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यूपी के श्रमिकों और छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत, मिलेगी ₹3000 मासिक पेंशन

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और छोटे व्यापारियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। केंद्र सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से राष्ट्रव्यापी विशेष पंजीकरण अभियान शुरू किया है। इसके तहत पात्र लाभार्थियों को ₹3000 प्रति माह पेंशन का लाभ मिलेगा।

यह अभियान प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना (PMSYM) और प्रधानमंत्री लघु व्यापारी मानधन योजना (NPS-Traders) के तहत संचालित किया जा रहा है।

दो चरणों में चलेगा पंजीकरण अभियान

पंजीकरण अभियान को दो चरणों में आयोजित किया जाएगा—शहरी क्षेत्र: 15 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक, ग्रामीण क्षेत्र: 16 फरवरी से 15 मार्च 2026 तक | इस दौरान पात्र श्रमिक और व्यापारी अपना पंजीकरण कराकर योजना का लाभ उठा सकते हैं।

कौन ले सकता है प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना का लाभ

गोरखपुर के उप श्रम आयुक्त शक्ति सेन मौर्य ने बताया कि इस योजना के तहत—

  • आयु सीमा: 18 से 40 वर्ष
  • मासिक आय: ₹15,000 या उससे कम
  • लाभ नहीं मिलेगा यदि व्यक्ति आयकरदाता, EPF, ESIC या NPS का सदस्य हो

पात्र श्रमिकों में शामिल हैं:

रिक्शा चालक, फेरीवाले, घरेलू कामगार, मिड-डे मील कर्मी, ईंट भट्ठा मजदूर, निर्माण श्रमिक, मनरेगा मजदूर, खेतिहर मजदूर, हथकरघा, बीड़ी, चमड़ा उद्योग से जुड़े कामगार, आंगनबाड़ी कार्यकत्री, आशा कार्यकर्ता सहित अन्य असंगठित कर्मकार।

लघु व्यापारियों के लिए भी पेंशन योजना

प्रधानमंत्री लघु व्यापारी मानधन योजना के तहत—

  • आयु सीमा: 18 से 40 वर्ष
  • वार्षिक टर्नओवर: 1.5 करोड़ रुपये से कम

यह भी पढ़े:- बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को मिली एंट्री, ICC जल्द करेगा आधिकारिक ऐलान

पात्र व्यापारियों में शामिल हैं:

दुकान मालिक, खुदरा व्यापारी, मिल व वर्कशॉप संचालक, कमीशन एजेंट, छोटे होटल-रेस्तरां मालिक, रियल एस्टेट एजेंट और अन्य स्वयं नियोजित लघु व्यापारी।

₹55 से ₹200 अंशदान पर ₹3000 पेंशन

दोनों योजनाओं के तहत आयु वर्ग के अनुसार ₹55 से ₹200 तक मासिक अंशदान करना होगा। इसके बदले 60 वर्ष की आयु के बाद ₹3000 प्रति माह पेंशन, लाभार्थी की मृत्यु होने पर पति/पत्नी को 50% पारिवारिक पेंशन

कैसे करें पंजीकरण

  • नजदीकी जन सुविधा केंद्र (CSC) के माध्यम से
  • या स्वयं ऑनलाइन पोर्टल  http://maandhan.in पर जाकर

बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को मिली एंट्री, ICC जल्द करेगा आधिकारिक ऐलान

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न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- आईसीसी (अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद) ने 2026 टी20 वर्ल्ड कप को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है। क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक, आगामी टी20 विश्व कप में अब बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को शामिल किया गया है। इस फैसले का औपचारिक ऐलान ICC जल्द कर सकता है।

2026 टी20 वर्ल्ड कप का आयोजन 7 फरवरी से भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में होना है। लेकिन टूर्नामेंट से पहले ही एक टीम के बदलने से क्रिकेट जगत में हलचल तेज हो गई है।

भारत में खेलने को लेकर बांग्लादेश ने नहीं दी सहमति

रिपोर्ट के अनुसार, ICC ने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) को भारत में खेलने को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए पर्याप्त समय दिया था। बावजूद इसके, लंबे इंतजार के बाद भी बांग्लादेश की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिला।

इसके बाद गवर्निंग बॉडी ने बड़ा कदम उठाते हुए एसोसिएट नेशन स्कॉटलैंड को मुख्य टूर्नामेंट में शामिल करने का निर्णय लिया। इस फैसले से बांग्लादेशी खिलाड़ियों का वर्ल्ड कप खेलने का सपना टूटता नजर आ रहा है।

ग्रुप C में शामिल हुआ स्कॉटलैंड

बांग्लादेश की जगह एंट्री मिलने के बाद स्कॉटलैंड को ग्रुप C में रखा गया है। स्कॉटलैंड की टीम अपने ज्यादातर मुकाबले कोलकाता और मुंबई में खेलेगी।

स्कॉटलैंड के ग्रुप स्टेज मैच

  • 7 फरवरी: वेस्टइंडीज के खिलाफ – कोलकाता
  • 9 फरवरी: इटली के खिलाफ – कोलकाता
  • 14 फरवरी: इंग्लैंड के खिलाफ – कोलकाता
  • 17 फरवरी: नेपाल के खिलाफ – मुंबई

टीम अपना पहला मुकाबला कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स स्टेडियम में खेलेगी।

BCB और BCCI विवाद बना कारण

बताया जा रहा है कि यह पूरा विवाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) और बीसीसीआई के बीच बढ़े तनाव से जुड़ा है। भारत में बांग्लादेश के खिलाफ बढ़ते विरोध और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही हिंसा के मुद्दे के बाद हालात बिगड़े थे।

इसी बीच बीसीसीआई ने बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान के आईपीएल खेलने पर रोक लगाई और कोलकाता नाइट राइडर्स को उन्हें रिलीज करने का निर्देश दिया। इसके बाद बांग्लादेश सरकार और बोर्ड ने भारत में आयोजित हो रहे टी20 वर्ल्ड कप में खेलने से इनकार कर दिया और ICC से वेन्यू बदलने की मांग की।

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हालांकि, ICC ने बांग्लादेश की मांग को खारिज करते हुए साफ कर दिया कि टूर्नामेंट भारत में ही खेला जाएगा। बांग्लादेश अपनी जिद पर अड़ा रहा और खिलाड़ियों व सपोर्ट स्टाफ की सुरक्षा का हवाला देते हुए भारत में खेलने से इनकार कर दिया।

स्कॉटलैंड को मिला सुनहरा मौका

बांग्लादेश के बाहर होने के बाद स्कॉटलैंड को पहली बार इतने बड़े मंच पर खुद को साबित करने का बड़ा मौका मिला है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला एसोसिएट देशों को बढ़ावा देने की ICC नीति के अनुरूप है।

नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस छोड़ी, कभी मायावती के थे करीबी; अब चंद्रशेखर से हाथ मिलाने की अटकलें

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस को तगड़ा झटका देते हुए वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले से प्रदेश की सियासी हलचल और तेज हो गई है।

नसीमुद्दीन सिद्दीकी कभी बसपा सुप्रीमो मायावती के बेहद करीबी माने जाते थे और लंबे समय तक पार्टी के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल रहे। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा था, लेकिन अब कांग्रेस से भी अलग होने का फैसला कर लिया है।

विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को झटका

सूत्रों के मुताबिक, नसीमुद्दीन सिद्दीकी का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दल आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए यह घटनाक्रम संगठनात्मक रूप से बड़ा नुकसान माना जा रहा है।

हालांकि, फिलहाल नसीमुद्दीन सिद्दीकी की ओर से इस्तीफे के कारणों को लेकर कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।

चंद्रशेखर आज़ाद से नजदीकी की चर्चा

कांग्रेस से इस्तीफे के बाद अब यह अटकलें तेज हो गई हैं कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी आज़ाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद के साथ राजनीतिक गठजोड़ कर सकते हैं। हाल के दिनों में दोनों नेताओं के बीच मुलाकातों और संवाद की खबरें भी सामने आती रही हैं।

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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दलित और पिछड़ा राजनीति के समीकरणों को देखते हुए यह संभावित गठबंधन उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है।

लंबा रहा है सियासी सफर

नसीमुद्दीन सिद्दीकी का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। बसपा में रहते हुए उन्होंने संगठन और सरकार में अहम भूमिका निभाई थी। मायावती से दूरी के बाद उन्होंने कांग्रेस का रुख किया, लेकिन वहां भी उनका सफर लंबा नहीं चला।

अब उनके अगले राजनीतिक कदम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

‘कलयुग के कालनेमि कौन?’ अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर अखिलेश यादव का योगी सरकार पर तीखा हमला

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा निशाना साधा है। अखिलेश यादव ने प्रतीकात्मक सवाल उठाते हुए कहा कि “कालनेमि को याद करने वाले यह भी बताएं कि कलयुग के कालनेमि कौन हैं?” उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता का दुरुपयोग कर धर्म और संतों को परेशान किया जा रहा है।

एसआईआर और चुनाव आयोग पर भी बरसे अखिलेश

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और चुनाव आयोग की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में चुनाव आयोग नोटिस जारी कर रहा है, उसकी जानकारी राजनीतिक दलों को क्यों नहीं दी जा रही।

अखिलेश ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं रह गया है और वह सरकार के इशारे पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि अधिकारी सरकार के साथ मिलकर गड़बड़ियां कर रहे हैं।

‘उपचुनाव में वोट लूटे गए’ का आरोप

सपा प्रमुख ने कहा कि SIR के बाद मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं होने का भरोसा दिया गया था, लेकिन उपचुनाव में वोट लूटे जाने के आरोप पहले ही सामने आ चुके हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग ने साफ कर दिया था कि CCTV फुटेज किसी राजनीतिक दल को नहीं दी जाएगी, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। अखिलेश का दावा है कि SIR प्रक्रिया के जरिए भी साजिश रची जा रही है।

BLO ट्रेनिंग और मतदाता सूची पर सवाल

अखिलेश यादव ने बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) की ट्रेनिंग को लेकर भी चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि खराब प्रशिक्षण के कारण कई BLO की जान तक चली गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि एक ही नाम से दो-दो वोटर बनाए जा रहे हैं और चुनाव आयोग आंखें मूंदे बैठा है। अखिलेश ने मांग की कि चुनाव आयोग विपक्षी दलों का सहयोग करे और निष्पक्षता से काम करे।

केजीएमयू और धार्मिक मुद्दों पर बयान

केजीएमयू परिसर से मजार हटाने के सवाल पर अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि अगर इसी तर्क से देखा जाए तो सरकार को केजीएमयू भी गिरवा देना चाहिए, क्योंकि उसका निर्माण ईसाई मिशनरियों ने कराया था।

अविमुक्तेश्वरानंद से संपर्क में होने का दावा

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद को लेकर अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी उनके संपर्क में है और लगातार बातचीत कर रही है।

एसआईआर, जनगणना और गाय के मुद्दे पर सरकार पर हमला

अखिलेश यादव ने कहा कि SIR को लेकर जानबूझकर भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि मतदाता सूची को आधार से जोड़ा जाए।

उन्होंने जातिगत जनगणना पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सभी जातियों की सही गिनती नहीं की जा रही। इसके साथ ही उन्होंने सरकार पर गाय और गौपालन विरोधी होने का आरोप लगाया।

यह भी पढ़े:- स्नान-पर्व में राजनीतिक लोगों का प्रभाव…! मायावती ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर तोड़ी 

अखिलेश ने कहा कि कन्नौज में देश का पहला काऊ मिल्क प्लांट सपा सरकार में लगाया गया था, जिसे मौजूदा सरकार ने बंद कर दिया। उन्होंने ऐलान किया कि सपा की सरकार बनने पर गाय का दूध खरीदा जाएगा और जनता में वितरित किया जाएगा।

डायल-100 व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

सपा प्रमुख ने कहा कि मौजूदा सरकार ने डायल-100 जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है, जिससे आम जनता की सुरक्षा प्रभावित हुई है।

स्नान-पर्व में राजनीतिक लोगों का प्रभाव…! मायावती ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर तोड़ी चुप्पी

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- प्रयागराज के माघ मेले में गंगा स्नान को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और शासन-प्रशासन के बीच जारी गतिरोध पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपनी राय सार्वजनिक की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर पोस्ट साझा कर धर्म और राजनीति के घालमेल पर कड़ा प्रहार किया और इसे संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ का परिणाम बताया।

मायावती का कहना – धर्म में राजनीति का बढ़ता हस्तक्षेप चिंता का विषय

मायावती ने लिखा कि उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों में धार्मिक पर्व, त्योहार, पूजा-पाठ और स्नान में राजनीतिक हस्तक्षेप पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ गया है। उनका कहना है कि इससे नए विवाद, तनाव और संघर्ष पैदा हो रहे हैं, जो बिल्कुल सही नहीं हैं।

उन्होंने कहा,“इन सब बातों से आम जनता में दुख और चिंता की लहर होना स्वाभाविक है।”

राजनीति और धर्म को जोड़ने के खतरे

बसपा प्रमुख ने प्रयागराज विवाद का उदाहरण देते हुए कहा कि संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ के लिए धर्म को राजनीति से जोड़ना हमेशा खतरनाक होता है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में चल रहा विवाद और आरोप-प्रत्यारोप इसका ताज़ा उदाहरण है, जिससे बचना ही बेहतर है।

संविधान और राष्ट्रीय धर्म की नसीहत

मायावती ने राजनेताओं को याद दिलाया कि संविधान और कानून केवल जनहित व जनकल्याणकारी कार्यों को वास्तविक राष्ट्रीय धर्म मानता है। उन्होंने अपील की कि राजनेता बिना किसी द्वेष और पक्षपात के सर्वसमाज के हित में काम करें।

यह भी पढ़े:- अविमुक्तेश्वरानंद की सुरक्षा पर संकट! शिष्यों ने जताई जान को खतरे की आशंका, शिविर में

उनका संदेश साफ था कि प्रयागराज का यह कड़वा विवाद आपसी सहमति से जितनी जल्दी सुलझे, उतना ही बेहतर है।

उत्तर प्रदेश दिवस पर शुभकामनाएं

अपने बयान के अंत में मायावती ने प्रदेशवासियों को ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि संवैधानिक मूल्यों और आपसी सद्भाव बनाए रखना प्रदेश की प्रगति के लिए अनिवार्य है।

अविमुक्तेश्वरानंद की सुरक्षा पर संकट! शिष्यों ने जताई जान को खतरे की आशंका, शिविर में लगाए गए 10 सीसीटीवी कैमरे

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या स्नान को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच चल रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मौनी अमावस्या के बाद बसंत पंचमी पर भी स्नान न करने के उनके फैसले के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। इस बीच अब शंकराचार्य की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं।

शंकराचार्य के शिष्यों और शिविर प्रबंधन ने उनकी जान को खतरा होने की आशंका जताई है। आरोप है कि पिछले कुछ दिनों से रात के समय शिविर के आसपास संदिग्ध और अपरिचित लोगों की आवाजाही देखी जा रही है। किसी भी संभावित अनहोनी या साजिश को देखते हुए शिविर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पूरे परिसर को सीसीटीवी निगरानी में ला दिया गया है।

शिविर के चारों ओर 10 हाई-डेफिनेशन कैमरे लगाए गए

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगिराज सरकार ने बताया कि सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक न हो, इसके लिए शिविर परिसर और आसपास के इलाकों में 10 हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

उनका दावा है कि रात के सन्नाटे में कुछ अज्ञात लोग शिविर के आसपास घूमते और रेकी करते नजर आए हैं, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल

शिविर प्रबंधन ने केवल बाहरी तत्वों पर ही नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए हैं। मीडिया प्रभारी का आरोप है कि प्रशासन की ओर से रात के अंधेरे में आकर नोटिस चस्पा किए जाते हैं, जिससे संदेह और भय का माहौल बन रहा है।

यह भी पढ़े:- क्या है UGC Regulation, जिसका अगड़ी जातियों के लोग कर रहे हैं विरोध? जानिए पूरा मामला

उन्होंने कहा कि आशंका है कि किसी भी समय शिविर को फंसाने की कोशिश की जा सकती है, इसलिए हर गतिविधि को रिकॉर्ड करने के उद्देश्य से सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

सुरक्षा एजेंसियों की गतिविधियां भी बढ़ीं

शिविर प्रबंधन के अनुसार, सादी वर्दी में एलआईयू, प्रदेश और केंद्र की सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी भी शिविर के आसपास सक्रिय देखे जा रहे हैं। ऐसे में शिविर में आने-जाने वाले हर व्यक्ति पर नजर रखना जरूरी हो गया है। कैमरों के माध्यम से 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।

भक्तों और शिष्यों में बढ़ी चिंता

शंकराचार्य की सुरक्षा को लेकर उठी इन आशंकाओं के बाद माघ मेले में मौजूद उनके अनुयायियों और भक्तों में चिंता का माहौल है। विशेष प्रतिनिधि देवेंद्र पांडे ने कहा कि सीसीटीवी लगवाना मजबूरी बन गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि संत के वेश में असामाजिक तत्व घूम रहे हैं और रात के समय वीडियो बनाकर डराने की कोशिश की जाती है। उनका कहना है कि नोटिस देने का काम दिन में होना चाहिए, रात में इस तरह की गतिविधियां संदेह पैदा करती हैं। इसी कारण शंकराचार्य की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए गए हैं।

क्या है UGC Regulation, जिसका अगड़ी जातियों के लोग कर रहे हैं विरोध? जानिए पूरा मामला

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- हाल के दिनों में यूजीसी (UGC) रेगुलेशन को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध देखने को मिल रहा है। खासकर अगड़ी जातियों से जुड़े संगठनों और लोगों ने इस नियम को लेकर आपत्ति जताई है। सवाल यह है कि आखिर यह UGC रेगुलेशन है क्या, और इसका विरोध क्यों हो रहा है? आइए पूरे मुद्दे को-

क्या है UGC Regulation?

UGC यानी University Grants Commission देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को नियंत्रित करने वाली शीर्ष संस्था है। UGC समय-समय पर विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए नियम (Regulations) जारी करती है, ताकि शिक्षा व्यवस्था में समानता और पारदर्शिता बनी रहे।

हालिया विवाद जिस UGC रेगुलेशन को लेकर है, वह मुख्य रूप से शिक्षण पदों (प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर) में भर्ती और प्रमोशन की प्रक्रिया से जुड़ा है। इसमें आरक्षण रोस्टर, मेरिट और कैडर आधारित नियुक्तियों को लेकर नए दिशा-निर्देश शामिल हैं।

विवाद की जड़ क्या है?

नए UGC रेगुलेशन के तहत विश्वविद्यालयों में आरक्षण को विभाग (Department) की जगह विश्वविद्यालय स्तर (University Level) पर लागू करने की व्यवस्था की जा रही है। इसका असर यह होगा कि आरक्षित वर्गों (SC, ST, OBC) को नियुक्तियों में अधिक प्रतिनिधित्व मिलेगा| कई जनरल कैटेगरी (अगड़ी जाति) के उम्मीदवारों को कम अवसर मिलने की आशंका है|

यह भी पढ़े:- जनगणना अधिसूचना में जाति का कॉलम नहीं, अखिलेश यादव का आरोप— बोले, भाजपा

इसी को लेकर अगड़ी जातियों के संगठन कह रहे हैं कि यह व्यवस्था मेरिट के खिलाफ है और इससे योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा।

अगड़ी जातियों का विरोध क्यों?

विरोध कर रहे लोगों का तर्क है कि आरक्षण का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है, जनरल कैटेगरी के लिए अवसर सीमित होते जा रहे हैं| प्रमोशन और नियुक्तियों में योग्यता की बजाय जाति को प्राथमिकता दी जा रही है| इसी वजह से कई जगहों पर धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन और विरोध मार्च किए जा रहे हैं।

सरकार और समर्थकों की क्या दलील है?

UGC और सरकार का कहना है कि यह रेगुलेशन संविधान के सामाजिक न्याय के सिद्धांत के अनुरूप है। समर्थकों के मुताबिक: उच्च शिक्षा संस्थानों में अब भी आरक्षित वर्गों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है| यह नियम अवसरों में समानता लाने की दिशा में जरूरी कदम है| आरक्षण के साथ-साथ योग्यता से कोई समझौता नहीं किया जा रहा| सरकार का दावा है कि यह व्यवस्था समावेशी शिक्षा प्रणाली को मजबूत करेगी।

आगे क्या हो सकता है?

UGC रेगुलेशन को लेकर विवाद अभी थमता नजर नहीं आ रहा है। आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन और तेज हो सकते हैं| राजनीतिक दल इसे बड़ा मुद्दा बना सकते हैं| मामला अदालत तक भी पहुंच सकता है| फिलहाल यह विषय शिक्षा, आरक्षण और सामाजिक संतुलन के बीच एक बड़ी बहस बन चुका है।

जनगणना अधिसूचना में जाति का कॉलम नहीं, अखिलेश यादव का आरोप— बोले, भाजपा फिर हुई बेनकाब

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जनगणना को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अखिलेश यादव का कहना है कि हाल ही में जारी जनगणना अधिसूचना में ‘जाति’ से जुड़ा कोई कॉलम शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने इसे पीडीए समाज (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) के खिलाफ एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।

‘जब कॉलम ही नहीं, तो गिनती कैसी?’

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अधिसूचना में जाति का कॉलम ही नहीं है, तो सरकार आखिर किस आधार पर गणना करेगी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जातिगत जनगणना भी भाजपा का एक और चुनावी वादा या जुमला बनकर रह गया है।

अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा की नीति साफ है— न तो वास्तविक गिनती होगी और न ही आनुपातिक आरक्षण व अधिकारों के लिए कोई ठोस जनसांख्यिकीय आधार तैयार किया जाएगा।

भाजपा नेताओं पर साधा निशाना

सपा अध्यक्ष ने उन भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी कटघरे में खड़ा किया, जो अब तक अपने समाज में जातिगत जनगणना का भरोसा दिला रहे थे। अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा पर भरोसा करने वाले लोग आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि जो भाजपा नेता जातिगत जनगणना का दावा करते थे, वे अब अपने समाज में जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि उन्हें अपनी पहचान और पार्टी से जुड़ाव छिपाने को मजबूर होना पड़ रहा है।

भाजपा को बताया ‘छलजीवी’ और ‘वचन-विमुखी’

अखिलेश यादव ने भाजपा पर तीखा हमला जारी रखते हुए कहा कि जब इस मुद्दे पर दबाव बढ़ेगा, तो पार्टी इसे ‘टाइपिंग मिस्टेक’ बताकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करेगी। उन्होंने भाजपा को ‘छलजीवी’ करार देते हुए कहा कि अब जनता उनके हर कदम को पहले ही समझने लगी है।

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उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है और शब्दकोशों में ‘वचन-विमुखी’ का अर्थ अब ‘भाजपा’ लिखे जाने का समय आ गया है।

पीडीए समाज को खुद लड़नी होगी लड़ाई

अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से आह्वान किया कि पीडीए समाज को अपने सम्मान, अधिकार और आरक्षण के लिए स्वयं संघर्ष करना होगा। उन्होंने संकेत दिया कि समाजवादी पार्टी इस मुद्दे पर आने वाले समय में सड़क से लेकर सदन तक बड़ा आंदोलन छेड़ सकती है।

‘जैसे इनके नेता चोर…’, योगी सरकार के मंत्री अनिल राजभर का ओपी राजभर पर मंच से तीखा हमला

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में शामिल दो कैबिनेट मंत्रियों अनिल राजभर और ओम प्रकाश राजभर के बीच लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक खींचतान एक बार फिर खुले मंच पर सामने आ गई। वाराणसी में महाराजा सुहेलदेव की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने सुभासपा प्रमुख और सरकार में ही मंत्री ओपी राजभर पर सार्वजनिक रूप से गंभीर आरोप लगा दिए।

कार्यक्रम के दौरान मंच से संबोधन करते हुए अनिल राजभर ने नारेबाजी कर रहे सुभासपा कार्यकर्ताओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि “जैसे इनके नेता हैं, वैसे ही ये लोग भी हैं”, जिसके बाद कार्यक्रम स्थल पर माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस बयान के बाद सुभासपा समर्थकों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने माफी या एफआईआर की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया।

महाराजा सुहेलदेव जयंती कार्यक्रम में बढ़ा विवाद

घटना वाराणसी के सुहेलदेव पार्क की है, जहां महाराजा सुहेलदेव राजभर की जयंती के अवसर पर समारोह आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान जब अनिल राजभर भाषण दे रहे थे, तभी पीला गमछा पहने कुछ सुभासपा समर्थकों ने नारेबाजी शुरू कर दी। आयोजकों ने उन्हें शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन शोरगुल बंद नहीं हुआ।

नारेबाजी से नाराज होकर अनिल राजभर ने आयोजकों को निर्देश दिया कि ऐसे लोगों को पंडाल से बाहर निकाला जाए। इसके बाद उनके समर्थकों और आयोजकों ने सुभासपा कार्यकर्ताओं को बाहर करने की कोशिश की, जिससे कुछ देर के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

ओपी राजभर से गठबंधन के विरोध में रहे हैं अनिल राजभर

गौरतलब है कि ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा का वर्तमान में भाजपा के साथ गठबंधन है और इसी के तहत उन्हें योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। हालांकि, इस गठबंधन का अनिल राजभर ने शुरुआत से ही विरोध किया है।

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पिछले विधानसभा चुनाव में ओपी राजभर ने समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और अनिल राजभर के खिलाफ अपने बेटे अरविंद राजभर को उम्मीदवार बनाया था। इसके बावजूद अनिल राजभर चुनाव जीतने में सफल रहे और मंत्री बने। बाद में ओपी राजभर के सपा से अलग होने और भाजपा से नजदीकी बढ़ने पर भी अनिल राजभर ने खुलकर आपत्ति जताई थी।

‘चोर’ कहे जाने पर सुभासपा समर्थकों का धरना

अनिल राजभर की टिप्पणी के बाद सुभासपा के कार्यकर्ता महाराजा सुहेलदेव पार्क में धरने पर बैठ गए। धरना दे रहे सुहेलदेव पार्टी के युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रुद्र राजन राजभर ने कहा कि जब तक अनिल राजभर सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते या उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

धरने में सुरेंद्र राजभर, ज्वाला राजभर, विशाल चौबे, आशीष, विकास, सुजीत, अनिकेत, सूरज, प्रमोद सहित कई कार्यकर्ता शामिल हैं। वहीं, बताया जा रहा है कि ओपी राजभर की ओर से भी इस पूरे मामले को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के सामने आपत्ति दर्ज कराई गई है।

Aaj Ka Rashifal 24 January 2026: जानें 12 राशियों का हाल, कैसा रहेगा आपका दिन

Aaj Ka Rashifal 24 January 2026: आज ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति की बात करें तो गुरु मिथुन राशि में विराजमान हैं। केतु सिंह राशि में हैं। सूर्य, बुध और मंगल मकर राशि में गोचर कर रहे हैं। राहु कुंभ राशि में स्थित हैं, जबकि शनि और चंद्रमा का विष योग मीन राशि में बना हुआ है। इन ग्रहों का असर सभी 12 राशियों पर देखने को मिलेगा। आइए जानते हैं आज का राशिफल।

मेष राशि

आज सिरदर्द, आंखों से जुड़ी परेशानी और बेवजह खर्च बढ़ सकता है। मन में किसी अनजाने डर की भावना बनी रह सकती है। हालांकि प्रेम जीवन और संतान पक्ष संतोषजनक रहेगा। व्यापार की स्थिति अच्छी बनी हुई है। आज नीली वस्तु का दान करना शुभ फल देगा।

वृषभ राशि

आय में उतार-चढ़ाव रहेगा, लेकिन कुल मिलाकर लाभ की स्थिति बनी रहेगी। यात्रा के दौरान परेशानी हो सकती है, पर अंत में फायदा होगा। कोई भ्रमित करने वाली सूचना मिल सकती है, जो आगे चलकर शुभ समाचार में बदल सकती है। प्रेम और संतान पक्ष सामान्य रहेगा, जबकि व्यापार बहुत अच्छा रहेगा। नीली वस्तु अपने पास रखें।

मिथुन राशि

व्यवसाय में अस्थिरता बनी रह सकती है। कोर्ट-कचहरी या कानूनी मामलों में मनचाहा परिणाम नहीं मिलेगा। पिता के स्वास्थ्य और खुद की सेहत पर ध्यान देना जरूरी है। प्रेम जीवन और संतान से जुड़ी स्थिति अच्छी रहेगी। व्यापार भी संतोषजनक है। नीली वस्तु पास रखना लाभकारी होगा।

कर्क राशि

मान-सम्मान को लेकर चिंता रह सकती है। यात्रा कष्टप्रद साबित हो सकती है। स्वास्थ्य कमजोर रह सकता है। हालांकि प्रेम, संतान और व्यापार से जुड़ी स्थिति अनुकूल बनी रहेगी। आज लाल वस्तु अपने पास रखें।

सिंह राशि

चोट-चपेट या किसी परेशानी में फंसने की आशंका है। हालात कुछ प्रतिकूल रह सकते हैं, इसलिए सावधानी से दिन बिताएं। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। प्रेम और संतान पक्ष ठीक रहेगा, व्यापार सामान्य रहेगा। नीली वस्तु का दान करना शुभ रहेगा।

कन्या राशि

आज खुद के स्वास्थ्य के साथ-साथ जीवनसाथी की सेहत पर भी ध्यान देना जरूरी है। प्रेम संबंधों में मुलाकात अपेक्षा के अनुरूप नहीं रह सकती। नौकरी में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। प्रेम और संतान मध्यम रहेंगे, जबकि व्यापार ठीक-ठाक रहेगा। नीली वस्तु पास रखें।

तुला राशि

शत्रुओं पर विजय मिलेगी और ज्ञान में वृद्धि होगी। बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त होगा। हालांकि स्वास्थ्य थोड़ा प्रभावित रह सकता है। प्रेम और संतान से जुड़ी स्थिति अच्छी है। व्यापार सामान्य रहेगा। नीली वस्तु साथ रखें।

वृश्चिक राशि

बच्चों की सेहत को लेकर सतर्क रहें। प्रेम संबंधों में विवाद की स्थिति बन सकती है। किसी भी बड़े फैसले को फिलहाल टालना बेहतर रहेगा, क्योंकि भावुक होकर लिया गया निर्णय नुकसान दे सकता है। व्यापार अच्छा रहेगा, लेकिन मानसिक तनाव रह सकता है। पीली वस्तु अपने पास रखें।

धनु राशि

ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्या हो सकती है। स्वयं और मां के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। घर में नकारात्मक माहौल और पारिवारिक कलह के संकेत हैं। भौतिक सुख-सुविधाओं में कमी महसूस हो सकती है। प्रेम, संतान और व्यापार की स्थिति अच्छी बनी रहेगी। लाल वस्तु पास रखें।

मकर राशि

पराक्रम में थोड़ी कमी महसूस हो सकती है। नाक, कान या गले से जुड़ी परेशानी संभव है। प्रेम और संतान पक्ष अच्छा रहेगा। व्यापार सामान्य स्थिति में रहेगा। आज काली जी को प्रणाम करना शुभ रहेगा।

कुंभ राशि

धन हानि की आशंका है, इसलिए जुआ, सट्टा या लॉटरी से दूरी बनाए रखें। निवेश करने से फिलहाल बचें। मुंह या दांतों से जुड़ी समस्या हो सकती है। स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है। प्रेम, संतान और व्यापार सामान्य रहेगा। पीली वस्तु का दान करें।

मीन राशि

आज बेचैनी और घबराहट महसूस हो सकती है। स्वास्थ्य, प्रेम और व्यापार के लिहाज से दिन चुनौतीपूर्ण रहेगा। सतर्क रहने की जरूरत है। हालांकि आय के स्रोत मजबूत बने रहेंगे। नीली वस्तु का दान करना लाभकारी रहेगा।