न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और सोलहवें वित्त आयोग के प्रमुख अरविंद पनगढ़िया के नए शोध में दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासनकाल में भारत ने अत्यधिक गरीबी को लगभग खत्म कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि गरीबी में गिरावट मुसलमानों में हिंदुओं की तुलना में अधिक तेज़ रही है। शोध के आंकड़ों के अनुसार, अब हिंदुओं में अत्यधिक गरीबी की दर 2.3% है, जबकि मुसलमानों में यह केवल 1.5% रह गई है।
कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अरविंद पनगढ़िया और इंटेलिंक एडवाइजर्स के संस्थापक विशाल मोरे द्वारा तैयार यह पेपर इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली (EPW) में प्रकाशित हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2011-12 से 2023-24 के बीच भारत में गरीबी में तेज़, निरंतर और व्यापक गिरावट दर्ज की गई।
मुस्लिमों में गरीबी घटने की रफ्तार ज्यादा
रिसर्च बताता है कि 2022-23 में भी दोनों समुदायों में गरीबी का फासला लगभग एक जैसा था—
- मुसलमान: 4%
- हिंदू: 4.8%
नई रिपोर्ट पहले से चली आ रही इस धारणा को चुनौती देती है कि मुसलमानों में गरीबी का स्तर हमेशा ऊंचा रहा है।
अत्यधिक गरीबी पर लगभग ‘पूर्ण विराम’
शोध के अनुसार, PPP (क्रय शक्ति समानता) मानक पर प्रति व्यक्ति 3 डॉलर प्रतिदिन से कम खर्च क्षमता को अत्यधिक गरीबी माना जाता है। इस मानक पर भारत में अत्यधिक गरीबी लगभग समाप्त हो चुकी है।
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पेपर के मुताबिक: राष्ट्रीय गरीबी दर 2011-12 में 21.9% थी, 2023-24 में यह घटकर 2.3% रह गई| यह 12 वर्षों में 19.7 प्रतिशत अंकों की गिरावट है—औसतन प्रति वर्ष 1.64 प्रतिशत अंक।
ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी तेजी से घटी
रिपोर्ट में कहा गया कि ग्रामीण भारत में गरीबी में गिरावट शहरी क्षेत्रों से काफी तेज़ रही।
- ग्रामीण इलाकों में: 22.5 प्रतिशत अंक की कमी
- शहरी इलाकों में: 12.6 प्रतिशत अंक की कमी
सभी सामाजिक समूहों में गरीबी घटी
SC, ST, OBC और ऊंची जातियों—सभी में गरीबी में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। सबसे नीचे माने जाने वाले ST समुदाय में भी अत्यधिक गरीबी 8.7% पर आ गई है।
हिंदू बनाम मुस्लिम: अब कौन ज्यादा गरीब?
पेपर में धार्मिक आधार पर गरीबी का ताज़ा वितरण इस प्रकार है:
- हिंदू: 2.3%
- मुसलमान: 1.5%
- ईसाई: 5%
- बौद्ध: 3.5%
- सिख/जैन: 0%
ग्रामीण भारत में अंतर और स्पष्ट है—
- मुसलमान: 1.6%
- हिंदू: 2.8%
शहरी क्षेत्रों में भी मुसलमानों की गरीबी 2011-12 के 20.8% से घटकर अब मात्र 1.2% हो गई है, जबकि हिंदुओं की गरीबी 12.5% से घटकर 1% पर आ गई है।



