सर्वोदय/नई दिल्ली:- संसद में वक्फ विधेयक पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच दिलचस्प और मजेदार सवाल-जवाब का सिलसिला देखने को मिला। यह वाकया तब हुआ जब अखिलेश यादव ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव पर तंज कसते हुए सवाल उठाया।
अखिलेश यादव का तंज:
वक्फ विधेयक पर चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने बीजेपी पर कटाक्ष करते हुए कहा, “जो पार्टी यह दावा करती है कि वह दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है, वह अभी तक अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष क्यों नहीं चुन पा रही है? बीजेपी के अंदर ऐसा क्या हो रहा है?” उनका यह सवाल सुनकर सदन में मौजूद उनके सहयोगी भी समर्थन देने लगे, और अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव भी मुस्कराते हुए दिखीं।
अमित शाह का मजेदार जवाब:
अखिलेश यादव के सवाल के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने तपाक से खड़े होकर हंसते हुए इसका मजेदार जवाब दिया। उन्होंने कहा, “अखिलेश जी ने हंसते-हंसते सवाल किया है, तो मैं भी हंसते हुए जवाब देता हूं। जहां तक बात बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की है, हमारी पार्टी में करोड़ों कार्यकर्ता हैं और हमें इन करोड़ों सदस्यों में से किसी एक को चुनने की प्रक्रिया करनी होती है, इसलिए इसमें समय लगता है। जबकि आपकी पार्टी में सिर्फ पांच लोग हैं, और वो भी परिवार में से ही अध्यक्ष चुनने हैं, तो आपको इसमें कोई समय नहीं लगता।” अमित शाह ने आगे कहा, “मैं यह भविष्यवाणी करता हूं कि आप (अखिलेश यादव) 25 साल तक अध्यक्ष रहेंगे!” उनके इस मजेदार पलटवार पर सदन में हंसी का माहौल बन गया और सभी सांसद जोर-जोर से ठहाके लगाने लगे।
सदन में हंसी की लहर:
अमित शाह की बात पर खुद अखिलेश यादव भी मुस्कराए और डिंपल यादव भी इस मजेदार पलटवार पर हंसी रोक नहीं पाईं। जब शाह ने अखिलेश यादव का नाम लिया, तो वह हाथ जोड़कर खड़े हो गए थे। इसके बाद अखिलेश यादव ने फिर से अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, “जो बात निकलकर आ रही है, मैं उसे और आगे बढ़ाना चाहता हूं। कहीं ऐसा तो नहीं है कि जो हाल ही में यात्रा हुई थी, वह 75 साल के विस्तार वाली यात्रा ही तो नहीं थी?” यह मजेदार नोकझोंक और व्यंग्यपूर्ण जवाबों का सिलसिला सदन में एक हल्के-फुल्के पल का कारण बना और सांसदों ने इसका आनंद लिया।
अखिलेश ने बीजेपी अध्यक्ष पर चुटकी लेकर किया सवाल,अमित शाह ने दिया मजेदार जवाब, सदन में गूंजे ठहाके
बालों में मेहंदी लगाने के फायदे और नुकसान – जानिए क्या है सही चुनाव?
सर्वोदय:- बालों को खूबसूरत और मजबूत बनाने के लिए मेहंदी का उपयोग सदियों से किया जाता रहा है। यह एक प्राकृतिक डाई है, जो बालों को रंग देने के साथ-साथ उन्हें पोषण भी देती है। हालांकि, इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं, जिन्हें जानना जरूरी है। आइए जानते हैं बालों में मेहंदी लगाने के फायदे और नुकसान।
बालों में मेहंदी लगाने के फायदे
1. प्राकृतिक हेयर डाई
मेहंदी बालों को केमिकल डाई की तुलना में ज्यादा सुरक्षित तरीके से रंग देती है। यह बालों को खूबसूरत ब्राउनिश-रेडिश शेड देती है और सफेद बालों को छुपाने में मदद करती है।
2. बालों की जड़ों को मजबूती देती है
मेहंदी में मौजूद प्राकृतिक तत्व स्कैल्प को पोषण देते हैं और बालों की जड़ों को मजबूत बनाते हैं, जिससे बाल झड़ने की समस्या कम होती है।
3. डैंड्रफ और स्कैल्प इन्फेक्शन से बचाव
मेहंदी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं, जो डैंड्रफ और खुजली की समस्या को दूर करने में मदद करते हैं।
4. बालों को चमकदार और घना बनाती है
मेहंदी लगाने से बालों की शाइन बढ़ती है और वे अधिक घने नजर आते हैं। यह बालों को कोमल और सिल्की बनाती है।
5. ऑयली स्कैल्प को नियंत्रित करती है
अगर आपके बाल जल्दी चिपचिपे और तैलीय हो जाते हैं, तो मेहंदी स्कैल्प के एक्स्ट्रा ऑयल को कंट्रोल करने में मदद करती है।
बालों में मेहंदी लगाने के नुकसान
1. बालों को ड्राई बना सकती है
मेहंदी का अधिक उपयोग करने से बाल रूखे और बेजान हो सकते हैं। इससे बचने के लिए मेहंदी में दही, एलोवेरा या नारियल तेल मिलाना जरूरी है।
2. सही शेड न मिलना
हर व्यक्ति के बालों की बनावट अलग होती है, इसलिए मेहंदी का रंग सभी पर समान नहीं आता। कई बार यह मनचाहा कलर नहीं देती।
3. बार-बार लगाने पर बालों की नेचुरल रंगत बदल सकती है
लगातार मेहंदी लगाने से बालों का प्राकृतिक रंग बदल सकता है और उनमें लाल या नारंगी शेड आ सकता है।
4. सफेद बालों को पूरी तरह कवर नहीं कर पाती
अगर आपके बाल बहुत ज्यादा सफेद हैं, तो मेहंदी पूरी तरह उन्हें कवर नहीं कर पाती। इसे गहरा रंग देने के लिए इंडिगो पाउडर का उपयोग करना पड़ सकता है।
5. एलर्जी या स्किन रिएक्शन हो सकता है
कुछ लोगों को मेहंदी से एलर्जी या खुजली की समस्या हो सकती है। इसलिए इसे लगाने से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है।
क्या मेहंदी लगाना सही है?
अगर आप बालों को केमिकल डाई से बचाना चाहते हैं और एक प्राकृतिक उपाय अपनाना चाहते हैं, तो मेहंदी एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। हालांकि, इसे लगाने से पहले बालों की टाइप और जरूरत को समझना जरूरी है।
मेहंदी लगाने का सही तरीका
मेहंदी में आंवला, शिकाकाई, दही या नारियल तेल मिलाने से बाल ज्यादा हेल्दी रहेंगे।इसे लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें, ताकि एलर्जी का पता लगाया जा सके।हफ्ते में एक बार से ज्यादा मेहंदी लगाने से बचें, ताकि बाल ड्राई न हों।
मेहंदी धोने के बाद अच्छे मॉइस्चराइजिंग शैंपू और कंडीशनर का इस्तेमाल करें।अगर आप प्राकृतिक तरीके से बालों की देखभाल करना चाहते हैं, तो मेहंदी एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकती है, लेकिन इसे सही तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है।
मुझे मेरी बीवी से बचाओ साहब- रोते हुए थाने पहुंचा युवक, पत्नी ने पति पर बरसाए जमकर थप्पड़,
सर्वोदय/मध्यप्रदेश:- मध्यप्रदेश के पन्ना से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक लोको पायलट पति ने अपनी पत्नी की प्रताड़ना से तंग आकर पुलिस से मदद की गुहार लगाई है। पीड़ित पति लोकेश कुमार मांझी (30) ने एसपी को ज्ञापन सौंपते हुए कहा— “साहब, मुझे मेरी पत्नी से बचाइए!”
सीसीटीवी फुटेज में कैद हुआ हैरान करने वाला मंजर
लोकेश ने अपनी शिकायत के साथ सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस को सौंपे हैं, जिनमें उनकी पत्नी उन्हें बेरहमी से पीटती हुई नजर आ रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में लोकेश हाथ जोड़कर रहम की भीख मांगते दिख रहे हैं, लेकिन उनकी पत्नी उन पर लगातार थप्पड़ बरसाती जा रही है।
शादी के बाद शुरू हुआ अत्याचार
पीड़ित ने बताया कि उनकी शादी जून 2023 में हर्षिता रैकवार से हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही उनकी पत्नी, सास और साला सोने-चांदी और पैसों की मांग करने लगे। जब उन्होंने मांग पूरी करने से इनकार किया, तो मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना शुरू हो गई।
कैमरे में कैद हुआ घरेलू हिंसा का सच
मारपीट की घटना 20 मार्च को हुई, जो घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। लोकेश ने बताया कि लगातार प्रताड़ना झेलने के बाद उन्होंने कैमरा लगाया, ताकि उनकी पत्नी की हकीकत सबके सामने आ सके। इस घटना के बाद उन्होंने सतना कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पीड़ित ने न्याय की मांग की
पति ने पुलिस से न्याय की अपील करते हुए कहा कि वह मानसिक रूप से टूट चुके हैं और पत्नी के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहते हैं। फिलहाल, इस मामले को लेकर पुलिस जांच में जुट गई है।
सपा नेता ने यूपी के डिप्टी CM ब्रजेश पाठक को दिया अनोखा तोहफा, सोशल मीडिया पर मचा बवाल
सर्वोदय/लखनऊ:- राजधानी लखनऊ में आयोजित ‘लंतरानी हास्य उत्सव’ के मंच पर एक रोचक नज़ारा देखने को मिला, जिसने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी। सोशल मीडिया पर इस घटना की खूब चर्चा हो रही है।
दरअसल, समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता दीपक रंजन ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को प्रतीकात्मक रूप से नीला ड्रम भेंट किया। इस दौरान मंच पर कई वरिष्ठ नेता और कवि भी मौजूद रहे।
क्यों हुआ ‘नीला ड्रम’ विवादों में?
हाल ही में मेरठ में हुए सौरभ राजपूत हत्याकांड के बाद से नीले ड्रम की चर्चा जोरों पर है। इस हत्याकांड में सौरभ की पत्नी मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर उसे मौत के घाट उतार दिया था। शव के टुकड़ों को नीले प्लास्टिक ड्रम में भरकर सीमेंट डाल दिया गया था, जिससे शव को छुपाया जा सके।
ऐसे में जब सपा नेता ने इसी रंग का ड्रम भाजपा नेता व उत्तर ब्रजेश उपमुख्यमंत्री पाठक को सौंपा, तो राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। यह घटना कई तरह की अटकलों को जन्म दे रही है, क्योंकि नीले ड्रम को अब मेरठ कांड से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, दीपक रंजन ने इसे महज हास्य-व्यंग्य के रूप में दिया गया एक प्रतीकात्मक उपहार बताया है।
ब्रजेश पाठक की प्रतिक्रिया
इस कार्यक्रम में शामिल होने के बाद ब्रजेश पाठक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा—
“लखनऊ में आयोजित 7वें लंतरानी हास्य उत्सव में पत्नी संग शामिल होकर प्रसिद्ध कवियों की मनोरंजक प्रस्तुतियों का आनंद लिया। इस मौके पर कई सम्मानित गणमान्यजन उपस्थित रहे।” हालांकि, इस पूरे वाकये को लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
कल वक्फ बिल पर आर-पार, 8 घंटे की अग्निपरीक्षा का गेम प्लान तैयार
सर्वोदय/नई दिल्ली:- लोकसभा में बुधवार को पक्ष और विपक्ष में जोरदार घमासान दिखाई देगा। मोदी सरकार चर्चा और पास कराने के लिए वक्फ संशोधन विधेयक सदन में ला रही है। इसके लिए दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे तक का समय तय किया गया है।दोनों ही पक्ष इसको लेकर अभी से रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस सहित कई पार्टियों ने लोकसभा के अपने सांसदों को व्हिप भी जारी किया है और सदन में मौजूद रहने को कहा है। विपक्षी दलों ने इसको लेकर एक बड़ी बैठक की है,जिसमें ये रणनीति बनाई गई है कि वक्फ बिल को लेकर सरकार का किस तरह मुकाबला किया जाए।
चर्चा के दौरान लोकसभा में जबरदस्त हंगामा होने का आसार
चर्चा के दौरान लोकसभा में जबरदस्त हंगामा होने का आसार हैं,क्योंकि विपक्षी दल इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं और इसे असंवैधानिक एवं मुस्लिम समुदाय के हितों के खिलाफ बता रहे हैं। वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर विपक्षी दल शुरू से ही असहमति जता रहे हैं l
उनका कहना है कि यह विधेयक अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों पर प्रभाव डाल सकता है। वहीं मोदी सरकार का दावा है कि यह संशोधन वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने और दुरुपयोग रोकने के लिए जरूरी है।
भाजपा ने अपने सांसदों के लिए व्हिप किया जारी
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लोकसभा में मुख्य सचेतक संजय जायसवाल ने व्हिप जारी कर बुधवार 2 अप्रैल को सभी लोकसभा सांसदों को सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश गया है।
भाजपा का कहना है कि लोकसभा में बुधवार को कुछ महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को पारित किया जाना है, जिसके लिए पार्टी के सभी सांसदों की उपस्थिति अनिवार्य है। भाजपा ने अपने सांसदों को निर्देश दिया है कि वे सदन में उपस्थित रहकर सरकार के पक्ष का समर्थन करें और विधायी प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न करने में सहयोग दें।
कांग्रेस ने अपने लोकसभा सदस्यों को व्हिप किया जारी
कांग्रेस ने भी अपने सभी लोकसभा सांसद को व्हिप जारी कर अगले तीन दिनों तक सदन में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।कांग्रेस ने तीन पंक्ति का व्हिप तब जारी किया,जब मोदी सरकार ने स्पष्ट किया कि विवादास्पद वक्फ (संशोधन) विधेयक बुधवार को चर्चा और पारित कराने के लिए लोकसभा में लाया जाएगा।
लोकसभा में बिल का विरोध करेगी कांग्रेस
बिल को लेकर कांग्रेस का कहना है कि पार्टी का जो रुख पहले था वही आज भी है।सदन में इस बिल का विरोध किया जाएगा, क्योंकि इस बिल के माध्यम से एनडीए सरकार की बांटने की कोशिश है।
कांग्रेस के सदस्यों ने जेपीसी में जो विचार व्यक्त किए हैं, वही विचार आज भी है,इस बिल को लाकर सिर्फ बांटने का प्रयास किया जा रहा है,भाजपा की सरकार हमेशा ही ऐसा करती है,इसका एक स्टेप वक्फ संशोधन बिल है।कांग्रेस हमेशा से अल्पसंख्यकों के साथ रही है।
वक्फ बिल का उद्देश्य लोगों को न्याय दिलाना
सत्ता पक्ष के सांसदों का कहना है कि वक्फ संशोधन विधेयक गरीब मुसलमानों के फायदे के लिए है।उन्होंने विपक्ष पर वक्फ संशोधन विधेयक के बारे में देश को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि देश के गरीब मुसलमान यह समझ चुके हैं कि यह विधेयक उनके हित में है।
उन्होंने कहा कि वक्फ की बड़ी-बड़ी प्रॉपर्टी पर बड़े मुसलमानों का कब्जा होता है, आम हिंदुओं की जमीन पर भी कब्जा कर ली जाती है, अगर सरकार द्वारा संसद में कोई बिल पेश किया जा रहा है तो इसका उद्देश्य लोगों को न्याय दिलाना है। न्यायालय, उच्च न्यायालय और सिविल न्यायालय सभी उनके लिए सुलभ होंगे। सभी को नैसर्गिक न्याय मिलेगा, इस पर किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
टीडीपी ने वक्फ संशोधन विधेयक का किया समर्थन
इसी बीच एनडीए में शामिल तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने भी मोदी सरकार को वक्फ संशोधन विधेयक पर समर्थन दिया है। टीडीपी ने घोषणा की है कि वह इस बिल के पक्ष में मतदान करेगी, इससे सरकार को विधेयक पारित कराने में और मजबूती मिलेगी।
सीएम नीतीश कुमार ने वक्फ बिल को लेकर अपनी पार्टी के नेताओं से की बात
सीएम नीतीश कुमार ने वक्फ बिल को लेकर अपनी पार्टी जेडीयू के नेताओं से बात की है। जेडीयू एनडीए में शामिल है। पार्टी नेताओं ने कहा है कि हमने इस विधेयक को लेकर सरकार को अहम सुझाव दिए हैं, हमारे सुझावों को तरजीह भी दी गई है।
सूत्रों के अनुसार जेडीयू ने सरकार से कहा है कि नए कानून को पिछली तारीख से लागू नहीं करना चाहिए,यानी मौजूदा पुरानी मस्जिद, दरगाह या अन्य मुस्लिम धार्मिक स्थान के साथ कोई छेड़छाड़ न हो, वक्फ कानून में इसका स्पष्ट प्रावधान होना चाहिए।
जेडीयू ने यह भी कहा था कि जमीन राज्यों का विषय है,लिहाजा वक्फ की जमीन के बारे में किसी भी फैसले में राज्यों की स्पष्ट राय भी ली जानी चाहिए। सूत्रों के अनुसार जेपीसी द्वारा सुझाए गए 14 महत्वपूर्ण संशोधनों में इन्हें भी शामिल किया गया है।
वक्फ बिल को लेकर जेडीयू के सुझाव
वक्फ संशोधन विधेयक के पारित होने के बाद इसमें राज्य सरकार का अधिकार क्षेत्र बना रहेगा।
संपत्ति वक्फ की है या नहीं यह तय करने के लिए राज्य सरकार कलेक्टर से ऊपर के रैंक के अधिकारी को नियुक्त कर सकती है।
मौजूदा मस्जिदों, दरगाहों या अन्य मुस्लिम धार्मिक स्थानों पर कोई छेड़छाड़ नहीं होगी।
यह कानून पुरानी तारीख से लागू नहीं होगा।
वक्फ की सूची को गजट में प्रकाशन के 90 दिनों के भीतर ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट करना अनिवार्य होगा।
विधेयक के अनुसार वक्फ परिषद में पदेन सदस्यों के अलावा दो गैर-मुस्लिम सदस्य शामिल होंगे। साथ ही वक्फ बोर्ड में वक्फ मामलों से संबंधित संयुक्त सचिव पदेन सदस्य होंगे।
लोकसभा में बिल को स्पष्ट बहुमत
लोकसभा में फिलहाल 542 सांसद हैं।इसमें भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। भाजपा के पास 240 सदस्य हैं। भाजपा को एनडीए में शामिल दलों का समर्थन हासिल है, इस समय एनडीए में शामिल दलों की लोकसभा में संख्या 293 है, इनमें टीडीपी और जेडीयू जैसे दल हैं, जिनके सदस्यों की संख्या दहाई के अंक में हैं,ऐसे में बिल पास कराने को लेकर संख्या सत्ता पक्ष के साथ है।
बिल के विरोध में विपक्ष के 245 सांसद
लोकसभा के 245 सांसद इस बिल के विरोध में हैं, इनमें कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है। लोकसभा में कांग्रेस के 99 सांसद हैं। कांग्रेस के अलावा केवल सपा और तृणमूल कांग्रेस के सांसदों की ही संख्या दहाई में है।
लोकसभा में सपा के 37 तो तृणमूल कांग्रेस के 28 सांसद हैं। विपक्षी गठबंधन में उद्धव ठाकरे की शिवसेना और शरद पवार की एनसीपी भी शामिल है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना के नौ और शरद पवार की एनसीपी के आठ सांसद हैं।
इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई।विपक्ष ने विधेयक पर चर्चा के लिए 12 घंटे का समय आवंटित करने की मांग की,जबकि मोदी सरकार ने 8 घंटे का कम समय रखने पर जोर दिया। इसके बाद मोदी सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक हुई और विपक्षी दलों के नेता बैठक छोड़कर बाहर आ गए।
बाद में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कुछ दल चार से छह घंटे की चर्चा चाहते थे।वहीं विपक्ष 12 घंटे की चर्चा कराने पर अड़ा रहा।हालांकि लोकसभा अध्यक्ष ने चर्चा के लिए आठ घंटे निर्धारित किए हैं और सदन की भावना के अनुरूप इस अवधि को बढ़ाया जा सकता है।रिजिजू ने इस बात पर हैरानी जतायी कि विपक्ष ने बीएसी की बैठक से वॉकआउट क्यों किया।
रिजिजू ने कहा कि वह बुधवार को 12 बजे निचले सदन में प्रश्नकाल समाप्त होते ही विधेयक को चर्चा और पारित कराने के लिए रखेंगे। विपक्ष के कुछ दल चर्चा से बचने के लिए बहाने बना रहे हैं। लोकसभा द्वारा विधेयक पारित किए जाने के बाद राज्यसभा को इसकी सूचना दी जाएगी।
वहीं लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने कहा कि विपक्ष बीएसी की बैठक से बाहर आ गया, क्योंकि सरकार अपना एजेंडा थोप रही है और मतदाता पहचान पत्र और आधार कार्ड को जोड़ने के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग स्वीकार नहीं की गई। गौरव ने आरोप लगाया कि विपक्ष को मौका नहीं दिया जा रहा।
पिछले साल विधेयक पेश करते समय सरकार ने इसे दोनों सदनों की एक संयुक्त समिति को भेजने का प्रस्ताव किया था,समिति द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत किये जाने के बाद उसकी सिफारिश के आधार पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मूल विधेयक में कुछ बदलावों को मंजूरी दी थी।विधेयक में भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन में सुधार का प्रावधान प्रस्तावित है।
सपा से बगावत करने वाले 3 विधायक अमित शाह से मिले, यूपी कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं तेज
सर्वोदय/नई दिल्ली:- समाजवादी पार्टी (सपा) से बगावत कर भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) के प्रत्याशी का समर्थन करने वाले सात में से तीन विधायक मंगलवार को दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह से मिले। इस मुलाकात में बाहुबली विधायक अभय सिंह के साथ राकेश सिंह और विनोद चतुर्वेदी भी मौजूद रहे। भाजपा के राज्यसभा सांसद संजय सेठ भी इस बैठक में शामिल थे। इस मुलाकात के बाद एक बार फिर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
सपा से बगावत करने के बाद से ही इन विधायकों के भविष्य को लेकर विभिन्न अटकलें लगाई जा रही हैं। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इन्होंने भाजपा का समर्थन किया था, लेकिन इन विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बावजूद पार्टी को लोकसभा चुनाव में विशेष लाभ नहीं हुआ। इस स्थिति के बाद से इनकी राजनीतिक भविष्यवाणी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं।
भा.ज.पा. में इस समय संगठन चुनाव हो रहे हैं और योगी सरकार के कैबिनेट विस्तार को लेकर विचार विमर्श हो रहा है। ऐसे में इन विधायकों की गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इस मुलाकात में इन विधायकों की भविष्य में राजनीति को लेकर भी चर्चा हुई। साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की रणनीति और इन विधायकों की भूमिका पर भी विचार विमर्श किया गया है।
मुलाकात की जानकारी खुद विधायक अभय सिंह ने सार्वजनिक की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, “भारतीय राजनीति के चाणक्य, देश के यशस्वी गृह एवं सहकारिता मंत्री आदरणीय श्री अमित शाह जी से शिष्टाचार भेंट कर आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन प्राप्त किया। आपका प्रेरणादायी मार्गदर्शन व आशीर्वाद सदैव ही नव-ऊर्जा एवं उत्साह के संचार को गति प्रदान करता है।”
हाल ही में अभय सिंह को लखनऊ हाईकोर्ट से जानलेवा हमले के मामले में बड़ी राहत मिली थी, और उनकी विधायकी पर लटकी तलवार हटा दी गई थी। इससे पहले कोर्ट के दो न्यायधीशों ने अलग-अलग फैसले दिए थे, लेकिन तीसरे न्यायधीश के फैसले ने अभय सिंह को राहत दी थी। कोर्ट से राहत मिलने के बाद से ही अभय सिंह की राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अगले विधानसभा चुनाव में अभी दो साल का समय बाकी है, और इस दौरान ये विधायक अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
गोवा में यूपी अग्निशमन विभाग को सम्मानित किया गया, महाकुंभ में अग्नि सुरक्षा में उत्कृष्ट कार्य के लिए मिली सराहना
लखनऊ/गोवा– प्रयागराज महाकुंभ का समापन हुए एक माह हो चुका है| इस दौरान उत्तर प्रदेश अग्निशमन विभाग द्वारा किए गए सराहनीय कार्य की गूंज अब भी पूरे देश में सुनाई दे रही है। महाकुंभ के 45 दिवसीय आयोजन में प्रदेश के अग्निशमन विभाग ने अपनी तत्परता और उत्कृष्टता से महाकुंभ में कोई भी जनहानि होने से बचाई। विभाग के इस उत्कृष्ट कार्य को अब देश भर में सराहा जा रहा है और पुरस्कृत भी किया जा रहा है। इसी कड़ी में, गोवा में मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने यूपी अग्निशमन विभाग की सराहना करते हुए अधिकारियों को सम्मानित किया।
महाकुंभ के दौरान प्रयागराज के संगम तट पर करीब 66 करोड़ श्रद्धालुओं ने स्नान किया था। यह मेला क्षेत्र 25 सेक्टरों में बंटा हुआ था, लगभग 4000 हेक्टेयर में बसा था इतना ही नहीं हर दिन लगभग एक करोड़ से अधिक श्रद्धालु यहां पहुंच रहे थे। इस आयोजन में, यूपी अग्निशमन विभाग ने अत्याधुनिक उपकरणों और मुस्तैदी से अग्नि दुर्घटनाओं पर काबू पाया |
यूपी अग्निशमन विभाग के नोडल अधिकारी प्रमोद शर्मा ने बताया कि गोवा में आयोजित सम्मान समारोह में, डायरेक्टर नितिन वी. रायकर की उपस्थिति में प्रदेश के अग्निशमन विभाग के अधिकारियों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने खुद जाकर प्रदेश के अग्निशमन विभाग के अधिकारियों को मोमेंटो देकर उनका सम्मान किया और उनकी भूमिका की सराहना की। इस दौरान, मुख्यमंत्री ने महाकुंभ में अग्नि सुरक्षा की तैयारियों और क्विक रिस्पांस की जानकारी ली।
महाकुंभ के आयोजन के दौरान, मेला क्षेत्र में 54 अग्निशमन केंद्र, 27 चौकियां, 2200 प्रशिक्षित अग्निशमन कर्मी और 351 अग्निशमन वाहन तैनात थे। विभाग ने 4 आर्टिकुलेटिंग वाटर टावर, क्विक रिस्पांस व्हीकल, अग्निशमन रोबोट, और फायर मिस्ट बाइक जैसी अत्याधुनिक अग्निशमन तकनीक का इस्तेमाल किया। इसके अलावा, बोट और पांटून पुलों पर नदी के पानी का उपयोग करने में सक्षम अग्निशमन नावें भी तैनात की गई थीं। उत्तर प्रदेश अग्निशमन विभाग का यह सराहनीय कार्य न केवल महाकुंभ को सुरक्षित बनाने में सहायक साबित हुआ, बल्कि इसके परिणामस्वरूप विभाग को सम्मान और प्रशंसा भी प्राप्त हुई है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में उत्तर रेलवे ने हासिल की बड़ी उपलब्धियां
सर्वोदय/ नई दिल्ली:- उत्तर रेलवे महाप्रबंधक अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि उत्तर रेलवे ने वित्तीय अनुशासन, संचालन दक्षता और कर्मचारियों के विकास में बड़ी प्रगति की है। इस वर्ष पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) का 100% उपयोग किया गया और पिछले साल की तुलना में राजस्व व्यय (रिवेन्यू एक्सपेंडिचर) में बचत दर्ज की गई। उल्लेखनीय है कि इस अवधि में विभिन्न सरकारी विभागों से 98.88 करोड़ रुपये वसूल किए गए, जबकि स्टेशनों के 71.76 करोड़ रु की बकाया राशि का भुगतान के किया गया।
महाप्रबंधक ने बताया कि वित्तीय जांच और आंतरिक निरीक्षण से करीब 147.58 करोड़ रुपये की बचत हुई और 878.50 करोड़ रुपये के वसूली योग्य बिलों का निपटारा किया गया। 1,15,793 कर्मचारियों की छुट्टी के आवेदन मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) के जरिए जांचे गए। साथ ही, 2024-2030 के बीच सेवानिवृत्त होने वाले 12,169 मामलों में से 9,784 कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड की पूर्व-जांच कर समय पर निपटान सुनिश्चित किया गया ।
इसके अलावा, 250 नए जूनियर अकाउंट्स असिस्टेंट और अकाउंट्स क्लर्कों के लिए राष्ट्रीय रेल संग्रहालय में ओरिएंटेशन प्रोग्राम आयोजित किया गया। साथ ही, आयकर, अनुशासन और अपील नियम (D&AR) और कानूनी मामलों पर विशेष सत्र के साथ उत्तर रेलवे मुख्यालय में बजट पर विशेष कार्यशाला भी आयोजित की गई ।
उत्तर रेलवे ने TIAs ई-बुलेटिन भी शुरू किया, जिसका दूसरा संस्करण दिसंबर 2024 में जारी किया गया। इसमें जन साधारण टिकट बुकिंग सेवा (JTBS) की कार्यप्रणाली को प्रमुखता से शामिल किया गया।
ये उपलब्धियां उत्तर रेलवे की सुव्यवस्थित वित्तीय प्रबंधन, संचालन सुधार और सेवाओं में गुणवत्ता लाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। आगे भी, उत्तर रेलवे अपने कार्यों को और बेहतर बनाने और सभी हितधारकों के लिए उत्कृष्ट सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। उक्त जानकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय मुख्य जनसंपर्क अधिकारी नई दिल्ली ने साझा किया |
सीएम योगी का बड़ा बयान: सड़कें चलने के लिए, नमाज के लिए नहीं
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अदा करने को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सड़कें चलने के लिए होती हैं, न कि धार्मिक आयोजनों के लिए। इसके साथ ही उन्होंने वक्फ (संशोधन) विधेयक को लेकर भी अपनी राय रखी और कहा कि वक्फ संपत्तियों पर चंद लोगों ने कब्जा जमा रखा है, जिससे गरीब मुसलमानों को कोई लाभ नहीं मिला है।
सड़क पर नमाज को लेकर कड़ा संदेश
एक इंटरव्यू के दौरान सीएम योगी ने कहा, “सड़कें सार्वजनिक आवागमन के लिए होती हैं। धार्मिक अनुशासन का पालन आवश्यक है। प्रयागराज में 66 करोड़ श्रद्धालु आए, लेकिन कोई अव्यवस्था नहीं हुई। त्योहार और उत्सव अनुशासन का प्रतीक होने चाहिए, न कि सार्वजनिक असुविधा का कारण।”
कांवड़ यात्रा और मुहर्रम की तुलना पर जवाब
मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा और मुहर्रम जुलूस की तुलना करने वालों को जवाब देते हुए कहा, “कांवड़ यात्रा हरिद्वार से गाजियाबाद और एनसीआर तक जाती है, इसलिए यह सड़कों पर चलती है। क्या हमने कभी किसी पारंपरिक मुस्लिम जुलूस पर रोक लगाई? नहीं। हां, सुरक्षा कारणों से ताजिया के आकार को छोटा रखने की सलाह दी जाती है, जैसे कांवड़ यात्रा में भी नियमों का पालन किया जाता है।”
ईद और नमाज पर सीएम योगी का बयान
उन्होंने कहा, “ईद के दिन सड़क पर नमाज पढ़ने के बजाय ईदगाह और मस्जिद में जाना चाहिए। सार्वजनिक जगहों पर धार्मिक आयोजनों से यातायात बाधित नहीं होना चाहिए। कानून सभी के लिए समान है, इसलिए नियमों का पालन करना जरूरी है।”
वक्फ संशोधन विधेयक पर सीएम योगी की राय
वक्फ (संशोधन) विधेयक पर पूछे गए सवाल पर सीएम योगी ने कहा कि यह सुधार की जरूरत है। उन्होंने कहा, “वक्फ संपत्तियों का उपयोग निजी स्वार्थ के लिए किया जा रहा है। क्या वक्फ बोर्ड ने कभी मुसलमानों के लिए कोई कल्याणकारी कार्य किया? सरकारी संपत्तियों पर कब्जा करने का यह माध्यम बन चुका है, इसलिए इसमें सुधार की जरूरत है।”
योगी आदित्यनाथ का बयान साफ संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक स्थानों पर अनियंत्रित धार्मिक आयोजनों को रोकने के लिए सख्त रुख अपना रही है। उनका कहना है कि धर्म का पालन अनुशासन के साथ किया जाना चाहिए, न कि सार्वजनिक असुविधा के रूप में।



