लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़: बच्चों में होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम और आपात स्थिति में प्राथमिक उपचार के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के कॉलेज ऑफ नर्सिंग के विद्यार्थियों ने जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। चाइल्ड हेल्थ नर्सिंग विभाग के बीएससी नर्सिंग पंचम सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने समूह परियोजना के तहत आरपीजी अस्पताल के बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में यह कार्यक्रम आयोजित किया।
कार्यक्रम में डॉ. श्रीकेश सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, आरपीजी अस्पताल, प्रो. डॉ. शिवकुमार मुदगल, प्राचार्य और प्रो. निपिन कलाल, उप-प्राचार्य की उपस्थिति रही। विद्यार्थियों को कार्यक्रम की तैयारी और प्रस्तुति के लिए श्रीमती लीना प्रवीण जॉन, श्रीमती पार्वथी सी. और श्रीमती वर्षा द्विवेदी ने मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम के आयोजन में नर्सिंग अधीक्षक श्रीमती अल्पना और डीएनएस अधिकारियों का भी सहयोग रहा।
पोस्टर और भूमिका-अभिनय के जरिए दिया जागरूकता संदेश
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अस्पताल की ओपीडी में आने वाले अभिभावकों और आम लोगों को बच्चों की सुरक्षा तथा दुर्घटनाओं से बचाव के उपायों के बारे में जानकारी देना था। नर्सिंग विद्यार्थियों ने पोस्टर और भूमिका-अभिनय के माध्यम से बच्चों के साथ होने वाली सामान्य दुर्घटनाओं और उनसे बचाव के तरीकों को समझाया।
विद्यार्थियों ने गिरने, जलने, दम घुटने, विषाक्त पदार्थों के संपर्क और अन्य चोटों जैसी परिस्थितियों में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी दी। साथ ही दुर्घटना होने पर प्राथमिक उपचार और समय पर चिकित्सकीय सहायता लेने के महत्व को भी बताया।
घर में सुरक्षित वातावरण बनाने पर जोर
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान अभिभावकों को बच्चों की उचित निगरानी करने और घर में उनके लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने की सलाह दी गई। विद्यार्थियों ने विशेष रूप से दवाइयों, रसायनों और अन्य विषैले पदार्थों को बच्चों की पहुंच से दूर रखने के बारे में जागरूक किया।
भूमिका-अभिनय के जरिए यह भी बताया गया कि दुर्घटना की स्थिति में घबराने के बजाय तत्काल प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराना और आवश्यकता पड़ने पर समय रहते चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
विद्यार्थियों में भी विकसित हुए व्यावहारिक कौशल
समूह परियोजना के माध्यम से नर्सिंग विद्यार्थियों को स्वास्थ्य शिक्षा और जन-जागरूकता से जुड़े व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुए। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों के संचार, प्रस्तुतीकरण, भूमिका-अभिनय और सामुदायिक सहभागिता जैसे कौशल विकसित करने में भी योगदान दिया।
इस पहल के माध्यम से बच्चों की सुरक्षा और दुर्घटना रोकथाम को लेकर अभिभावकों एवं आम जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।


