शादीशुदा होकर झूठा वादा करना अपराध, हाईकोर्ट ने आरोपी के खिलाफ केस रद्द करने से किया इंकार

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादी का झूठा वादा कर महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाने के आरोपी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई और चार्जशीट को रद्द करने से मना कर दिया है। न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना ने विपिन कुमार और अन्य तीन याचिकाकर्ताओं की याचिकाएं खारिज की हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर कोई व्यक्ति पहले से शादीशुदा है, तो शादी का वादा स्वयं ही कपटपूर्ण माना जाएगा।

मुकदमा सहारनपुर के देवबंद में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में लंबित है। पीड़िता ने 22 मई 2025 को एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें उसने आरोप लगाया कि 2018 में फेसबुक पर संपर्क में आने के बाद आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ लगातार यौन संबंध बनाए। एफआईआर के अनुसार पीड़िता पांच बार गर्भवती हुई, जिनमें चार बार उसे गर्भपात के लिए मजबूर किया गया। उस समय वह छह महीने की गर्भवती थी और बाद में उसने एक बच्ची को जन्म दिया।

पीड़िता ने यह भी कहा कि आरोपी ने उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल किया। अन्य आरोपियों पर उसके परिवार को धमकाने और समझौते के लिए दबाव डालने का आरोप है। याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि संबंध आपसी सहमति से बने और किसी प्रकार का कपट नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़िता शिक्षित है और उसे आरोपी के शादीशुदा होने का पता था क्योंकि वह 2016 में उसकी शादी में शामिल हुई थी।

लंबे संबंध में शादी का वादा पूरा न करना अपराध नहीं

हाईकोर्ट ने एक अलग मामले में यह भी स्पष्ट किया कि पढ़े-लिखे दो बालिगों के बीच लंबे समय तक शारीरिक संबंध होना और बाद में शादी का वादा पूरा न करना आपराधिक अपराध नहीं है। ऐसे मामलों में केस जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा। यह आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना ने बस्ती के श्याम बहादुर यादव की याचिका पर दिया। कोर्ट ने याची के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई, चार्जशीट और सम्मन आदेश रद्द कर दिए।

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कोर्ट ने कहा कि स्वीकृत तथ्य है कि पीड़िता और आरोपी 2016 से एक-दूसरे को जानते थे। 2019 से वे शादी के वादे पर शारीरिक संबंध में थे, जो 2025 तक जारी रहे। इस दौरान 2020 में दो बार गर्भपात भी कराया गया। सुप्रीम कोर्ट के दृष्टिकोण का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक संबंध बनाए रखने का अर्थ यह है कि दोनों पक्षों की सहमति मौजूद थी।

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