इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 69 हजार शिक्षक भर्ती में EWS आरक्षण नहीं होगा लागू

प्रयागराज/सर्वोदय:- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश की चर्चित 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस भर्ती प्रक्रिया में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को आरक्षण नहीं दिया जाएगा, भले ही भर्ती शुरू होते समय राज्य में यह नीति लागू हो चुकी थी।

न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और सभी 69,000 पदों पर नियुक्ति दी जा चुकी है। चयनित अभ्यर्थी वर्षों से सेवा में हैं और उनके चयन को अब तक किसी न्यायिक चुनौती का सामना नहीं करना पड़ा है। ऐसे में नियुक्त अभ्यर्थियों को हटाकर EWS श्रेणी के तहत नई सूची तैयार करना व्यावहारिक और न्यायसंगत नहीं होगा।

उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2018-19 में 69,000 सहायक अध्यापक पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। इसी अवधि में राज्य सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10% आरक्षण लागू करने का निर्णय लिया था, जो केंद्र सरकार की नीति के अनुरूप था।

EWS अभ्यर्थियों की ओर से यह याचिका दायर की गई थी कि जब सरकार ने भर्ती के समय EWS आरक्षण लागू किया था, तो उसे इस प्रक्रिया में भी शामिल किया जाना चाहिए था। लेकिन वास्तविकता में इस भर्ती में EWS आरक्षण का प्रावधान नहीं किया गया।

कोर्ट ने माना कि सरकार को चाहिए था कि वह EWS आरक्षण को इस भर्ती प्रक्रिया में लागू करती। लेकिन वर्तमान स्थिति में चयन सूची में फेरबदल करना लाखों लोगों के अधिकारों को प्रभावित करेगा और इससे न्यायिक अस्थिरता उत्पन्न हो सकती है।

इस फैसले से उन हज़ारों EWS उम्मीदवारों को झटका लगा है, जिन्होंने उम्मीद की थी कि उन्हें आरक्षण का लाभ मिलेगा। वहीं, वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि उनकी नियुक्ति अब सुरक्षित मानी जाएगी।

हालांकि, कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि आने वाली भर्तियों में राज्य सरकार को EWS आरक्षण को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू करना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद उत्पन्न न हों।

 

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