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Indian Army SSC Tech Recruitment 2026: 350 इंजीनियर पदों पर भर्ती, अभी करें आवेदन

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- भारतीय सेना ने 67वें शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC-Tech) पुरुष कोर्स के लिए भर्ती अधिसूचना जारी की है। इस भर्ती के तहत कुल 350 पदों पर इंजीनियरिंग स्नातकों की नियुक्ति की जाएगी। देश सेवा का जज्बा रखने वाले पुरुष और महिला उम्मीदवार joinindianarmy.nic.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

पात्रता मानदंड

  • शैक्षणिक योग्यता: संबंधित इंजीनियरिंग स्ट्रीम में स्नातक या अंतिम वर्ष के छात्र। अंतिम वर्ष के छात्र को अक्टूबर 2026 तक डिग्री प्रमाणपत्र जमा करना अनिवार्य है।
  • आयु सीमा: 20 से 27 वर्ष के बीच।

आवेदन प्रक्रिया और तिथियां

  • आवेदन की शुरुआत: 7 जनवरी 2026
  • अंतिम तिथि: 5 फरवरी 2026, दोपहर 3:00 बजे तक
  • आवेदन केवल ऑनलाइन मोड में स्वीकार किए जाएंगे।

चयन प्रक्रिया

  • बिना लिखित परीक्षा: इस भर्ती की खासियत यह है कि कोई लिखित परीक्षा नहीं होगी।
  • शॉर्टलिस्टिंग: इंजीनियरिंग डिग्री में प्राप्त अंकों के आधार पर उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा।

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  • SSB इंटरव्यू: शॉर्टलिस्टेड उम्मीदवारों को 5 दिन के SSB इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। इसमें मनोवैज्ञानिक परीक्षण, ग्रुप टास्क और पर्सनल इंटरव्यू शामिल हैं।
  • मेडिकल टेस्ट: इंटरव्यू में सफल उम्मीदवारों का सैन्य अस्पताल में मेडिकल परीक्षण किया जाएगा।

प्रशिक्षण और करियर

सफल उम्मीदवारों को ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA), चेन्नई में 49 सप्ताह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्त किया जाएगा। भारतीय सेना में इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के ऑफिसर्स को अत्याधुनिक तकनीक और हथियारों के साथ काम करने का अवसर मिलता है।

सुझाव: उम्मीदवार आवेदन करने से पहले सेना की वेबसाइट पर उपलब्ध अधिसूचना को ध्यान से पढ़ें ताकि आवेदन में कोई गलती न हो।

1 फरवरी को ही पेश हो आम बजट…रविवार के सस्पेंस के बीच CCPA का प्रस्ताव

नई दिल्ली/सर्वोदय न्यूज़:- आगामी Union Budget 2026 को 1 फरवरी को पेश किए जाने की संभावना है, लेकिन चूंकि यह दिन रविवार है, इसलिए बजट पेश करने को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। इस बीच, कैबिनेट कमेटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स (CCPA) ने संसद के बजट सत्र की शुरुआत 28 जनवरी से करने और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, इन तारीखों को लेकर अंतिम निर्णय अभी लिया जाना बाकी है।

बजट सत्र कब से शुरू होगा?

सूत्रों के अनुसार, CCPA की बैठक में बजट सत्र शुरू करने के लिए 28 जनवरी और 31 जनवरी की संभावित तारीखों पर चर्चा हुई। पारंपरिक तौर पर संसद का बजट सत्र जनवरी के अंतिम सप्ताह में शुरू होता है। यदि 28 जनवरी को सत्र आरंभ होता है, तो इसके तुरंत बाद आर्थिक सर्वेक्षण सदन में प्रस्तुत किया जाएगा, और इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण केंद्रीय बजट पेश करेंगी।

बजट पेश करने की प्रक्रिया

संसद में आमतौर पर बजट सत्र दो चरणों में आयोजित किया जाता है। पहले चरण में राष्ट्रपति का अभिभाषण, आर्थिक सर्वेक्षण और केंद्रीय बजट सदन में प्रस्तुत किया जाता है।

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इसके बाद कुछ समय का अवकाश लिया जाता है ताकि संसद की स्थायी समितियां विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों का विश्लेषण कर सकें। दूसरे चरण में इन मांगों पर चर्चा और पारित करने की प्रक्रिया पूरी की जाती है।

पहले का पैटर्न

साल 2017 से पहले आम बजट फरवरी के अंतिम दिन पेश किया जाता था। उस समय संसद नए वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही के खर्चों के लिए लेखानुदान पारित करती थी। बाकी वित्तीय वर्ष के लिए बजट को संसद द्वारा बाद में मंजूरी दी जाती थी, जब अलग-अलग विभागों की अनुदान मांगों की समीक्षा स्थायी समितियों द्वारा पूरी हो जाती थी।

साल 2017 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यह प्रथा शुरू की कि बजट को 1 फरवरी को पेश किया जाए, ताकि नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत से पहले इसे संसद से मंजूरी मिल सके।

संपत्ति विवरण न देने वाले राज्यकर्मियों का वेतन और पदोन्नति रुकेगी, मुख्य सचिव का सख्त आदेश

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश सरकार ने चल-अचल संपत्तियों का विवरण समय पर न देने वाले राज्य कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जो कर्मचारी निर्धारित समय सीमा में अपनी संपत्ति का ब्योरा नहीं देंगे, उनका वेतन रोका जाएगा और पदोन्नति पर भी रोक लगेगी।

प्रदेश में लगभग आठ लाख से अधिक राज्यकर्मी कार्यरत हैं। सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को 31 जनवरी तक मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्तियों का विवरण अनिवार्य रूप से अपलोड करना होगा। जिनका विवरण पोर्टल पर दर्ज नहीं होगा, उन्हें फरवरी माह में जनवरी का वेतन जारी नहीं किया जाएगा।

हर साल देना होता है संपत्ति का ब्योरा

मुख्य सचिव की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार, प्रदेश में 8.91 लाख कर्मचारी और अधिकारी हैं, जिन्हें हर वर्ष 1 से 31 जनवरी के बीच अपनी संपत्ति की जानकारी देना अनिवार्य होता है।

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इस बार कर्मचारियों को यह भी बताना होगा कि दिसंबर 2025 तक उन्होंने कितनी चल-अचल संपत्तियां अर्जित की हैं।

अब तक 5% से भी कम ने दी जानकारी

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अभी तक पांच प्रतिशत से भी कम कर्मचारियों ने मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति का विवरण दर्ज कराया है। शासनादेश में विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सुनिश्चित करें कि उनके विभाग के सभी कर्मचारी समय पर ऑनलाइन विवरण भरें। ऐसा न करने वाले कर्मचारियों के नाम लेखाधिकारी को भेजे जाएंगे, ताकि उनका वेतन रोका जा सके।

यूपी में 896 शिक्षकों पर बड़ी कार्रवाई, सभी DIOS को भेजी गई डिबार सूची

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) ने 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। बोर्ड ने 896 शिक्षकों को परीक्षा कार्यों से डिबार कर दिया है। इन शिक्षकों की सूची प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को भेज दी गई है।

बोर्ड के आदेश के अनुसार, 24 जनवरी से शुरू होने वाली इंटरमीडिएट की प्रायोगिक परीक्षाओं में इन शिक्षकों की ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी। इसके साथ ही ये शिक्षक कक्ष निरीक्षण, प्रश्नपत्र संचालन और उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन जैसे किसी भी परीक्षा संबंधी कार्य में शामिल नहीं किए जाएंगे।

इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा शिक्षक डिबार

बोर्ड की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, क्षेत्रीय कार्यालयों के आधार पर डिबार किए गए शिक्षकों की संख्या इस प्रकार है—

  • प्रयागराज क्षेत्र – 241 शिक्षक
  • वाराणसी क्षेत्र – 217 शिक्षक
  • मेरठ क्षेत्र – 204 शिक्षक
  • गोरखपुर क्षेत्र – 121 शिक्षक
  • बरेली क्षेत्र – 113 शिक्षक

प्रयागराज के 70 शिक्षक आजीवन डिबार

प्रयागराज जिले में 70 शिक्षकों को बोर्ड परीक्षा के सभी कार्यों से आजीवन डिबार कर दिया गया है। वहीं कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं जिन्हें पहले 2025 तक डिबार किया गया था और अब उनकी ड्यूटी बहाल की गई है। इसके अलावा कुछ शिक्षकों को 2026 और 2027 तक परीक्षा कार्यों से वंचित रखा गया है।

भर्ती और परीक्षा व्यवस्था को और सख्त बनाएगा आयोग

इधर, मंगलवार को हुई उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) की बैठक में प्रशासनिक और परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने को लेकर कई अहम फैसले लिए गए।

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आयोग के उप सचिव एवं पीआरओ संजय कुमार सिंह की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, आयोग के पास मौजूद सभी फाइलों और अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जाएगा, जिससे रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे और कामकाज में तेजी आएगी।

भर्ती प्रक्रिया के हर चरण के लिए बनेगी SOP

बैठक में यह भी तय किया गया कि भर्ती प्रक्रिया के प्रत्येक चरण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जाएगी। परीक्षा नियंत्रक को निर्देश दिया गया है कि वह तैयार SOP को आगामी बैठक में प्रस्तुत करें, जिसके बाद परीक्षा तिथियों को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

एजेंसियों के साथ हुए MOU की होगी समीक्षा

इसके अलावा, आयोग की जरूरतों के अनुसार विभिन्न एजेंसियों के साथ किए गए एमओयू की समीक्षा की जाएगी, ताकि भविष्य में किसी तकनीकी खामी से बचा जा सके। परीक्षा से जुड़े कार्यों के लिए एजेंसियों का चयन पारदर्शी प्रक्रिया और विज्ञप्ति जारी कर किया जाएगा।

आयोग भवन की होगी मरम्मत

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आयोग भवन के क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत कराई जाएगी। इसके तहत रंगाई-पुताई और साफ-सफाई का कार्य जल्द शुरू किया जाएगा।

हम अपमान की कीमत पर भारत में नहीं खेलेंगे, बांग्लादेश ने टी20 वर्ल्ड कप पर ICC को दी गीदड़-भभकी

स्पोर्ट्स डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- टी20 वर्ल्ड कप 2026 को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव और गहरा गया है। बांग्लादेश ने इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि वह राष्ट्रीय अपमान की कीमत पर भारत में आकर टूर्नामेंट नहीं खेलेगा। बांग्लादेश सरकार के यूथ एंड स्पोर्ट्स एडवाइजर आसिफ नजरुल ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

मुस्तफिजुर विवाद के बाद बढ़ा तनाव

तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के निर्देश पर IPL 2026 से बाहर किए जाने के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों में और तल्खी आई है। इसके बाद बांग्लादेश ने ICC से मांग की कि T20 वर्ल्ड कप के उसके मैचों का आयोजन स्थल बदला जाए।

टी20 वर्ल्ड कप 7 फरवरी से भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में खेला जाना है। बांग्लादेश को अपने चार लीग मुकाबले कोलकाता और मुंबई में खेलने हैं, लेकिन अब वह भारत में खेलने को लेकर असहमति जता रहा है।

ICC के जवाब से संतुष्ट नहीं बांग्लादेश

बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम बुलबुल और उपाध्यक्ष फारूक अहमद के साथ बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए आसिफ नजरुल ने कहा कि ICC की ओर से मिला जवाब उनकी चिंताओं को गंभीरता से नहीं दर्शाता।

उन्होंने कहा,“आईसीसी के पत्र को पढ़कर ऐसा लगा कि वे भारत में बांग्लादेशी खिलाड़ियों से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं को पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं। यह सिर्फ सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि यह हमारे देश के सम्मान से भी जुड़ा हुआ है।”

सम्मान और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं

आसिफ नजरुल ने साफ कहा कि बांग्लादेश क्रिकेट खेलने का इच्छुक है, लेकिन किसी भी हाल में अपने खिलाड़ियों, दर्शकों, पत्रकारों और देश की गरिमा से समझौता नहीं करेगा।

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उन्होंने कहा, “हम क्रिकेट को बेहद पसंद करने वाला देश हैं और टी20 वर्ल्ड कप खेलना चाहते हैं, लेकिन अगर बात देश के अपमान या सुरक्षा की होगी तो हम पीछे नहीं हटेंगे।”

श्रीलंका में मैच खेलने पर अड़ा बांग्लादेश

बांग्लादेश ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह दूसरे मेजबान देश श्रीलंका में अपने मुकाबले खेलने को तैयार है और इस मांग पर अडिग रहेगा।

आसिफ नजरुल ने कहा,“जब हमारे खिलाड़ियों की सुरक्षा और देश के सम्मान की बात आएगी, तो कोई समझौता नहीं होगा। हम श्रीलंका में खेलने को तैयार हैं और इसी पर कायम रहेंगे।”

IPL बैन और बढ़ता विवाद

गौरतलब है कि कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने मुस्तफिजुर रहमान को ऑक्शन में 9.2 करोड़ रुपये में खरीदा था, लेकिन बाद में उन्हें टीम से रिलीज कर दिया गया। BCCI की ओर से इस फैसले पर कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया।

हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स में इसे बांग्लादेश में हिंदुओं पर कथित हमलों और उससे जुड़े राजनयिक तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। विवाद के बाद बांग्लादेश सरकार ने IPL के प्रसारण पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।

घर में पूजा और मंदिर की पूजा में क्या होता है अंतर? जानिये प्रेमानंद महाराज ने क्या बताया

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- हर घर में पूजा स्थल को बेहद पवित्र माना जाता है। आजकल अधिकांश लोग अपने घरों में अलग से पूजा कक्ष बनवाते हैं और नियमित रूप से देवी-देवताओं की आराधना करते हैं। कई लोगों का मानना है कि घर में की गई पूजा से ही ईश्वर प्रसन्न हो जाते हैं, इसलिए मंदिर जाना आवश्यक नहीं है। इसी विषय को लेकर एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से सवाल किया कि घर में पूजा और मंदिर या तीर्थ स्थल में की गई पूजा में क्या अंतर होता है? आइए जानते हैं महाराज जी का उत्तर।

घर की पूजा और मंदिर की पूजा अलग-अलग फल देती है

इस प्रश्न के उत्तर में प्रेमानंद महाराज ने कहा कि घर में की गई पूजा और मंदिर, तीर्थ या धाम में की गई पूजा के फल समान नहीं होते। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूजा का स्थान भी उसके फल को निर्धारित करता है।

महाराज जी ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति घर में रहकर 1000 माला जप करता है, वही व्यक्ति यदि गौशाला में 100 माला और देवालय में केवल एक माला जप करता है, तो देवालय में किया गया एक माला जप, घर में किए गए 1000 माला जप के बराबर फल देता है।

धामों में भजन का विशेष महत्व

प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा कि यदि कोई भक्त वृंदावन धाम जैसे पवित्र स्थान पर जप करता है, तो वहां की गई एक माला, एक लाख माला के बराबर फल प्रदान करती है।

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इससे यह स्पष्ट होता है कि घर का भजन और तीर्थ या धाम में किया गया भजन अलग-अलग प्रभाव रखता है।

भगवत प्राप्ति की इच्छा तीर्थ यात्रा से जुड़ी

महाराज जी के अनुसार, जब मन में भगवान की प्राप्ति की तीव्र इच्छा जागृत होती है, तभी व्यक्ति तीर्थ यात्रा करता है, संतों के सान्निध्य में जाता है और बड़े देवालयों के दर्शन करता है। ऐसे स्थानों पर जाने से मन और हृदय अधिक पवित्र होता है।

गंगा तट पर भजन का अलग ही प्रभाव

उन्होंने कहा कि घर में भजन करना और गंगा तट पर भजन करना एक समान नहीं होता। यदि कोई व्यक्ति गंगा जल के समीप या उसमें बैठकर भजन करता है, तो उसका पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। यह सब भजन की विभिन्न पद्धतियां हैं, जिनका अपना-अपना आध्यात्मिक महत्व है।

तीर्थों में पूजा का विशेष लाभ

प्रेमानंद महाराज ने कहा कि तीर्थों, धामों और पवित्र स्थलों में की गई पूजा और भजन का फल, घर की पूजा की तुलना में कई गुना अधिक होता है। यही कारण है कि शास्त्रों में तीर्थ यात्रा को विशेष महत्व दिया गया है।

डिस्क्लेमर:
इस लेख में दी गई जानकारियां धार्मिक मान्यताओं और संतों के प्रवचनों पर आधारित हैं। हम इनकी पूर्ण सत्यता का दावा नहीं करते। किसी भी धार्मिक या आध्यात्मिक निर्णय से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

यूपी में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा रद्द, योगी सरकार का बड़ा फैसला

लखनऊ/ सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को लेकर योगी सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 910 पदों के लिए आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को निरस्त करने के आदेश दिए हैं। यह फैसला अभ्यर्थियों के उज्ज्वल भविष्य और भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

भर्ती प्रक्रिया की शुचिता पर सरकार का जोर

सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में होने वाली सभी भर्तियों और चयन प्रक्रियाओं को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और शुचितापूर्ण बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC), प्रयागराज द्वारा विज्ञापन संख्या-51 के तहत अप्रैल 2025 में आयोजित सहायक आचार्य (असिस्टेंट प्रोफेसर) परीक्षा को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई थीं।

इन शिकायतों में अनियमितता, धांधली और अवैध धन वसूली जैसे आरोप शामिल थे, जिसे देखते हुए सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया।

गोपनीय जांच में हुआ बड़ा खुलासा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर इस मामले की गोपनीय जांच कराई गई। जांच के दौरान एसटीएफ उत्तर प्रदेश ने फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया। इस कार्रवाई में महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल को गिरफ्तार किया गया।

इस संबंध में थाना विभूतिखंड, लखनऊ में मुकदमा भी दर्ज किया गया है।

मॉडरेशन प्रक्रिया में प्रश्नपत्र लीक होने की पुष्टि

जांच में सामने आया कि आरोपी महबूब अली ने मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान प्रश्नपत्र निकालकर कई अभ्यर्थियों को भारी रकम लेकर उपलब्ध कराए थे। एसटीएफ द्वारा की गई डेटा एनालिसिस और विवेचना से इस बात की पुष्टि हुई।

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इसके अलावा अन्य संदिग्ध अभ्यर्थियों की भूमिका भी उजागर हुई, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि परीक्षा की शुचिता पूरी तरह भंग हो चुकी थी।

दोबारा होगी परीक्षा

इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को रद्द करने का आदेश दिया है। साथ ही उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देश दिए गए हैं कि परीक्षा का आयोजन शीघ्र, पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से दोबारा कराया जाए।

ईरान बन सकता है अमेरिका का अगला निशाना; वेनेजुएला से भी बदतर होंगे हालात-; किसकी चेतावनी?

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले के बाद वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड, कोलंबिया, नाइजीरिया और ईरान समेत कई देशों को खुली चेतावनी दी है। ट्रंप की इन धमकियों के बाद प्रसिद्ध अमेरिकी अर्थशास्त्री और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े विशेषज्ञ जेफ्री सैक्स ने अमेरिका की विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

जेफ्री सैक्स ने आशंका जताई है कि ईरान अमेरिका का अगला सैन्य टारगेट हो सकता है और अगर ऐसा हुआ तो हालात वेनेजुएला से कहीं ज्यादा भयावह होंगे।

अमेरिका में कानून सिर्फ एक कल्पना बन गया: सैक्स

इंडिया टुडे को दिए गए इंटरव्यू में जेफ्री सैक्स ने कहा कि अमेरिका में अब कानून सिर्फ एक काल्पनिक कहानी बनकर रह गया है। उनके मुताबिक, देश एक ऐसे डीप स्टेट सैन्य तंत्र के प्रभाव में काम कर रहा है, जो संविधान से ऊपर खुद को मानता है।

उन्होंने यह भी कहा कि डोनाल्ड ट्रंप अब नियंत्रण में नहीं हैं और अमेरिकी सत्ता संरचना लोकतांत्रिक सीमाओं से बाहर जाकर फैसले ले रही है।

ईरान पर हमला हुआ तो हालात होंगे बेहद खतरनाक

ईरान पर संभावित अमेरिकी कार्रवाई को लेकर पूछे गए सवाल पर सैक्स ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कदम उठाया, तो यह स्थिति वेनेजुएला से भी ज्यादा विनाशकारी होगी।

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उन्होंने खुलासा किया कि नए साल से ठीक पहले इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के संकेतों से यह साफ हुआ कि ईरान अगला निशाना हो सकता है

इजरायल के दबाव में काम करता है अमेरिका

जेफ्री सैक्स के अनुसार, इजरायल ईरान को लेकर बेहद आक्रामक रवैया रखता है और वहां की सरकार को गिराने की मंशा रखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका कई बार इजरायल के दबाव में वही युद्ध लड़ता है, जो इजरायल चाहता है।

सैक्स ने इसे वैश्विक शांति के लिए एक बेहद खतरनाक स्थिति बताया।

मानवाधिकारों के नाम पर युद्ध की तैयारी?

ईरान में चल रहे प्रदर्शनों को लेकर ट्रंप की बयानबाजी पर प्रतिक्रिया देते हुए जेफ्री सैक्स ने कहा कि यह डीप स्टेट की पुरानी रणनीति है, जिसमें मानवाधिकारों का हवाला देकर किसी देश पर हमला करने की जमीन तैयार की जाती है

उन्होंने आगाह किया कि ईरान के साथ युद्ध सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रहेगा, बल्कि यह वैश्विक युद्ध की वजह भी बन सकता है

UP IPS Transfer List: यूपी पुलिस में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 20 आईपीएस अधिकारियों के तबादले

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। योगी सरकार ने पुलिस महकमे में 20 आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। ये तबादले अपर पुलिस महानिदेशक (ADG), पुलिस महानिरीक्षक (IG) और उप महानिरीक्षक स्तर पर किए गए हैं।

इस फेरबदल में कई वरिष्ठ अधिकारियों को नई और अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। डॉ. संजीव गुप्ता को एडीजी मुख्यालय, लखनऊ बनाया गया है, जबकि किरण एस को आईजी लखनऊ रेंज की जिम्मेदारी दी गई है।

कई अहम इकाइयों में नई तैनाती

इस तबादला सूची में पुलिस कमिश्नरेट, रेलवे, सीआईडी, प्रशिक्षण, तकनीकी सेवाएं, यूपी-112, ईओडब्ल्यू और विशेष शाखा जैसी महत्वपूर्ण इकाइयों में अधिकारियों की नई पोस्टिंग की गई है। ट्रांसफर लिस्ट में 1995 से लेकर 2008 बैच तक के आईपीएस अधिकारी शामिल हैं।

किन अधिकारियों को कहां मिली नई जिम्मेदारी

  • राम कुमार (IPS 1995) – एडीजी मानवाधिकार से एडीजी लॉजिस्टिक्स, लखनऊ
  • राजकुमार (IPS 1995) – एडीजी लॉजिस्टिक्स से एडीजी मानवाधिकार, लखनऊ
  • ज्योति नारायण (IPS 1996) – एडीजी पीएसी, कानपुर से एडीजी प्रयागराज जोन
  • डॉ. संजीव गुप्ता (IPS 1999) – एडीजी प्रयागराज जोन से एडीजी मुख्यालय, लखनऊ
  • प्रशांत कुमार (IPS 2000) – एडीजी प्रशासन, पुलिस मुख्यालय, लखनऊ

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  • तरुण गाबा (IPS 2001) – एडीजी/आईजी सुरक्षा, उत्तर प्रदेश
  • आशुतोष कुमार (IPS 2001) – एडीजी, यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड, लखनऊ
  • अपर्णा कुमार (IPS 2002) – संयुक्त पुलिस आयुक्त, पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ
  • मोडक राजेश डी. राव (IPS 2003) – पुलिस महानिरीक्षक, स्थापना, उत्तर प्रदेश
  • आर.के. भारद्वाज (IPS 2005) – पुलिस महानिरीक्षक, रेलवे, लखनऊ
  • किरण एस (IPS 2008) – पुलिस महानिरीक्षक, लखनऊ परिक्षेत्र
  • आनंद सुरेशराव कुलकर्णी (IPS 2008) – पुलिस महानिरीक्षक, भ्र0लि0सं0, उत्तर प्रदेश
  • अमित वर्मा (IPS 2008) – पुलिस महानिरीक्षक, ईओडब्ल्यू, लखनऊ
  • डॉ. अखिलेश कुमार (IPS SPS-2008) – पुलिस महानिरीक्षक, सीआईडी, उत्तर प्रदेश
  • ए. कोनांची (IPS 2008) – पुलिस महानिरीक्षक, रेलवे, प्रयागराज
  • राजीव मल्होत्रा (IPS SPS-2008) – पुलिस महानिरीक्षक, यूपीएसआईएफएस, लखनऊ

सरकार के इस फैसले को पुलिस प्रशासन को और अधिक प्रभावी, संतुलित और कार्यक्षम बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। नई तैनातियों से कानून-व्यवस्था, जांच और विशेष इकाइयों के कामकाज में तेजी आने की उम्मीद है।