न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- सोना और चांदी के दामों में इन दिनों दबाव देखने को मिल रहा है, जिससे खरीदारों के लिए राहत की उम्मीद बढ़ गई है। वैश्विक बाजार में बदलते हालात और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने कीमती धातुओं की दिशा पर असर डाला है। खासतौर पर डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ी नीतियों और स्ट्रेट ऑफ हार्मुज के आसपास बढ़ते तनाव ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
आमतौर पर वैश्विक संकट के समय सोना सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) माना जाता है, लेकिन मौजूदा स्थिति में इसका रुख कुछ अलग नजर आ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी और इसके संभावित 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने की आशंका ने महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
महंगाई बढ़ने का सीधा असर ब्याज दरों पर पड़ता है। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो सोना और चांदी जैसे गैर-ब्याज देने वाले निवेश विकल्प कम आकर्षक हो जाते हैं। यही वजह है कि निवेशक बेहतर रिटर्न वाले साधनों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे इन धातुओं की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
हालिया आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद सोने की कीमतों में करीब 8 प्रतिशत तक गिरावट आई है, जबकि चांदी में लगभग 16 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहता है, तो सोना करीब 10 प्रतिशत और गिर सकता है। ऐसे में इसकी कीमत 4,400 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ सकती है, वहीं चांदी 67 डॉलर के स्तर तक फिसल सकती है।
हालांकि, बाजार की दिशा पूरी तरह एकतरफा नहीं है। यदि कच्चे तेल की कीमतें फिर से 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आती हैं, तो महंगाई का दबाव कम होगा और सोना-चांदी को समर्थन मिल सकता है। इस स्थिति में सोना 5,000 डॉलर प्रति औंस के पार जा सकता है और चांदी भी 80 डॉलर से ऊपर पहुंच सकती है।
डॉलर की मजबूती भी एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। मजबूत डॉलर के कारण सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग में कमी आती है। फिलहाल बाजार में यह धारणा बनी हुई है कि अमेरिका में जल्द ब्याज दरों में कटौती नहीं होगी, जिससे सोने की चमक कुछ फीकी पड़ी है।
आने वाले समय में सोना और चांदी दोनों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहकर बाजार के रुझान, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ही निर्णय लेना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह खबर केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दिए गए विचार विशेषज्ञों के निजी आकलन पर आधारित हैं। निवेश से पहले किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेना उचित रहेगा।