न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के दौरान एक नया विवाद सामने आया है। मेला प्रशासन ने ज्योतिष्पीठ से जुड़े स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को नोटिस जारी कर उनके नाम के साथ ‘शंकराचार्य’ पद के उपयोग पर आपत्ति जताई है। प्रशासन ने उनसे इस पद के वैधानिक अधिकार और उससे संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। नोटिस के बाद संत समाज और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
दरअसल, माघ पूर्णिमा के अवसर पर संगम स्नान को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच पहले ही तनाव की स्थिति बन चुकी थी। स्नान की अनुमति न मिलने के बाद वे बिना स्नान किए लौट आए थे और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए अनशन शुरू कर दिया था। प्रशासन की ओर से इन आरोपों का खंडन भी किया गया था। इसी विवाद के बीच अब नोटिस जारी होने से मामला और पेचीदा हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले का हवाला
माघ मेला प्रशासन ने अपने नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक याचिका का उल्लेख किया है। नोटिस में पूछा गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने नाम के आगे ‘शंकराचार्य’ क्यों लिखते हैं, जबकि ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य को लेकर मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। प्रशासन ने 24 घंटे के भीतर स्थिति स्पष्ट करने और लिखित जवाब देने का निर्देश दिया है।

यह नोटिस प्रयागराज मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ऋषिराज की ओर से जारी किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में लगे बोर्ड पर ‘ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य’ शब्द का प्रयोग किया गया है, जबकि वर्ष 2020 से जुड़ा यह विवाद अब भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। ऐसे में अंतिम आदेश या दिशा-निर्देश के बिना इस पद का उपयोग न्यायालय की अवहेलना माना जा सकता है।
मौनी अमावस्या से जुड़ा है विवाद
बताया जा रहा है कि यह विवाद मौनी अमावस्या के दिन और गहरा गया था, जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को संगम जाने से रोक दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके कई शिष्यों के साथ पुलिस ने मारपीट की और उन्हें जबरन संगम तट से हटाया गया। हालांकि प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज किया था।
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मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल और पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार का कहना था कि किसी के साथ मारपीट नहीं की गई, बल्कि कुछ लोग पुलिसकर्मियों से दुर्व्यवहार कर रहे थे, जिन्हें वहां से हटाया गया। मेलाधिकारी ऋषिराज ने भी नोटिस की पुष्टि करते हुए कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए प्रशासन ने नियमों के तहत कार्रवाई की है।
शिविर में नाराजगी, बढ़ सकता है विवाद
नोटिस मिलने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर और समर्थकों में नाराजगी देखी जा रही है। उनके समर्थकों का कहना है कि यह सनातन परंपरा और शंकराचार्य पीठ की मान्यताओं पर सीधा हस्तक्षेप है। उनका तर्क है कि पीठ की परंपराएं शास्त्रों और धार्मिक नियमों से तय होती हैं, न कि प्रशासनिक आदेशों से।
मेला प्रशासन ने साफ किया है कि तय समय सीमा के भीतर जवाब न मिलने की स्थिति में आगे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं, जिसमें शिविर और सुविधाओं पर कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। माघ मेले जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में किसी प्रमुख संत को इस तरह का नोटिस दिए जाने को असामान्य माना जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में विवाद और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।



