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यूपी पंचायत चुनाव अप्रैल–मई में होंगे, पिछड़ा वर्ग आयोग गठन की प्रक्रिया जल्द: ओम प्रकाश राजभर

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर लंबे समय से संशय था, लेकिन अल्पसंख्यक कल्याण व पंचायतीराज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने बताया कि यूपी पंचायत चुनाव अप्रैल–मई 2025 में आयोजित होंगे।

मंत्री राजभर ने कहा कि समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन की प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जाएगी और इसका प्रस्ताव कैबिनेट में पास कराया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव तय समय पर हर हाल में कराए जाएंगे।

मदरसों की निगरानी और अपराध रोकथाम

राजभर ने यह भी कहा कि मदरसा छात्रों और शिक्षकों का पूरा ब्योरा एटीएस को उपलब्ध कराया जाएगा। उनका कहना था कि किसी भी स्थिति में मदरसों को अपराध का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि प्रयागराज और कुशीनगर में जाली नोट छपने और बहराइच के मदरसे में विदेशी नागरिकों को गलत तरीके से शरण देने के मामलों को देखते हुए विभाग पूरी तरह सतर्क है।

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दिल्ली बम धमाके के संदर्भ में जहाँ पुलिस को शक है, वहां अल्पसंख्यक कल्याण विभाग पूरी मदद करेगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मदरसों में छात्रों और शिक्षकों की पूरी जानकारी, उनके मोबाइल नंबर, माता-पिता और निवास स्थान की जानकारी एटीएस को दी जाए।

विश्व शौचालय दिवस पर सम्मानित जिले और ग्राम पंचायतें

विश्व शौचालय दिवस के अवसर पर गाजियाबाद को सर्वश्रेष्ठ जिला चुना गया। इसके बाद के स्थान इस प्रकार रहे:

  • 2nd: रामपुर
  • 3rd: हाथरस
  • 4th: श्रावस्ती
  • 5th: फिरोजाबाद

सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायतें:

  • 1st: नदिहार (मिर्जापुर)
  • 2nd: भरतौल (बरेली)
  • 3rd: जालबपुर गूदड़ (बिजनौर)
  • 4th: रमईपुर (कानपुर)
  • 5th: सरवन तारा (श्रावस्ती)

कार्यक्रम में गुलाबी गैंग की प्रमुख संपत पाल देवी को भी सम्मानित किया गया। प्रमुख सचिव पंचायती राज अनिल कुमार और निदेशक अमित कुमार सिंह भी उपस्थित रहे।

“मदरसों को अपराध का अड्डा नहीं बनने देंगे”-यूपी सरकार के मंत्री का बयान

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण व पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार मदरसों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखेगी और किसी भी परिस्थिति में उन्हें अपराध का केंद्र नहीं बनने देगी।
राजभर ने बताया कि जल्द ही मदरसा छात्रों और शिक्षकों का पूरा ब्योरा एटीएस (Anti-Terror Squad) को उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें पढ़ने-पढ़ाने वालों के मोबाइल नंबर, पता, माता-पिता की जानकारी और कुल संख्या शामिल है।

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मंत्री ने कहा कि प्रयागराज और कुशीनगर में जाली नोट छपने, तथा बहराइच के एक मदरसे में विदेशियों को गलत तरीके से शरण देने की घटनाओं के बाद सरकार पूरी तरह सतर्क है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली धमाके के बाद जो भी मदरसे जांच के दायरे में आए हैं, वहां पुलिस की मदद के लिए विभाग पूरी तरह तैयार है।

टेरर मॉड्यूल के बड़े चेहरे: किसकी क्या भूमिका? एक पाकिस्तानी आतंकी से भी था संपर्क

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- दिल्ली में लाल किले के पास हुए धमाके को एक हफ्ता बीत चुका है और जांच एजेंसियों ने अब टेरर मॉड्यूल के लगभग सभी सदस्यों की भूमिकाएं स्पष्ट कर दी हैं। इस हमले के बाद से फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी जांच के केंद्र में आ गई है। ईडी ने भी इस मामले में दखल देते हुए यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को 13 दिन की रिमांड पर लिया है। आरोप है कि सिद्दीकी ने छात्रों को फर्जी मान्यता दिखाकर 415 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की।

इसी बीच एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से खुलासा किया है कि इस व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल का उद्देश्य सिर्फ आतंकी हमला करना ही था। सदस्यों के बीच जिम्मेदारियां बांटी गई थीं—किसी ने विस्फोटक बनाए, किसी ने फंड जुटाया, किसी ने भर्ती की और मॉड्यूल का एक सदस्य पाकिस्तानी आतंकी हंजुल्ला के संपर्क में भी था।

टेरर मॉड्यूल के हर सदस्य की भूमिका

 डॉ. उमर उन नबी — मुख्य हमलावर

लाल किले के पास धमाका करने वाला यही था। सुसाइड अटैक की तैयारी पर उसका वीडियो भी सामने आया।विस्फोटक और बम बनाने में विशेषज्ञ। मॉड्यूल का सबसे आक्रामक और सक्रिय सदस्य।

 जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश — तकनीशियन

ड्रोन और बम मॉड्यूल में तकनीकी सहायता दी। डॉ. उमर ने ही उसे टीम में शामिल किया। ड्रोन में बम लोड करने के लिए मोडिफिकेशन करता था। रॉकेट तक बनाने की कोशिश की थी।

आमिर राशिद अली — प्लानर और लॉजिस्टिक्स

दिल्ली से गिरफ्तार। हमले की योजना तैयार करने में डॉ. उमर का मुख्य सहयोगी। उमर को i20 कार उपलब्ध कराई।विस्फोटक तैयार करने में भी मदद की।

 इरफान अहमद — भर्ती करने वाला मौलवी

शोपियां का मौलवी, युवाओं को बरगलाकर मॉड्यूल में भर्ती करता था। डॉक्टरों की भर्ती में अहम भूमिका। उसी ने मुजम्मिल शकील को जोड़ा। सीधे जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के आतंकियों से संपर्क में था।

 पाकिस्तानी आतंकी उमर बिन खत्ताब उर्फ हंजुल्ला — विदेशी लिंक

इरफान अहमद सीधे इसके संपर्क में था। यह पुष्टि करता है कि मॉड्यूल में पाकिस्तान से संचालित नेटवर्क भी सक्रिय था।

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अदील अहमद राथर — पहला पकड़ा गया और बड़े खुलासे का कारण

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सबसे पहले गिरफ्तार किया। इसकी पूछताछ से पूरा मॉड्यूल बेनकाब हुआ। इसकी जानकारी पर मुजम्मिल शकील और शाहीन सईद गिरफ्तार हुए। फरीदाबाद से 2,900 किलोग्राम विस्फोटक बरामद कराने में भूमिका। हथियारों की सप्लाई की जिम्मेदारी संभालता था।

शाहीन सईद — फंडिंग और महिला विंग से कनेक्शन

अल-फलाह यूनिवर्सिटी की फैकल्टी। गरीब महिलाओं और लड़कियों को कट्टरपंथी बनाकर जमात-उल-मुमीनात (JeM की महिला शाखा) से जोड़ती थी। मॉड्यूल की फंडिंग का काम संभालती थी। हवाला से करीब 20 लाख रुपये प्राप्त किए। पैसे को लेकर डॉ. उमर से विवाद भी हुआ था। अपने भाई परवेज़ अंसारी को भी मॉड्यूल में शामिल किया।

मुजम्मिल शकील — डॉक्टर और मॉड्यूल एक्सपैंडर

अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ा डॉक्टर। इरफान अहमद ने सबसे पहले इसे मॉड्यूल में शामिल किया। इसके बाद इसने अन्य डॉक्टरों और छात्रों को जोड़ा। विस्फोटक पहुंचाने और कट्टरपंथ फैलाने दोनों में भूमिका।

गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का भाई खोलेगा कई राज! कोर्ट ने अनमोल को 11 दिनों की NIA रिमांड पर भेजा

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- अमेरिका से डिपोर्ट किए जाने के बाद भारत पहुँचे कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भाई अनमोल बिश्नोई को बुधवार को NIA ने हिरासत में ले लिया। इसके कुछ ही घंटों बाद दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने उसे 11 दिन की एनआईए रिमांड पर भेज दिया।
अनमोल एनसीपी नेता और पूर्व महाराष्ट्र मंत्री बाबा सिद्दीकी की हत्या का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता है और उसके खिलाफ देशभर में 31 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।

5 बजे कोर्ट में पेशी — NIA ने मांगी थी 15 दिन की रिमांड

अमेरिका से प्रत्यर्पण के बाद अनमोल बिश्नोई को NIA टीम बुधवार शाम करीब 5 बजे विशेष न्यायाधीश प्रशांत कुमार शर्मा की अदालत में पेश किया। एजेंसी ने 15 दिन की रिमांड की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने 11 दिन की रिमांड मंजूर की।

सिद्धू मूसेवाला मर्डर से लेकर सलमान खान फायरिंग तक—कई मामलों में वांछित

अनमोल पर इन बड़े मामलों में भूमिका बताई जाती है—बाबा सिद्दीकी हत्याकांड (मुख्य साजिशकर्ता), सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग-अप्रैल 2024को , सिद्धू मूसेवाला मर्डर केस, राजस्थान समेत कई राज्यों में दर्ज क्रिमिनल केस| 2022 से फरार अनमोल पिछले साल नवंबर 2024 से अमेरिका में हिरासत में था। वह वहां से अपने भाई लॉरेंस के गैंग और उससे जुड़े आतंकी मॉड्यूल को संचालित कर रहा था।

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उसका भारत प्रत्यर्पण इस गैंग के खिलाफ चल रही बड़ी कार्रवाई का हिस्सा है, जिसमें वह 19वां गिरफ्तार आरोपी बना है।

NIA चार्जशीट में गंभीर आरोप

NIA ने मार्च 2023 में अनमोल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। जांच में पता चला था कि—2020 से 2023 के बीच उसने गोल्डी बराड़ और लॉरेंस बिश्नोई के साथ मिलकर देशभर में कई संगठित अपराध और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने में सक्रिय भूमिका निभाई।

एजेंसी अब इससे जुड़े सभी नेटवर्क, फंडिंग और विदेशी लिंक की पूछताछ करेगी। रिमांड अवधि में उससे कई अहम राज खुलने की उम्मीद है।

“कश्मीर से लाल किले तक हमले हमने किए”-पाकिस्तानी नेता का चौंकाने वाला कबूलनामा

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- भारत वर्षों से सीमा पार आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर आरोप लगाता रहा है, लेकिन इस्लामाबाद हमेशा इससे इनकार करता रहा। अब पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी अनवारुल हक के बयान ने पाकिस्तान के झूठ का पर्दाफाश कर दिया है। हक ने PoJK विधानसभा में खुलकर स्वीकार किया कि पाकिस्तान की जमीन से संचालित आतंकी संगठनों ने “लाल किले से लेकर कश्मीर के जंगलों तक” भारत पर हमले किए हैं।

यह बयान उस समय आया जब हक सोमवार को अविश्वास प्रस्ताव हारने के बाद सदन को संबोधित कर रहे थे। उनके इस भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

10 नवंबर के लाल किले आत्मघाती हमले पर बड़ा संकेत

हक के बयान में लाल किले हमले का जिक्र होने से यह संकेत मिलता है कि 10 नवंबर को दिल्ली में हुए कार धमाके में पाकिस्तानी आतंकियों की भूमिका की पुष्टि होती है। इस हमले में 15 लोगों की मौत हुई थी।

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हमले का मास्टरमाइंड डॉ. उमर उन नबी जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े उस “सफेदपोश मॉड्यूल” का हिस्सा था, जिसका फरीदाबाद में हमले से कुछ दिन पहले भंडाफोड़ हुआ था।

‘कश्मीर के जंगलों’ वाली टिप्पणी पहलगाम हमले की ओर इशारा

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में पाकिस्तानी आतंकियों ने पर्यटकों से उनका धर्म पूछा और फिर गोलियां बरसा दीं | इस हमले में 26 पर्यटकों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान व PoJK में आतंकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की थी।

सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप में क्या कहा हक ने?

वायरल वीडियो में अनवारुल हक कहते दिख रहे हैं- “अगर तुम (भारत) बलूचिस्तान को खून से लथपथ करोगे, तो हम लाल किले से लेकर कश्मीर के जंगलों तक हमला करेंगे। और खुदा की नेमत से हमारे शाहीन ने ऐसा कर दिखाया है। वे अभी तक लाशें नहीं गिन पा रहे।”

यह पहली बार नहीं है जब हक ने भारत के खिलाफ इस तरह की धमकी दी हो। अप्रैल में भी उन्होंने कहा था-“तुम बलूचिस्तान में पाकिस्तानियों का खून बहाओगे, तो इसकी कीमत तुम दिल्ली से लेकर कश्मीर तक चुकाओगे।”  उनके बयान पाकिस्तान की आतंकवाद नीति और उस पर शासन तंत्र के संरक्षण को लेकर चिंताएं और गहरी करते हैं।

अल फलाह यूनिवर्सिटी केस: मालिक जवाद सिद्दीकी ने धोखे से कमाए 400 करोड़+, गल्फ भागने की आशंका— ED

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- दिल्ली की एक अदालत ने अल फलाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक और चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को 13 दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अदालत में दावा किया कि सिद्दीकी ने छात्रों और अभिभावकों को फर्जी मान्यता के नाम पर धोखा देकर 415 करोड़ रुपये से अधिक जुटाए। साथ ही, एजेंसी ने बताया कि उनके खाड़ी देशों से गहरे संबंध हैं, जिसके कारण उनके विदेश भागने की आशंका है।

10 नवंबर के आतंकी हमले के बाद बढ़ी जांच की रफ्तार

अल फलाह यूनिवर्सिटी 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए आत्मघाती हमले के बाद एजेंसियों के रडार पर आई थी। जांच में सामने आया कि हमले में शामिल मॉड्यूल के कई संदिग्धों का संबंध इसी यूनिवर्सिटी से था। इसके बाद ईडी ने मंगलवार को दिनभर अल फलाह समूह के कई ठिकानों पर छापेमारी की और देर रात सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया।

अदालत में क्या हुआ?

सिद्दीकी को एडिशनल सेशंस जज शीतल चौधरी प्रधान की अदालत में पेश किया गया। ईडी ने 14 दिन की रिमांड की मांग की थी। अदालत ने 1 दिसंबर तक 13 दिन की हिरासत मंजूर की।

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रिमांड अर्जी में ईडी ने बताया कि सिद्दीकी बड़े आर्थिक संसाधनों वाले प्रभावशाली व्यक्ति हैं। गल्फ देशों में परिवार होने के कारण उनके “फरार होने” की संभावना अधिक है। उनका आर्थिक अपराधों का इतिहास रहा है; रिहा होने पर वे सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं।

फर्जी मान्यता के नाम पर 415 करोड़ की वसूली—ED का आरोप

ईडी की कोर्ट में दायर रिपोर्ट के अनुसार, सिद्दीकी और उनके चैरिटेबल ट्रस्ट ने छात्रों को यह दावा कर गुमराह किया कि यूनिवर्सिटी को NAAC मान्यता प्राप्त है, UGC द्वारा मान्यता प्राप्त है |

ED का कहना है कि ये दोनों दावे पूरी तरह झूठे और जाली दस्तावेजों पर आधारित थे। एजेंसी के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ने फीस व अन्य शिक्षा से संबंधित प्राप्तियों के नाम पर ₹415.10 करोड़ की वसूली की और इन्हें सिद्दीकी के निजी हितों में इस्तेमाल किया गया।

दिल्ली पुलिस की FIR के आधार पर कार्रवाई

ईडी ने दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की दो FIR को आधार बनाकर मामले में मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की है, जिनमें अल फलाह द्वारा फर्जी मान्यता दिखाकर दाखिला देने और भारी-भरकम फीस वसूलने के आरोप लगाए गए हैं। सिद्दीकी की ओर से उनके वकील ने कहा कि सभी आरोप “गलत और बेबुनियाद” हैं।

PM मोदी की तारीफ पर शशि थरूर विपक्ष के निशाने पर, BJP बोली— कांग्रेस ने जारी किया ‘फतवा’

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया भाषण की सराहना करने पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। थरूर की प्रशंसा पर कांग्रेस नेताओं ने आपत्ति जताई, जिसके बाद भाजपा ने कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी अपने नेताओं के खिलाफ “फतवा” जारी कर देती है।

भाजपा का कांग्रेस पर हमला
बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र नाम की कोई चीज नहीं है। उन्होंने कहा- “यदि कोई नेता प्रधानमंत्री के भाषण की तारीफ कर दे, तो कांग्रेस तुरंत उसके खिलाफ फतवा निकाल देती है। जो पार्टी पूरे देश में लोकतंत्र की बात करती है, उसके अंदर लोकतंत्र बिल्कुल नहीं बचा है।”

बीजेपी ने कांग्रेस की विचारधारा पर हमला करते हुए यह भी कहा कि पार्टी का नाम “इंदिरा नाजी कांग्रेस” कर देना चाहिए, क्योंकि उसके व्यवहार में आपातकाल जैसी मानसिकता झलकती है।

थरूर ने क्यों की थी प्रधानमंत्री की प्रशंसा?
बिहार चुनावों में NDA की बड़ी जीत के बाद इंडियन एक्सप्रेस द्वारा आयोजित छठे रामनाथ गोयनका लेक्चर में पीएम मोदी का भाषण हुआ था। इसी कार्यक्रम में शशि थरूर मौजूद थे और उन्होंने बाद में एक्स (Twitter) पर पोस्ट करके भाषण की तारीफ की थी।

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थरूर ने लिखा कि- “प्रधानमंत्री ने कहा कि लोग उन पर हमेशा चुनावी मूड में रहने का आरोप लगाते हैं, जबकि वे असल में ‘भावनात्मक मूड’ में रहते हैं, ताकि जनता की समस्याओं के समाधान पर वे ध्यान केंद्रित कर सकें।”

उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में थॉमस मैकाले, “गुलामी की मानसिकता” और भारतीय भाषाओं व ज्ञान परंपराओं में गर्व बहाल करने के 10 साल के राष्ट्रीय मिशन की बात की। थरूर ने इसे एक “महत्वपूर्ण और विचारणीय संदेश” बताया।

कांग्रेस की नाराज़गी क्यों?
बिहार में करारी हार के बाद कांग्रेस नेतृत्व लगातार आंतरिक असहमति और आलोचना पर सतर्क है। थरूर द्वारा प्रधानमंत्री की सार्वजनिक सराहना को पार्टी के कई नेताओं ने “अनुचित समय” पर दिया गया संदेश माना।

इस विवाद के बाद BJP और Congress के बीच नई राजनीतिक गर्मी देखने को मिल रही है।

बेशर्म, बिकाऊ, भ्रष्ट, कायर…; राहुल गांधी की आलोचना करने वाले 272 प्रतिष्ठित नागरिकों पर अलका लांबा का तीखा हमला

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:-  लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को 272 प्रतिष्ठित नागरिकों द्वारा लिखे गए खुले पत्र के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इन नागरिकों में पूर्व न्यायाधीश, पूर्व राजदूत, सेवानिवृत्त नौकरशाह और सेना-पैरामिलिट्री के अधिकारी शामिल हैं, जिन्होंने राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों की आलोचना की थी।

लेकिन इस पत्र पर कांग्रेस नेता अलका लांबा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए “बेशर्म, बिकाऊ, भ्रष्ट, कायर, सत्ता के दलाल” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने एक्स पर एक रिपोर्ट साझा करते हुए यह टिप्पणी की, जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि उनका निशाना पत्र लिखने वाले इन 272 लोगों पर ही था।

वरिष्ठ नागरिकों ने क्या लिखा था?
इन 272 प्रतिष्ठित नागरिकों ने अपने पत्र में कहा कि देश की संवैधानिक संस्थाएं—जैसे सेना, न्यायपालिका और चुनाव आयोग—निष्पक्ष, पारदर्शी और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए कार्य कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए किसी संस्थान की छवि खराब करना “गलत और निंदनीय” है।

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पत्र में कहा गया है—“अब समय आ चुका है कि लोकतंत्र के नेतृत्व की नींव में सत्य हो, विचारों में नाटकीयता नहीं; सेवा की भावना हो, अपमान की नहीं। राजनीतिक लाभ के लिए तमाशा नहीं होना चाहिए।”

पत्र लिखने वालों में कौन शामिल थे?
इन 272 लोगों में 16 पूर्व न्यायाधीश, 14 पूर्व राजदूत, 123 सेवानिवृत्त नौकरशाह, 133 सेवानिवृत्त सेना, अर्द्धसैनिक बल और पुलिस अधिकारी शामिल हैं।  पत्र के साथ दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज एस.एन. ढींगरा और झारखंड के पूर्व डीजीपी निर्मल कौर के नाम और संपर्क विवरण भी हैं।

वरिष्ठ नागरिकों ने कहा कि चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाना “निराधार” और “राजनीति से प्रेरित” है। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया और कहा कि कुछ नेता संवैधानिक संस्थानों पर “ज़हर उगल रहे हैं”।

‘क्या सभ्य समाज को इसकी इजाजत देनी चाहिए?’—सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-हसन को रद्द करने के संकेत दिए!

न्यूज डेस्क/सर्वोदय न्यूज़ :- सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तलाक-ए-हसन की प्रथा को असंवैधानिक घोषित करने के संकेत दिए। न्यायालय ने पूछा कि क्या 2025 के आधुनिक समाज में ऐसी प्रथा जारी रहनी चाहिए जो महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाती हो। कोर्ट ने कहा कि तीन तलाक को अवैध ठहराने के बाद अब तलाक-ए-हसन पर भी नए सिरे से विचार जरूरी है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि वह इस प्रथा को रद्द करने और मामले को पांच-न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ को भेजने पर गंभीरता से विचार कर रही है। कोर्ट ने संबंधित पक्षों से व्यापक संवैधानिक सवालों की सूची के साथ संक्षिप्त नोट देने को कहा है।

तलाक-ए-हसन क्या है?
इस प्रथा के तहत एक मुस्लिम पुरुष तीन महीने की अवधि में हर महीने एक बार “तलाक” कहकर विवाह समाप्त कर सकता है।

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कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या ऐसी प्रथा, जो स्पष्ट रूप से महिलाओं के अधिकारों और गरिमा को प्रभावित करती है, आधुनिक समाज में स्वीकार्य हो सकती है।

कोर्ट का सख्त रुख
पीठ ने कहा,“यह प्रणाली बड़े पैमाने पर समाज को प्रभावित करती है। अगर इसमें घोर भेदभाव है तो न्यायालय को कदम उठाने होंगे। क्या 2025 में भी ऐसी प्रथाओं को बचाए रखना चाहिए? क्या एक महिला की गरिमा को ऐसे बनाए रखा जा सकता है?”

क्या है मामला?
पूरा मामला पत्रकार बेनजीर हीना की जनहित याचिका से जुड़ा है। उन्होंने तलाक-ए-हसन को अनुच्छेद 14, 15, 21 और 25 का उल्लंघन बताते हुए प्रतिबंध लगाने की मांग की है। आरोप है कि उनके पति ने दहेज देने से इनकार होने के बाद वकील के माध्यम से तलाक-ए-हसन नोटिस भेजकर एकतरफा तलाक दे दिया।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नोट्स प्राप्त होने के बाद वह इस मामले को संविधान पीठ के पास भेजने की “वांछनीयता” पर निर्णय लेगा।

ओवैसी ‘खानदानी नेता’, मुसलमान होना ही उनका गुनाह—बृजभूषण सिंह ने AIMIM चीफ की जमकर तारीफ की

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उप्र के कैसरगंज से पूर्व बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर अपने बयान की वजह से सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की तारीफ करते हुए कहा कि ओवैसी “सीधी बात करने वाले और खानदानी नेता” हैं। बृजभूषण के अनुसार, “उनका एकमात्र गुनाह यह है कि वह मुसलमान हैं।” उन्होंने बिहार चुनाव में AIMIM को मिली पांच सीटों की जीत पर भी खुशी जताई।

एक यूट्यूबर से बातचीत में जब बृजभूषण से पूछा गया कि वे ओवैसी को किस तरह के नेता के रूप में देखते हैं, तो उन्होंने कहा,“ओवैसी ने बिहार में सीधे चुनाव लड़े। उन्होंने बीजेपी गठबंधन और लालू यादव की पार्टी—दोनों की आलोचना की। कम से कम वह सीधी और स्पष्ट बात करते हैं। उन्हें सफलता मिली है और मुझे इसकी खुशी है।

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उन्होंने मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा,“अब मीडिया कहती है कि ओवैसी भाजपा की बी-टीम हैं। कल मायावती को भी भाजपा की बी-टीम कह दिया जाएगा। ओवैसी खानदानी नेता हैं, उनका गुनाह सिर्फ यही है कि वह मुसलमान हैं।”

AIMIM ने 5 सीटों पर दर्ज की जीत
बिहार विधानसभा चुनाव में AIMIM ने 25 सीटों पर चुनाव लड़ा और सीमांचल क्षेत्र की 5 सीट—जोकिहाट, बहादुरगंज, कोचाधामन, अमौर और बायसी—पर जीत हासिल की। ये सीटें मुस्लिम-बहुल इलाकों में आती हैं।

2020 में भी किया था कमाल
2020 के बिहार चुनाव में भी AIMIM ने इसी क्षेत्र से 5 सीटें जीती थीं, हालांकि बाद में इनमें से चार विधायक RJD में शामिल हो गए थे।