कर्नाटक में विधान परिषद सदस्य (MLC) के चुनाव परिणाम कांग्रेस के लिए निराशाजनक रहे। राज्य में सत्ता में होने के बावजूद पार्टी चारों सीटों पर जीत दर्ज नहीं कर सकी। इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीन सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि जनता दल सेक्युलर (JDS) को एक सीट मिली। खास बात यह है कि चुनाव बैलेट पेपर के जरिए कराए गए थे। नतीजों के बाद विपक्षी दलों ने कांग्रेस की चुनाव प्रक्रिया और EVM को लेकर उठाए जाने वाले सवालों पर निशाना साधा है।
कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद पार्टी को चारों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। भाजपा और जेडीएस ने मिलकर चुनाव लड़ा था। दोनों दलों के उम्मीदवारों ने अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में कांग्रेस प्रत्याशियों को शिकस्त दी। इन नतीजों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
भाजपा ने तीन सीटों पर दर्ज की जीत
कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में भाजपा ने उत्तर-पूर्व शिक्षक, दक्षिण-पूर्व स्नातक और पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की। वहीं, बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट जेडीएस के खाते में गई।
उत्तर-पूर्व शिक्षक सीट पर भाजपा के मौजूदा एमएलसी शशिल जी नामोशी ने कांग्रेस उम्मीदवार शरणप्पा मट्टूर को हराया। नामोशी को 15,596 वोट मिले, जबकि मट्टूर को 12,299 मत प्राप्त हुए। इस तरह भाजपा उम्मीदवार ने 3,297 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के केएम सुरेश ने कांग्रेस प्रत्याशी शशि हुलिकुंते मठ को पराजित किया। वहीं, पश्चिम स्नातक सीट पर भाजपा के एसवी संकनूर ने कांग्रेस उम्मीदवार मोहन लिंबिकई को 9,323 वोटों के अंतर से हराया।
बेंगलुरु शिक्षक सीट पर जेडीएस की जीत
बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जेडीएस के एपी रंगनाथ ने कांग्रेस उम्मीदवार पुट्टन्ना को हराकर जीत हासिल की। रंगनाथ को 10,810 वोट मिले, जबकि पुट्टन्ना को 9,902 मत प्राप्त हुए।
इस निर्वाचन क्षेत्र में कुल 27,405 मतदाता पंजीकृत थे, जिनमें से 22,468 लोगों ने मतदान किया। मतदान प्रतिशत 81.98 रहा। मतगणना में 21,056 वोट वैध पाए गए, जबकि 1,857 मत अवैध घोषित किए गए।
इस सीट पर मिली जीत के बाद भाजपा और जेडीएस के नेताओं ने कांग्रेस पर हमला बोला। दोनों दलों ने चुनाव परिणामों को कांग्रेस के राजनीतिक दावों के संदर्भ में उठाया।
बैलेट पेपर के नतीजों पर राहुल गांधी को घेरा
कांग्रेस देश में कई बार बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग उठा चुकी है। पार्टी EVM के जरिए मतदान और चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाती रही है। ऐसे में बैलेट पेपर से हुए कर्नाटक MLC चुनाव में चारों सीटों पर हार के बाद विपक्षी नेताओं को कांग्रेस पर निशाना साधने का मौका मिल गया।
जेडीएस नेता निखिल कुमारस्वामी ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि इस बार EVM को लेकर आरोप लगाने का मौका नहीं मिलेगा, क्योंकि चुनाव बैलेट पेपर से हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद शिक्षकों ने भाजपा और जेडीएस के उम्मीदवारों को समर्थन दिया।
निखिल कुमारस्वामी ने एपी रंगनाथ की जीत पर भाजपा और जेडीएस के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को बधाई भी दी। उनके बयान के बाद कर्नाटक की राजनीति में चुनाव परिणामों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
कांग्रेस के लिए क्यों अहम हैं ये नतीजे?
कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है, ऐसे में विधान परिषद की चारों सीटों पर हार पार्टी के लिए राजनीतिक झटका मानी जा रही है। खासकर तब, जब चुनाव बैलेट पेपर के जरिए कराए गए और भाजपा-जेडीएस गठबंधन तीन शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में से अलग-अलग सीटों पर सफल रहा।
हालांकि, विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों को पूरे राज्य के जनमत का सीधा संकेत नहीं माना जा सकता। इन सीटों पर मतदाताओं का दायरा सीमित और विशिष्ट होता है। फिर भी, परिणामों ने कांग्रेस को घेरने के लिए विपक्ष को नया मुद्दा दे दिया है।
असम में भी कांग्रेस को मिली थी हार
इससे पहले असम के सिलचर नगर निगम चुनाव में भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। उस समय मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था कि पार्टी बैलेट पेपर से होने वाले चुनावों में भी जीत हासिल नहीं कर पा रही है।
अब कर्नाटक MLC चुनाव के नतीजों के बाद एक बार फिर बैलेट पेपर और EVM को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। भाजपा और जेडीएस इन परिणामों को कांग्रेस के दावों पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस के लिए इन सीटों पर मिली हार चुनावी रणनीति और संगठन के प्रदर्शन की समीक्षा का विषय बन सकती है।


