Thursday, June 18, 2026

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PM Modi Bikaner Speech: “अब मेरी नसों में सिंदूर बह रहा है”, पाकिस्तान को दी कड़ी चेतावनी

बीकानेर/सर्वोदय:– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीकानेर की रैली में कड़े शब्दों में पाकिस्तान को सख्त चेतावनी दी। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद यह उनकी पहली जनसभा थी, जिसमें उन्होंने भारत की नई सैन्य नीति और विकास योजनाओं को लेकर बड़े ऐलान किए।

“अब सिर्फ POK पर बात होगी, न व्यापार न बातचीत”

पीएम मोदी ने स्पष्ट कहा, “अब पाकिस्तान से न कोई बातचीत होगी, न कोई व्यापार। अब सिर्फ PoK (पाक अधिकृत कश्मीर) की बात होगी।”

उन्होंने आगे कहा, “मोदी का दिमाग ठंडा है, लेकिन नसों में अब गरम सिंदूर बह रहा है।” यह बयान भारत की बदली हुई नीति और मजबूत इरादों का प्रतीक है।

ऑपरेशन सिंदूर: आतंकवाद पर निर्णायक प्रहार

प्रधानमंत्री ने बताया कि-

  • 22 मिनट में 9 आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया।
  • “यह प्रतिशोध नहीं, न्याय का नया स्वरूप है,” उन्होंने कहा।
  • भारत अब हर आतंकी हमले को युद्ध मानकर कार्रवाई करेगा।

उन्होंने तीन-स्तरीय नई सैन्य नीति की घोषणा की:

  • आतंकी हमला = युद्ध
  • जवाबी कार्रवाई का समय सेना तय करेगी
  • स्टेट और नॉन-स्टेट एक्टर्स में कोई फर्क नहीं होग

पाकिस्तान को पानी नहीं मिलेगा

पीएम मोदी ने कहा, “भारत अब अपने हिस्से का पानी पाकिस्तान को नहीं देगा। यह हमारा संकल्प है और कोई ताकत इसे रोक नहीं सकती।”

पाक एयरबेस ICU में, भारत का नाल एयरबेस सुरक्षित

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान का रहिमयारखान एयरबेस अब ICU में है, जबकि भारत का नाल एयरबेस पूरी तरह सुरक्षित और सक्षम है।

बीकानेर को ₹26,000 करोड़ की विकास योजनाओं की सौगात

प्रधानमंत्री मोदी ने बीकानेर में 26,000 करोड़ रुपये की योजनाओं की शुरुआत की:

  • 103 रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन
  • बीकानेर-बांद्रा ट्रेन को हरी झंडी
  • राजस्थान में 11 सालों में ₹70,000 करोड़ से अधिक का निवेश
  • रेलवे पर ही 10,000 करोड़ रुपये का खर्च

डबल इंजन सरकार से तेज़ हुआ विकास

  • नई औद्योगिक नीति, इकोनॉमिक कॉरिडोर, और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान
  • बीकानेरी भुजिया और रसगुल्ला को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय बढ़ावा
  • सौर ऊर्जा योजनाओं में राजस्थान अग्रणी – 40,000 से अधिक लोग इससे जुड़े

सिंचाई और जल प्रबंधन की बड़ी योजनाएं

  • पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना से किसानों को मिलेगा लाभ
  • नदियों को जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम
  • राजस्थान में पानी की समस्या का स्थायी समाधान तैयार

बीकानेर से पीएम मोदी ने न सिर्फ विकास का रोडमैप पेश किया, बल्कि पाकिस्तान और आतंकवाद को लेकर भारत की नई नीति का स्पष्ट खाका भी सामने रखा। उनकी भाषा में जोश और योजनाओं में ठोस समाधान नजर आया – “अब भारत सिर्फ जवाब नहीं देता, निर्णायक कार्रवाई करता है।”

अलीगढ़ न्यूज: ‘डॉक्टर डेथ’ देवेंद्र शर्मा गिरफ्तार, दौसा के आश्रम में पुजारी बनकर छिपा था

अलीगढ़/सर्वोदय:– उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। देशभर में कुख्यात सीरियल किलर देवेंद्र शर्मा को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी दिल्ली क्राइम ब्रांच द्वारा राजस्थान के दौसा जिले के एक आश्रम से की गई, जहां वह पुजारी बनकर छिपा हुआ था।

कौन है देवेंद्र शर्मा?

देवेंद्र शर्मा, जिसे मीडिया में ‘डॉक्टर डेथ’ (Dr. Death) के नाम से जाना जाता है, एक समय में आयुर्वेदिक डॉक्टर हुआ करता था। बताया जा रहा है कि उसने 1984 में बिहार से BAMS की पढ़ाई पूरी की थी और बाद में अलीगढ़ के पास बंदीकुई में ‘जनता क्लिनिक’ के नाम से अपना आयुर्वेदिक क्लिनिक खोला।

अपराध की दुनिया में कैसे आया?

सूत्रों के मुताबिक, 1994 में गैस एजेंसी घोटाले में 11 लाख रुपये की धोखाधड़ी का शिकार होने के बाद उसने अपराध की राह पकड़ी। इसके बाद देवेंद्र ने हत्या, किडनी रैकेट और अंग तस्करी जैसे संगीन अपराधों को अंजाम देना शुरू कर दिया।

मगरमच्छों को खिलाता था शव

रिपोर्ट्स के अनुसार, देवेंद्र शर्मा अपने अपराधों के सबूत मिटाने के लिए शवों को मगरमच्छों को खिला देता था। ये तरीका उसे पुलिस से बचने में लंबे समय तक मदद करता रहा।

पैरोल पर रिहा होकर हुआ था फरार

2023 में पैरोल पर रिहा होने के बाद से ही देवेंद्र फरार चल रहा था। दिल्ली क्राइम ब्रांच को सूचना मिली कि वह राजस्थान के दौसा जिले के एक आश्रम में छिपा है। जैसे ही उसने अपना मोबाइल फोन चार्ज कर ऑन किया, पुलिस ने उसकी लोकेशन ट्रेस कर ली और तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।

दिल्ली पुलिस कर रही पूछताछ

फिलहाल दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम उससे पूछताछ कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फरारी के दौरान वह किन-किन लोगों के संपर्क में था और क्या इस दौरान उसने कोई नए अपराध किए।

23 मई को है अपरा एकादशी: व्रत से मिलती है यश, कीर्ति और अपार पुण्य की प्राप्ति

लखनऊ/सर्वोदय:- हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष यह पावन तिथि 23 मई 2025, गुरुवार को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखने से व्यक्ति को अपार यश, सम्मान और धन की प्राप्ति होती है। साथ ही समस्त पापों से मुक्ति मिलती है।

विष्णु पूजन से होता है कल्याण

अपरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा विशेष रूप से शुभ मानी जाती है। श्रद्धालुओं को इस दिन चंदन, गंगाजल और कपूर से श्रीहरि का अभिषेक करना चाहिए। इस व्रत को श्रद्धा एवं नियमपूर्वक करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

पौराणिक संदर्भ

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, धर्मराज युधिष्ठिर ने जब श्रीकृष्ण से इस एकादशी के महत्व के बारे में पूछा, तब श्रीकृष्ण ने बताया कि यह एकादशी न केवल अपार धन प्रदान करने वाली है, बल्कि व्रतधारी को कीर्ति और आध्यात्मिक उन्नति भी प्राप्त होती है।

किन-किन पापों से मिलती है मुक्ति?

श्रीकृष्ण ने अपरा एकादशी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि इस व्रत से ब्रह्महत्या, प्रेत बाधा, परनिंदा, असत्य भाषण, झूठी गवाही, छल-कपट से किए गए कर्म और गुरु का अपमान जैसे गंभीर पाप भी नष्ट हो जाते हैं। क्षत्रियों द्वारा युद्ध से पलायन और वैदिक शास्त्रों का अपमान करने जैसे कृत्यों से उत्पन्न दोष भी इस व्रत से समाप्त हो जाते हैं।

पुण्यफल की तुलना

शास्त्रों में बताया गया है कि जैसे तीनों पुष्करों में कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान, गंगा तट पर पिंडदान, कुंभ में तीर्थ यात्रा, सूर्य ग्रहण में कुरुक्षेत्र में स्नान या नवप्रसूता गौ का दान करने से जो पुण्य मिलता है, वही फल एक अपरा एकादशी व्रत से सहज ही प्राप्त हो जाता है। यह व्रत पापों को नष्ट करने वाली कुल्हाड़ी और आत्मा को शुद्ध करने वाली अग्नि के समान है।

व्रत का फल

इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति विष्णुलोक को प्राप्त करता है और उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा कि इस व्रत की कथा का श्रवण और पाठ भी स्वयं में अत्यंत पुण्यकारी है और इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

आयुर्वेद: जटिल रोगों का प्राकृतिक समाधान

नई दिल्ली/सर्वोदय:- आयुर्वेद, भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति, न केवल साधारण रोगों के उपचार में बल्कि जटिल और दीर्घकालिक बीमारियों के समाधान में भी प्रभावी साबित हुई है। जहाँ आधुनिक चिकित्सा प्रणाली लक्षणों पर केंद्रित रहती है, वहीं आयुर्वेद रोग की जड़ तक जाकर इलाज करता है। आज के समय में डायबिटीज़, थायरॉइड, गठिया, अस्थमा, हाई बीपी, मोटापा, और यौन समस्याओं जैसे गंभीर रोगों का भी इलाज आयुर्वेद से संभव है।

आयुर्वेद की मूलभूत अवधारणा

आयुर्वेद “त्रिदोष सिद्धांत” पर आधारित है – वात, पित्त और कफ। जब शरीर में इन तीनों का संतुलन बिगड़ता है, तब बीमारियाँ उत्पन्न होती हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा इन दोषों को संतुलित कर शरीर की प्राकृतिक उपचार शक्ति को सक्रिय करती है।

आयुर्वेद से जटिल रोगों का इलाज कैसे होता है?

  1. डायबिटीज़ (मधुमेह)

आयुर्वेद में मधुमेह को “प्रमेह” कहा गया है। इसका इलाज जामुन, गुड़मार, नीम और त्रिफला जैसी जड़ी-बूटियों से किया जाता है जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करते हैं और अग्न्याशय (पैंक्रियास) को सक्रिय करते हैं।

  1. गठिया (आर्थराइटिस)

गठिया वात दोष की अधिकता से होता है। आयुर्वेद में इसमें अश्वगंधा, शल्लकी, और पंचकर्म चिकित्सा जैसी विधियाँ दी जाती हैं जो जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करती हैं।

  1. थायरॉइड

थायरॉइड संतुलन में सहायक होती हैं कनचनार, अश्वगंधा और ब्राह्मी जैसी औषधियाँ, जो हार्मोनल असंतुलन को सुधारती हैं।

  1. अस्थमा और सांस की समस्याएँ

तुलसी, वासा, हरीशंकरी और अदरक जैसी जड़ी-बूटियाँ फेफड़ों को मज़बूत बनाती हैं और श्वास नली को खोलती हैं।

  1. यौन दुर्बलता और नपुंसकता

आयुर्वेद में शिलाजीत, सफेद मुसली, कौंच बीज और अकरकरा जैसी जड़ी-बूटियाँ कामशक्ति को बढ़ाने और वीर्य की गुणवत्ता सुधारने के लिए जानी जाती हैं।

आयुर्वेदिक जीवनशैली और आहार

आयुर्वेद केवल दवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सम्पूर्ण जीवनशैली है जिसमें दिनचर्या (दिन के समय अनुसार गतिविधियाँ), ऋतुचर्या (मौसम के अनुसार खान-पान) और सात्विक आहार का विशेष स्थान है। यह पद्धति शरीर को स्वयं ही स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करती है।

Nature Root Ayurveda – भरोसेमंद आयुर्वेदिक ब्रांड

अगर आप प्रामाणिक और शुद्ध आयुर्वेदिक उत्पादों की तलाश में हैं तो Nature Root Ayurveda एक बेहतरीन विकल्प है। यहाँ की हर्बल पाउडर, शिलाजीत, सफेद मुसली और विशेष बूस्टर पैक जैसे उत्पाद Ministry of AYUSH और GMP सर्टिफाइड हैं, जो आपके स्वास्थ्य को प्राकृतिक तरीके से सुधारने में मदद करते हैं।

आयुर्वेद आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना हजारों वर्ष पहले था। यह केवल रोगों का इलाज नहीं करता, बल्कि शरीर, मन और आत्मा को संतुलित कर सम्पूर्ण स्वास्थ्य प्रदान करता है। यदि आप जटिल रोगों से परेशान हैं और साइड इफेक्ट्स से बचना चाहते हैं, तो आयुर्वेद की ओर रुख करें — यह एक जीवनदायिनी प्रणाली है।

IndiGo की फ्लाइट पर गिरी बिजली, श्रीनगर में हुई इमरजेंसी लैंडिंग | 227 यात्रियों की जान बची

नई दिल्ली/श्रीनगर(Sarvoday): दिल्ली से श्रीनगर जा रही इंडिगो की फ्लाइट 6E2142 (रेजिस्ट्री: VT-IMD) उस समय मुश्किल में पड़ गई जब विमान को उड़ान के दौरान गंभीर मौसम का सामना करना पड़ा। आसमान में तेज़ बर्फबारी, ओले और बिजली गिरने जैसी स्थितियों के बीच फ्लाइट में सवार 227 यात्रियों ने दहशत के पल झेले। हालांकि, पायलट और क्रू की सूझबूझ से एक बड़ा हादसा टल गया।

कैसे हुआ इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला?

उड़ान के दौरान जैसे ही विमान खराब मौसम में फंसा, विमान के अगले हिस्से (नोज) को नुकसान पहुंचा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पायलट ने तुरंत श्रीनगर एटीसी (ATC) से संपर्क कर आपातकालीन लैंडिंग की अनुमति मांगी। शाम 6:30 बजे विमान ने श्रीनगर एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की।

  • विमान में मौजूद 227 यात्री और क्रू मेंबर पूरी तरह सुरक्षित हैं।
  • विमान के नोज सेक्शन को स्पष्ट रूप से बाहरी नुकसान हुआ है।
  • इंडिगो एयरलाइंस ने इसे “Aircraft on Ground (AOG)” घोषित किया है, यानी विमान अब तकनीकी जांच और मरम्मत के लिए उड़ान से बाहर रहेगा।

VIDEO: जब आसमान में बिजली गिरी और मच गई चीखपुकार

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही विमान बर्फीले तूफान में घिरा, जोरदार आवाज़ और झटकों से विमान हिलने लगा। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें यात्रियों की घबराहट और पायलट की घोषणाएं सुनाई दे रही हैं।

गोवा के लिए भी इंडिगो की एडवाइजरी जारी

इंडिगो ने गोवा के यात्रियों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी भी जारी की है। चेतावनी दी गई है कि गोवा में भारी बारिश के चलते उड़ानों में देरी या रद्दीकरण संभव है।

एयरलाइंस ने यात्रियों को सलाह दी है कि:

  • एयरपोर्ट के लिए रवाना होने से पहले अपनी फ्लाइट की स्थिति जांच लें।
  • स्थानीय ट्रैफिक भी प्रभावित हो सकता है, इसलिए अतिरिक्त समय रखें।
     

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क्या ज्यादा एंटीबायोटिक दवाएं बना रही हैं लड़कियों को समय से पहले जवान? नई रिसर्च ने उड़ाए होश!

नई दिल्ली/सर्वोदय:- क्या आपकी नवजात बेटी को शुरुआती बीमारियों में बार-बार एंटीबायोटिक दी गई है? तो सावधान हो जाइए। एक हालिया अध्ययन ने इस चिंता को और गहरा कर दिया है कि नवजात कन्याओं को जीवन के पहले साल में दी गई एंटीबायोटिक दवाएं, उनके समय से पहले यौवन (Early Puberty) लाने का कारण बन सकती हैं। यह शोध यूरोपियन सोसाइटी की पहली संयुक्त कांग्रेस में प्रस्तुत किया गया।

क्या कहती है नई रिसर्च?

इस अध्ययन में दक्षिण कोरिया के हानयांग यूनिवर्सिटी गुरी अस्पताल और हानयांग यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने 0 से 12 महीने की उम्र के 3,22,731 बच्चों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। निष्कर्षों के मुताबिक: जिन लड़कियों को 3 महीने की उम्र से पहले एंटीबायोटिक दी गई, उनमें 33% अधिक संभावना समय से पहले यौवन शुरू होने की पाई गई। जिन कन्याओं को 14 दिन के भीतर एंटीबायोटिक दी गई, उनमें यह जोखिम 40% तक बढ़ गया।  जबकि लड़कों में ऐसा कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया।

क्या होता है समय से पहले यौवन (Central Precocious Puberty – CPP)?

CPP एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बच्चों में यौन विकास सामान्य उम्र से पहले शुरू हो जाता है।

लड़कियों में: 8 वर्ष से पहले पीरियड्स या स्तनों का विकास

लड़कों में: 9 वर्ष से पहले यौन लक्षणों का प्रकट होना

यह स्थिति अधिकतर लड़कियों में पाई जाती है और इसके पीछे कोई स्पष्ट जैविक कारण अक्सर नहीं होता।

क्यों है यह चिंताजनक?

आजकल कई परिवारों में देखने को मिल रहा है कि 9 साल की बच्चियां भी पीरियड्स का अनुभव करने लगी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बहुत कम उम्र में यौवन आने से न केवल मानसिक और शारीरिक विकास प्रभावित होता है, बल्कि आगे चलकर हॉर्मोनल असंतुलन, डायबिटीज, मोटापा और अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।

क्या करें मातापिता?

डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चों को एंटीबायोटिक न दें

हल्की बीमारियों में घरेलू या प्राकृतिक उपचार अपनाएं

बच्चों की दवाओं का इतिहास रखें

बच्चों के शारीरिक बदलावों पर सतर्क निगरानी रखें

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Simsa Mata Mandir: इस मंदिर के चमत्कारी फर्श पर लेटते ही महिलाएं हो जाती हैं गर्भवती! जानें रहस्य

हिमाचल प्रदेश/सर्वोदय:- भारत रहस्यों और आस्था की भूमि है, जहां हर जगह कोई न कोई चमत्कारिक कहानी देखने-सुनने को मिलती है। लेकिन हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित माता सिमसा मंदिर अपने आप में एक ऐसा मंदिर है जिसकी मान्यता ने विज्ञान और तर्क की सीमाओं को पार कर दिया है। यह मंदिर खासतौर पर संतान प्राप्ति की इच्छुक महिलाओं के लिए आस्था का केंद्र बन चुका है।

क्या है सिमसा माता मंदिर का रहस्य?

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जो भी महिला इस मंदिर के परिसर में फर्श पर लेटती है, उसे कुछ ही दिनों में गर्भधारण का सौभाग्य प्राप्त होता है। भक्तों का कहना है कि मां शारदा देवी स्वयं सपनों में आकर महिलाओं को संतान की सूचना देती हैं—कि उन्हें पुत्र होगा या पुत्री।

जहां टेक्नोलॉजी हार गई, वहां आस्था ने जीत ली

आधुनिक चिकित्सा पद्धति और तकनीक जहाँ कई बार असफल हो जाती हैं, वहीं सिमसा माता मंदिर में सिर्फ आस्था के बल पर महिलाओं को संतान प्राप्त होती है। यही कारण है कि इस मंदिर को “संतान प्राप्ति का चमत्कारी मंदिर” भी कहा जाता है।

अगर संतान नहीं लिखी है, तो मां देती हैं संकेत!

मंदिर से जुड़ी एक और आश्चर्यजनक मान्यता यह है कि यदि किसी महिला की किस्मत में संतान सुख नहीं होता, तो मां उसे सपने में इसका संकेत दे देती हैं। इसके अलावा, यदि फिर भी कोई महिला मंदिर परिसर में ज़मीन पर लेटती है, तो उसके शरीर पर लाल दाग और खुजली होने लगती है, जिससे उसे वहाँ से वापस जाना पड़ता है।

पत्थर भी हिलता है मां के नाम से!

मंदिर परिसर के पास एक विशाल पत्थर भी स्थित है जिसे सामान्यतः कोई हिला नहीं सकता। लेकिन मान्यता है कि यदि कोई श्रद्धालु मां का नाम लेकर अपनी छोटी उंगली से उस पत्थर को छुए, तो वह खुद-ब-खुद हिलने लगता है। यह दृश्य वहां मौजूद श्रद्धालुओं के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं होता।

सिमसा माता मंदिर क्यों है खास?

  • संतान प्राप्ति की विशेष मान्यता
  • सपने में देवी का संकेत मिलना
  • चमत्कारी फर्श पर सोने से गर्भधारण
  • लाल दाग के जरिए देवी का अस्वीकार
  • पत्थर का चमत्कारी हिलना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे 103 पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन, बलिया का सुरेमनपुर स्टेशन भी शामिल

वाराणसी, सर्वोदय:- भारतीय रेलवे द्वारा आगामी 50 वर्षों की यात्रा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ‘अमृत स्टेशन योजना’ के अंतर्गत देशभर के रेलवे स्टेशनों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त किया जा रहा है। इसी क्रम में 22 मई 2025 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी राजस्थान के बीकानेर जिले के पालना से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भारतीय रेल के 103 पुनर्विकसित स्टेशनों का उद्घाटन करेंगे। इन स्टेशनों में उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद स्थित सुरेमनपुर रेलवे स्टेशन भी शामिल है।

सुरेमनपुर रेलवे स्टेशन को 12.41 करोड़ की लागत से किया गया पुनर्विकसित

पूर्वोत्तर रेलवे के अंतर्गत आने वाला सुरेमनपुर स्टेशन औड़िहार-छपरा रेलखंड पर स्थित है और एनएसजी-4 श्रेणी का प्रमुख स्टेशन माना जाता है। इस स्टेशन को ₹12.41 करोड़ की लागत से पूरी तरह से पुनर्विकसित किया गया है। स्टेशन अब लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, कोलकाता, मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद, दरभंगा, अमृतसर समेत कई बड़े शहरों से सीधे जुड़ा हुआ है।

यात्रियों के लिए उन्नत सुविधाओं का विकास

  • सभी तीन प्लेटफार्मों पर यात्री छाजन (शेड) का निर्माण

  • 2824 वर्गमीटर में सर्कुलेटिंग एरिया का विकास

  • प्लेटफार्मों की ऊँचाई और सतह में सुधार के साथ ग्रेनाइट फर्श

  • 658 वर्गमीटर क्षेत्र में प्रतीक्षालय और नया VIP लाउंज

  • 1 फुट ओवर ब्रिज (FOB) और 2 लिफ्ट का निर्माण

  • दिव्यांगजनों के लिए समुचित सुविधाएं

  • सीमेंट मुराल और आकर्षक वॉल पेंटिंग

  • उन्नत प्रकाश व्यवस्था और मॉडर्न फसाड लाइटिंग

  • चार टिकट काउंटर, वाटर बूथ, पर्याप्त नल, साइनेज, ट्रेन डिस्प्ले बोर्ड

  • दो और चार पहिया वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था

स्थानीय जनप्रतिनिधि भी रहेंगे उपस्थित

इस उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान बलिया के  सांसद  सनातन पांडेय, राज्यसभा सांसद नीरज शेखर, विधायक जयप्रकाश अंचल, और विधान परिषद सदस्य  रविशंकर सिंह (पप्पू) समेत कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहेंगे।

भारत में एक बार फिर बढ़े कोविड-19 के मामले: ‘पिरोला’ वैरिएंट बन सकता है अगला बड़ा खतरा ?

नई दिल्ली/सर्वोदय:- भारत में एक बार फिर कोविड-19 के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है, खासकर केरल, महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों में. स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस उछाल के पीछे ओमिक्रॉन वंश के नए सब-वेरिएंट BA.2.86, जिसे ‘पिरोला’ (Pirola) के नाम से भी जाना जाता है, को जिम्मेदार मान रहे हैं।

क्या है Pirola वैरिएंट और क्यों है यह चिंताजनक?

Pirola वैरिएंट के JN.1 सब-वेरिएंट में करीब 30 जेनेटिक म्यूटेशन पाए गए हैं, जो इसे अधिक संक्रामक बनाते हैं और इसे मौजूदा इम्यूनिटी से बच निकलने में मदद करते हैं। ये बदलाव वायरस के स्पाइक प्रोटीन में होते हैं, जिससे यह मानव कोशिकाओं में आसानी से प्रवेश कर सकता है।

क्या मौजूदा वैक्सीन असरदार हैं?

विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि JN.1 वैरिएंट मौजूदा वैक्सीनेशन या संक्रमण से बनी इम्यूनिटी को चकमा दे सकता है, फिर भी शरीर की टी और बी कोशिकाएं गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान कर सकती हैं। एक हालिया शोध के अनुसार, टी कोशिकाएं अब भी ओमिक्रॉन के कई हिस्सों को पहचान सकती हैं और बी कोशिकाएं एंटीबॉडी बनाकर वायरस से लड़ सकती हैं।

कौन लोग हैं ज्यादा जोखिम में?

  • बुजुर्ग
  • गर्भवती महिलाएं
  • बच्चे
  • डायबिटीज, किडनी रोग, एचआईवी या अंग प्रत्यारोपण से पीड़ित लोग इन सभी को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

क्या नए mRNA टीके होंगे ज्यादा असरदार?

भारत में विकसित mRNA वैक्सीन जेमकोवैक-19 (GEMCOVAC-19) को Pirola जैसे नए वैरिएंट्स के खिलाफ तेज़ी से अपडेट किया जा सकता है। यह टीका 2-8°C पर स्टोर किया जा सकता है, जिससे यह अन्य mRNA टीकों की तुलना में अधिक व्यावहारिक है। हालांकि, यह अभी तक व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है।

क्या करें सुरक्षित रहने के लिए?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ निम्नलिखित उपायों को अपनाने की सलाह देते हैं:

  • मास्क का उपयोग करें, खासकर भीड़-भाड़ वाले इलाकों में
  • नियमित रूप से हाथ धोएं और सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करें
  • सामाजिक दूरी बनाए रखें
  • यदि लक्षण महसूस हों, तो टेस्ट करवाएं और आइसोलेट रहें

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अगर बढ़ गया है यूरिक एसिड, तो अपनाएं ये 5 आसान उपाय – एक महीने में मिलेगा आराम

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली/सर्वोदय : यूरिक एसिड (Uric Acid) का बढ़ना आजकल एक आम समस्या बनती जा रही है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। हाई यूरिक एसिड न केवल गठिया (Gout) और किडनी स्टोन जैसी समस्याओं की वजह बनता है, बल्कि यह शरीर में असहनीय दर्द और सूजन भी पैदा कर सकता है। अच्छी बात यह है कि कुछ साधारण लाइफस्टाइल बदलावों से आप इस स्थिति पर काबू पा सकते हैं।

अगर आप भी हाई यूरिक एसिड से परेशान हैं, तो नीचे दिए गए 5 उपायों को अपनाकर आप केवल 30 दिनों में आराम महसूस कर सकते हैं।

  1. कम करें प्यूरिन वाली चीजों का सेवन

यूरिक एसिड, प्यूरिन नामक तत्व के टूटने से बनता है। रेड मीट, कुछ समुद्री भोजन (जैसे सार्डिन, ऐन्कोवीज), दालें, और बीयर में प्यूरिन की मात्रा अधिक होती है। इनकी जगह फल, सब्जियां, और लो-फैट डेयरी प्रोडक्ट्स को डाइट में शामिल करें। इससे यूरिक एसिड लेवल पर नियंत्रण रखा जा सकता है।

  1. पानी की मात्रा बढ़ाएं

शरीर से यूरिक एसिड को बाहर निकालने का सबसे अच्छा माध्यम है – पानी। रोजाना 8-10 गिलास पानी पिएं। इसके अलावा नींबू पानी, नारियल पानी, हर्बल टी और ताजे फलों का जूस भी शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं।

  1. बेरीज और चेरीज खाएं

ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी और चेरी जैसी बेरीज में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण यूरिक एसिड को कम करने में सहायक होते हैं। इन्हें स्मूदी, फ्रूट सलाद या दही के साथ मिलाकर रोजाना खाया जा सकता है।

  1. विटामिन C लें भरपूर

विटामिन-C यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स को तोड़ने और शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। रोजाना संतरा, कीवी, मौसंबी और नींबू जैसे खट्टे फल खाने से आपको फायदा मिलेगा। आप चाहें तो डॉक्टर की सलाह से विटामिन-C सप्लिमेंट भी ले सकते हैं।

  1. वजन घटाना है जरूरी

ओवरवेट या मोटापा भी यूरिक एसिड बढ़ने का कारण बन सकता है। नियमित एक्सरसाइज और संतुलित डाइट की मदद से अगर आप थोड़ा भी वजन घटा लेते हैं, तो इसका सकारात्मक असर यूरिक एसिड के स्तर पर साफ देखा जा सकता है।