न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:-करीब दो साल बाद जेल से बाहर आए समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान अपने पुराने आक्रामक तेवरों में लौट आए हैं। एक साक्षात्कार में उन्होंने मुलायम सिंह यादव से अपने रिश्तों को याद करते हुए भावुक बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा, “मुलायम मेरे आशिक और माशूक दोनों थे। वो नंगे पैर मेरे पीछे दौड़े थे।”
आजम खान ने कहा, “अगर फिर जेल जाना पड़ा तो जाऊंगा, लेकिन मरूंगा तो जनाजा धूमधाम से निकलेगा।” उन्होंने खुद को फौलाद बताया और कहा कि जो हथौड़ा चलाया जाता है, वो फौलाद पर ही चलता है। वहीं मुलायम सिंह यादव के साथ अपने रिश्ते को लेकर बेहद भावुक भी हुए।
“5 साल जेल में रहा, लेकिन कोई मलाल नहीं”
आजम खान ने बताया कि उन्हें 5 साल तक जेल में रहना पड़ा, जहां उन्हें तनहाई में रखा गया। उन्होंने कहा,“वो तनहाई जेल थी, दुनिया से मेरा हर संपर्क कट गया था। गर्मी में भीषण गर्मी और सर्दियों में कड़ाके की ठंड थी। लेकिन मुझे कोई मलाल नहीं है, बस शर्म आती है।”
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“जिंदगी रही तो लौटूंगा, मर गया तो जनाजा धूमधाम से निकलेगा”
उन्होंने साफ कहा कि अगर फिर से जेल भेजा गया, तो वे तैयार हैं।“मैं फिर भी जाऊंगा। अगर जिंदगी रही तो लौटूंगा और अगर मर गया तो हमारा जनाजा धूमधाम से निकलेगा।”
“मुलायम सिंह मेरे आशिक और माशूक थे”
आजम खान ने मुलायम सिंह यादव के साथ अपने पुराने रिश्ते को याद करते हुए कहा:“मैं निकल पड़ा था, तो मुलायम नंगे पैर मेरे पीछे दौड़े थे। मैंने कहा, इस्तीफा दे दूंगा। उन्होंने कहा, ऐसा मत करो, मैं सबसे बात करूंगा। वो मेरे आशिक और माशूक थे, जो अब नहीं हैं।”
“कोई मेरे खिलाफ एक लफ्ज नहीं बोल सकता था मुलायम के सामने”
उन्होंने दावा किया कि जब तक मुलायम सिंह यादव जीवित थे, कोई हिम्मत नहीं करता था उनके खिलाफ एक शब्द कहने की।“अगर मैं कैबिनेट मीटिंग में 4 घंटे लेट आता था, तो मीटिंग मुझे आने तक नहीं होती थी। कोई और मेरे लिए ऐसा करेगा क्या?”
“मुलायम जैसे लोग सदी में एक बार पैदा होते हैं”
आजम खान ने कहा,“मैंने उनसे सिर्फ एक यूनिवर्सिटी मांगी थी। उन्होंने कभी रोका नहीं। मुलायम जैसे लोग अब पैदा नहीं होते। सैकड़ों सालों में एक ही बार ऐसे इंसान जन्म लेते हैं।”
“काश मुलायम मुसलमान होते!”
उन्होंने मुलायम सिंह यादव से जुड़ा एक निजी किस्सा साझा करते हुए कहा:“मैंने कहा था कि कितना अच्छा होता अगर आप मुसलमान होते। तो उन्होंने हंसकर कहा – मैं मुसलमान ही तो हूं।” “मैंने कहा – नहीं, आप एक बेहतरीन हिंदू हैं और इससे बेहतर हमारे लिए कुछ भी नहीं है।”



