न्यूज़ डेस्क/ सर्वोदय न्यूज़: उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अब फैसले की घड़ी आ गई है। सौरभ की हत्या के मामले में आरोपी उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला के खिलाफ अभियोजन और बचाव पक्ष की अंतिम बहस पूरी हो चुकी है। मेरठ की जिला अदालत ने मामले में 30 सितंबर 2026 को फैसला सुनाने की तारीख तय की है।
करीब 13 महीने चली अदालती कार्रवाई के बाद अब सभी की नजरें फैसले पर हैं। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत में दोनों पक्ष अपनी दलीलें रख चुके हैं। हालांकि, अदालत फैसला सुनाएगी कि आरोप साबित हुए हैं या नहीं और दोष सिद्ध होने की स्थिति में कानून के तहत क्या सजा होगी। अभी से सजा को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
प्रेम विवाह के बाद साहिल की हुई एंट्री
पुलिस और अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मुस्कान रस्तोगी ने वर्ष 2016 में सौरभ राजपूत से प्रेम विवाह किया था। दोनों की एक बेटी भी है। बाद में मुस्कान की मुलाकात साहिल शुक्ला से हुई और दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने की बात जांच में सामने आई।
बताया गया कि सौरभ मर्चेंट नेवी से जुड़े काम के सिलसिले में विदेश में रहता था और बाद में लंदन चला गया था। उसके भारत लौटने के बाद उसके और मुस्कान के रिश्ते में तनाव की बात भी सामने आई थी।
मार्च 2025 में सामने आया था मामला
यह मामला मार्च 2025 में सामने आया था। पुलिस जांच के अनुसार, सौरभ की हत्या के बाद उसके शव के टुकड़े किए गए और उन्हें एक नीले ड्रम में रखकर सीमेंट से बंद कर दिया गया था। इसी वजह से यह मामला बाद में ‘नीला ड्रम हत्याकांड’ के नाम से चर्चित हुआ।
जांच के बाद पुलिस ने मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया था। दोनों तब से जेल में हैं।
हत्या की साजिश को लेकर क्या सामने आया?
पुलिस की जांच और अभियोजन पक्ष के अनुसार, हत्या की योजना पहले से बनाई गई थी। जांच में यह भी दावा किया गया कि सौरभ के भारत लौटने के बाद वारदात को अंजाम दिया गया।
हालांकि, मामले में बचाव पक्ष ने अदालत के सामने अपनी अलग दलीलें रखीं। सुनवाई के दौरान चश्मदीद गवाह और अन्य साक्ष्यों को लेकर भी बचाव पक्ष ने अपनी बात रखी।
शव को नीले ड्रम में छिपाने का आरोप
अभियोजन के मुताबिक, सौरभ की हत्या के बाद शव को टुकड़ों में बांटा गया और उन्हें ड्रम में रखा गया। इसके बाद शव को सीमेंट से ढककर छिपाने की कोशिश की गई। पुलिस को जांच के दौरान इसी ड्रम से शव के अवशेष मिले थे।
इस मामले में अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अपना पक्ष रखा, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों का विरोध किया।
22 गवाह और 126 पेशियां
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में बड़ी संख्या में पेशियां हुईं और गवाहों के बयान दर्ज किए गए। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 13 महीने चली सुनवाई में 22 गवाह पेश हुए और 126 पेशियां हुईं। इसके बाद दोनों पक्षों की अंतिम बहस पूरी हो गई।
30 सितंबर को आएगा अदालत का फैसला
अब मेरठ जिला अदालत में 30 सितंबर को इस मामले में फैसला सुनाया जाना है। अदालत के निर्णय से ही स्पष्ट होगा कि अभियोजन द्वारा लगाए गए आरोपों और पेश किए गए साक्ष्यों को न्यायालय किस तरह देखता है।
मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला के खिलाफ मामले में क्या फैसला आता है और अदालत की ओर से क्या आदेश दिया जाता है, इस पर अब सबकी नजरें टिकी हैं।


