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धनतेरस से दिवाली तक करें ये 5 उपाय, बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा, बढ़ेगा धन भाग्य

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- 18 अक्टूबर 2025 से दिवाली का पांच दिवसीय महापर्व शुरू हो रहा है। इस पावन समय में माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए कुछ सरल लेकिन प्रभावशाली उपाय किए जा सकते हैं। धनतेरस से दिवाली तक इन उपायों को करने से घर में समृद्धि, सुख और धनवृद्धि बनी रहती है।

1. श्री यंत्र की पूजा करें

धन की देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए श्री यंत्र का पूजन सर्वोत्तम माना गया है।
उपाय: धनतेरस से दिवाली तक प्रतिदिन श्री यंत्र की विधिपूर्वक पूजा करें, इसे लाल कपड़े पर स्थापित करें और कुमकुम, अक्षत, फूल और दीप से अर्चना करें | “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जाप करें |

2. करें तुलसी पूजन

तुलसी को लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है।
उपाय:  धनतेरस से दिवाली तक सुबह-शाम तुलसी के पौधे के सामने दीपक जलाएं | तुलसी जी को जल अर्पित करें और “ॐ तुलस्यै नमः” मंत्र का जाप करें| तुलसी का पूजन करने से धन के साथ-साथ घर में सकारात्मक ऊर्जा भी बनी रहती है |

3. करें दान, मिलेगा पुण्य और सुख

सनातन धर्म में दान को सर्वोच्च कर्तव्य माना गया है।
उपाय: इन दिनों गरीबों को वस्त्र, भोजन, दीप, बर्तन, फल, मिठाई और धन का दान करें | धनिया के बीज का दान विशेष रूप से लक्ष्मी प्रसन्न करने वाला माना जाता है | अपने सामर्थ्य के अनुसार कोई भी वस्तु श्रद्धापूर्वक दें|

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4. पढ़ें श्री लक्ष्मी चालीसा

माता लक्ष्मी की चालीसा का पाठ करने से मनोवांछित फल प्राप्त होता है।
उपाय: रोज सुबह और शाम श्री लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें | घी के दीपक के साथ पाठ करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है | यह पाठ दरिद्रता और आर्थिक संकट को दूर करता है

5. करें लक्ष्मी मंत्र का जाप

लक्ष्मी मंत्र के जाप से धन संबंधित रुकावटें दूर होती हैं।
मंत्र:ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः। जाप की संख्या: कम से कम 108 बार प्रतिदिन, इस जाप से घर में धनवर्षा, समृद्धि और मानसिक शांति आती है |

दिवाली 2025 का पंचांग:

दिन पर्व तिथि
18 अक्टूबर धनतेरस त्रयोदशी
19 अक्टूबर नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) चतुर्दशी
20 अक्टूबर दीपावली (लक्ष्मी पूजन) अमावस्या
21 अक्टूबर गोवर्धन पूजा प्रतिपदा
22 अक्टूबर भाई दूज द्वितीया

महत्वपूर्ण सलाह:

इन उपायों के साथ सच्चे मन, श्रद्धा और भक्ति का भाव भी जरूरी है। यही आपके प्रयासों को सफल और फलदायी बनाएगा।

डिस्क्लेमर:

इस लेख में प्रस्तुत जानकारियां धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी उपाय को अपनाने से पहले संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

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