न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कड़ी निगरानी के बीच भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। कच्चे तेल और एलपीजी सप्लाई पर असर पड़ने के बाद केंद्र सरकार अब देश के पूर्वी समुद्री क्षेत्रों में छिपे तेल और प्राकृतिक गैस के भंडार खोजने की तैयारी में जुट गई है।
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (DGH) बंगाल की खाड़ी और पूर्वी तट के कई समुद्री क्षेत्रों में व्यापक भूगर्भीय सर्वेक्षण शुरू करने जा रहा है। इस परियोजना के लिए 14 मई 2026 को टेंडर जारी किए गए हैं।
क्या है पूरा प्रोजेक्ट?
यह सर्वे तकनीकी रूप से “2D ब्रॉडबैंड मरीन सीस्मिक एंड ग्रेविटी-मैग्नेटिक डेटा एक्विजिशन, प्रोसेसिंग एंड इंटरप्रिटेशन” परियोजना कहलाती है। आसान शब्दों में समझें तो यह समुद्र के नीचे छिपे तेल और गैस भंडारों की खोज के लिए हाईटेक स्कैनिंग मिशन है।
इस दौरान विशेष जहाज समुद्र में लंबे केबलनुमा उपकरण यानी स्ट्रीमर्स छोड़ेंगे। ये उपकरण ध्वनि तरंगें समुद्र की गहराई में भेजेंगे और चट्टानों से टकराकर लौटने वाली तरंगों को रिकॉर्ड करेंगे। वैज्ञानिक इन संकेतों के आधार पर समुद्र तल के नीचे मौजूद संरचनाओं की विस्तृत तस्वीर तैयार करेंगे।
लाखों किलोमीटर क्षेत्र में होगा सर्वे
यह अभियान अगले दो वर्षों तक चल सकता है। अलग-अलग बेसिन में बड़े पैमाने पर सर्वे की योजना बनाई गई है।
- बंगाल-पूर्णिया और महानदी बेसिन – 45,000 लाइन किलोमीटर
- अंडमान बेसिन – 43,000 एलकेएम
- कृष्णा-गोदावरी (KG) बेसिन – 43,000 एलकेएम
- कावेरी बेसिन – 30,000 एलकेएम
क्यों अहम है यह मिशन?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। गैस के मामले में भी देश काफी हद तक आयात पर निर्भर है। ऐसे में वैश्विक तनाव, युद्ध या सप्लाई बाधित होने का सीधा असर पेट्रोल-डीजल, गैस सिलेंडर और महंगाई पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का पूर्वी समुद्री तट अभी भी काफी हद तक अनछुआ है। आधुनिक सीस्मिक तकनीक के जरिए यहां नए ऊर्जा स्रोत मिलने की संभावना बढ़ गई है।
इन 5 क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा उम्मीद
1. बंगाल अपतटीय बेसिन
यहां मोटी तलछटी परतें मौजूद हैं और कई स्तरों पर गैस के संकेत पहले भी मिल चुके हैं। वैज्ञानिकों को बड़े हाइड्रोकार्बन भंडार मिलने की उम्मीद है।
2. महानदी बेसिन
इसे व्यावसायिक उत्पादन के लिहाज से बेहद संभावनाशील क्षेत्र माना जा रहा है। गहरे पानी के गैस भंडार यहां मौजूद हो सकते हैं।
3. अंडमान बेसिन
म्यांमार और इंडोनेशिया के गैस क्षेत्रों जैसी भूगर्भीय संरचना होने के कारण यहां बड़े गैस भंडार मिलने की संभावना जताई जा रही है। मीथेन हाइड्रेट्स भी यहां मौजूद बताए जाते हैं।
4. कृष्णा-गोदावरी (KG) बेसिन
यह पहले से भारत का प्रमुख गैस उत्पादक क्षेत्र है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसके गहरे हिस्सों में अभी भी बड़े भंडार छिपे हो सकते हैं।
5. कावेरी बेसिन
यह क्षेत्र पहले से पेट्रोलियम उत्पादन के लिए जाना जाता है, लेकिन गहरे समुद्री इलाकों में अभी और खोज की संभावना बनी हुई है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा सहारा
अगर इस सर्वे में बड़े तेल और गैस भंडार मिलते हैं, तो भारत की विदेशी आयात पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे लंबे समय में ईंधन कीमतों को स्थिर रखने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिलेगी।



