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अमित शाह का राहुल गांधी पर तंज, बोले- जिन्हें दूर से दिखा आंतकी, सपनों में भी आएगा नजर

सर्वोदय (नई दिल्ली):- राज्यसभा में गृह मंत्रालय के कामकाज के बारे में जानकारी देते हुए अमित शाह ने विपक्ष पर हमला बोला। उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा पर तंज कसते हुए कहा, “पैदल यात्रा निकाली, कश्मीर गए, अपने कार्यकर्ताओं के साथ बर्फ की होली खेली और दावा किया कि दूर से आतंकवादी दिखाई पड़े थे। अरे भाई, जिनकी नजर में आतंकवादी हैं, वह सपने में भी दिखेंगे और कश्मीर में भी दिखाई देंगे।”

शाह ने जम्मू-कश्मीर, आतंकवाद, वाम नक्सलवाद और पूर्वोत्तर के उग्रवाद को ‘तीन नासूर’ के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि अगर इन तीनों समस्याओं को जोड़ दिया जाए तो पिछले चार दशकों में देश में कुल 92 हजार नागरिकों की जान गई। गृह मंत्री ने यह भी कहा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए पहले कभी इतने संगठित प्रयास नहीं किए गए, जितने नरेंद्र मोदी सरकार ने किए हैं।

शाह ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर चर्चा करते हुए कहा कि पहले पाकिस्तान से आतंकवादी सीमा पार कर आते थे, धमाके करते थे और हत्याएं करते थे। उन्होंने बताया कि पहले ऐसा कोई त्योहार नहीं जाता था, जब लोग चिंतित रहते थे। शाह ने कहा कि पिछली सरकारें इस पर चुप रहती थीं और वोट बैंक की राजनीति के चलते कुछ नहीं करती थीं।

गृह मंत्री ने यह भी कहा कि मोदी सरकार के आने के बाद भी उरी और पुलवामा हमले हुए, लेकिन इन हमलों के बाद तत्काल कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा, “हमारे सरकार में, उरी और पुलवामा हमलों के बाद दस दिन के भीतर पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक की गई। “पूरी दुनिया में दो ही देश हैं जो अपनी सीमा और सेना की सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं – अमेरिका और इजराइल। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने भारत को इन देशों की सूची में शामिल किया।”

प्रमुख मुख्य संरक्षा अधिकारी, नॉर्थ सेंट्रल रेलवे, ने किया सेफ्टी ऑडिट निरीक्षण-अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की

सर्वोदय(लखनऊ):-  इन्टर रेलवे सेफ्टी ऑडिट निरीक्षण के अंतर्गत प्रमुख मुख्य संरक्षा अधिकारी,नॉर्थ सेंट्रल रेलवे, जे.सी.एस. बोरा एवं अन्य अधिकारियों का गत दिवस पर अपने दो दिवसीय निरीक्षण कार्यक्रम के तहत उत्तर रेलवे, लखनऊ मण्डल में आगमन हुआ | इस कार्यक्रम के दूसरे दिन  दिनांक 21 मार्च 2025 को प्रमुख मुख्य संरक्षा अधिकारी ने अपने निरीक्षण का प्रारम्भ लखनऊ मण्डल के अन्य अधिकारियों के साथ लखनऊ स्थित लोको पॉयलेट/ट्रेन मैनेजर लाबी से किया | वहाँ पहुंचकर प्रमुख मुख्य संरक्षा अधिकारी ने वहाँ की सभी व्यवस्थाओं को देखा और ए. आई. बेस स्मार्ट सिग्नल काल आउट सिस्टम सहित वहाँ की कार्यपद्धति की क्रमवार जानकारी लिए साथ ही अभिलेखों की जाँच भी किये |जिसके बाद उन्होंने रनिंग रूम में पहुंचकर वहाँ के रिकार्ड और कार्यप्रणाली को परखा और  सेल्फ प्रोपेल्ड एक्सीडेंट रिलीफ मेडिकल वैन का निरीक्षण किया I इसके पश्चात ऑडिट टीम ने कैरिज एण्ड वैगन डिपो में पहुंचकर विभिन्न कार्यशालाओं एवं इनकी कार्य पद्धति का निरीक्षण किया और इनकी जानकारी प्राप्त की |

निरीक्षण के अगले सत्र में प्रमुख मुख्य संरक्षा अधिकारी का आगमन हजरतगंज स्थित मंडलीय कार्यालय में हुआ |  वहाँ उन्होंने सभागार में आयोजित की जाने वाली वाली समीक्षा बैठक में भाग लिया | इस बैठक में उन्होंने मण्डल रेल प्रबंधक,  एस. एम. शर्मा एवं अन्य अधिकारियों के साथ संरक्षा संबंधी अनेक महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार-विमर्श करते हुए इसकी समीक्षा की तथा संरक्षा संबंधी नई नीतियों एवं कार्यप्रणालियों को अमल में लाने की संभावनाओं पर गहन मंथन किया गया|

इस अवसर पर प्रमुख मुख्य संरक्षा अधिकारी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए अवगत कराया की संरक्षा प्रणाली सम्पूर्ण रेलकार्य की आधारशिला है | अतः हम सभी को “संरक्षा को प्रथम वरीयता प्रदान” करते हुए अपना रेल कार्य करना है | संरक्षा की अनिवार्यता और महत्ता के कारण संरक्षा कोटि एवं संरक्षा सेवाओं से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों का उत्तरदायित्व एवं जिम्मेदारी और भी अधिक बढ़ जाती है | उन्होंने संरक्षा संबंधी सभी मानकों एवं नियमों का पूर्णतया पालन करते हुए इस विषय में बेहद सतर्क और जागरूक रहते हुए कार्य करने की सलाह दी | इस निरीक्षण कार्यक्रम में अपर मण्डल रेल प्रबंधक,  सचिन वर्मा, सहित संरक्षा कोटि के वरिष्ठ अधिकारीगण अन्य सभी विभागों के शाखाध्यक्ष तथा अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे |उक्त जानकरी कुलदीप तिवारी, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबन्धक,उत्तर रेलवे, लखनऊ ने दी |

रात को दूध में इन तीन चीजों को मिलाकर पीने से कमजोरी से पाया जा सकता छुटकारा

सर्वोदय :- कमजोरी को दूर करने के लिए लोग महंगी दवाइयों का सेवन करते हैं, लेकिन कई बार इन दवाइयों से कोई खास फायदा नहीं होता और यह पैसे की बर्बादी भी हो सकती है। दरअसल, कमजोरी को दूर करने के लिए एक साधारण और प्रभावी उपाय किचन में ही मौजूद है। अगर आप रोजाना दूध का सेवन करें, तो यह कमजोरी को दूर करने में मददगार हो सकता है। इसके अलावा, अगर दूध में कुछ चीजें मिलाकर पिया जाए, तो वह और भी अधिक ताकतवर हो जाता है। रात को दूध में इन तीन चीजों को मिलाकर पीने से कमजोरी से छुटकारा पाया जा सकता है:

  1. केसर: केसर एक प्राकृतिक ऊर्जा बूस्टर है जो शरीर को ताकत प्रदान करता है और कमजोरी को जल्दी दूर करने में मदद करता है। आप दूध उबालते वक्त उसमें केसर के कुछ टुकड़े डाल सकते हैं और उसे अच्छे से उबालने के बाद ठंडा करके पी सकते हैं। इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है और कमजोरी दूर होती है।
  2. बादाम: बादाम एक बेहतरीन स्रोत है विटामिन और मिनरल का, जो शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है। अगर आप रात को दूध में बादाम डालकर उबाल लें और फिर इसे पी लें, तो यह कमजोरी को दूर करने में मदद करता है। रोजाना ऐसा करने से शरीर को ताकत मिलती है और कमजोरी कम होती है।
  3. इलायची: इलायची एक प्राकृतिक डाइजेस्टिव है, जो पाचन तंत्र को सुधारने में मदद करती है। जब आप रात को दूध में इलायची डालकर पियेंगे, तो यह पाचन तंत्र को ठीक करेगा और कमजोरी को दूर करने में मदद करेगा।

इन तीनों चीजों को दूध में मिलाकर पीने से कमजोरी की समस्या को आसानी से दूर किया जा सकता है। हालांकि, अगर आपको कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो, तो आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

दिल्ली हाईकोर्ट के जज के घर से मिला भारी मात्रा में कैश-सुप्रीम कोर्ट ने जांच की शुरू

सर्वोदय(नई दिल्ली):-सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर करने की सिफारिश की है, जिसके बाद इस फैसले से काफी हलचल मच गई है। जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास से कथित रूप से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के बाद यह विवाद उठ खड़ा हुआ है।

इस घटना के बाद, मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता में कॉलेजियम ने तत्काल बैठक की और जस्टिस वर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट से ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया। जस्टिस वर्मा का यह ट्रांसफर तब लागू होगा जब केंद्र कॉलेजियम की सिफारिश को स्वीकार करेगा, जिसे अभी औपचारिक रूप से भेजा जाना बाकी है। कॉलेजियम जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई भी कर सकता है।

दिल्ली हाई कोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज जस्टिस वर्मा शुक्रवार को कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए, और उनके कोर्ट मास्टर ने वकीलों को इस बारे में जानकारी दी। एक वरिष्ठ वकील ने जस्टिस वर्मा के मुद्दे को दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय के सामने उठाया और घटना पर दुख व्यक्त किया। न्यायमूर्ति उपाध्याय ने भी इसी तरह की चिंता व्यक्त की और कहा, “हम सब इस बात से अवगत हैं…”कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉलेजियम के कुछ वरिष्ठ सदस्य जस्टिस वर्मा के ट्रांसफर के अलावा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

ज्ञात हो कि 1999 में सुप्रीम कोर्ट ने न्यायालयों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों को सुलझाने के लिए एक आंतरिक प्रक्रिया तय की थी। इसके तहत अगर कोई शिकायत मिलती है, तो मुख्य न्यायाधीश संबंधित जज से जवाब मांगते हैं। अगर वह संतुष्ट नहीं होते, तो एक गहन जांच की प्रक्रिया शुरू की जाती है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज शामिल होते हैं।

आईपीएल में अलग स्तर की चुनौती,कुछ अन्य गेंदों पर काम कर रहे हैं-वरुण चक्रवर्ती

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सर्वोदय:-  चैंपियंस ट्रॉफी में भारत की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ‘अबूझ’ स्पिनर वरुण चक्रवर्ती का मानना है कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) हर बार एक नई चुनौती पेश करता है, जिसमें उन्हें हमेशा नई शुरुआत करने की आवश्यकता होती है।चक्रवर्ती ने चैंपियंस ट्रॉफी में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने पहले मैच में पांच विकेट लेकर महत्वपूर्ण योगदान दिया था और पूरे टूर्नामेंट में तीन मैचों में नौ विकेट चटकाए थे। हालांकि, वह अपनी पिछली सफलता को आगे बढ़ाने में सतर्क हैं।

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ आईपीएल के सत्र के पहले मैच से पहले मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “आत्मविश्वास हर किसी के लिए अलग होता है। आप भले ही पिछले टूर्नामेंट के विजेता हों, लेकिन आपको हर बार नए टूर्नामेंट में शुरुआत करनी होती है।”उन्होंने कहा, “आपको शून्य से शुरुआत करनी होती है। जैसा कि कहते हैं, अगर आपने पिछले मैच में शतक बनाया है, तो भी अगली पारी में आपको शून्य से शुरुआत करनी होगी।”

चक्रवर्ती ने आगे कहा, “हां, मैंने पिछले टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन आईपीएल एक अलग प्रकार का खेल है और यह काफी चुनौतीपूर्ण है। मैं पूरी तरह से समझता हूं कि मुझे क्या चुनौती मिलने वाली है।”चक्रवर्ती विराट कोहली का सामना करने को लेकर भी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा, “विराट के खिलाफ खेलना निश्चित रूप से रोमांचक होगा। जाहिर है, उन्होंने मेरे खिलाफ अच्छा प्रदर्शन किया है और मैं भी उनके खिलाफ अच्छा खेलना चाहूंगा।”

लंदन के हीथ्रो हवाई पर क्या हुआ? 1400 उड़ानें प्रभावित

सर्वोदय (देश-विदेश):- लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे को 21 मार्च की रात तक बंद कर दिया गया है, जिसका प्रभाव 14,000 से अधिक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ा है। इसमें एयर इंडिया की कई उड़ानें भी शामिल हैं, जिन्हें या तो रद्द कर दिया गया है या उन्हें वापस लौटने के लिए कहा गया है।20 मार्च को लंदन के हेस क्षेत्र में स्थित एक इलेक्ट्रिकल सबस्टेशन में आग लग गई थी, जिससे बिजली आपूर्ति में गंभीर विघटन हुआ। इसके कारण हीथ्रो हवाई अड्डे को बंद करना पड़ा। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इस समस्या को ध्यान में रखते हुए हवाई अड्डे को रात 11:59 बजे तक बंद रखने का निर्णय लिया गया है।

एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे हवाई अड्डे पर न जाएं और अपनी एयरलाइन से उड़ान की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त करें। साथ ही, उन्होंने असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है। हवाई अड्डे के प्रवक्ता ने बताया कि अग्निशमन दल आग बुझाने के प्रयास कर रहे हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि बिजली आपूर्ति कब तक बहाल हो पाएगी।हीथ्रो हवाई अड्डा दुनिया के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक है, जहां प्रतिदिन लगभग 1300 उड़ानें संचालित होती हैं। हवाई अड्डे के बंद होने के कारण लगभग 120 उड़ानें, जो पहले से हवा में थीं, उन्हें अन्य हवाई अड्डों पर डायवर्ट किया गया।

इस स्थिति के कारण करीब 2 लाख लोग फंसे हुए हैं। एयर इंडिया ने अपनी उड़ानों पर हुए व्यवधान के बारे में यात्रियों को सूचित किया और उन्हें सलाह दी कि वे अपनी उड़ान की स्थिति को हवाई अड्डे जाने से पहले चेक करें। एयरलाइन ने यात्रियों के लिए हेल्पलाइन नंबर 011-69329333/011-69329999 भी जारी किया है और कहा कि वे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

पाकिस्तान के पेशावर में जुमे की नमाज के दौरान एक बड़ा धमाका हुआ

सर्वोदय (देश-विदेश):- पाकिस्तान के पेशावर शहर में जुमे की नमाज के दौरान एक बड़ा धमाका हुआ है, जो कि किस्साखानी बाजार स्थित जामा मस्जिद में हुआ। धमाके के समय मस्जिद में बड़ी संख्या में लोग नमाज पढ़ रहे थे, और इस हादसे में कई लोग मारे गए हैं। घटना के बाद, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर लिया और राहत-बचाव कार्य जारी किया है। घायलों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है, लेकिन अभी तक किसी आतंकवादी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। पेशावर पहले भी आतंकवादी हमलों का शिकार रहा है, और पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

पाकिस्तान में आतंकवाद से जुड़ी घटनाओं में तेजी से इजाफा हो रहा है। हाल ही में एक रिपोर्ट में बताया गया कि फरवरी महीने में आतंकवादी हमलों में 73 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। बलूचिस्तान सबसे अधिक प्रभावित इलाका रहा है, जहां आतंकवाद की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। बलूचिस्तान में एक और बड़ी घटना, जैसे कि जाफर एक्सप्रेस ट्रेन का हाईजैक होना, ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

इस्लामाबाद स्थित पाक इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज़ (PIPS) की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी महीने में पाकिस्तान में 54 आतंकवादी हमले हुए, जिनमें 121 लोग मारे गए और 103 लोग घायल हुए। इन हमलों में 62 प्रतिशत मौतें बलूचिस्तान में हुईं, जो यह दर्शाता है कि बलूचिस्तान अब आतंकवाद का मुख्य केंद्र बनता जा रहा है।

खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र भी आतंकवाद से प्रभावित हुआ है। फरवरी महीने में यहां 30 आतंकवादी हमले हुए, जिनमें 45 लोग मारे गए और 58 लोग घायल हुए। पाकिस्तान सरकार का आरोप है कि इन हमलों में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), हाफिज गुल बहादुर ग्रुप, लश्कर-ए-इस्लाम और इस्लामिक स्टेट-खोरासन (IS-K) जैसे आतंकवादी संगठन शामिल हैं।

बलूचिस्तान में भी फरवरी में 23 हमले हुए, जिनमें 75 लोग मारे गए और 45 लोग घायल हुए। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA), बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) और बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (BRG) जैसे बलूच उग्रवादी समूहों ने 22 हमले किए, जिनमें 74 लोग मारे गए। इसके अलावा, TTP ने एक हमले को अंजाम दिया, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हुई।

पाकिस्तान में आतंकवाद में बढ़ोतरी ने देश की आंतरिक सुरक्षा को गंभीर चुनौती दी है, विशेषकर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में हो रहे हमले यह संकेत देते हैं कि पाकिस्तान में उग्रवादी गुटों की पकड़ मजबूत हो रही है। यह सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है कि वह इस हिंसा को कैसे रोके और इन क्षेत्रों में शांति कैसे स्थापित करे।

‘भजन सम्राट’ अनूप जलोटा पंडित से बने मौलवी? सनातन छोड़ अपनाया मुस्लिम धर्म! तस्वीरें हो रही वायरल

सर्वोदय :- भजन सम्राट अनूप जलोटा अपने संगीत के साथ-साथ निजी जीवन और सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर भी हमेशा चर्चाओं में रहते हैं। ‘ऐसी लागी लगन’ जैसे अमर भजनों से करोड़ों दिलों में जगह बनाने वाले अनूप जलोटा को आज भला कौन नहीं जानता। लेकिन इस बार वे अपने भजनों की वजह से नहीं, बल्कि एक खास लुक के चलते सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं।

71 वर्षीय अनूप जलोटा ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें वे हरे रंग का कुर्ता, हरी माला और टोपी पहने दिखाई दे रहे हैं। उनके चेहरे पर बढ़ी हुई दाढ़ी है और मूंछें साफ हैं। इस तस्वीर के साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा – “नासिक शहर में ‘भारत देश है मेरा’ की शूटिंग के लिए उत्साहित हूं।”

https://www.instagram.com/p/DHVLZkZMXm3/?igsh=MW01ZWpiY3hydDc1YQ==

हालांकि, यह लुक किसी फिल्म या सीरीज़ की शूटिंग के लिए था, लेकिन कुछ सोशल मीडिया यूजर्स को यह अंदाज रास नहीं आया। लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया और भजन गायक के रूप में उनकी पहचान पर सवाल खड़े किए। एक यूजर ने टिप्पणी की – “आपने अपने धर्म का अनादर किया है।” वहीं दूसरे ने तंज कसते हुए उनका नया नाम “अनुपउल्ला खान जलोतादूनी” रख दिया।

कुछ ने इसे भजन से कव्वाली की ओर बढ़ता कदम कहा तो कुछ ने “ऐसी लागी लगन सलमा हो गई मगन…” जैसे फनी कमेंट्स कर मज़ाक उड़ाया। वहीं कुछ यूजर्स ने भावनात्मक अपील करते हुए लिखा – “अनूप जी, कृपया अपनी आत्मा को पहचानिए, आप सनातनी हैं।”

हालांकि शूटिंग के लिए किया गया यह गेटअप था, लेकिन कई लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर देखा, जिससे विवाद की स्थिति बन गई है।

 

योगी ने बदल दी राजनीति की परिभाषा

सर्वोदय (लखनऊ):- दायित्व के अनुसार अस्थायी रूप से किसी व्यक्ति का स्थान बदल सकता है। पर, उसकी परंपरा और संस्कार नहीं बदलते। बल्कि उसके पद और दायित्व के अनुसार इनका और विस्तार ही होता है। उत्तर प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके आठ साल का सफल कार्यकाल इसका प्रमाण है।

उल्लेखनीय है कि योगी जी का गृह जनपद गोरखपुर है। यहीं उत्तर भारत की प्रमुख धार्मिक पीठों में शुमार गोरक्षपीठ है। इस पीठ को देश-दुनिया में फैले नाथपंथ का मुख्यालय माना जाता है। योगी जी मुख्यमंत्री होने के साथ इसी पीठ के पीठाधीश्वर भी हैं। इस रूप में दीक्षित योगी (संन्यासी) भी है। खुद के योगी होने पर उनको गर्व भी है। समय-समय पर सदन से लेकर सार्वजनिक सभाओं में वह इस बात को कहते भी हैं।

आठ साल पहले जब एक लंबे अंतराल के बाद उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में भाजपा को बहुमत मिला तो 19 मार्च 2017 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर, आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े और राजनीति के लिहाज से सर्वाधिक संवेदनशील सूबे के मुखिया का दायित्व संभाला। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने पीठ की लोककल्याण की परंपरा और संस्कार के फलक को अपने पद के अनुसार लगातार विस्तार दिया। उन्होंने साबित किया कि जनकेंद्रित राजनीति के केंद्र में भी धर्म हो सकता है। उनके दादा गुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के समय में जिस ‘हिंदू और हिंदुत्व’ को प्रतिगामी माना जाता था उसे योगी ने बहस के केंद्र में ला दिया। जो पहले भगवान श्रीराम की आलोचना करते थे, उनको काल्पनिक बताते थे ऐसे लोग भी खुद को हिंदू कहलाकर गौरवान्वित महसूस करते हैं। इस तरह उन्होंने धर्म और राजनीति को लोक कल्याण का जरिया बनाकर साबित किया कि संत, समाज का वैचारिक मार्गदर्शन करने के साथ सत्ता का कुशलता से नेतृत्व भी कर सकता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ के खाते में ढेर सारी उपलब्धियां दर्ज हैं। 2019 में एक प्रतिष्ठित पत्रिका के सर्वे में उनको देश का सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री माना गया।

सच साबित हुई ‘मैं कभी हारा नहीं’ का बयान
एक इंटरव्यू में कभी योगी जी कहा था कि वह कभी हारे नहीं हैं। गोरखपुर से संसदीय चुनावों में वह अजेय रहे हैं तो पहली बार 2022 में विधानसभा चुनाव लड़कर उन्होंने अपनी अपराजेय लोकप्रियता को पुनः प्रमाणित किया।

मंदिर आंदोलन के दौरान आए महंत अवेद्यनाथ के संपर्क में
जन, जल, जंगल और जमीन से प्यार करने वाले योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1972 को पौढ़ी गढ़वाल (उत्तराखंड) के पंचुर गांव में एक सामान्य परिवार में हुआ था। संयोग से उसी दिन विश्व पर्यावरण दिवस भी पड़ता है। उनके पिता स्वर्गीय आनंद सिंह विष्ट वन विभाग में रेंजर थे। बाल्यकाल से राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रेरित योगी का जुड़ाव नब्बे के दशक में राम मंदिर आंदोलन से हो गया। राम मंदिर आंदोलन के दौरान ही वह इस आंदोलन के नायक गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ के संपर्क में आए। महंत जी के सानिध्य और उनसे प्राप्त नाथपंथ के बारे में मिले ज्ञान ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि गढ़वाल विश्वविद्यालय से स्नातक विज्ञान तक शिक्षा ग्रहण करने के बाद उन्होंने सन्यास लेने का निर्णय कर लिया। इसी क्रम में वह 1993 में गोरखनाथ मंदिर आ गए और नाथ पंथ की परंपरा के अनुरूप धर्म, अध्यात्म की तात्विक विवेचना और योग साधना में रम गए। उनकी साधना और अंतर्निहित प्रतिभा को देख महंत अवेद्यनाथ ने उन्हें 15 फरवरी 1994 को गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी के रूप में दीक्षा प्रदान किया। गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी के रूप में उन्होंने पीठ की लोक कल्याण और सामाजिक समरसता के ध्येय को सदैव विस्तारित किया।

22 साल की उम्र में ली नाथपंथ की दीक्षा
महज 22 साल की उम्र में योगी जी नाथपंथ में दीक्षित होकर वह सन्यासी (योगी) बने। इस रूप में वह गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ के उत्तराधिकारी बने। अवेद्यनाथ संत समाज एवं समाज में एक सर्व स्वीकार्य नाम था। इसलिए उनको राष्ट्र संत भी कहा जाता है। एक योग्य गुरु को एक योग्य शिष्य से अधिक क्या चाहिए। अपने गुरु के ब्रह्मलीन होने के बाद अपने पहले साक्षात्कार में योगी ने कहा भी था, ‘गुरुदेव के सम्मोहन ने सन्यासी बना दिया।’ दोनों का एक दूसरे पर अटूट भरोसा था। यही वजह रही कि पीठ के उत्तराधिकारी के रूप में धार्मिक विरासत सौंपने के कुछ साल बाद ही ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ ने अपने प्रिय शिष्य (योगी) को अपनी राजनीतिक विरासत भी सौंप दी।

14 सितंबर 2014 में बने गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर

महंत अवेद्यनाथ के ब्रह्मलीन होने के उपरांत वह14 सितंबर 2014 को गोरक्षपीठाधीश्वर (महंत) के रूप मे पदासीन हुए। इसी भूमिका के तदंतर वह इसी तिथि से अखिल भारतीय बारह भेष पंथ योगी सभा के अध्यक्ष भी हैं।

बेदाग रहा राजनीतिक सफर
योगी आदित्यनाथ को राजनीतिक दायित्व भी गोरक्षपीठ से विरासत में मिला है। उनके दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ गोरखपुर संसदीय क्षेत्र का एक बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उनके गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ गोरखपुर संसदीय क्षेत्र से चार बार सांसद और मानीराम विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रहे हैं। 1996 में गोरखपुर लोकसभा से चुनाव जीतने के बाद ही महंत अवेद्यनाथ ने घोषणा कर दी थी कि उनकी राजनीति का उत्तराधिकार भी योगी ही संभालेंगे। इसके बाद योगी 1998 के लोकसभा चुनाव में गोरखपुर से चुनाव मैदान में उतरे और जीत हासिल कर बारहवीं लोकसभा में उस वक्त सबसे कम उम्र (26 वर्ष) के सांसद बने। तब से 2014 तक लगातार पांच बार संसदीय चुनाव में जीत हासिल करने वाले वह विरले सांसदों में रहे।

मठ छूटा संस्कार वही
2017 में उत्तर प्रदेश में जब भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला तो पार्टी नेतृत्व ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया। 19 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की शपथ लेने वाले योगी ने तमाम उपलब्धियों के बीच न केवल शानदार कार्यकाल पूरा किया बल्कि सार्वजनिक जीवन में बेदाग छवि को भी बरकरार रखा है। इन आठ वर्षों के दौरान उनकी खुद की जीवनचर्या सन्यासी की ही भांति रही। सादगीपूर्ण व अनुशासित जीवनशैली में तनिक भी परिवर्तन नहीं आया है। सम्भवतः वह प्रदेश के अबतक के इकलौते मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने प्रदेश के हर जिले का कई बार दौरा करने के साथ नोएडा जाने के मिथक को भी तोड़ा है। पहले मुख्यमंत्री इस मिथक के भय से नोएडा नहीं जाते थे कि वहां जाने से सीएम की कुर्सी चली जाती है। योगी ने आधा दर्जन से अधिक बार नोएडा की यात्रा कर यह साबित किया है कि एक संत का ध्येय सिर्फ सत्ता बचाए रखना नहीं बल्कि लोक कल्याण होता है। मुख्यमंत्री बनने के बाद वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य बने और 2022 के विधानसभा चुनाव में एक लाख से अधिक वोटों से जीतकर और अपनी पार्टी बीजेपी को सूबे में प्रचंड बहुमत दिलाकर दोबारा मुख्यमंत्री बने।

योगी के नेतृत्व में बदल गया परसेप्शन, मजबूत हुई यूपी की पहचान
पहले कार्यकाल में योगी का फोकस प्रदेश के बाबत देश-दुनिया में जो खराब परसेप्शन था, उसको बदलने का था। इसमें कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस जैसी नीतियां कारगर रहीं। दूसरे कार्यकाल में फोकस प्रदेश की पहचान बदलने पर रहा। अब जब उनके दूसरे कार्यकाल का तीसरा साल पूरा होने जा रहा है, यूपी नए भारत का नया उत्तर प्रदेश के रूप में सबके सामने है। आज उत्तर प्रदेश की पहचान एक अपराधग्रस्त या दंगाग्रस्त प्रदेश के रूप में नहीं है। आज देश के अंदर उत्तर प्रदेश बेहतर कानून व्यवस्था के रूप में जाना जाता है और अलग-अलग राज्यों में उत्तर प्रदेश के मॉडल को उतारने और उसको जानने की उत्सुकता भी रहती है। बीते 8 वर्षों में उत्तर प्रदेश को देश की सातवें से दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के बाद अब लक्ष्य विकास के हर मानक पर नम्बर एक होने की है। नोएडा में फिल्म सिटी, डेटा पार्क, अयोध्या और जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, हेल्थपार्क, लेदर पार्क, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, मेट्रो रेल का विस्तार, रैपिड रेल विस्तार, ओडीओपी और एमएसएमई के जरिये निर्यात को दोगुना करने, ब्रांड उप्र को देश और दुनिया में स्थापित करने जैसे बहुआयामी कार्यक्रमों से उत्तर प्रदेश के विकास को और रफ्तार देने की तैयारी है। विकास के यह नए मानक प्रदेश को नई पहचान दिलाने वाले होंगे। प्रयागराज के महाकुंभ के रूप में दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक समागम के सफल आयोजन ने उनकी लोकप्रियता में एक और चार चांद लगा दिया।

संत के रूप में योगी की उपलब्धियां
वर्ष 1997, 2003, 2006 में गोरखपुर में और 2008 में तुलसीपुर (बलरामपुर) में विश्व हिन्दू महासंघ के अन्तर्राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन।
सहभोज के माध्यम से छुआछूत और अस्पृश्यता की भेदभावकारी रूढ़ियों पर प्रहार। सीएम योगी ‘यौगिक षटकर्म, ‘हठयोग: स्वरूप एवं साधना, ‘राजयोग: स्वरूप एवं साधना’ तथा ‘हिन्दू राष्ट्र नेपाल’ नामक पुस्तकों का लेखन करने वाले योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मन्दिर से प्रकाशित मासिक योग पत्रिका ‘योगवाणी’ के प्रधान सम्पादक भी हैं।

सीएम योगी ने रामलला के श्रीचरणों में झुकाया शीश, हनुमानगढ़ी में भी लगाई हाजिरी

सर्वोदय (अयोध्या):- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को रामनगरी पहुंचे। उन्होंने अपने दौरे का आगाज हनुमानगढ़ी में संकट मोचन के चरणों में हाजिरी लगाकर किया। यहां उन्होंने संतों से भी मुलाकात की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने श्रीरामलला के चरणों में भी प्रणाम निवेदित किया।

सीएम ने की प्रदेश के कल्याण की कामना
शुक्रवार सुबह तुलसीपुर में मां पाटेश्वरी के दर्शन-पूजन व स्थानीय लोगों से मिलने के उपरांत मुख्यमंत्री रामनगरी पहुंचे, जहां रामकथा पार्क स्थित हैलीपेड पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों व भाजपा नेताओं ने उनका स्वागत किया। रामकथा पार्क से सीएम योगी सीधे हनुमानगढ़ी पहुंचे, जहां रामभक्त संकटमोचन हनुमान के दरबार में हाजिरी लगाई और प्रदेश के कल्याण की कामना की। सीएम ने दर्शन-पूजन के उपरांत निकलते समय आमजन का अभिवादन भी स्वीकार किया।

मुख्यमंत्री ने संतों से भी की मुलाकात, पूछा कुशलक्षेम
मुख्यमंत्री ने हनुमानगढ़ी में संतों से भी मुलाकात की और उनका कुशलक्षेम जाना। यहां मुख्यमंत्री सबसे पहले गद्दीनशीन महंत प्रेमदास महाराज जी महाराज से मिले। इसके बाद मुख्यमंत्री यहां अन्य संतों से भी मिले और उनका हालचाल जाना।

निर्माण कार्यों की प्रगति के बारे में ली जानकारी
इसके बाद मुख्यमंत्री श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पहुंचे और श्रीरामलला के चरणों में शीश झुकाया। मुख्यमंत्री ने यहां विधिवत दर्शन-पूजन भी किया। इसके बाद उन्होंने राम मंदिर निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया, यहां चल रहे निर्माण कार्य की प्रगति के बारे में भी जानकारी ली। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्र ने मुख्यमंत्री को यहां चल रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने इस दौरान आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।इस दौरान योगी सरकार के मंत्री सूर्य प्रताप शाही, राकेश सचान, महापौर गिरीश पति त्रिपाठी, विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, रामचंद्र यादव, अभय सिंह, चंद्रभानु पासवान आदि मौजूद रहे।