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राज्यसभा की चर्चा में पहले था निशांत का नाम, फिर कैसे तय हुआ नीतीश कुमार का जाना? जानिए पूरी कहानी

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- बिहार की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से चल रही अटकलों पर अब विराम लग गया है। करीब दो दशक तक राज्य की सत्ता संभालने वाले मुख्यमंत्री Nitish Kumar अब सक्रिय राजनीति के इस अध्याय को समेटते हुए राज्यसभा की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। पहली नजर में यह फैसला अचानक लग सकता है, लेकिन राजनीतिक गलियारों से मिली जानकारी बताती है कि इसकी तैयारी पिछले एक महीने से चुपचाप चल रही थी।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब मुख्यमंत्री के बेटे Nishant Kumar को राजनीति में सक्रिय करने की चर्चा तेज हुई। अब तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहने वाले निशांत हाल के दिनों में जेडीयू के कई कार्यक्रमों में दिखाई दिए थे। पार्टी के अंदर एक वर्ग उन्हें नीतीश कुमार के बाद संगठन को संभालने वाले चेहरे के रूप में देख रहा था।

शुरुआती योजना यह बताई जा रही थी कि निशांत को राज्यसभा भेजकर उन्हें राष्ट्रीय राजनीति का अनुभव दिलाया जाए। लेकिन इसी दौरान बीजेपी के रणनीतिकारों, खासकर केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah, ने इस स्थिति को अलग नजरिए से देखा। उनका मानना था कि नीतीश कुमार की सेहत को देखते हुए उन्हें सम्मानजनक तरीके से सक्रिय राजनीति से विदाई देने का यह सही समय हो सकता है।

दरअसल, अक्टूबर 2025 में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी को 89 और जेडीयू को 85 सीटें मिली थीं। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि बीजेपी नेतृत्व को लगा कि मौजूदा समय में यह बदलाव कराना ज्यादा आसान होगा। उन्हें आशंका थी कि अगर ज्यादा इंतजार किया गया तो जेडीयू संगठनात्मक रूप से फिर मजबूत हो सकती है, जिससे सत्ता में बदलाव करना कठिन हो जाएगा।

इस रणनीति को आगे बढ़ाने के लिए अमित शाह ने जेडीयू के कई वरिष्ठ नेताओं से लगातार संपर्क बनाए रखा। इनमें Rajiv Ranjan Singh, Sanjay Jha और Vijay Kumar Chaudhary शामिल थे। बताया जाता है कि विजय कुमार चौधरी ने ही अंततः नीतीश कुमार के सामने राज्यसभा जाने का प्रस्ताव रखा।

फरवरी के अंतिम सप्ताह से इन नेताओं की मुख्यमंत्री के साथ कई दौर की बैठकें हुईं। बीजेपी की ओर से यह तर्क दिया गया कि अगर नीतीश कुमार अभी राज्यसभा नहीं जाते हैं, तो अगला मौका करीब दो साल बाद ही मिल सकता है।

बताया जाता है कि इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी नीतीश कुमार के परिवार को 3 मार्च को मिली। हालांकि तब तक राजनीतिक फैसला लगभग तय हो चुका था। 4 मार्च को जेडीयू के वरिष्ठ मंत्री Bijendra Prasad Yadav ने उनसे मुलाकात कर फैसले पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया, लेकिन तब तक नामांकन की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी थी और नीतीश कुमार दस्तखत कर चुके थे।

समझौते के तहत अब निशांत कुमार दिल्ली की बजाय बिहार की राजनीति में सक्रिय भूमिका से अपना राजनीतिक सफर शुरू करेंगे। वहीं नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना बिहार की राजनीति में एक बड़े दौर के अंत के रूप में देखा जा रहा है। कभी “सुशासन बाबू” के नाम से पहचान बनाने वाले इस नेता ने आखिरकार अपने स्वास्थ्य और बेटे के राजनीतिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री पद को अलविदा कह दिया।

Aaj Ka Rashifal 6 March 2026: धनु को कोर्ट-कचहरी में सफलता, सिंह के लिए धन लाभ के योग, मकर का भाग्य देगा साथ

Aaj Ka Rashifal 6 March 2026 को ग्रहों की स्थिति कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे रही है। इस समय गुरु मिथुन राशि में, केतु सिंह में और चंद्रमा कन्या राशि में हस्त नक्षत्र में स्थित है। चंद्रमा की इस स्थिति के कारण लोगों में जिज्ञासा और खोजी प्रवृत्ति बढ़ेगी। लोग आसपास की घटनाओं और व्यक्तियों के बारे में अधिक जानने की कोशिश करेंगे। कई पुराने मामलों के सुलझने और नई जानकारी सामने आने की संभावना भी बन रही है।

वहीं सूर्य, बुध, मंगल और राहु कुंभ राशि में गोचर कर रहे हैं, जबकि शुक्र और शनि मीन राशि में स्थित हैं। इन ग्रह स्थितियों का असर सभी राशियों के जीवन पर अलग-अलग रूप में दिखाई देगा। आइए जानते हैं आज का राशिफल।

मेष राशि
आज आपको विरोधियों पर बढ़त मिल सकती है। कुछ नई बातें सीखने और अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलेगा। दिन थोड़ा व्यस्त या तनावपूर्ण रह सकता है, लेकिन अंत में लाभकारी रहेगा। प्रेम, संतान और व्यापार के मामले में स्थिति सामान्य रहेगी। हरी वस्तु का दान करना शुभ रहेगा।

वृषभ राशि
विद्यार्थियों के लिए दिन अनुकूल रहेगा। पढ़ाई, लेखन और रिसर्च से जुड़े लोगों को अच्छे अवसर मिल सकते हैं। प्रेम और संतान पक्ष से सहयोग मिलेगा। व्यापार में भी सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। हरी वस्तु अपने पास रखना लाभदायक रहेगा।

मिथुन राशि
घर के वातावरण में थोड़ी असहमति हो सकती है, इसलिए धैर्य बनाए रखें। भूमि, मकान या वाहन से जुड़ी खरीदारी के योग बन सकते हैं। स्वास्थ्य में सुधार होगा। प्रेम जीवन और संतान पक्ष से सहयोग मिलेगा। व्यापार की स्थिति भी अच्छी बनी रहेगी।

कर्क राशि
कारोबार में कुछ नया करने का विचार मन में आ सकता है और प्रयास सफल भी हो सकते हैं। आपके साहस और मेहनत से कामों में प्रगति होगी। रोजगार के अवसरों में वृद्धि संभव है। स्वास्थ्य बेहतर रहेगा। प्रेम और संतान पक्ष सामान्य रहेगा, जबकि व्यापार में लाभ के संकेत हैं।

सिंह राशि
आज धन लाभ के संकेत मिल रहे हैं और परिवार में भी वृद्धि या खुशी का माहौल बन सकता है। हालांकि बोलचाल में संयम रखना जरूरी है और निवेश सोच-समझकर करें। पेट से जुड़ी समस्या परेशान कर सकती है। दांपत्य जीवन में संतुलन बनाए रखें।

कन्या राशि
आज आपके अंदर ऊर्जा और आत्मविश्वास बना रहेगा। सकारात्मक सोच से कई काम पूरे होंगे। आवश्यक चीजें समय पर मिलेंगी। स्वास्थ्य बेहतर रहेगा। प्रेम और संतान का सहयोग मिलेगा। व्यापार में भी सफलता के संकेत हैं और विरोधियों पर आपकी पकड़ मजबूत रहेगी।

तुला राशि
मानसिक तनाव या उदासी महसूस हो सकती है। आंखों से जुड़ी परेशानी या सिरदर्द की शिकायत हो सकती है। खर्च बढ़ने और कर्ज जैसी स्थिति बनने की आशंका है। समय थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन धैर्य रखने से स्थिति संभल जाएगी।

वृश्चिक राशि
आज यात्रा के योग बन सकते हैं। रुका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना है। आय के नए स्रोत भी बन सकते हैं। शुभ समाचार मिल सकता है। स्वास्थ्य, प्रेम जीवन और व्यापार के लिए दिन अच्छा रहेगा।

धनु राशि
कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में सफलता मिलने की संभावना है। व्यापार में भी अच्छी प्रगति होगी और राजनीति से जुड़े लोगों को लाभ मिल सकता है। प्रेम और संतान पक्ष सामान्य रहेगा, जबकि कारोबार में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।

मकर राशि
भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। यात्रा के योग बन सकते हैं और धार्मिक या सामाजिक कार्यों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। प्रेम और संतान पक्ष सामान्य रहेगा, लेकिन व्यापार में लाभ के संकेत हैं।

कुंभ राशि
आज थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है। चोट या छोटी-मोटी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि यह स्थिति ज्यादा समय तक नहीं रहेगी। स्वास्थ्य और पारिवारिक मामलों में सामान्य स्थिति रहेगी, जबकि व्यापार में लाभ के संकेत हैं।

मीन राशि
दिन सुखद बीत सकता है। जीवन में आनंद का अनुभव होगा। हालांकि स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न बरतें। प्रेम और संतान पक्ष अनुकूल रहेगा और व्यापार में भी स्थिति अच्छी बनी रहेगी।

नीतीश कुमार के बाद बिहार का अगला सीएम कौन? भाजपा के सामने खड़े हैं ये 5 बड़े चैलेंज

न्यूज़ डेस्क/ सर्वोदय न्यूज़:– बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है, जिससे यह संकेत मिल रहे हैं कि वह जल्द ही मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं। उनका राज्यसभा कार्यकाल 10 अप्रैल से शुरू होगा। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।

बिहार में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है और अब तक नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही एनडीए सरकार चल रही थी। लेकिन उनके हटने की स्थिति में भाजपा के सामने नए नेता को चुनने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। इस प्रक्रिया में पार्टी को कई अहम सवालों के जवाब भी तलाशने होंगे।

1. नीतीश कुमार जैसा कद वाला नेता ढूंढना मुश्किल

भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि नए मुख्यमंत्री की तुलना सीधे नीतीश कुमार से की जाएगी। जेपी आंदोलन से निकले नीतीश कुमार को करीब पांच दशक का राजनीतिक अनुभव है। उनकी छवि बिहार की राजनीति में अजातशत्रु नेता की रही है। यही वजह है कि विरोधी भी अक्सर उनके प्रति सम्मानजनक रवैया रखते रहे हैं।

2. सामाजिक समीकरणों को संभालना

बिहार की राजनीति सामाजिक समीकरणों पर काफी हद तक टिकी हुई है। नीतीश कुमार ने अति पिछड़ा वर्ग को मजबूत राजनीतिक पहचान दी और यादव राजनीति के मुकाबले एक नया वोट बैंक तैयार किया। ऐसे में भाजपा को नया चेहरा चुनते समय इस सामाजिक संतुलन का खास ध्यान रखना होगा।

3. सभी को साथ लेकर चलने की क्षमता

नीतीश कुमार की एक बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने सरकार चलाते समय सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की कोशिश की। “सबका साथ, सबका विकास” की नीति को उन्होंने व्यवहार में लागू करने की कोशिश की। नया मुख्यमंत्री भी इसी कसौटी पर परखा जाएगा।

4. महिला सुरक्षा और शराबबंदी जैसे मुद्दे

2005 में सत्ता में आने के बाद नीतीश कुमार ने कई बड़े फैसले लिए। महिला सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाए गए और शराबबंदी लागू की गई। इन फैसलों ने बिहार की राजनीति और समाज दोनों पर असर डाला। इसलिए नए मुख्यमंत्री को इन मुद्दों पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

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5. करिश्माई नेतृत्व की जरूरत

किसी भी सरकार को मजबूत बनाने के लिए करिश्माई नेतृत्व जरूरी माना जाता है। नीतीश कुमार लंबे समय तक इसी करिश्मे के सहारे सत्ता में बने रहे। अब भाजपा के सामने चुनौती यह है कि क्या वह बिहार को ऐसा ही प्रभावशाली और लोकप्रिय नेता दे पाएगी।

फिलहाल बिहार की राजनीति में कई नामों की चर्चा जरूर है, लेकिन अभी तक किसी एक चेहरे पर सहमति नहीं बनी है। आने वाले दिनों में भाजपा और जेडीयू के बीच बैठकों के बाद ही यह तय होगा कि नीतीश कुमार के बाद बिहार की कमान किसे सौंपी जाएगी।

अमेरिका से तनाव के बीच ईरान का बड़ा ऐलान,भारत के लिए आई खुशखबरी, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बड़ा ऐलान

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने एक बड़ा ऐलान किया है, जो भारत के लिए राहत की खबर माना जा रहा है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने घोषणा की है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब अमेरिका, इजरायल, यूरोप और उनके पश्चिमी सहयोगियों के जहाजों के लिए पूरी तरह बंद रहेगा।

यह घोषणा गुरुवार को ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी (IRIB) के माध्यम से की गई। IRGC ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर अमेरिका, इजरायल या उनके समर्थक देशों का कोई जहाज इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने की कोशिश करता है तो उस पर हमला किया जाएगा और उसे नष्ट कर दिया जाएगा।

हालांकि इस घोषणा में भारत का नाम उन देशों में शामिल नहीं है जिन पर यह प्रतिबंध लागू होगा। इससे संकेत मिल रहा है कि भारत के लिए इस मार्ग से तेल आपूर्ति जारी रह सकती है।

युद्ध के बीच ईरान का दावा

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून और संबंधित प्रस्तावों के अनुसार युद्धकाल में ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य में आवागमन को नियंत्रित करने का अधिकार है। IRGC ने कहा कि युद्ध की स्थिति में इस जलमार्ग पर नियंत्रण रखना ईरान का अधिकार है।

यह घोषणा उस समय आई है जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किए जाने के बाद क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है। इसके कारण वैश्विक तेल बाजार में भी उथल-पुथल देखने को मिल रही है और कीमतों में तेज उछाल आया है।

पहले सिर्फ चीन को दी थी अनुमति

इससे पहले ईरान ने बुधवार को घोषणा की थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य से केवल चीनी ध्वज वाले जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जाएगी। ईरानी अधिकारियों ने इसे युद्ध के दौरान चीन के समर्थन के प्रति आभार बताया था।

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दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक समुद्री तेल परिवहन का करीब 20 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता है। फारस की खाड़ी के देशों के लिए यह प्रमुख निर्यात मार्ग है, जिसमें दुबई का जेबेल अली बंदरगाह भी शामिल है।

समुद्र में खड़े हैं सैकड़ों जहाज

संघर्ष शुरू होने के बाद से इस जलमार्ग पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। समुद्री ट्रैकिंग वेबसाइटों के अनुसार कुवैत के पास और दुबई के तट से दूर सैकड़ों तेल टैंकर और अन्य जहाज लंगर डाले खड़े हैं। वहीं ईरान का बेड़ा भी बंदर अब्बास बंदरगाह के पास तैनात है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नाकाबंदी लंबे समय तक जारी रहती है तो खाड़ी क्षेत्र के व्यापार और वैश्विक तेल-गैस आपूर्ति पर भारी दबाव पड़ सकता है।

अग्निवीर भर्ती 2026: भारतीय सेना में 25,000+ पदों पर निकली बंपर वैकेंसी, जानें आवेदन से लेकर सैलरी तक पूरी डिटेल

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- अगर आप भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने का सपना देखते हैं, तो आपके लिए बड़ी खुशखबरी है। Indian Army ने साल 2026 के लिए अग्निवीर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती के जरिए जनरल ड्यूटी (GD), ट्रेड्समैन, क्लर्क और टेक्निकल समेत कई पदों पर 25,000 से अधिक (संभावित) युवाओं की भर्ती की जाएगी।

यह मौका उन युवाओं के लिए खास है जो 8वीं, 10वीं या 12वीं पास हैं और सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना चाहते हैं।

आवेदन की अहम तारीखें

अग्निवीर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

  • आवेदन शुरू: 13 फरवरी 2026
  • आवेदन की अंतिम तिथि: 1 अप्रैल 2026
  • ऑनलाइन कॉमन एंट्रेंस एग्जाम (CEE): 1 जून से 15 जून 2026

सभी उम्मीदवारों को आवेदन करते समय 250 रुपये परीक्षा शुल्क देना होगा, जिसे ऑनलाइन माध्यम से जमा किया जा सकता है।

शैक्षणिक योग्यता

अलग-अलग पदों के लिए अलग-अलग योग्यता निर्धारित की गई है।

जनरल ड्यूटी (GD)

  • 10वीं पास
  • कुल 45% अंक और हर विषय में कम से कम 33% अंक

ट्रेड्समैन

  • 8वीं या 10वीं पास

क्लर्क/टेक्निकल

  • 12वीं पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं

अगर किसी उम्मीदवार ने हाल ही में 10वीं की परीक्षा दी है और रिजल्ट का इंतजार कर रहा है, तो वह भी आवेदन कर सकता है। हालांकि भर्ती रैली के दौरान मूल मार्कशीट दिखानी होगी।

आयु सीमा

अग्निवीर बनने के लिए उम्मीदवार की उम्र 17.5 वर्ष से 21 वर्ष के बीच होनी चाहिए। जन्म तिथि: 1 जुलाई 2005 से 1 जुलाई 2009 के बीच | ड्यूटी के दौरान शहीद हुए रक्षा कर्मियों की विधवाओं के लिए अधिकतम उम्र सीमा में 30 वर्ष तक छूट का प्रावधान है।

शारीरिक मानक (Physical Standards)

सेना में भर्ती के लिए शारीरिक फिटनेस बेहद जरूरी है।

  • न्यूनतम लंबाई: 162 सेमी
  • सीने का फुलाव: कम से कम 5 सेमी
  • वजन: उम्र और लंबाई के अनुसार (BMI के आधार पर)

कुछ वर्गों जैसे गोरखा, पूर्वोत्तर राज्यों और आदिवासी उम्मीदवारों को लंबाई में 4 सेमी की छूट दी जाती है।

फिजिकल फिटनेस टेस्ट

भर्ती रैली के दौरान उम्मीदवारों को फिजिकल फिटनेस टेस्ट देना होगा।

  • 1.6 किमी दौड़: 7 मिनट 45 सेकंड में पूरी करनी होगी
  • 10 फीट लंबी कूद
  • 3 फीट ऊंची कूद

चयन प्रक्रिया

अग्निवीर भर्ती की प्रक्रिया दो चरणों में होगी।

Phase 1:

  • ऑनलाइन कंप्यूटर बेस्ड परीक्षा (CEE)

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Phase 2:

  • फिजिकल फिटनेस टेस्ट
  • शारीरिक माप
  • मेडिकल टेस्ट
  • डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन

कितनी मिलेगी सैलरी

अग्निवीर योजना के तहत चयनित युवाओं को चार साल तक सेवा का मौका मिलेगा।

  • पहला साल: ₹30,000 प्रति माह
  • दूसरा साल: ₹33,000 प्रति माह
  • तीसरा साल: ₹36,500 प्रति माह
  • चौथा साल: ₹40,000 प्रति माह

इसके अलावा रिस्क और हार्डशिप अलाउंस, राशन, ड्रेस और ट्रैवल अलाउंस भी दिए जाएंगे।

आवेदन कैसे करें

अभ्यर्थी भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

  1. Indian Army की आधिकारिक वेबसाइट joinindianarmy.nic.in पर जाएं।
  2. नया यूजर होने पर पहले रजिस्ट्रेशन करें।
  3. लॉगिन करके आवेदन फॉर्म भरें।
  4. फोटो, सिग्नेचर और जरूरी दस्तावेज अपलोड करें।
  5. 250 रुपये फीस जमा करके फॉर्म सबमिट करें।

भविष्य के लिए आवेदन फॉर्म का प्रिंटआउट जरूर सुरक्षित रखें।

युद्धपोत डुबाने का ईरान ने ले लिया बदला! अमेरिकी तेल टैंकर पर मिसाइल हमला, फारस की खाड़ी में लगी आग

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- श्रीलंका के तट के पास ईरानी युद्धपोत डुबोए जाने के बाद Iran और United States के बीच तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने इस घटना का बदला लेने का दावा करते हुए फारस की खाड़ी में एक अमेरिकी तेल टैंकर पर मिसाइल हमला किया है।

ईरान के सरकारी टीवी के मुताबिक इस हमले के बाद टैंकर में भीषण आग लग गई। बताया जा रहा है कि यह हमला ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जहाजों पर ईरान की हालिया सबसे बड़ी कार्रवाई में से एक है।

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का दावा

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, Islamic Revolutionary Guard Corps ने सरकारी टेलीविजन पर जारी बयान में कहा कि फारस की खाड़ी के उत्तरी हिस्से में एक अमेरिकी तेल टैंकर मिसाइल से टकराया, जिसके बाद उसमें आग लग गई।

हालांकि इस घटना को लेकर अब तक United States की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

युद्धपोत डुबोने के बाद बढ़ा तनाव

दरअसल बुधवार को United States ने हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत को निशाना बनाया था। बताया गया था कि यह पोत भारत से लौट रहा था और श्रीलंका के तट के पास इसे डुबो दिया गया।

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इस हमले में कई ईरानी नागरिकों के मारे जाने की खबर सामने आई थी, जिसके बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ी सख्ती

रिपोर्ट्स के अनुसार Iran ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz पर सख्त निगरानी बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि फिलहाल वहां से केवल सीमित जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जा रही है।

इससे पहले भी फारस की खाड़ी क्षेत्र में कई तेल टैंकरों पर हमले की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

‘भारत के मेहमान’ पोत पर हमले से भड़का ईरान, अमेरिका को दी कड़ी चेतावनी

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक ईरानी युद्धपोत पर अमेरिकी हमले के बाद तनाव और बढ़ गया है। इस हमले को लेकर Iran ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए United States को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। ईरान का दावा है कि जिस पोत पर हमला हुआ वह हाल ही में India द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास में शामिल हुआ था और भारतीय नौसेना का ‘अतिथि’ था।

ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने कहा कि करीब 130 नाविकों को लेकर जा रहे युद्धपोत IRIS Dena पर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बिना किसी चेतावनी के हमला किया गया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने जो कदम उठाया है, उसे लेकर उसे भारी पछतावा होगा।

पनडुब्बी से किया गया हमला

इस बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने वॉशिंगटन में दावा किया कि एक अमेरिकी पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबो दिया। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली घटना है जब किसी दुश्मन युद्धपोत को टॉरपीडो से डुबोया गया है।

अमेरिकी रक्षा मंत्री के मुताबिक डुबोए गए जहाज का नाम पूर्व ईरानी सैन्य कमांडर Qasem Soleimani के नाम पर रखा गया था, जिन्हें 2020 में अमेरिकी हमले में मार गिराया गया था।

क्या है IRIS Dena

IRIS Dena ईरान की नौसेना का आधुनिक युद्धपोत माना जाता है। यह मौदगे श्रेणी का फ्रिगेट है, जिसे समुद्री गश्त और सैन्य अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस पोत में भारी तोपें, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, पोत रोधी मिसाइलें और टॉरपीडो तैनात थे। जहाज पर एक हेलीकॉप्टर भी मौजूद था।

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अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख Brad Cooper के अनुसार मौजूदा संघर्ष के दौरान अब तक कम से कम 17 ईरानी नौसैनिक पोत डुबोए जा चुके हैं।

श्रीलंका ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन

घटना के बाद Sri Lanka की नौसेना और तटरक्षक बल ने बचाव अभियान शुरू किया। श्रीलंका के विदेश मंत्री Vijitha Herath ने संसद में बताया कि तड़के लगभग 5:08 बजे गॉल बंदरगाह से करीब 40 समुद्री मील दूर एक पोत के डूबने की सूचना मिली थी।

उन्होंने बताया कि बचाव अभियान में अब तक लगभग 30 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जबकि जहाज पर करीब 180 लोगों के सवार होने की आशंका है। जहाज डूबने की असली वजह की जांच अभी जारी है।

नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए भरा नामांकन, अमित शाह और सम्राट चौधरी रहे मौजूद; बिहार की राजनीति में बढ़ी हलचल

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। उनके नामांकन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah और बिहार के उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary भी मौजूद रहे। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

नीतीश कुमार ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए राज्यसभा चुनाव लड़ने की अपनी इच्छा जताई थी। उन्होंने लिखा था कि संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनके मन में यह इच्छा रही है कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के सदस्य बनें। इसी क्रम में उन्होंने राज्यसभा चुनाव लड़ने का फैसला लिया है।

एनडीए नेताओं की मौजूदगी में नामांकन

सूत्रों के अनुसार, National Democratic Alliance की ओर से नामांकन के दौरान कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। जानकारी के मुताबिक जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Nabin के साथ नामांकन दाखिल किया। इस दौरान अमित शाह की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और राजनीतिक महत्व दे दिया।

इससे पहले Bharatiya Janata Party ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने दो उम्मीदवारों के नाम घोषित किए थे, जिनमें नितिन नवीन भी शामिल हैं। वहीं एनडीए के सहयोगी दल के नेता Upendra Kushwaha को भी लगातार दूसरी बार राज्यसभा भेजे जाने की पुष्टि हो चुकी है।

पोस्ट में क्या बोले नीतीश कुमार

अपने संदेश में नीतीश कुमार ने बिहार की जनता का आभार जताते हुए लिखा कि पिछले दो दशकों से अधिक समय से लोगों ने उन पर भरोसा बनाए रखा है। उसी विश्वास के आधार पर उन्होंने राज्य और उसके लोगों की सेवा की है। उन्होंने कहा कि बिहार आज विकास और सम्मान के नए आयाम स्थापित कर रहा है, जिसके लिए वह प्रदेशवासियों के आभारी हैं।

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उन्होंने यह भी कहा कि आगे भी उनका बिहार की जनता से संबंध बना रहेगा और वह राज्य के विकास के लिए अपना संकल्प जारी रखेंगे।

नई सरकार को देंगे सहयोग

नीतीश कुमार ने अपने संदेश में यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में बनने वाली नई सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा। उन्होंने कहा कि बिहार को विकसित बनाने का उनका लक्ष्य पहले की तरह कायम रहेगा।

तेजस्वी यादव का हमला

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा नीतीश कुमार और उनकी पार्टी Janata Dal (United) को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।

तेजस्वी यादव ने कहा कि भाजपा अपने सहयोगियों को धीरे-धीरे खत्म करने की राजनीति करती रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि बिहार की जनता इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम को देख रही है।

बिहार में कैसे ‘सीनियर पार्टनर’ बनती गई भाजपा, जेडीयू से आगे निकलने तक का पूरा सियासी सफर

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- बिहार की राजनीति में Bharatiya Janata Party और Janata Dal (United) का गठबंधन लंबे समय से बना हुआ है, लेकिन बीते तीन दशकों में इस गठबंधन की ताकत का संतुलन धीरे-धीरे बदल गया। कभी जेडीयू और उसके नेता Nitish Kumar इस गठबंधन के ‘बड़े भाई’ माने जाते थे, लेकिन अब भाजपा राज्य की राजनीति में एनडीए की ‘सीनियर पार्टनर’ बनती दिख रही है।

हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने की इच्छा जताई है। इसके साथ ही बिहार की राजनीति में भाजपा की बढ़ती ताकत और जेडीयू की बदलती स्थिति पर चर्चा तेज हो गई है।

लालू के खिलाफ गठबंधन से शुरुआत

1990 के दशक में Nitish Kumar ने Lalu Prasad Yadav के नेतृत्व वाली राजनीति के खिलाफ एक मजबूत राजनीतिक मोर्चा तैयार किया। उस समय उनकी समता पार्टी का बिहार में अच्छा प्रभाव था।

2000 के विधानसभा चुनाव से पहले तक नीतीश कुमार बिहार में एक प्रमुख नेता के रूप में स्थापित हो चुके थे। झारखंड अलग होने से पहले यह संयुक्त बिहार का आखिरी चुनाव था।

2005: एनडीए सरकार और जेडीयू की मजबूत स्थिति

अक्टूबर 2005 में पहली बार नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार बनी। इस चुनाव में जेडीयू ने 88 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा को 55 सीटें मिलीं। उस समय गठबंधन में जेडीयू स्पष्ट रूप से सीनियर पार्टनर थी।

2010: नीतीश कुमार की लोकप्रियता का चरम

2010 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू का प्रदर्शन और भी बेहतर रहा। पार्टी ने 115 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा को 91 सीटें मिलीं। सीट शेयरिंग में भी जेडीयू को ज्यादा सीटें मिली थीं और गठबंधन में उसकी स्थिति मजबूत बनी रही।

2013–2014: गठबंधन टूटने से बदला समीकरण

2014 के लोकसभा चुनाव से पहले जब Narendra Modi को भाजपा ने प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया तो नीतीश कुमार ने असहजता जताई और 2013 में भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया। इसके बाद उन्होंने Rashtriya Janata Dal और Indian National Congress के साथ मिलकर महागठबंधन बनाया।

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया, जबकि जेडीयू सिर्फ दो सीटों पर सिमट गई। यह पहला संकेत था कि बिहार में भाजपा का स्वतंत्र जनाधार मजबूत हो चुका है।

2015: महागठबंधन की जीत, भाजपा का बढ़ता वोट शेयर

2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार राजद और कांग्रेस के साथ चुनाव लड़े और गठबंधन ने जीत हासिल की। हालांकि भाजपा ने अकेले चुनाव लड़ते हुए भी लगभग 24.4% वोट शेयर हासिल किया, जो किसी भी अकेली पार्टी से अधिक था।

2017: नीतीश की एनडीए में वापसी

2017 में Nitish Kumar ने फिर से एनडीए का दामन थाम लिया। लेकिन इस बार राजनीतिक समीकरण पहले जैसे नहीं रहे। भाजपा की राजनीतिक ताकत और सौदेबाजी की स्थिति पहले से ज्यादा मजबूत हो चुकी थी।

2020: भाजपा पहली बार जेडीयू से आगे

2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने मिलकर चुनाव लड़ा। इस चुनाव में भाजपा को 74 सीटें मिलीं, जबकि जेडीयू सिर्फ 43 सीटों पर सिमट गई। यह पहली बार था जब एनडीए के भीतर भाजपा सीटों के मामले में जेडीयू से काफी आगे निकल गई।

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हालांकि मुख्यमंत्री पद पर Nitish Kumar ही बने रहे, लेकिन गठबंधन में भाजपा ‘बड़े भाई’ की भूमिका में आ गई। इस चुनाव में Chirag Paswan की पार्टी ने जेडीयू की कई सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिससे जेडीयू को नुकसान हुआ।

2024 और 2025: भाजपा की स्थिति और मजबूत

2024 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू और भाजपा को बराबर सीटें मिलीं और दोनों दलों के 12-12 सांसद चुने गए। इसके बाद 2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि जेडीयू को 85 सीटें मिलीं। पहली बार ऐसा हुआ जब एनडीए में रहते हुए जेडीयू और भाजपा ने बराबर सीटों (101-101) पर चुनाव लड़ा।

भाजपा के बढ़ते प्रभाव के कारण

विश्लेषकों के अनुसार भाजपा का कोर वोट बैंक लगातार स्थिर बना रहा, जबकि जेडीयू का वोट शेयर गठबंधन बदलने और सत्ता विरोधी लहर के कारण प्रभावित हुआ।

2014 के बाद भाजपा ने बिहार के ग्रामीण इलाकों और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) में अपनी पकड़ मजबूत की। यह वही सामाजिक आधार था जिसे पहले Nitish Kumar की सबसे बड़ी ताकत माना जाता था।