न्याय मिला, लेकिन देर से: कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत पर मंत्री दयाशंकर सिंह की प्रतिक्रिया

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उन्नाव रेप मामले में दोषी करार दिए गए पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट से मिली सशर्त जमानत और उम्रकैद की सजा पर रोक को लेकर उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह का बयान सामने आया है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।

मीडिया द्वारा प्रतिक्रिया पूछे जाने पर मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि न्यायपालिका ने अपना काम किया है। उन्होंने कहा, “न्याय जरूर मिला है, लेकिन इसमें काफी देर हो गई। इस फैसले का हम स्वागत करते हैं।” उनके इस बयान को लेकर भी सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

इससे पहले, सेंगर को मिली राहत पर पीड़िता द्वारा नई दिल्ली के इंडिया गेट पर धरना देने को लेकर पूछे गए सवाल पर यूपी सरकार के एक अन्य वरिष्ठ मंत्री ओम प्रकाश राजभर का बयान भी विवादों में आ गया था। उन्होंने एक गंभीर सवाल के जवाब में हल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए हंसी जाहिर की थी, जिसके बाद उन्हें सोशल मीडिया पर काफी आलोचना का सामना करना पड़ा।

पीड़िता ने जताया फैसले पर दुख

वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा सजा पर रोक लगाए जाने को लेकर पीड़िता ने एएनआई से बातचीत में कहा कि इस फैसले से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है। उन्होंने कहा कि यह देश का पहला ऐसा मामला है, जिसमें रेप के दोषी को सजा पर रोक लगाकर जमानत दी गई है। पीड़िता ने यह भी सवाल उठाया कि अब तक सीबीआई ने इस मामले में क्या किया।

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पीड़िता ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अभी सुप्रीम कोर्ट में कोई याचिका दाखिल नहीं की है, लेकिन इससे पहले वह कह चुकी हैं कि यह फैसला उनके परिवार के लिए किसी आपदा से कम नहीं है और वे इसके खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख करेंगी।

2017 में सामने आया था मामला

गौरतलब है कि वर्ष 2017 में उन्नाव से तत्कालीन भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर एक नाबालिग लड़की के अपहरण और दुष्कर्म का आरोप लगा था। इस मामले में 2019 में दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके अलावा सेंगर पर पीड़िता के पिता की मौत से जुड़े मामले में भी आरोप लगे थे।

दिल्ली हाई कोर्ट से मिली सशर्त राहत

23 दिसंबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित कर दिया और उन्हें कुछ सख्त शर्तों के साथ जमानत दी। जमानत की शर्तों में यह भी शामिल है कि सेंगर पीड़िता के पांच किलोमीटर के दायरे में नहीं जाएंगे। इस फैसले के बाद एक बार फिर यह मामला राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है।

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