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PM मोदी से मिले तमिलनाडु CM विजय, विकास परियोजनाओं और पानी विवाद पर हुई अहम चर्चा

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay ने बुधवार को प्रधानमंत्री Narendra Modi से नई दिल्ली में मुलाकात की। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनकी प्रधानमंत्री से पहली औपचारिक मुलाकात रही। दोनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनट तक बातचीत हुई, जिसमें तमिलनाडु के विकास, लंबित केंद्रीय फंड और अंतरराज्यीय जल विवाद जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई इस बैठक के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने हाल ही में हॉलैंड से वापस लाई गई प्राचीन तांबे की पट्टियों के लिए केंद्र सरकार और पीएम मोदी का आभार जताया। इसके साथ ही उन्होंने कर्नाटक की मेकेदातु बांध परियोजना का मुद्दा भी उठाया। तमिलनाडु सरकार का मानना है कि इस परियोजना से राज्य के निचले इलाकों में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, विजय प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah और केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman से भी मुलाकात करेंगे। बताया गया है कि वह दिल्ली स्थित तमिलनाडु हाउस में रात्रि विश्राम करेंगे।

दिल्ली दौरे को क्यों माना जा रहा है अहम?

तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के संस्थापक और अभिनेता से नेता बने विजय पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद दिल्ली पहुंचे हैं। राज्य में नई गठबंधन सरकार बनने के बाद उनकी यह यात्रा राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री विजय केंद्र सरकार को एक विस्तृत ज्ञापन सौंप सकते हैं, जिसमें विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए फंड आवंटन और स्कूल शिक्षा विभाग के तहत सर्व शिक्षा अभियान (SSA) सहित लंबित केंद्रीय राशि जारी करने की मांग शामिल है। राज्य में 4 जून से स्कूल खुलने वाले हैं, इसलिए शिक्षा विभाग के लिए फंड जारी कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

10 मई को संभाली थी मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी

विजय ने 10 मई को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद उन्होंने विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर अपनी सरकार का बहुमत साबित किया। उन्हें सहयोगी दलों के साथ-साथ विपक्षी खेमे के कुछ बागी विधायकों का भी समर्थन मिला था।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय के नेतृत्व में राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। उनकी जीत ने तमिलनाडु की पारंपरिक द्रविड़ राजनीति के लंबे समय से चले आ रहे दो-दलीय प्रभाव को चुनौती दी है।

किन नेताओं से करेंगे मुलाकात?

दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री विजय राष्ट्रपति Droupadi Murmu, उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan, कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge, कांग्रेस नेता Rahul Gandhi, Sonia Gandhi और Priyanka Gandhi Vadra सहित कई वरिष्ठ नेताओं से भी शिष्टाचार मुलाकात कर सकते हैं। इसके अलावा वामपंथी दलों के नेताओं से भी उनकी बैठक प्रस्तावित है।

ममता बनर्जी की पार्टी पर संकट के आसार, कई नेता नाराज, सांसदों के दल बदलने की अटकलें तेज

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ Mamata Banerjee की पार्टी All India Trinamool Congress में अंदरूनी असंतोष की खबरें लगातार चर्चा में हैं। विधानसभा चुनाव में झटके के बाद पार्टी के भीतर नाराजगी बढ़ने और कई नेताओं के खुलकर विरोध दर्ज कराने की बातें सामने आ रही हैं। वहीं, कुछ रिपोर्टों में यह दावा भी किया जा रहा है कि कई सांसद पार्टी छोड़ सकते हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।

कई वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी की चर्चा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी के कई वरिष्ठ नेता संगठन और नेतृत्व शैली को लेकर असंतोष जता चुके हैं। इनमें सांसद Sukhendu Sekhar Roy, Kakoli Ghosh Dastidar, Dev, Kalyan Banerjee और Rachna Banerjee जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं।

इसके अलावा कुणाल घोष, रिताब्रता बनर्जी, रविंद्रनाथ घोष और कई अन्य नेताओं के भी पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाने की चर्चा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्थानीय निकाय चुनाव से पहले बढ़ती नाराजगी पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती बन सकती है।

सांसदों के दल बदलने की अटकलें

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि टीएमसी के कई सांसद भारतीय जनता पार्टी के संपर्क में हैं। सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि एक दर्जन से अधिक सांसद पार्टी बदलने या समर्थन देने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, किन सांसदों के नाम शामिल हैं और इस पर कोई अंतिम फैसला हुआ है या नहीं, इसे लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि यदि असंतोष बढ़ता रहा तो पार्टी को आगामी चुनावों में संगठनात्मक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

पार्षदों के इस्तीफों से बढ़ी चिंता

रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के दिनों में 100 से अधिक पार्षदों के इस्तीफे की खबरों ने भी पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। कई पार्षद कथित तौर पर पार्टी नेतृत्व और Abhishek Banerjee के “डायमंड हार्बर मॉडल” पर सवाल उठा रहे हैं।

इन घटनाक्रमों के बीच ममता बनर्जी ने नेताओं और कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने की अपील की है।

नंदीग्राम सीट बनी चुनौती

Nandigram सीट को लेकर भी पार्टी के सामने मुश्किलें बताई जा रही हैं। खबर है कि संभावित उपचुनाव के लिए उम्मीदवार तलाशने में टीएमसी को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

याद रहे कि 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को यहां भाजपा नेता Suvendu Adhikari से हार मिली थी। बाद में नंदीग्राम की राजनीति राज्य की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल हो गई।

आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

हालांकि, पार्टी छोड़ने वाले सांसदों और नेताओं को लेकर अब तक टीएमसी या संबंधित नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल की राजनीति में बदलते समीकरणों के बीच आने वाले महीनों में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

सीएम योगी के तारों पर कपड़े सुखाने वाले बयान पर भड़के अखिलेश,बोले- जनता भाजपा को ‘धो-पटककर’ सुखा देगी

UPNews: उत्तर प्रदेश में बढ़ते बिजली संकट को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav ने मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के बयान पर तीखा पलटवार किया है। अखिलेश यादव ने कहा कि अगले चुनाव में जनता भाजपा को “धो-पटककर हमेशा के लिए सुखा देगी।”

योगी के बयान पर अखिलेश का तंज

दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिजली संकट पर विपक्ष को घेरते हुए कहा था कि समाजवादी पार्टी की सरकार में बिजली के तारों पर कपड़े सुखाए जाते थे। इसी बयान को लेकर अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी।

अखिलेश ने लिखा कि,
“अगले चुनाव में जनता भाजपा को अच्छे से धो-पटककर हमेशा के लिए सुखा देगी। शुक्र है कि मुख्यमंत्री ने यह नहीं कहा कि इस बिजली संकट के पीछे दिल्ली से भेजे गए किसी दूत की साजिश है।”

उन्होंने आगे तंज कसते हुए पूछा कि बिजली मंत्री समीक्षा बैठकों में शामिल होते हैं या उन्हें बुलाया ही नहीं जाता। अखिलेश ने कहा कि अगर मंत्री बैठकों में आते हैं तो मुख्यमंत्री उनके साथ एक तस्वीर साझा कर दें, ताकि जनता को “आपसी गर्मी” से ही कुछ राहत मिल जाए।

भाजपा सरकार पर साधा निशाना

सपा प्रमुख ने अपने बयान में भाजपा सरकार पर बिजली व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा शासन में बिजली सब-स्टेशनों पर पीएसी तैनात करनी पड़ रही है और विधायक-सांसद अपनी ही सरकार के खिलाफ चिट्ठियां लिख रहे हैं।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधि जनता के गुस्से से बचने के लिए ऐसा कर रहे हैं।

बिजली बचाने की अपील के साथ योगी का पलटवार

वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को बिजली संकट पर बोलते हुए कहा कि विपक्ष उन मुद्दों पर सवाल उठा रहा है, जिनकी स्थिति उनके शासनकाल में कहीं अधिक खराब थी।

उन्होंने लोगों से जरूरत के अनुसार ही बिजली इस्तेमाल करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनावश्यक लाइट और एसी न चलाएं तथा नगर निगम और ग्राम पंचायतें भी जरूरत के मुताबिक ही स्ट्रीट लाइट जलाएं।

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योगी ने कहा कि बिजली बचाना केवल पावर कॉरपोरेशन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का दायित्व है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार बिजली संकट समेत सभी समस्याओं का समाधान कर रही है।

सपा सरकार पर भी लगाए आरोप

मुख्यमंत्री योगी ने 2017 से पहले की समाजवादी पार्टी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उस समय गरीबों के लिए आवास योजनाएं प्रभावी तरीके से लागू नहीं होती थीं और योजनाओं का लाभ चुनिंदा लोगों तक सीमित रहता था।

योगी ने दावा किया कि उनकी सरकार ने बिना भेदभाव के गरीबों, महिलाओं, किसानों और युवाओं के लिए काम किया है। उन्होंने कहा कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 65 लाख से अधिक गरीबों को आवास उपलब्ध कराए गए हैं।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने महिला सुरक्षा को लेकर भी सपा सरकार पर हमला बोला और कहा कि उस दौर में कानून-व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती थी।

I Love Modi… लेकिन पर्दे के पीछे वार! क्या बेअसर रहा मार्को रुबियो का भारत दौरा?

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio का हालिया भारत दौरा भले ही कूटनीतिक मुस्कुराहट और दोस्ती के संदेशों से भरा दिखाई दिया हो, लेकिन इसके पीछे अमेरिका की सख्त नीतियों की परछाईं साफ नजर आई। एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump सार्वजनिक मंच से “I Love Modi” जैसे बयान देकर भारत-अमेरिका दोस्ती को मजबूत बताने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर व्यापार, वीजा और रूस से भारत के संबंधों को लेकर दबाव लगातार बढ़ता दिख रहा है।

‘फ्रीडम 250’ समारोह में दोस्ती का प्रदर्शन

नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास में अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ “फ्रीडम 250” का भव्य आयोजन किया गया। इस दौरान संगीतकार A. R. Rahman की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को खास बना दिया। सबसे अधिक चर्चा उस समय हुई जब राष्ट्रपति ट्रंप वर्चुअली कार्यक्रम से जुड़े और प्रधानमंत्री Narendra Modi की खुलकर तारीफ की।

ट्रंप ने कहा कि मोदी उनके करीबी मित्र हैं और भारत अमेरिका पर “100 प्रतिशत भरोसा” कर सकता है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंच पर दिखाई गई गर्मजोशी और बंद कमरों में चल रही रणनीतिक बातचीत में बड़ा अंतर है।

भारत-अमेरिका रिश्तों में बढ़ती असहजता

हालिया कूटनीतिक बैठकों के बावजूद दोनों देशों के रिश्तों में पहले जैसी सहजता नहीं दिख रही। पिछले वर्ष उपराष्ट्रपति J. D. Vance के भारत दौरे को जिस तरह भारतीय मीडिया में प्रमुखता मिली थी, वैसी प्रतिक्रिया इस बार देखने को नहीं मिली।

रुबियो को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई कठिन सवालों का सामना करना पड़ा। इनमें ट्रंप की सोशल मीडिया टिप्पणियां और भारत-अमेरिका संबंधों में आई कथित दूरी जैसे मुद्दे शामिल रहे। सार्वजनिक तौर पर रुबियो ने रिश्तों को “बेहद मजबूत” बताया, लेकिन रणनीतिक हलकों में इसे लेकर संदेह बना हुआ है।

H-1B और ग्रीन कार्ड नियमों से भारतीयों की चिंता बढ़ी

अमेरिका में नौकरी और स्थायी निवास का सपना देखने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए ट्रंप प्रशासन की नई नीतियां चिंता का कारण बन रही हैं। वाशिंगटन में ग्रीन कार्ड प्रक्रिया को सख्त बनाने की तैयारी के साथ-साथ H-1B वीजा नियमों में भी कई बदलाव किए गए हैं।

इन फैसलों का सबसे ज्यादा असर भारतीय आईटी सेक्टर के कर्मचारियों और छात्रों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई नीतियों से अमेरिका में काम करने और बसने की प्रक्रिया पहले से अधिक कठिन हो सकती है।

रूस से तेल खरीद पर अमेरिका की नाराजगी

भारत और Vladimir Putin के नेतृत्व वाले रूस के बीच ऊर्जा और रक्षा संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं। लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका लगातार भारत पर रूसी तेल खरीद कम करने का दबाव बना रहा है।

अमेरिका का तर्क है कि रूस से तेल खरीदने से मॉस्को को आर्थिक मजबूती मिलती है। वहीं भारत का कहना है कि उसकी प्राथमिकता ऊर्जा सुरक्षा है। खासकर पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बाद भारत के लिए सस्ता तेल आर्थिक जरूरत बन चुका है।

मुद्दा अमेरिका का रुख भारत का पक्ष
H-1B और ग्रीन कार्ड नियमों में सख्ती भारतीय पेशेवरों के हितों की सुरक्षा
रूस से तेल खरीद प्रतिबंध और आलोचना ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि
पाकिस्तान नीति इस्लामाबाद से बढ़ती करीबी आतंकवाद पर सख्त रुख की मांग
व्यापार टैरिफ दबाव और बड़ी खरीद की मांग संतुलित व्यापार समझौते की अपेक्षा

पाकिस्तान को लेकर बढ़ी भारत की चिंता

भारत के लिए सबसे संवेदनशील मुद्दों में अमेरिका का पाकिस्तान के प्रति बदलता रुख भी शामिल है। हालिया भारत-पाक तनाव के दौरान ट्रंप प्रशासन ने युद्धविराम कराने का दावा किया था, जिसे भारत ने स्वीकार नहीं किया।

विश्लेषकों का मानना है कि ईरान और पश्चिम एशिया के मामलों में अमेरिका की पाकिस्तान पर बढ़ती निर्भरता से इस्लामाबाद को कूटनीतिक लाभ मिल रहा है। यही वजह है कि नई दिल्ली इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सतर्क नजर आ रही है।

व्यापारिक दबाव और 500 बिलियन डॉलर का लक्ष्य

ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति भी भारत के लिए चुनौती बनती जा रही है। अमेरिका ने वैश्विक टैरिफ नीति के तहत भारत समेत कई देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लागू कर रखा है।

इसके साथ ही अमेरिका चाहता है कि भारत अगले कुछ वर्षों में लगभग 500 बिलियन डॉलर के अमेरिकी विमान, ऊर्जा, कृषि और तकनीकी उत्पाद खरीदे। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह सौदा भारत के लिए काफी महंगा साबित हो सकता है, जबकि बदले में अमेरिका कोई विशेष टैरिफ राहत देने के मूड में नहीं दिखता।

क्या रुबियो का दौरा बेअसर रहा?

राजनयिक विशेषज्ञों का कहना है कि रुबियो का दौरा दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने की कोशिश जरूर था, लेकिन इससे कोई बड़ा ठोस परिणाम निकलता नजर नहीं आया।

Milan Vaishnav का कहना है कि अमेरिकी प्रशासन के बयानों और उसकी वास्तविक नीतियों में स्पष्ट विरोधाभास दिखाई देता है। वहीं Rick Rossow ने भी इस दौर को भारत-अमेरिका संबंधों के लिए “कठिन समय” बताया है।

हालांकि, दोनों देशों के बीच ऊर्जा, तकनीक और व्यापार सहयोग को लेकर बातचीत जारी है। आने वाले समय में संभावित अंतरिम व्यापार समझौता यह तय करेगा कि अमेरिका की कूटनीतिक गर्मजोशी वास्तव में कितनी गहरी है और भारत अपने राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित रखते हुए इन चुनौतियों से कैसे निपटता है।

Aaj Ka Rashifal 27 May 2026: सिंह राशि को मिलेगा धन लाभ, मीन वालों के लिए बनेगा सफलता का योग

Aaj Ka Rashifal 27 May 2026: बुधवार का दिन कई राशियों के लिए नई उम्मीद और अवसर लेकर आया है। ग्रहों की चाल का असर करियर, व्यापार, परिवार और स्वास्थ्य पर देखने को मिलेगा। कुछ राशियों को आर्थिक लाभ होगा तो कुछ को सावधानी बरतने की जरूरत है। जानिए मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का दैनिक राशिफल।

मेष राशि

आज कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। आत्मविश्वास बढ़ा रहेगा। नौकरी में अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। परिवार में सुखद माहौल रहेगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। खर्चों पर नियंत्रण रखें।

वृषभ राशि

आज कोई रुका हुआ काम पूरा हो सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। विद्यार्थियों के लिए दिन शुभ रहेगा। प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी। यात्रा के योग बन सकते हैं।

मिथुन राशि

व्यापार में लाभ मिलने के संकेत हैं। नौकरीपेशा लोगों को नई उपलब्धि मिल सकती है। परिवार का सहयोग मिलेगा। सेहत को लेकर लापरवाही न करें। पुराने मित्र से मुलाकात संभव है।

कर्क राशि

आज मन थोड़ा चिंतित रह सकता है। किसी बात को लेकर तनाव हो सकता है। कार्यक्षेत्र में धैर्य बनाए रखें। परिवार का सहयोग मिलेगा। धन संबंधी मामलों में सोच-समझकर फैसला लें।

सिंह राशि

आर्थिक लाभ के प्रबल योग बन रहे हैं। कारोबार में सफलता मिलेगी। नौकरी में प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। परिवार के साथ अच्छा समय बिताएंगे।

कन्या राशि

आज मेहनत का पूरा फल मिलेगा। रुके हुए कार्य पूरे होंगे। निवेश के लिए समय अनुकूल है। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। स्वास्थ्य में सुधार देखने को मिलेगा।

तुला राशि

आज खर्च बढ़ सकते हैं, लेकिन आय के नए स्रोत भी बनेंगे। व्यापार में लाभ होगा। परिवार में किसी शुभ कार्य की चर्चा हो सकती है। छात्रों को सफलता मिलेगी।

वृश्चिक राशि

कार्यस्थल पर सफलता मिलेगी। नए संपर्क भविष्य में लाभ देंगे। धन लाभ के योग हैं। प्रेम जीवन अच्छा रहेगा। वाहन चलाते समय सावधानी बरतें।

धनु राशि

भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। नौकरी और व्यापार में तरक्की के संकेत हैं। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। परिवार के साथ यात्रा का प्लान बन सकता है।

मकर राशि

आज किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से मुलाकात हो सकती है। करियर में नए अवसर मिलेंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें और खानपान संतुलित रखें।

कुंभ राशि

आज विवादों से दूर रहें। कार्यक्षेत्र में धैर्य और समझदारी से काम लें। निवेश करते समय सावधानी बरतें। परिवार का सहयोग मिलेगा। शाम तक कोई अच्छी खबर मिल सकती है।

मीन राशि

आज का दिन सफलता और खुशियों से भरा रहेगा। नौकरी और व्यवसाय में लाभ होगा। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षा में सफलता मिल सकती है।

UPSSSC Recruitment 2026: विधान भवन में 170 पदों पर निकली भर्ती, 12वीं पास युवा कर सकेंगे आवेदन

UPSSSC Recruitment 2026: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। Uttar Pradesh Subordinate Services Selection Commission ने विधान भवन के अंतर्गत विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती अभियान के जरिए कुल 170 रिक्त पदों को भरा जाएगा। आवेदन प्रक्रिया 9 जून 2026 से शुरू होगी।

भर्ती के तहत विधान भवन रक्षक और विधान भवन अग्निरक्षक के पद शामिल किए गए हैं। आयोग द्वारा जारी विवरण के अनुसार, विधान भवन रक्षक के 120 पद और अग्निरक्षक के 50 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।

शैक्षणिक योग्यता

इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना जरूरी है। साथ ही अभ्यर्थियों के पास PET-2025 का वैध स्कोरकार्ड होना अनिवार्य होगा। पीईटी स्कोर के आधार पर ही उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाएगा।

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आयु सीमा

भर्ती के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना 1 जुलाई 2026 के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट का लाभ मिलेगा।

आवेदन शुल्क

सभी वर्गों के अभ्यर्थियों के लिए आवेदन शुल्क 25 रुपये रखा गया है। शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा।

महत्वपूर्ण तिथियां

  • आवेदन शुरू होने की तारीख: 9 जून 2026
  • आवेदन की अंतिम तारीख: 29 जून 2026
  • आवेदन फॉर्म में संशोधन की अंतिम तिथि: 6 जुलाई 2026

वेतनमान

चयनित उम्मीदवारों को लेवल-3 पे स्केल के तहत 21,700 रुपये से 69,100 रुपये तक वेतन और अन्य सरकारी भत्ते दिए जाएंगे।

ऐसे करें आवेदन

उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करते समय पीईटी रजिस्ट्रेशन नंबर, जरूरी दस्तावेज, फोटो और हस्ताक्षर अपलोड करने होंगे। अंतिम सबमिट से पहले आवेदन पत्र में भरी गई जानकारी को ध्यानपूर्वक जांच लेना जरूरी है।

अधिक जानकारी और आवेदन के लिए अभ्यर्थी UPSSSC की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

बेटियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को नहीं मिलेगी राहत, प्रयागराज में बोले सीएम योगी

UPNews:  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने प्रयागराज दौरे के दौरान अपराधियों और महिलाओं से छेड़छाड़ करने वालों को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि बेटियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। मुख्यमंत्री मंगलवार को प्रयागराज नगर निगम के नवनिर्मित सदन हॉल और विभिन्न विकास परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की विकास यात्रा लगातार आगे बढ़ रही है और प्रयागराज आज सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक आस्था और आधुनिक विकास का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार ‘चरैवेति-चरैवेति’ के मंत्र के साथ निरंतर विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है।
सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले कुंभ और माघ मेले अव्यवस्था, गंदगी और भगदड़ के प्रतीक बन गए थे, लेकिन 2019 के कुंभ आयोजन ने प्रयागराज की तस्वीर बदल दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के मार्गदर्शन में प्रयागराज कुंभ को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में वैश्विक पहचान मिली। महाकुंभ 2025 की तैयारियों के तहत शहर में बड़े स्तर पर आधारभूत सुविधाओं का विकास किया गया है।
मुख्यमंत्री ने नगर निगम की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि शहर की ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक विकास से जोड़ने का काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 161 वर्ष पुरानी नगर निगम इमारत को नया स्वरूप दिया गया है और करीब 400 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया जा रहा है।
उन्होंने ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल का जिक्र करते हुए कहा कि 400 टन कबाड़ सामग्री से द्वादश ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियां तैयार की गई हैं, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे प्रयास प्रयागराज को नई पहचान दिला रहे हैं।
सीएम योगी ने कहा कि पहले अक्षयवट और सरस्वती कूप आम श्रद्धालुओं के लिए सुलभ नहीं थे, लेकिन अब श्रद्धालु वहां दर्शन और पूजन कर पा रहे हैं। महर्षि भारद्वाज आश्रम को भी अतिक्रमण से मुक्त कराकर उसका भव्य स्वरूप विकसित किया गया है।

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उन्होंने कहा कि आज प्रयागराज माफिया और गुंडागर्दी से मुक्त हो चुका है। अब बेटियां, व्यापारी और आम नागरिक बिना डर के कहीं भी आ-जा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों के साथ किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार सुरक्षा, सुशासन और विकास के लक्ष्य के साथ काम कर रही है। उन्होंने प्रयागराजवासियों का आभार जताते हुए कहा कि महाकुंभ के दौरान लोगों ने धैर्य और सहयोग का परिचय दिया, जिससे आयोजन सफल हो सका।
उन्होंने बताया कि प्रयागराज को बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए गंगा एक्सप्रेसवे समेत कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम चल रहा है। साथ ही गंगा नदी पर फोरलेन पुल और फाफामऊ पुल परियोजना भी जल्द पूरी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि प्रयागराज के विकास के लिए आने वाले हर प्रस्ताव को प्रदेश सरकार का पूरा सहयोग मिलेगा।

यूपी को जल्द मिलने जा रहा स्थायी डीजीपी, दिल्ली की बैठक में ये 3 नाम तय

UPNews:  उत्तर प्रदेश में करीब चार साल बाद स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। नई दिल्ली में मंगलवार को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की बैठक में यूपी के नए डीजीपी पद के लिए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों पर चर्चा की गई। बैठक में मुख्य सचिव एसपी गोयल और प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद भी शामिल हुए।
सूत्रों के मुताबिक, यूपीएससी ने विचार-विमर्श के बाद तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल तैयार कर लिया है। संभावना जताई जा रही है कि आयोग बुधवार को यह पैनल राज्य सरकार को भेज देगा। इसके बाद मुख्यमंत्री Yogi Adityanath अंतिम निर्णय लेते हुए नए पूर्णकालिक डीजीपी के नाम पर मुहर लगाएंगे।
बताया जा रहा है कि पैनल में 1990 बैच की आईपीएस अधिकारी Renuka Mishra का नाम वरिष्ठता क्रम में सबसे ऊपर है। इसके अलावा 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी Piyush Anand और वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी Rajeev Krishna के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं।
वरिष्ठता सूची में 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी आलोक शर्मा का नाम भी शामिल था, लेकिन वह फिलहाल केंद्र में डीजी एसपीजी के पद पर तैनात हैं और उनका कार्यकाल अगले महीने समाप्त हो रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण की दावेदारी सबसे मजबूत है।

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जानकारी के अनुसार, डीजीपी पद के लिए उन्हीं अधिकारियों के नामों पर विचार किया गया जिन्होंने 30 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है और जिनका कम से कम छह महीने का कार्यकाल बाकी है। रेणुका मिश्रा इस समय डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध हैं, जबकि पीयूष आनंद वर्तमान में एनडीआरएफ में डीजी पद पर तैनात हैं।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सभी राज्यों को स्थायी डीजीपी नियुक्त करने के लिए प्रस्ताव केंद्र को भेजने के निर्देश दिए थे। उत्तर प्रदेश में आखिरी बार Mukul Goel पूर्णकालिक डीजीपी के रूप में तैनात थे। मई 2022 में उन्हें पद से हटाए जाने के बाद से राज्य में लगातार कार्यवाहक डीजीपी ही जिम्मेदारी संभालते रहे हैं।
इधर, यूपी कैडर के छह आईपीएस अधिकारियों को केंद्र में प्रतिनियुक्ति का रास्ता भी साफ हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आईजी स्तर पर इंपैनल किए गए अधिकारियों की सूची जारी की है, जिसमें यूपी कैडर के कई अधिकारियों के नाम शामिल हैं।

कर्नाटक में सिद्धारमैया शासन का अंत? सिद्धारमैया गुरुवार को दे सकते हैं इस्तीफा;आगे क्या

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- कर्नाटक की राजनीति में चल रही हलचल के बीच मुख्यमंत्री Siddaramaiah के इस्तीफे की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया 28 मई यानी गुरुवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इससे पहले बुधवार को वह बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कर सकते हैं।
दरअसल, मंगलवार को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge और वरिष्ठ नेता Rahul Gandhi के साथ मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम D. K. Shivakumar की लंबी बैठक हुई। इस बैठक के बाद कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें और तेज हो गईं।
हालांकि कांग्रेस महासचिव K. C. Venugopal ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि बैठक में केवल राज्यसभा और एमएलसी चुनाव को लेकर चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बदलने जैसी खबरों में कोई सच्चाई नहीं है।
इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं जारी रहीं। सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धारमैया को इस्तीफा देकर राज्यसभा जाने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही उन्हें दिल्ली में बड़ी जिम्मेदारी देने का भरोसा भी दिलाया गया। हालांकि बताया जा रहा है कि सिद्धारमैया फिलहाल इसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं।

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सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि सिद्धारमैया राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी के बड़े ओबीसी चेहरे के तौर पर सक्रिय भूमिका निभाएं। माना जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस सामाजिक न्याय और ओबीसी वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
बताया जा रहा है कि बैठक में पार्टी नेताओं ने यह भी चर्चा की कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस को सिद्धारमैया जैसे अनुभवी नेता की जरूरत है। वहीं, अगर वह मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं तो उनकी राजनीतिक चिंताओं का समाधान करने का आश्वासन भी दिया गया है।
गौरतलब है कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार बनने के बाद से ही सत्ता साझेदारी को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के समर्थक लगातार दावा करते रहे हैं कि विधानसभा चुनाव 2023 के बाद उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का वादा किया गया था। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व की ओर से अब तक किसी भी संभावित बदलाव को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

यूपी में सपा सरकार बनते ही केंद्र की बीजेपी सरकार गिर जाएग, अखिलेश यादव का बड़ा दावा

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनने के बाद केंद्र की भाजपा सरकार भी टिक नहीं पाएगी। उन्होंने भाजपा पर “फर्जी अर्थव्यवस्था” और “फर्जी एनकाउंटर” की राजनीति करने का आरोप लगाया।
मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार देश की जनता को भ्रमित करने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि डॉलर की कीमत बढ़ने का असर सीधे आम लोगों पर पड़ रहा है और महंगाई लगातार बढ़ रही है। उनके मुताबिक चाय समेत रोजमर्रा की चीजें महंगी होती जा रही हैं, जिससे आम जनता परेशान है।
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में कथित फर्जी मुठभेड़ों के जरिए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग को डराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार जाति और धर्म के आधार पर कार्रवाई कर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ रही है। अखिलेश ने कहा कि फर्जी एनकाउंटर किसी भी सरकार की विफलता का संकेत होते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के जरिए समाज में हिंसक मानसिकता को बढ़ावा दिया जा रहा है। अखिलेश यादव के अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का शासन सर्वोपरि होना चाहिए, लेकिन भाजपा सरकार मुठभेड़ों को सही ठहराकर संविधान और सामाजिक न्याय की भावना को कमजोर कर रही है।

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भाजपा पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकार अपने समर्थकों को खुश करने के लिए नफरत की राजनीति कर रही है। उनका आरोप था कि इससे समाज में तनाव और पुलिस व्यवस्था में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि फर्जी मुठभेड़ों से कानून-व्यवस्था मजबूत नहीं होती बल्कि और खराब होती है।
अखिलेश यादव ने फर्जी मुठभेड़ों को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं में शामिल पुलिसकर्मी भी बाद में कानूनी और सामाजिक परेशानियों का सामना करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जरूरत पड़ने पर ऐसे पुलिसकर्मियों से दूरी बना लेती है, जबकि उनके परिवारों को सामाजिक अपमान झेलना पड़ता है।