न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़: उत्तर कोलकाता के ऐतिहासिक चोरबागान सार्वजनीन दुर्गोत्सव पंडाल में सप्तमी की रात हुई भगदड़ के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। इस हादसे में 19 श्रद्धालुओं की मौत होने की खबर है। विपक्षी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने राज्य की भाजपा सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाते हुए पूजा समिति के गठन तथा सुरक्षा व्यवस्था की जांच की मांग की है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया है कि समिति से जुड़े प्रभावशाली लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
हालांकि, पूजा समिति और हादसे के लिए जिम्मेदारी तय करने से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
शुभेंदु अधिकारी के भतीजे का नाम लेकर TMC ने उठाए सवाल
तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के भतीजे देवदीप अधिकारी का नाम पूजा समिति से कथित तौर पर जुड़े होने के संदर्भ में उठाया। उन्होंने सवाल किया कि यदि कोई दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई कब होगी।
वहीं, TMC प्रवक्ता कुणाल घोष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पूजा समिति के पूर्व महासचिव जयंत बनर्जी का 17 जुलाई का कथित पत्र साझा किया। घोष का दावा है कि मई 2026 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद पुरानी समिति पर दबाव बनाया गया और नए पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई।
उनके अनुसार, जोरासांको से भाजपा विधायक जिजोय ओझा को नई समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। TMC नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या हादसे की जांच में समिति के पदाधिकारियों और उनसे जुड़े प्रभावशाली लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी।
भाजपा विधायक ने क्या दी सफाई?
TMC के आरोपों पर भाजपा नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। जोरासांको के विधायक जिजोय ओझा ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद समिति से जुड़े होने की बात स्वीकार की। हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्हें प्रवेश और निकास द्वारों के संकरे होने की जानकारी नहीं थी।
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने घटना की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं।
भाजपा विधायक रितेश तिवारी ने TMC के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि पहले भी राज्य में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता दुर्गा पूजा समितियों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि किसी नेता या उसके रिश्तेदार का समिति से जुड़ा होना अपने आप में उसे हादसे के लिए जिम्मेदार कैसे ठहरा सकता है।
भाजपा नेता सजल घोष ने भी कहा कि बारिश के कारण पैदा हुई अफरा-तफरी समेत हादसे की परिस्थितियों की जांच किए बिना किसी एक पक्ष पर जिम्मेदारी डालना जल्दबाजी होगी।
मुख्यमंत्री ने जांच के लिए उठाया कदम
हादसे के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की पहल की है। खबर के मुताबिक, उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर मौजूदा न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति गठित करने का अनुरोध करने की घोषणा की है।
राज्य सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को ग्रुप-डी पद पर सरकारी नौकरी देने का ऐलान किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। घायलों के इलाज का खर्च उठाने और उन्हें पांच लाख रुपये की सहायता देने की बात कही गई है।
इस बीच, गिरिश पार्क थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर पूजा समिति के पदाधिकारियों, निजी सुरक्षा एजेंसी के प्रतिनिधियों और इवेंट मैनेजमेंट कंपनी से जुड़े कर्मचारियों समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और उनकी भूमिका से संबंधित जानकारी की आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
राहुल गांधी ने जताया दुख, निष्पक्ष जांच की मांग
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कोलकाता हादसे पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने घायलों को उचित इलाज उपलब्ध कराने और घटना की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही, कांग्रेस कार्यकर्ताओं से राहत कार्यों में प्रशासन की मदद करने की अपील की।
दूसरी ओर, कांग्रेस नेता सुमन रॉय चौधरी ने दावा किया कि मृतकों और घायलों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से अधिक हो सकती है। उन्होंने भीड़ प्रबंधन और पुलिसकर्मियों की तैनाती को लेकर सवाल उठाए।
चौधरी के अनुसार, सरकार की ओर से बताई गई 19 मौतों की संख्या के अतिरिक्त भी लोगों के हताहत होने की आशंका है। हालांकि, इस दावे की पुष्टि के लिए आधिकारिक आंकड़ों और अस्पतालों से मिली जानकारी का इंतजार करना जरूरी है।
हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ ने भीड़ प्रबंधन, प्रवेश और निकास की व्यवस्था तथा सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, लेकिन हादसे की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच के निष्कर्ष अहम होंगे।
फिलहाल मामले में पुलिस की कार्रवाई, पूजा समिति की भूमिका और प्रस्तावित उच्चस्तरीय जांच पर नजर बनी हुई है। जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि भगदड़ किन परिस्थितियों में हुई और सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई चूक हुई थी या नहीं।


