Jharkhand Student Protest: झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। सोमवार को रांची में हजारों छात्रों ने पुरानी विधानसभा से नई विधानसभा की ओर मार्च किया। इस दौरान 9 दिनों से अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी आंदोलनकारियों के साथ विधानसभा मार्च में शामिल हुए।
महतो की तबीयत खराब होने के बावजूद उनका मार्च में शामिल होना प्रदर्शन के दौरान चर्चा का विषय बना रहा। शुरुआत में वह कुछ दूरी तक पैदल चले, लेकिन कमजोरी के कारण उन्हें एंबुलेंस में ले जाया गया। बाद में आंदोलनकारी उन्हें स्ट्रेचर पर लेकर आगे बढ़े। उनके साथ छात्रों ने नारेबाजी की और समर्थन जताया।
कई बैरिकेड पार कर आगे बढ़े छात्र
विधानसभा मार्च में शामिल हजारों छात्रों ने पुरानी विधानसभा के पास से नई विधानसभा की ओर बढ़ना शुरू किया। रास्ते में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की थी।
प्रदर्शनकारी एक के बाद एक कई बैरिकेड पार करते हुए आगे बढ़े। बाद में छात्र शहीद मैदान के आसपास सड़क पर बैठ गए। उन्हें आगे जाने से रोकने के दौरान कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।
हालांकि, छात्र संगठनों के स्वयंसेवक भीड़ को नियंत्रित करने और प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की कोशिश करते नजर आए।
एंबुलेंस से पहुंचे, फिर स्ट्रेचर पर आगे बढ़े महतो
देवेंद्र नाथ महतो पिछले 9 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। बताया गया कि आंदोलन के शुरुआती चार दिनों में उन्होंने पानी भी नहीं लिया था। इसके बावजूद उन्होंने विधानसभा मार्च में छात्रों का साथ नहीं छोड़ा।
महतो हाथ में पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की तस्वीर लेकर मार्च में शामिल हुए। मंच से कुछ दूरी तक पैदल चलने के बाद उनकी तबीयत को देखते हुए उन्हें एंबुलेंस में बैठाया गया। कुछ दूरी तय करने के बाद आंदोलनकारी उन्हें स्ट्रेचर पर लेकर आगे बढ़े।
महतो की स्थिति देखकर छात्रों में भी उत्साह दिखाई दिया और प्रदर्शनकारियों ने उनके समर्थन में जमकर नारे लगाए।
‘अनशन से ज्यादा कष्ट कांटेदार तार देखकर हुआ’
मार्च के दौरान मीडिया से बातचीत में देवेंद्र नाथ महतो ने पुलिस की ओर से लगाई गई कंटीली तारों वाली बैरिकेडिंग पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लंबे समय से अनशन के बावजूद उन्हें कांटेदार बैरिकेडिंग देखकर ज्यादा दुख हुआ।
महतो ने कहा कि वह अस्पताल जाने की स्थिति में हैं और 9 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उन्होंने छात्रों से संयम और अनुशासन बनाए रखने की अपील भी की।
उन्होंने आशंका जताई कि आंदोलन के दौरान स्थिति बिगड़ सकती है, भगदड़ हो सकती है या पुलिस की ओर से आंसू गैस का इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति में वह ऐसी स्थिति में खुद तेजी से हट भी नहीं पाएंगे।
‘सरकार ऐसा कदम न उठाए जिससे हालात बिगड़ें’
देवेंद्र नाथ महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के जन्मदिन का जिक्र करते हुए कहा कि वह नहीं चाहते कि ऐसा कोई कदम उठाया जाए जिससे आंदोलन हिंसक हो या छात्रों को चोट पहुंचे।
उन्होंने छात्रों और मीडिया का आभार जताते हुए आंदोलन को अनुशासित तरीके से आगे बढ़ाने की अपील की। महतो ने कहा कि सरकार को छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उन्होंने शिबू सोरेन का जिक्र करते हुए कहा कि अगर वह आज जीवित होते तो संभवतः आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ खड़े होते, क्योंकि उन्होंने खुद लंबे समय तक आंदोलनों में हिस्सा लिया था।
अभिजीत दीपके का पुराना बयान भी चर्चा में
देवेंद्र नाथ महतो के विधानसभा मार्च में शामिल होने के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक पुराने आंदोलन का उदाहरण भी सामने आया। उस दौरान संसद मार्च में शामिल नहीं होने को लेकर अभिजीत दीपके की आलोचना हुई थी।
बताया गया कि 20 मार्च को संसद मार्च के दौरान दीपके जंतर-मंतर पर एक ट्रक पर मौजूद रहे और खुद मार्च का नेतृत्व नहीं कर पाए। बाद में एक इंटरव्यू में उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा था कि वह तीन दिनों से भूख हड़ताल पर थे और उन्हें चक्कर आ गया था।
दीपके के मुताबिक, साथियों की सलाह पर वह ट्रक पर रहकर प्रदर्शनकारियों को दिशा देने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर वह अनशन पर नहीं होते तो खुद जमीन पर उतरकर मार्च में शामिल होते।
फिलहाल रांची में छात्रों का आंदोलन जारी है और प्रदर्शनकारी JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच समेत अपनी प्रमुख मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं।



