ED का बड़ा एक्शन: गूगल और मेटा को समन, सट्टेबाजी ऐप्स के प्रचार में शामिल होने का आरोप

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गूगल और मेटा (फेसबुक) के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए उन्हें समन जारी किया है। यह कार्रवाई अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप्स से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच के तहत की गई है। दोनों टेक दिग्गजों को 21 जुलाई 2025 को पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

क्या है मामला?

ईडी के अनुसार, गूगल और मेटा ने उन ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म्स को विज्ञापन और प्रचार का मंच दिया, जो मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला ट्रांजैक्शन जैसे गंभीर आर्थिक अपराधों में शामिल थे।

इन कंपनियों पर यह आरोप है कि उन्होंने इन सट्टेबाजी ऐप्स की वेबसाइट्स को प्राइम एड स्लॉट्स दिए, जिससे उनकी पहुंच लाखों लोगों तक पहुंच गई और उनका अवैध नेटवर्क तेजी से फैला।

‘स्किल गेमिंग’ की आड़ में जुए का जाल

ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि ये ऐप्स खुद को ‘स्किल बेस्ड गेमिंग प्लेटफॉर्म’ बताते हैं, लेकिन असल में इनमें अवैध सट्टेबाजी और जुए का कारोबार चलाया जा रहा था। इन प्लेटफॉर्म्स से कमाई गई भारी रकम को हवाला चैनलों के माध्यम से विदेशों में ट्रांसफर किया गया।

29 सेलेब्रिटीज और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के खिलाफ मामला दर्ज

ईडी ने इस केस में 29 से ज्यादा सेलिब्रिटीज और सोशल मीडिया स्टार्स को आरोपी बनाया है। इनमें शामिल हैं:

  • प्रकाश राज
  • राणा दग्गुबाती
  • विजय देवरकोंडा

इन पर आरोप है कि इन्होंने इन अवैध ऐप्स का प्रमोशन कर मोटी रकम कमाई।

महादेव सट्टेबाजी ऐप: 6,000 करोड़ से ज्यादा का घोटाला

यह मामला मुख्यतः ‘महादेव सट्टेबाजी ऐप घोटाले’ से जुड़ा है, जिसकी राशि ₹6,000 करोड़ से ज्यादा आंकी गई है ईडी के अनुसार, इस घोटाले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भी लपेटे में लिया गया है। एजेंसी का दावा है कि उन्हें ₹500 करोड़ की रकम महादेव ऐप के प्रमोटर्स से मिली।

Fairplay IPL Betting App का भी नाम शामिल

एक अन्य बड़ा मामला Fairplay IPL Betting App का है।

  • इस ऐप पर IPL मैचों की अवैध लाइव स्ट्रीमिंग करने और सट्टा लगाने का आरोप है।
  • इससे Viacom18 जैसे आधिकारिक ब्रॉडकास्टर्स को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।

इस केस में भी कई बॉलीवुड और सोशल मीडिया हस्तियां जांच के घेरे में हैं।

क्या पूछे जाएंगे गूगल और मेटा से सवाल?

ED अब जानना चाहती है कि:

  • गूगल और मेटा ने किन ऐप्स को विज्ञापन की अनुमति दी?
  • क्या प्रमोशन के दौरान नियमों की अनदेखी हुई?
  • क्या कंपनियों को इस गतिविधि की अवैध प्रकृति की जानकारी थी?

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