न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- केंद्र सरकार द्वारा MGNREGA (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) का नाम बदलकर विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025 किए जाने के बाद सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया है। अब कांग्रेस शासित कर्नाटक सरकार ने इस कदम को संवैधानिक और कानूनी रूप से चुनौती देने का ऐलान किया है।
कर्नाटक सरकार का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ कोर्ट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे “जनता की अदालत” तक ले जाया जाएगा।
कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खड़गे ने गुरुवार (15 जनवरी) को कहा कि राज्य सरकार मनरेगा को हटाकर नया कानून लागू करने के फैसले को संविधान और कानून दोनों के तहत चुनौती देगी। उन्होंने बताया कि 22 जनवरी से राज्य विधानसभा का संयुक्त सत्र बुलाया गया है, जिसमें VB-G RAM G Act, 2025 पर विशेष चर्चा की जाएगी।
“ग्रामीण भारत के साथ बड़ा अन्याय”
प्रियंक खड़गे ने कहा,
“मनरेगा को खत्म करना ग्रामीण भारत के साथ गंभीर अन्याय है। इसीलिए हमने दो दिन का विशेष सत्र बुलाया है। हम जनता को यह समझाना चाहते हैं कि मनरेगा और नए कानून में क्या अंतर है और इसका सामाजिक व आर्थिक असर क्या पड़ेगा। यह लड़ाई संविधान, कानून और जनता—तीनों स्तरों पर लड़ी जाएगी।”
केंद्र सरकार पर कांग्रेस का हमला
इससे पहले कर्नाटक सरकार के वरिष्ठ मंत्री एच.के. पाटिल ने केंद्र सरकार के फैसले को तानाशाही और क्रूर करार दिया था। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण मज़दूरों को काम का अधिकार दिया था, जिसे अब छीन लिया गया है।
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पाटिल के मुताबिक, “मनरेगा ग्रामीण और कृषि मज़दूरों के लिए जीवनरेखा थी, जिसे खत्म करना असंवेदनशील फैसला है।”
देशभर में ‘मनरेगा बचाओ’ आंदोलन
मनरेगा को हटाने के विरोध में कांग्रेस ने ‘मनरेगा बचाओ’ नाम से तीन चरणों वाला राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने का एलान किया है। नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर रोजगार गारंटी योजना को कमजोर करने का आरोप लगाया। वेणुगोपाल ने बताया कि कांग्रेस कार्यसमिति ने “मनरेगा बचाओ संग्राम” अभियान को मंजूरी दी है।
आंदोलन का पूरा रोडमैप
पहला चरण:
- 8 जनवरी: प्रदेश कांग्रेस कार्यालयों में तैयारी बैठक
- 10 जनवरी: जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस
- 11 जनवरी: जिला मुख्यालयों पर महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्तियों के पास एक दिन का उपवास
दूसरा चरण (12–30 जनवरी):
- ग्राम पंचायत स्तर पर चौपाल
- कांग्रेस अध्यक्ष का पत्र ग्रामीणों तक पहुंचाया जाएगा
- विधानसभा क्षेत्रों में नुक्कड़ सभाएं और पंपलेट वितरण
तीसरा चरण:
- 30 जनवरी (शहीद दिवस): वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरना
- 31 जनवरी–6 फरवरी: जिला स्तर पर डीसी/डीएम कार्यालयों का घेराव
- 7–15 फरवरी: विधानसभा भवनों का राज्य स्तरीय घेराव
- 16–25 फरवरी: देशभर में चार क्षेत्रीय AICC रैलियां
मनरेगा पर टकराव तेज
कांग्रेस का कहना है कि यह लड़ाई किसी एक योजना की नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के अधिकारों और रोजगार की सुरक्षा की है। वहीं केंद्र और कांग्रेस शासित राज्यों के बीच मनरेगा को लेकर टकराव लगातार तेज होता जा रहा है।



