नई दिल्ली/सर्वोदय न्यूज़:- कोविड-19 टीकों को लेकर पिछले कुछ समय से उठते सवालों पर अब विराम लगता दिख रहा है। केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए कहा कि कोरोना वैक्सीन और अचानक कार्डिएक अरेस्ट से होने वाली मौतों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया है। यह निष्कर्ष इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR), ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (AIIMS) और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) द्वारा किए गए विस्तृत अध्ययन के आधार पर निकाला गया है।
कोरोना महामारी के बाद देश-विदेश में ऐसे वीडियो और घटनाएं सामने आईं जिनमें लोग अचानक चलते-फिरते, नाचते-गाते गिरकर दम तोड़ते नजर आए। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो वायरल हुए और लोगों ने आशंका जताई कि कहीं कोविड टीके तो इसकी वजह नहीं हैं? इन दावों ने लोगों के मन में डर और भ्रम पैदा कर दिया।
स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि:“भारत में उपयोग में लाई गई कोविड-19 वैक्सीन्स पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी हैं। गंभीर दुष्प्रभाव के मामले बेहद दुर्लभ हैं। वैक्सीन और अचानक मौतों के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।”
मंत्रालय ने यह भी बताया कि अचानक हृदयगति रुकने (सडन कार्डिएक अरेस्ट) की घटनाओं के पीछे जेनेटिक कारण, जीवनशैली की समस्याएं, पूर्व मौजूद बीमारियां और कोविड संक्रमण के बाद की जटिलताएं प्रमुख कारक हो सकती हैं।
क्या कहती हैं ICMR और AIIMS की स्टडीज़?
पहला अध्ययन: केस-कंट्रोल स्टडी (अक्टूबर 2021 – मार्च 2023)
- यह अध्ययन ICMR और NCDC द्वारा देश के 19 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के 47 अस्पतालों में किया गया।
- अध्ययन में 18 से 45 वर्ष तक के स्वस्थ दिखने वाले युवाओं की मौतों का विश्लेषण किया गया।
- निष्कर्ष: टीकाकरण के बाद अचानक मृत्यु का खतरा नहीं बढ़ता।
दूसरा अध्ययन: AIIMS–ICMR का रियल टाइम डेटा विश्लेषण
- इस अध्ययन में युवाओं की अचानक मौत के कारणों का गहराई से मूल्यांकन किया जा रहा है।
- प्रारंभिक परिणामों में स्पष्ट हुआ है कि हार्ट अटैक (मायोकार्डियल इन्फार्क्शन) जैसी पारंपरिक हृदय संबंधी समस्याएं अब भी प्रमुख कारण हैं।
- महत्वपूर्ण बात यह है कि पिछले वर्षों की तुलना में कोई नया पैटर्न या असामान्यता नहीं देखी गई।
मंत्रालय और वैज्ञानिकों ने स्पष्ट रूप से कहा कि कोरोना वैक्सीन को अचानक मौतों से जोड़ना “विज्ञान विरोधी और अफवाह फैलाने वाला” कदम है। इस तरह के दावों से वैक्सीनेशन की प्रक्रिया में लोगों की भागीदारी घट सकती है, जो कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।
“वैज्ञानिक तथ्यों के बिना लगाए गए आरोप न केवल झूठे हैं, बल्कि समाज में भ्रम फैलाने वाले भी हैं। कोरोना वैक्सीन को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।” — स्वास्थ्य मंत्रालय
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