लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए समाजवादी पार्टी ने अपनी राजनीतिक रणनीति तेज कर दी है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी PDA समीकरण को मजबूत करने के लिए विभिन्न दलों के प्रभावशाली नेताओं को पार्टी से जोड़ रहे हैं। इसी क्रम में मंगलवार को लखनऊ में भाजपा के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप और उनकी बेटी कीर्ति कश्यप ने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम को बरेली और रुहेलखंड क्षेत्र में सपा की राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
बताया जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान टिकट नहीं मिलने से धर्मेंद्र कश्यप भाजपा से नाराज थे। हालांकि, उनके सपा में शामिल होने के पीछे की वजहों को लेकर यह जानकारी सामने आई है। पार्टी में शामिल होने के बाद अखिलेश यादव ने दावा किया कि धर्मेंद्र कश्यप और कीर्ति कश्यप के आने से बरेली, रुहेलखंड और प्रदेश में समाजवादी पार्टी की ताकत बढ़ेगी। इस दौरान उन्होंने कीर्ति कश्यप को आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट देने का भी वादा किया।
भाजपा के मजबूत वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति
समाजवादी पार्टी आगामी चुनाव में अपना जनाधार बढ़ाने के लिए गैर-यादव पिछड़ी जातियों और गैर-जाटव दलित समुदायों के बीच अपनी पैठ मजबूत करने पर जोर दे रही है। राजनीतिक रूप से इन समुदायों को उत्तर प्रदेश में भाजपा के महत्वपूर्ण समर्थक वर्गों में गिना जाता है। ऐसे में इन वर्गों से जुड़े नेताओं को पार्टी में शामिल कराना सपा की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
हाल के दिनों में कई नेताओं ने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है। सोमवार को पूर्व आईएएस अधिकारी राम बहादुर पासी भी सपा में शामिल हुए। वह पहले बहुजन समाज पार्टी से जुड़े थे और वर्ष 2017 में मोहनलालगंज विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। उस चुनाव में उन्हें सपा प्रत्याशी से कड़ी चुनौती मिली थी। बाद में उन्होंने बसपा छोड़कर वर्ष 2022 में भाजपा की सदस्यता ले ली थी।
दारा सिंह प्रजापति के आने से पश्चिमी यूपी में सपा को उम्मीद
राम बहादुर पासी के साथ बसपा के पूर्व नेता दारा सिंह प्रजापति ने भी समाजवादी पार्टी का हाथ थाम लिया। दारा सिंह ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर सीट से बसपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था। उन्हें करीब 1.43 लाख वोट मिले थे। इस चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार संजीव बालियान को हार का सामना करना पड़ा था।
दारा सिंह प्रजापति राष्ट्रीय प्रजापति महासभा से भी जुड़े हैं, जो प्रजापति समुदाय के हितों और कल्याण के लिए काम करती है। उनके सपा में आने से पार्टी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपने सामाजिक समीकरण मजबूत होने की उम्मीद है। अखिलेश यादव ने कहा कि राम बहादुर पासी और दारा सिंह प्रजापति के जुड़ने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा के सामने चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
कुशाग्र सागर ने भी थामा सपा का दामन
भाजपा के पूर्व विधायक कुशाग्र सागर भी सोमवार को समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। वह सैंथवार समुदाय से आते हैं। उनके पार्टी में आने को भी आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सपा की सामाजिक और राजनीतिक आधार को विस्तार देने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
दरअसल, अखिलेश यादव की रणनीति केवल पारंपरिक सपा समर्थक वर्गों तक सीमित नहीं है। पार्टी गैर-प्रमुख ओबीसी जातियों और अनुसूचित जातियों के प्रभावशाली चेहरों को साथ जोड़कर उन विधानसभा क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है, जहां पिछले चुनावों में उसे कड़ी चुनौती मिली थी।
आने वाले समय में समाजवादी पार्टी में दूसरे दलों के कुछ और नेताओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यूपी की राजनीति में दल-बदल और जातीय समीकरणों को लेकर गतिविधियां तेज हो सकती हैं। हालांकि, इन नए राजनीतिक समीकरणों का चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।


