सर्वोदय/देश-विदेश:- म्यांमार में आए विनाशकारी भूकंप के कारण मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 1644 तक पहुंच गया है। वहीं, 3400 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। भूकंप के बाद राहत और बचाव कार्य तेज़ी से चल रहे हैं। म्यांमार में लगातार छह भूकंप के झटके महसूस किए गए थे और यह सिलसिला अब भी जारी है। कल से आज तक म्यांमार में 16 बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। यूरेशियन और इंडो-ऑस्ट्रेलियाई प्लेटों के बीच टकराव के कारण म्यांमार भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील है और यहां भूकंप आने का खतरा हमेशा बना रहता है।
भूकंप के प्रभाव: म्यांमार में भूकंप की तीव्रता इतनी अधिक थी कि यह कई इलाकों में भारी तबाही का कारण बन गई। सागाइंग फॉल्ट, जो म्यांमार के कई प्रमुख शहरों जैसे यांगून, मांडले, और बागो से होकर गुजरता है, ने इस आपदा के खतरे को और बढ़ा दिया है।
भारत का समर्थन: भारत ने संकट के इस समय में म्यांमार के साथ अपनी एकजुटता दिखाई है। ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के तहत भारत ने म्यांमार को राहत और बचाव कार्यों के लिए 15 टन सामग्री, 80 सदस्यीय एनडीआरएफ टीम और एक फील्ड अस्पताल भेजा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार के वरिष्ठ जनरल से फोन पर बात कर उन्हें इस विनाशकारी भूकंप में हुई मौतों पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए लिखा, “भारत इस कठिन समय में म्यांमार के साथ खड़ा है। ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत आपदा राहत सामग्री, मानवीय सहायता, खोज और बचाव दल को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है।”
भविष्य की स्थिति: म्यांमार में भूकंप के कारण हर साल कई बार भूकंपीय घटनाएं होती रहती हैं, जिससे यहां के लोग हमेशा भूकंप के खतरे से जूझते रहते हैं। 1990 से 2019 के बीच म्यांमार और उसके आस-पास के क्षेत्रों में 3.0 या उससे अधिक तीव्रता वाले लगभग 140 भूकंप आए हैं। भूकंप के बाद म्यांमार में राहत कार्यों की रफ्तार तेज़ कर दी गई है, और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी इस संकट की घड़ी में म्यांमार के साथ है।
म्यांमार में भूकंप से 1644 लोगों की मौत, 3400 से अधिक घायल; राहत कार्य जारी
चैत्र नवरात्र कल से शुरू, सुबह इतने बजे शुरू हो जाएगा कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
सर्वोदय/लखनऊ:- हिन्दू धर्म में चैत्र नवरात्र का महत्व बहुत अधिक है, जो हर साल चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होता है। इस वर्ष चैत्र नवरात्र 2025 का आरंभ कल, 30 मार्च, रविवार से होगा। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के भक्त उनकी पूजा-अर्चना के लिए तैयार होते हैं और व्रत रखते हैं।
कलश/घटस्थापना का शुभ मुहूर्त:
चैत्र नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना की जाती है, जो इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण धार्मिक रस्म है। इस वर्ष घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 30 मार्च को सुबह 6:08 बजे से 10:08 बजे तक रहेगा। इस समय के बीच श्रद्धालु अपने घरों में कलश स्थापित करके मां दुर्गा की पूजा आरंभ करेंगे। नवरात्रि के पहले दिन का महत्व विशेष रूप से इस रूप में है कि यह शुभ दिन न केवल मां दुर्गा की पूजा का आरंभ है, बल्कि यह नए आरंभ और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी माना जाता है।
नवरात्रि की तैयारियां:
चैत्र नवरात्रि का आरंभ होने से पहले लोग घरों को स्वच्छ करके सजाते हैं और नौ दिनों तक व्रत रखते हुए पूजा-अर्चना करते हैं। इसके अलावा, खासतौर पर दुर्गा पूजा और किलों पर होने वाली हवन की तैयारियां भी जोरों पर होती हैं।
आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से यह पर्व न केवल व्यक्तिगत उन्नति और सुख-संपत्ति की प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण होता है, बल्कि यह समाज में एकता और श्रद्धा का प्रतीक भी है।
नवरात्रि के महत्त्व:
चैत्र नवरात्रि को विशेष रूप से देवी के नौ रूपों की पूजा के रूप में मनाया जाता है। इन नौ दिनों में भक्त अलग-अलग रूपों में मां दुर्गा की पूजा करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
आध्यात्मिक उन्नति, सुख-समृद्धि और शांति की प्राप्ति के लिए नवरात्रि एक श्रेष्ठ समय होता है, और इस दौरान किए गए व्रत और पूजन से विशेष लाभ प्राप्त होता है।चैत्र नवरात्र के इस पर्व पर हम सभी मां दुर्गा से सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।
प्रभु श्रीराम के सूर्य तिलक के लिए आईआईटी टीम ने राम मंदिर के शिखर पर लगाया स्थायी लेंस,जानें कैसे पहुंचेगी किरण…
सर्वोदय/अयोध्या:- रामनगरी अयोध्या एक बार फिर भक्ति और उल्लास से सराबोर है। 6 अप्रैल को रामनवमी के पावन पर्व पर प्रभु श्रीराम का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।दोपहर 12 बजे का वह पवित्र क्षण जब प्रभु श्रीराम राम का जन्म हुआ था,हर राम भक्त के लिए अद्भुत अनुभव लेकर आएगा। दोपहर 12 बजे ठीक 4 मिनट तक भगवान सूर्य अपनी किरणों से प्रभु श्रीराम के मस्तक पर तिलक करेंगे। यह दुर्लभ और दिव्य दृश्य रामनगरी के हर कोने के साथ-साथ देशभर में प्रसारित किया जाएगा।
रामनवमी के दिन राम मंदिर में प्रभु श्रीराम के मस्तक पर सूर्य तिलक के लिए आईआईटी रुड़की की टीम ने इस बार स्थाई व्यवस्था कर दी है। राम मंदिर के शिखर के शीर्ष पर कलश के नीचे वाले भाग यानी आमलक पर स्थाई लेंस लगा दिया गया है। अब राम मंदिर का केवल कलश वाला ही भाग बनना बचा है।
ऐसे में अब लेंस को हटाने की जरूरत नहीं होगी। इस लेंस के माध्यम से ही सूर्य की किरणें परावर्तित होकर पीतल के पाइप से होते हुए प्रभु श्रीराम के मस्तक पर पहुंचेंगी।पाइप में भी विभिन्न कोणों पर लेंस इस तरह से लगाए गए है l ताकि ठीक 12 बजे राम मंदिर के शिखर पर आने वाले किरणें इन लेंस के जरिए सीधे मस्तक को सुशोभित कर सकें। इस बार छह अप्रैल को रामनवमी पड़ रही है।
रामनवमी के अवसर पर प्रभु श्रीराम के प्राकट्य के क्षणों में उनके मस्तक पर सूर्य तिलक की व्यवस्था अब बीस वर्षो तक के लिए स्थायी हो जाएगी।राम मंदिर के शिखर का निर्माण इस व्यवस्था के लिए आवश्यक ऊंचाई तक पहुंच चुका है।इसके कारण कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग के जरिए 20 साल तक सूर्य की गति के मुताबिक राम नवमी पर दोपहर ठीक 12 बजे सूर्य किरणों को परावर्तित कर राम मंदिर के अंदर भेजकर प्रभु श्रीराम के मस्तक पर उनका अभिषेक कराया जाएगा।हर 20 साल में सूर्य की गति में परिवर्तन होता है। इसके कारण वैज्ञानिकों ने ऐसी व्यवस्था निर्धारित की है ताकि सम्बन्धित उपकरणों की दिशा निर्धारित कोण पर मैनुअली परिवर्तित की जा सके और फिर से कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग के जरिए अगले 20 सालों तक सूर्य अभिषेक यथावत संभव हो सके।
प्रभु श्रीराम के मस्तक पर सूर्य तिलक के लिए आईआईटी रुड़की की टीम ने खास सिस्टम बनाया है। सूर्य तिलक के लिए अष्टधातु के 20 पाइप से 65 फीट लंबा सिस्टम बनाया गया। इसमें 4 लेंस और 4 मिरर के जरिए गर्भ गृह तक प्रभु श्रीराम के मस्तक पर किरणें पहुंचाई जाएंगी।
यात्री सुविधा और सुरक्षा में वृद्धि:महामना एक्सप्रेस को मिलेगा एलएचबी कोचों का अपग्रेड, यात्रा होगी और भी आरामदायक
सर्वोदय/लखनऊ:- उत्तर रेलवे, लखनऊ मण्डल द्वारा रेल यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यात्रियों की यात्रा को सुखद, सुरक्षित और आरामदायक बनाने के उद्देश्य से निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस कड़ी में आगामी 29 मार्च 2025 से वाराणसी जंक्शन से नई दिल्ली के बीच चलने वाली गाड़ी संख्या 22417/22418 महामना एक्सप्रेस को उच्चीकृत (अपग्रेड) किया जाएगा। इस ट्रेन के रैक को अब आधुनिक लिंक हॉफमैन बुश (LHB) कोचों के साथ संचालित किया जाएगा।
महामना एक्सप्रेस का अपग्रेडेशन:
उत्तर रेलवे, लखनऊ मण्डल ने यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस ट्रेन में संरचनात्मक परिवर्तन किए हैं। अब ट्रेन के सभी इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) कोचों को LHB कोचों में बदला जा रहा है, जिससे यात्रियों को अधिक सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा। इसके अलावा, कोचों की संख्या भी बढ़ाकर 22 की जा रही है, जिसमें 8 स्लीपर, 4 तृतीय श्रेणी वातानुकूलित, 1 प्रथम श्रेणी वातानुकूलित, 2 द्वितीय श्रेणी वातानुकूलित, 4 सामान्य श्रेणी, 1 रसोइयान, 1 SLRD और 1 जेनरेटर कोच शामिल होंगे।
गाड़ी संख्या 22417/22418 महामना एक्सप्रेस भारतीय रेलवे की पहली महामना श्रेणी की ट्रेन है, जिसे 22 जनवरी 2016 को भारत के प्रधानमंत्री, माननीय श्री नरेंद्र मोदी द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वाराणसी जंक्शन से हरी झंडी दी गई थी। यह ट्रेन नई दिल्ली और वाराणसी के बीच सप्ताह में तीन दिन संचालित होती है और अपने रास्ते में गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली, लखनऊ, निहालगढ़, सुलतानपुर और जौनपुर सिटी जैसे प्रमुख स्टेशनों पर ठहराव करती है।

LHB कोचों की विशेषताएँ और लाभ:
LHB कोचों को आधुनिक तकनीक से डिज़ाइन किया गया है, जो यात्रियों को अधिक आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव प्रदान करते हैं। इनके प्रमुख लाभों में शामिल हैं:
सुरक्षा में वृद्धि: LHB कोच टेलिस्कोपिक टक्कर अवशोषण तकनीक से लैस होते हैं, जिससे दुर्घटना के समय झटकों का प्रभाव कम होता है।
उच्च गति क्षमता: ये कोच 160 किमी/घंटा तक की गति से चल सकते हैं, जिससे यात्रा का समय कम होता है।
अधिक आरामदायक यात्रा:LHB कोचों में बड़े खिड़कियाँ, बेहतर वेंटिलेशन और उन्नत सस्पेंशन सिस्टम होता है, जिससे यात्रा अधिक आरामदायक होती है।

कम ध्वनि और झटके: ICF कोचों की तुलना में LHB कोचों में ध्वनि और कंपन कम होते हैं, जिससे यात्रियों को शांतिपूर्ण यात्रा का अनुभव मिलता है।
अधिक वहन क्षमता: LHB कोच हल्के होते हैं और इनमें अधिक यात्रियों को समायोजित करने की क्षमता होती है।
लंबी आयु: इन कोचों की आयु ICF कोचों की तुलना में अधिक होती है, जिससे रखरखाव की लागत कम होती है।
उत्तर रेलवे, लखनऊ मण्डल यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोपरि मानते हुए निरंतर सुधार और वृद्धि की दिशा में काम कर रहा है। महामना एक्सप्रेस में किए गए LHB कोचों के अपग्रेडेशन से यात्रियों को उच्च गुणवत्ता वाली सुविधाएँ प्राप्त होंगी और उनकी यात्रा का अनुभव और भी सुगम एवं आरामदायक होगा। उक्त जानकारी कुलदीप तिवारी वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबन्धक, उत्तर रेलवे, लखनऊ ने दी |
17 साल बाद महिला के पेट से निकाली गई कैची, KGMU के डॉक्टरों ने बचाई जान
सर्वोदय/लखनऊ:- राजधानी लखनऊ में प्राइवेट अस्पतालों की लापरवाही से जुड़ी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिसमें कभी इलाज के दौरान मरीज की मौत तो कभी इलाज के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी की खबरें आती हैं। अब लखनऊ के इंदिरानगर स्थित श्री मेडिकल केयर अस्पताल में एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां 17 साल पहले एक महिला के ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने पेट में कैची छोड़ दी थी। शुरुआत में यह दर्द ऑपरेशन का हिस्सा समझा गया, लेकिन जब महिला को लंबे समय तक दर्द की समस्या हुई, तो जांच के दौरान पेट में कैची होने की बात सामने आई। इसके बाद KGMU के डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर महिला की जान बचाई।
2008 में हुआ था ऑपरेशन, उसके बाद शुरू हुई समस्याएं
इंदिरानगर के अरविंद कुमार पांडेय ने बताया कि उनकी पत्नी का ऑपरेशन 26 फरवरी 2008 को श्री राम हॉस्पिटल में गर्भावस्था के दौरान किया गया था। शुरुआत में सब कुछ ठीक था, लेकिन कुछ समय बाद पेट में दर्द और अन्य समस्याएं उत्पन्न होने लगीं। उन्होंने कई डॉक्टरों से इलाज कराया, लेकिन समस्या में कोई राहत नहीं मिली।
X-Ray में पेट में कैची का पता चला, KGMU ने बचाई जान
अरविंद ने बताया कि लंबे समय तक दर्द से परेशान होकर उन्होंने अपनी पत्नी का एक्स-रे कराया, जिसमें पेट में कैची का पता चला। इसके बाद 25 मार्च को उन्होंने अपनी पत्नी को लखनऊ के KGMU अस्पताल में भर्ती कराया। 26 मार्च को KGMU के डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर पेट में फंसी कैची को बाहर निकाला और महिला की जान बचाई। इस घटना के बाद अरविंद ने गुरुवार को गाजीपुर थाने में श्री राम हॉस्पिटल के खिलाफ तहरीर दी और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।’ यह मामला अस्पतालों की लापरवाही और मरीजों की जान से खिलवाड़ करने का एक और उदाहरण बनकर सामने आया है, जिसमें अस्पताल की गलतियों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
कृष्ण भक्ति से जुड़ा है ,सीमा हैदर की बेटी नाम, बोली- ‘अब मैं हिंदू बन चुकी हूं, इसलिए…
सर्वोदय/लखनऊ:- पाकिस्तान से भारत आई सीमा हैदर और सचिन मीणा ने हाल ही में अपनी बेटी का नाम घोषित किया है, जो उनकी प्यार की निशानी बनी है। सीमा, जो दो साल पहले पाकिस्तान से भारत आई थीं, ने हाल ही में पांचवीं बार मां बनने का अनुभव किया है। इसके साथ ही, अब यह सवाल उठ रहा था कि सीमा और सचिन अपनी बेटी का क्या नाम रखेंगे, जिसे उन्होंने आखिरकार सभी के सामने पेश किया।
सीमा और सचिन ने अपनी बेटी का नाम मीरा रखा है, जो भगवान कृष्ण की भक्त मीरा से प्रेरित है। हालांकि, पंडित जी द्वारा आधिकारिक नामकरण किया जाएगा, लेकिन फिलहाल उन्होंने इसे प्यार से मीरा नाम रखा है। सीमा ने खुद कहा कि वह अब हिंदू बन चुकी हैं और भगवान कृष्ण की भक्त हैं, इसलिए उन्होंने अपनी बेटी का नाम मीरा रखा है।
सीमा के चार बच्चे पहले के पति से हैं, जिनके नाम भी अब हिंदू नामों में बदल दिए गए हैं। सीमा ने अपने नाम में कोई बदलाव नहीं किया, क्योंकि उनका नाम सीमा हिंदू धर्म में भी प्रचलित है।
सीमा और सचिन की मुलाकात का दिलचस्प किस्सा
सीमा हैदर और सचिन मीणा की मुलाकात ऑनलाइन गेम PUBG के दौरान हुई थी। दोनों गेम खेलते-खेलते एक-दूसरे से दिल लगा बैठे, और फिर सीमा ने पाकिस्तान की सीमा लांघते हुए नेपाल के रास्ते भारत में अवैध रूप से प्रवेश किया। इस पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन बाद में वह जमानत पर बाहर आ गईं। सीमा का कहना है कि वह सचिन से बहुत प्यार करती हैं और उनसे शादी कर चुकी हैं, और अब वह अपनी बाकी की जिंदगी भारत में ही बिताना चाहती हैं।
पूर्व पति का विवादित बयान
वहीं, सीमा हैदर के पूर्व पति गुलाम हैदर ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सीमा और सचिन की संतान को ‘नाजायज’ करार दिया है। इसके साथ ही, गुलाम हैदर अपने चार बच्चों को वापस पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने की बात भी कर रहे हैं।
भाई-बहन की हुई शादी! लड़का बोला- साफा पहनने के शौक में दीदी के साथ बैठ गया”
सर्वोदय/जौनपुर:- उत्तर प्रदेश के जौनपुर में हुए सामूहिक विवाह कार्यक्रम में एक भाई और बहन के शादी करने का अजीब मामला सामने आया है। आरोप है कि इस आयोजन में फर्जी तरीके से दोनों को विवाह के लिए बैठाया गया। इस सामूहिक विवाह में कुल 1001 जोड़ों का विवाह हुआ था, जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए थे और उन्होंने सभी जोड़ों को आशीर्वाद दिया था।
यह घटना 12 मार्च को जौनपुर के शाही किले में आयोजित जौनपुर महोत्सव के दौरान हुई, जहां सामूहिक विवाह का आयोजन किया गया था। हालांकि, इस दौरान एक भाई-बहन को विवाह की सूची में शामिल किया गया। जब इस मामले पर लड़के से सवाल किया गया, तो उसने दावा किया कि वह केवल शौकिया तौर पर साफा पहनकर अपनी बहन के साथ विवाह समारोह में बैठ गया था। इस घटना की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हंगामा मच गया।
सामूहिक विवाह के आयोजन के संबंध में कई सवाल उठ रहे हैं, खासकर विवाह की सूची को लेकर। समाज कल्याण विभाग से कई बार सूची मांगी गई, लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया गया। इससे फर्जीवाड़े के मामलों की जांच में परेशानी हो रही है।
इस मामले में प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। जिलाधिकारी दिनेश सिंह ने कहा कि यदि जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि होती है, तो सामूहिक विवाह में सहायता राशि को रोका जा सकता है। साथ ही, लड़के की चाची ने यह भी खुलासा किया कि उनका भतीजा विवाह से 15 दिन पहले ही गांव आया था और इसके बाद वह कहीं दिखाई नहीं दिया। वहीं, लड़की ने बताया कि शादी के बाद उसका पति मुंबई चला गया। प्रशासन ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
धूल के गुबार से ढका इलाका, तेज भूकंप के दौरान चंद सेकंड में धराशायी हुई गगनचुंबी इमारत
सर्वोदय/ देश -विदेश:- दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में शुक्रवार को आए दो तेज भूकंपों ने व्यापक तबाही मचाई। थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में कई इमारतें हिल गईं, और एक निर्माणाधीन 30 मंजिला टावर चंद सेकंड में ढह गया। इस हादसे में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोग मलबे में फंसे हुए हैं।
भूकंप के झटके बैंकॉक के अलावा म्यांमार में भी महसूस किए गए, जिससे वहां भी दहशत का माहौल बन गया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और जर्मनी के जीएफजेड भूविज्ञान केंद्र के अनुसार, भूकंप का केंद्र म्यांमार में था, जिसकी गहराई 10 किलोमीटर थी। भूकंप के तुरंत बाद थाईलैंड के उपप्रधानमंत्री फुमथाम वेचायाचाई ने स्थिति का आकलन किया और बताया कि बैंकॉक में ढही इमारत में कम से कम तीन श्रमिकों की मौत हुई, और 81 लोग मलबे में फंसे हैं।
भूकंप के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें निर्माणाधीन इमारत ढहते हुए दिखाई दे रही थी। इसके अलावा, भूकंप के झटके से बैंकॉक की सड़कों पर पानी बहने लगा और कई इमारतों से मलबा गिरने की घटनाएं हुईं।
भूकंप के बाद लोग घबराए हुए थे और घनी आबादी वाले इलाकों से बाहर निकलने के लिए भागे। प्रधानमंत्री पैटोंगटार्न शिनावात्रा ने आपातकालीन बैठक बुलाई है और आपदा के प्रभाव का आकलन किया जा रहा है। म्यांमार में भूकंप से धार्मिक स्थलों और घरों को भी नुकसान पहुंचा है, लेकिन वहां के गृहयुद्ध के कारण नुकसान की विस्तृत जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं हो पाई है।
महिला टीचर और सहायिका के बीच आंगनवाड़ी केंद्र में मारपीट का चौंकाने वाला वीडियो वायरल
सर्वोदय/मथुरा:- मथुरा के छाता क्षेत्र में एक आंगनवाड़ी केंद्र से एक गंभीर घटना की खबर सामने आई है, जहां एक शिक्षिका और आंगनवाड़ी सहायिका के बीच हुई हिंसक झगड़े ने सभी को चौंका दिया। सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे इस वीडियो में दोनों महिलाएं एक-दूसरे पर लात-घूंसे बरसाते हुए दिखाई दे रही हैं। बाल खींचने और गालियाँ देने के साथ-साथ यह मारपीट इतनी भयानक थी कि वहां मौजूद बच्चे भयभीत हो गए। यह घटना न केवल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में डालती है, बल्कि बच्चों के भविष्य को लेकर भी चिंता पैदा करती है।
इस वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक महिला पीले सूट में और दूसरी सहायिका आपस में भिड़ गईं। दोनों के बीच पहले तीखी बहस हुई, जो फिर हाथापाई में बदल गई। एक महिला को जमीन पर गिरा दिया गया, उसके बाल खींचे गए और फिर लात-घूंसे चलने लगे। कुछ लोग बीच-बचाव की कोशिश करते नजर आए, लेकिन दोनों महिलाएं गुस्से में इतनी खोई हुई थीं कि किसी की बात सुनने को तैयार नहीं थीं। वीडियो के अंत में एक महिला बेहोश होकर जमीन पर पड़ी हुई नजर आई, जिसे देखकर उपस्थित लोग उसे उठाने का प्रयास कर रहे थे। यह सब कुछ बच्चों के सामने हुआ, जिसने माहौल को और भी तनावपूर्ण बना दिया।
इस घटना ने स्थानीय अभिभावकों में गुस्सा उत्पन्न कर दिया है। उनका कहना है कि अगर स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर शिक्षक और कर्मचारी इस तरह की हरकत करेंगे, तो बच्चों का क्या होगा? एक अभिभावक ने कहा, “हम अपने बच्चों को शिक्षा और अच्छे संस्कार सिखाने के लिए भेजते हैं, लेकिन अगर ऐसा माहौल बना रहेगा तो उनके भविष्य की सुरक्षा कैसे होगी?” यह सवाल सभी माता-पिता के मन में अनायास उठता है, जो अपने बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा की आशा रखते हैं।
यह पहली बार नहीं है जब शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। समय समय पर शिक्षकों और स्टाफ के बीच विवाद की घटनाएं समाचारों की सुर्खियाँ बनती रहती हैं। मथुरा की इस घटना ने एक बार फिर बेसिक शिक्षा विभाग की अनुशासनात्मक कमी को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में अनुशासन और शिक्षकों के व्यवहार को सुधारने के लिए सख्त नियम बनाए जाने चाहिए। अगर स्थिति यूं ही बनी रही, तो बच्चों के मानसिक विकास पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
प्रशासन ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तेजी से कार्रवाई की है और जांच प्रारंभ कर दी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ऐसी घटनाओं को सहन नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।



