यूनतम वेतन का अधिकार सुनिश्चित करती है। पहले न्यूनतम वेतन केवल चुनिंदा रोजगारों तक सीमित था, जिससे केवल 30% श्रमिक ही इसके दायरे में आते थे।
- केंद्र सरकार फ्लोर वेज तय करेगी, और कोई भी राज्य इससे कम न्यूनतम वेतन घोषित नहीं कर सकेगा।
- समान काम के लिए भर्ती, वेतन और नौकरी की शर्तों में लिंग के आधार पर भेदभाव, जिसमें ट्रांसजेंडर शामिल हैं, प्रतिबंधित होगा।
- वेतन भुगतान समय पर सुनिश्चित करने और अनावश्यक कटौती रोकने के प्रावधान अब सभी कर्मचारियों पर लागू होंगे।
- अतिरिक्त काम (ओवरटाइम) कराने पर नियोक्ता को न्यूनतम दो गुना मजदूरी देना अनिवार्य होगा।
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औद्योगिक संबंध संहिता 2020
- निश्चित अवधि (फिक्स्ड टर्म) पर काम करने वाले कर्मचारियों को अब एक वर्ष नौकरी के बाद ही ग्रेच्युटी का हक मिल जाएगा, जबकि पहले यह अवधि पाँच वर्ष थी।
- छंटनी किए गए कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण व पुनर्वास हेतु एक नया फंड तैयार किया जाएगा और यह राशि 45 दिनों के भीतर कर्मचारी खाते में भेजी जाएगी।
- सर्विस सेक्टर में नियोक्ता और कर्मचारी की सहमति से वर्क फ्रॉम होम का प्रावधान भी शामिल किया गया है।
सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020
- ईएसआईसी की सुविधा अब पूरे देश में उपलब्ध होगी। 10 से कम स्टाफ वाले संस्थान भी नियोक्ता-कर्मचारी की सहमति से इसमें शामिल हो सकते हैं।
- खतरनाक काम करने वाले प्रतिष्ठानों के लिए ईएसआईसी कवरेज अनिवार्य होगा और इसका विस्तार बागान श्रमिकों तक किया गया है।
- ईपीएफ से संबंधित जांच शुरू करने की समय-सीमा 5 वर्ष तय कर दी गई है जिसे 2 साल में पूरा करना होगा।
- ईपीएफओ के आदेश पर अपील करने वाले नियोक्ताओं को अब आकलन राशि का केवल 25% जमा करना होगा।
- असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म कर्मचारियों के लिए जीवन बीमा, स्वास्थ्य सुविधा, विकलांगता और पेंशन जैसी योजनाओं हेतु एक विशेष फंड का प्रस्ताव है।
- महिला कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ाकर इसमें ससुर-सास और अन्य आश्रित परिवारजन भी शामिल किए जाएंगे।
- घर और कार्यस्थल के बीच आने-जाने के दौरान हुई दुर्घटनाएँ अब काम से जुड़ी दुर्घटना मानी जाएंगी और मुआवजा उपलब्ध होगा।
व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य शर्तें संहिता 2020
- सरकार खतरनाक या जोखिमपूर्ण काम करने वाले किसी भी प्रतिष्ठान पर—चाहे उसमें एक ही कर्मचारी क्यों न हो—यह संहिता लागू कर सकती है।
- उद्योगों के लिए एक लाइसेंस, एक रजिस्ट्रेशन और एक रिटर्न की व्यवस्था की गई है ताकि कागजी कार्रवाई और अनुपालन का बोझ कम हो।
- प्रवासी श्रमिकों की परिभाषा का विस्तार करते हुए अब उन कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है जो स्वयं ही काम की तलाश में दूसरे राज्यों में जाते हैं।
- सभी कर्मचारियों को निःशुल्क वार्षिक स्वास्थ्य जांच देने का प्रावधान है।
- महिलाएँ अब सभी प्रतिष्ठानों में और रात की पाली (सुबह 6 से पहले व शाम 7 के बाद) में भी काम कर सकेंगी, बशर्ते सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएँ।
- सामान्य काम के घंटे 8 घंटे प्रतिदिन और 48 घंटे प्रति सप्ताह तय किए गए हैं।
- ओवरटाइम केवल कर्मचारी की सहमति से होगा और इसके लिए दोगुनी मजदूरी दी जाएगी।



