दिल्ली धमाके से तीन दिन पहले छोड़ी हाई-प्रोफाइल नौकरी, कौन है डॉ. परवेज? जांच में चौंकाने वाले खुलासे

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- दिल्ली में 10 नवंबर 2025 की शाम लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट की जांच अब तेजी से आगे बढ़ रही है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए डॉ. परवेज अंसारी, उनकी बहन डॉ. शाहीन और उनके सहयोगियों से जुड़े कई नए खुलासे सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इंटीग्रल विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत डॉ. परवेज ने धमाके से ठीक तीन दिन पहले अपनी लगभग 1.75 लाख रुपये महीने की नौकरी छोड़ दी थी।

बिना नोटिस छोड़ी नौकरी, धमाके से पहले बढ़ी थी गतिविधियां

सूत्रों के अनुसार, डॉ. परवेज ने 7 नवंबर को अचानक ई-मेल के जरिए अपना इस्तीफा भेजा था। विश्वविद्यालय प्रशासन को न तो कोई पूर्व सूचना दी गई और न ही कारण बताया गया।
जांच में सामने आया है कि इस्तीफा देने से पहले वह अपनी बहन शाहीन के साथ कथित तौर पर जैश से जुड़े लोगों से मुलाकात कर चुका था। दिल्ली और कानपुर में कई बैठकें भी हुई थीं, जिनमें कानपुर के डॉ. आरिफ मीर, हापुड़ के डॉ. फारुक अहमद और फरीदाबाद के डॉ. मुजम्मिल भी शामिल बताए जा रहे हैं।

जांच टीम के अनुसार, परवेज की एक बैठक उस युवक से भी हुई थी, जिस पर कार में विस्फोटक लगाने का आरोप है, जिसे पहचान उमर के रूप में की गई है।

घर से मिले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बने अहम सुराग

खुफिया एजेंसियों ने परवेज के आवास से कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बरामद किए हैं। शुरुआती विश्लेषण में इनमें से कुछ महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिलने की बात कही जा रही है, जो जांच की कड़ियां जोड़ने में मददगार साबित हो सकते हैं।

बहन शाहीन की भूमिका पर भी जांच तेज

एजेंसियों के अनुसार, डॉ. शाहीन ने ही परवेज को कट्टर विचारधारा की ओर धकेला था। वर्ष 2016 से 2018 के बीच वह यूएई में काम कर रही थीं, उसी दौरान परवेज भी वहां गया था। बताया जा रहा है कि इसी दौरान उसकी मुलाकात कुछ संदिग्ध व्यक्तियों से कराई गई थी।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी जताई चिंता

इंटीग्रल विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद हारिस सिद्दीकी का कहना है कि वर्ष 2022 में प्रमोशन मिलने के बाद से परवेज के व्यवहार में काफी बदलाव दिखाई देने लगा था।
उनके मुताबिक,

  • परवेज छात्रों को पढ़ाने में कम रुचि लेता था

  • अलग तरह की किताबें पढ़ता था

  • कई बार छात्रों ने शिकायत की कि उनकी बातचीत सामान्य नहीं लगती

हालांकि उस समय इन बातों को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया गया।

जांच एजेंसियों का फोकस

एजेंसियां अब बरामद इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और मीटिंग्स के डिजिटल ट्रेल को जोड़कर पूरे मॉड्यूल की संरचना समझने की कोशिश कर रही हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस केस से जुड़े और भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

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