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यूपी बोर्ड परीक्षा 2026: जूते-मोजे उतरवाने पर रोक, तलाशी से लेकर निगरानी तक सख्त नियम लागू

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- यूपी बोर्ड परीक्षाओं को लेकर हर साल नकल, अव्यवस्था और परीक्षार्थियों के साथ दुर्व्यवहार जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। इन तमाम आरोपों और विवादों पर रोक लगाने के लिए इस बार उत्तर प्रदेश सरकार ने कड़े और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 को लेकर सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि अब परीक्षा केवल प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरी प्रक्रिया अनुशासन, पारदर्शिता और मानवीय गरिमा के दायरे में संचालित होगी।

सबसे अहम बदलाव यह किया गया है कि अब किसी भी परीक्षार्थी को जूते या मोजे उतरवाकर परीक्षा नहीं ली जाएगी। बीते वर्षों में इस तरह की तलाशी को लेकर छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी देखी गई थी। नए निर्देशों के मुताबिक, परीक्षार्थियों की जांच परीक्षा केंद्र के मुख्य द्वार पर ही की जाएगी, ताकि कक्षा में प्रवेश के बाद उन्हें किसी तरह की असुविधा या अपमान का सामना न करना पड़े। इस फैसले को छात्रों के सम्मान और सुविधा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को भी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत किया गया है। सभी केंद्रों पर लगे सीसीटीवी कैमरे और वॉयस रिकॉर्डर की रोजाना जांच अनिवार्य कर दी गई है। यदि कोई उपकरण खराब पाया जाता है, तो इसकी सूचना तुरंत जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) और उनके कंट्रोल रूम को देनी होगी। साफ निर्देश हैं कि बिना सक्रिय सीसीटीवी और वॉयस रिकॉर्डर के परीक्षा किसी भी स्थिति में आयोजित नहीं की जाएगी। खराब उपकरणों को तत्काल ठीक कराना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी।

महिला परीक्षार्थियों की गरिमा को ध्यान में रखते हुए शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि छात्राओं की तलाशी केवल महिला शिक्षिकाओं द्वारा ही की जाएगी। किसी भी पुरुष शिक्षक को यह जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही केंद्र व्यवस्थापकों और कक्ष निरीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि परीक्षार्थियों के साथ किसी भी प्रकार का अभद्र व्यवहार न किया जाए और परीक्षा का माहौल शांतिपूर्ण व सम्मानजनक बना रहे।

निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए एक और महत्वपूर्ण नियम लागू किया गया है। जिस विषय की परीक्षा चल रही होगी, उस विषय के शिक्षकों की ड्यूटी उसी परीक्षा केंद्र पर नहीं लगाई जाएगी। इससे किसी भी तरह के पक्षपात या संदेह की गुंजाइश खत्म करने की कोशिश की गई है। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा।

सरकार ने परीक्षा के दौरान मीडिया गतिविधियों पर भी रोक लगा दी है। परीक्षा केंद्रों पर न तो फोटोग्राफी की अनुमति होगी और न ही प्रेस या मीडिया को किसी तरह की ब्रीफिंग दी जाएगी। प्रशासन का मानना है कि इससे परीक्षा के माहौल पर अनावश्यक दबाव पड़ता है और व्यवधान उत्पन्न होता है।

नकल पर रोक लगाने के लिए अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों, संयुक्त शिक्षा निदेशकों और डीआईओएस को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब “कैमरा खराब था” या “रिकॉर्डिंग नहीं हो सकी” जैसे बहाने स्वीकार नहीं किए जाएंगे। हर स्तर पर जवाबदेही तय की गई है।

इस बार उत्तर पुस्तिकाओं को लेकर भी नया नियम लागू किया गया है। परीक्षार्थियों को अपनी उत्तर पुस्तिका के प्रत्येक पृष्ठ पर रोल नंबर और उत्तर पुस्तिका क्रमांक लिखना अनिवार्य होगा। केंद्र व्यवस्थापक और कक्ष निरीक्षक यह सुनिश्चित करेंगे कि इस नियम का पूरी तरह पालन हो।

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परीक्षा ड्यूटी में लगे सभी कर्मचारी और कक्ष निरीक्षक अपने मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण परीक्षा केंद्र के बाहर ही जमा करेंगे। परीक्षा समाप्त होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं को सीसीटीवी और वॉयस रिकॉर्डर की निगरानी में पैक कर संकलन केंद्र भेजा जाएगा। सभी रिकॉर्डिंग कम से कम 30 दिनों तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।

संवेदनशील और अतिसंवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर सशस्त्र पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। इसके साथ ही 50 प्रतिशत वाह्य कक्ष निरीक्षकों द्वारा निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। औचक निरीक्षण की रिपोर्ट रोजाना सेक्टर और स्टैटिक मजिस्ट्रेट जिलाधिकारी और डीआईओएस को सौंपेंगे।

यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 में प्रदेश भर में कुल 8033 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इस वर्ष करीब 52.30 लाख परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे, जिनमें 27.50 लाख हाईस्कूल और 24.79 लाख इंटरमीडिएट के छात्र शामिल हैं। परीक्षा का आयोजन 18 फरवरी से 12 मार्च तक किया जाएगा।

कुल मिलाकर सरकार इस बार किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है। तकनीक, अनुशासन और मानवीय संवेदनाओं को साथ लेकर परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की कोशिश की जा रही है। साफ संदेश है कि यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 में नकल, अव्यवस्था और दुर्व्यवहार के लिए कोई जगह नहीं होगी। छात्रों के लिए यह परीक्षा सिर्फ अंक लाने की नहीं, बल्कि व्यवस्था पर भरोसे की भी परीक्षा होगी।

सब बकवास है, एपस्टीन फाइल में पीएम मोदी के नाम पर भड़का विदेश मंत्रालय?

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- एपस्टीन से जुड़ी फाइलों को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मची हुई है। इस बार इन दस्तावेजों को लेकर भारत में भी राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि एपस्टीन फाइल्स के एक ईमेल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इज़रायल यात्रा का ज़िक्र है और कहा गया है कि उन्होंने कथित तौर पर जेफ्री एपस्टीन से सलाह ली थी।

इन दावों पर विदेश मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें पूरी तरह खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इज़रायल यात्रा वर्ष 2017 में एक आधिकारिक राजकीय दौरा थी और इसका किसी भी तरह से जेफ्री एपस्टीन से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि ईमेल में किए गए दावे पूरी तरह से झूठे, निराधार और मनगढ़ंत हैं, जिन्हें गंभीरता से लेने की आवश्यकता नहीं है।

गौरतलब है कि जेफ्री एपस्टीन एक दोषी यौन अपराधी था, जिस पर नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के गंभीर आरोप थे। सामने आए ईमेल में यह भी कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने उससे सलाह ली थी। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सरकार पर सवाल उठाए और पूछा कि प्रधानमंत्री को एपस्टीन से सलाह लेने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

इस पर विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि प्रधानमंत्री की 2017 की इज़रायल यात्रा एक आधिकारिक दौरा थी और ईमेल में किए गए बाकी सभी दावे पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। मंत्रालय ने साफ कहा कि ऐसे दुष्प्रचार को सिरे से खारिज किया जाता है।

30 लाख से अधिक दस्तावेज किए गए सार्वजनिक

अमेरिका में एपस्टीन से जुड़े 30 लाख से अधिक पन्नों के दस्तावेज़ सार्वजनिक किए गए हैं। ये दस्तावेज़ एक विशेष कानून के तहत जारी किए गए हैं, जिसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि अमेरिकी सरकार को जेफ्री एपस्टीन के अपराधों और उसके प्रभावशाली लोगों से संबंधों के बारे में कितनी जानकारी थी।

डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांच के अनुसार, न्याय विभाग ने एपस्टीन से जुड़े रिकॉर्ड के सबसे बड़े खुलासे के तहत ये दस्तावेज़ जारी किए हैं। इनमें वे फाइलें भी शामिल हैं जिन्हें पहले सार्वजनिक करने से रोक दिया गया था। ये सभी रिकॉर्ड विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध कराए गए हैं।

इन दस्तावेजों को ‘एपस्टीन फाइल पारदर्शिता अधिनियम’ के तहत जारी किया गया है, जिसे लंबे समय से चले आ रहे सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव के बाद लागू किया गया था। इसके तहत सरकार को जेफ्री एपस्टीन और उसकी करीबी सहयोगी व पूर्व प्रेमिका घिसलेन मैक्सवेल से संबंधित फाइलों को सार्वजनिक करना अनिवार्य किया गया।

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इससे पहले न्याय विभाग ने क्रिसमस से ठीक पहले भी हजारों पन्नों के दस्तावेज़ जारी किए थे, जिनमें तस्वीरें, कॉल रिकॉर्ड, साक्षात्कार के ट्रांसक्रिप्ट और अदालती दस्तावेज़ शामिल थे। हालांकि, इनमें से कई रिकॉर्ड पहले से सार्वजनिक थे या आंशिक रूप से संपादित किए गए थे।

अब तक न तो पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और न ही पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पर एपस्टीन से जुड़े किसी अपराध का सार्वजनिक आरोप लगाया गया है। दोनों नेताओं ने यह दावा किया है कि उन्हें एपस्टीन की आपराधिक गतिविधियों की कोई जानकारी नहीं थी।

गौरतलब है कि वर्ष 2021 में न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत ने घिसलेन मैक्सवेल को यौन तस्करी के मामले में दोषी ठहराया था। उस पर नाबालिग लड़कियों की भर्ती में मदद करने का आरोप था। फिलहाल वह अमेरिका में 20 साल की सजा काट रही है, हालांकि उसने किसी भी गलत कार्य में शामिल होने से इनकार किया है।

योगी अपने हैं, उन्हें हराने की साजिश है UGC नियम – इस्तीफा दे चुके अलंकार अग्निहोत्री का बड़ा दावा

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- यूजीसी के नए नियमों के विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा दे चुके अलंकार अग्निहोत्री ने शनिवार को कानपुर में एक बड़ा राजनीतिक बयान देकर हलचल मचा दी। उन्होंने दावा किया कि UGC Regulation 2026 को उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों को प्रभावित करने के उद्देश्य से लाया गया है।

अलंकार अग्निहोत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा-“मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने हैं, उनसे हमें कोई शिकायत नहीं है। यह काला कानून योगी को हराने की साजिश है।”

मोदी–शाह की सोची-समझी साजिश का आरोप

अलंकार ने आरोप लगाया कि यूजीसी रेगुलेशन 2026 को भारत सरकार के गजट में जानबूझकर प्रकाशित किया गया।
उनका कहना था कि-“मोदी और शाह इस नियम के जरिए जनरल और ओबीसी समाज को आपस में लड़वाना चाहते हैं, ताकि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव को प्रभावित किया जा सके।”

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि समय रहते इसका विरोध हुआ और सुप्रीम कोर्ट ने इस काले कानून पर रोक लगाकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बजरंग बली का आशीर्वाद उनके साथ है, इसलिए सच्चाई सामने आ पाई।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मामले पर क्या बोले

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और बटुकों के साथ कथित दुर्व्यवहार के सवाल पर अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि प्रशासन की ओर से उनके साथ गलत व्यवहार किया गया
हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में जांच समिति गठित कर दी है| सरकार और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच वार्ता जारी है

इस्तीफे से देशभर में फैला विरोध

अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि यूजीसी नियम लागू होने के बाद देशभर में विरोध शुरू हुआ था, लेकिन सरकार तक उसकी आवाज नहीं पहुंच रही थी।

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उन्होंने कहा-“लोगों को यह एहसास दिलाने के लिए कि हम सब एक हैं, मैंने इस्तीफा दिया। इसके बाद विरोध राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा। बड़े-बड़े सेलिब्रिटी भी सोशल मीडिया के जरिए समर्थन में आए।” उनका दावा है कि इसी दबाव के चलते सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा।

मंत्री–विधायक विवाद पर तीखा बयान

महोबा में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और विधायक बृजभूषण राजपूत के बीच हुए विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए अलंकार ने कहा कि- “यह विवाद कमीशनखोरी का है। देश में विकास इसलिए नहीं हो पा रहा, क्योंकि हर स्तर पर कमीशनखोरी हावी है।”

उन्होंने दावा किया कि कई सांसद और विधायक सच बोलना चाहते हैं, लेकिन आयकर, ईडी और सीबीआई के डर से चुप हैं।“जो भी आवाज उठाता है, उसे नोटिस देकर दबा दिया जाता है।”

व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई

अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि यह संघर्ष सिर्फ एक कानून के खिलाफ नहीं है। “यह व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई है। मैं अकेला नहीं हूं, अब जनता भी इस लड़ाई में हमारे साथ खड़ी है।”

सैकड़ों भक्तों संग अयोध्या पहुंचे गोपाल सेठ, राम मंदिर में किया दर्शन–पूजन

अयोध्या/सर्वोदय न्यूज़ :- जय मां श्री ऊषा माता शिव मंदिर ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल सेठ सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ रामनगरी अयोध्या पहुंचे। इस अवसर पर उन्होंने माता ऊषा की तस्वीर के साथ अयोध्या धाम का भ्रमण किया और भक्तों के साथ प्रमुख धार्मिक स्थलों पर विधिवत दर्शन–पूजन संपन्न कराया।

गोपाल सेठ ने श्रद्धालुओं के साथ श्रीराम जन्मभूमि मंदिर,हनुमानगढ़ी,और कनक भवन में दर्शन कर पूजा-अर्चना की।

भव्य सरयू आरती में भी हुई सहभागिता

धार्मिक यात्रा के दौरान श्रद्धालु राजा महाराज के नेतृत्व में आयोजित भव्य सरयू आरती में भी शामिल हुए। सरयू तट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन-अर्चन किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिरस में सराबोर हो गया। कार्यक्रम के दौरान अयोध्या पूरी तरह भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंगी नजर आई।

गोपाल सेठ बोले—अयोध्या का स्वरूप अद्भुत

इस अवसर पर गोपाल सेठ ने कहा-“योगी–मोदी सरकार ने रामनगरी अयोध्या को अद्भुत रूप से संवारा है। यहां की आध्यात्मिक छटा मन को अत्यंत शांति और प्रसन्नता प्रदान करती है। श्री ऊषा माता के आशीर्वाद से हमें प्रभु श्रीराम के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसके लिए हम प्रभु श्रीराम और वर्तमान सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।”

सनातन धर्म के प्रचार में जुटा ट्रस्ट

प्रसिद्ध कथावाचक रवि तिवारी ने कहा कि— “जो भी प्रभु श्रीराम की शरण में आता है, उसका जीवन धन्य हो जाता है। हम भक्तों को लगातार रामनगरी अयोध्या आने के लिए प्रेरित करते हैं। श्री ऊषा माता ट्रस्ट से जुड़े सभी लोग सनातन धर्म के प्रचार–प्रसार में निरंतर सक्रिय हैं।”

सरयू की महिमा का वर्णन

श्री ऊषा माता मंदिर के पुजारी रवि तिवारी ने रामायण की प्रसिद्ध चौपाई का उल्लेख करते हुए कहा-“कोटि कल्प काशी बसे, मथुरा कल्प हजार। एक निमिष सरजू बसे, तुले न तुलसीदास॥”

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उन्होंने कहा कि सरयू नदी की महिमा अतुलनीय है और प्रत्येक सनातनी को इसके आध्यात्मिक महत्व से जुड़ना चाहिए।

बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे मौजूद

इस धार्मिक यात्रा में ट्रस्ट सहयोगी प्रवेश कपूर, कथा व्यास पूज्य रवि महाराज,सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और सनातन प्रेमी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में “जय श्रीराम” और “जय मां ऊषा माता” के जयकारे लगाए।

मुसलमानों को गाली देने से हिंदू राष्ट्र नहीं बनेगा,धीरेंद्र शास्त्री ने सनातन समाज में आत्मसुधार पर दिया जोर

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदू समाज को आत्ममंथन और सुधार का संदेश दिया है। उत्तर प्रदेश के बांदा में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि किसी समुदाय को गाली देने या निशाना बनाने से भारत हिंदू राष्ट्र नहीं बन सकता।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंदू समाज को पहले अपनी आंतरिक कुरीतियों और कमजोरियों को दूर करना होगा, तभी समाज में एकता, शांति और सौहार्द स्थापित हो सकेगा।

बांदा में धार्मिक कार्यक्रम के दौरान दिया संदेश

दिव्य हनुमंत कथा के समापन के करीब दस दिन बाद धीरेंद्र शास्त्री शुक्रवार को एक बार फिर बांदा पहुंचे। वे खुरहंड स्टेशन क्षेत्र में सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी के आवास पर आयोजित सुंदरकांड और हनुमान चालीसा पाठ कार्यक्रम में शामिल हुए।

इस दौरान उन्होंने कहा- “हिंदू मेरी एक बात नोट कर लें, मुसलमानों को गालियां देकर हिंदू राष्ट्र नहीं बनेगा। हिंदुओं को अपनी कुरीतियां सुधारनी होंगी। सनातन में जो कमियां हैं, उन्हें दूर करना होगा।”

जात-पात खत्म करने की अपील

धीरेंद्र शास्त्री ने समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि“भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का एक ही उपाय है—जात-पात की विदाई। हम सब हिंदू भाई-भाई हैं।”

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उनके मुताबिक, जब तक समाज अंदर से मजबूत और एकजुट नहीं होगा, तब तक किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सकता।

कानून और व्यवस्था पर टिप्पणी

अपने संबोधन में उन्होंने पारिवारिक कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि “हमारे यहां तो 20–25 बार पेशी होने के बाद तलाक होता है। इसमें कोई बुराई नहीं है। नियम-कायदों में रहेंगे तो फायदे में रहेंगे।” उन्होंने इसे व्यवस्था और अनुशासन से जोड़ते हुए समाज के लिए सकारात्मक बताया।

आस्था पर दिया संदेश

धीरेंद्र शास्त्री ने आस्था और विश्वास को लेकर भी श्रद्धालुओं को संदेश दिया। उन्होंने कहा- “हमारा काम है दर पर जाना, उनका काम है बिगड़ी बनाना और परमात्मा का काम है सब कुछ संभालना। अगर भगवान पर भरोसा रखोगे, तो वह कभी भरोसा नहीं तोड़ेगा।” उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि आस्था में स्पष्टता और एकनिष्ठता जरूरी है।

क्या संदेश देना चाहते हैं शास्त्री?

धीरेंद्र शास्त्री के बयान को समाज में आत्मसुधार,आंतरिक एकता,और सामाजिक समरसता पर जोर देने के रूप में देखा जा रहा है।

सोना एक झटके में 33 हजार टूटा, खरीदारी का सुनहरा मौका, जानें आज के ताजा रेट

Gold Rate Today 31 January 2026: देश में सोने और चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट ने बाजार को चौंका दिया है। सिर्फ एक कारोबारी दिन में सोना प्रति 10 ग्राम 33 हजार रुपये से ज्यादा सस्ता हो गया, जबकि चांदी की कीमतों में 1 लाख रुपये से अधिक की बड़ी टूट दर्ज की गई है।

लगातार रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद आई यह गिरावट वेडिंग सीजन से पहले आम लोगों और निवेशकों—दोनों के लिए राहत लेकर आई है।

आज कितना सस्ता हुआ सोना?

31 जनवरी 2026 को राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोना: ₹1,79,010 प्रति 10 ग्राम, 22 कैरेट सोना: ₹1,64,110 प्रति 10 ग्राम

जानकारों का कहना है कि हालिया गिरावट ने सोने को फिर से खरीदारों की पहुंच में ला दिया है।

MCX पर जबरदस्त गिरावट

MCX पर 2 अप्रैल एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर 29 जनवरी को जहां ₹1,83,962 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, वहीं 30 जनवरी की क्लोजिंग तक यह फिसलकर ₹1,50,849 पर आ गया। इतनी तेज गिरावट से निवेशक भी हैरान रह गए।

लाइफटाइम हाई से कितना नीचे आया सोना?

बीते सप्ताह सोना तेजी के साथ ₹1,93,096 प्रति 10 ग्राम के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया था। इसके बाद अचानक आई बिकवाली ने बाजार की तस्वीर बदल दी। रिकॉर्ड स्तर से तुलना करें तो सोना करीब ₹42,247 प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि यह वही करेक्शन है, जिसकी आशंका लंबे समय से जताई जा रही थी।

Gold Rate Today In India: 31 जनवरी 2026

देश के 10 बड़े शहरों में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)

  • दिल्ली: 24K ₹1,79,010 | 22K ₹1,64,110 | 18K ₹1,20,330
  • मुंबई: 24K ₹1,78,860 | 22K ₹1,63,960 | 18K ₹1,19,930
  • अहमदाबाद: 24K ₹1,78,910 | 22K ₹1,64,010 | 18K ₹1,19,970
  • चेन्नई: 24K ₹1,78,860 | 22K ₹1,63,960 | 18K ₹1,19,930
  • कोलकाता: 24K ₹1,78,860 | 22K ₹1,63,960 | 18K ₹1,19,930
  • हैदराबाद: 24K ₹1,78,860 | 22K ₹1,63,960 | 18K ₹1,19,930
  • जयपुर: 24K ₹1,79,010 | 22K ₹1,64,110 | 18K ₹1,20,330
  • भोपाल: 24K ₹1,78,910 | 22K ₹1,64,010 | 18K ₹1,19,970
  • लखनऊ: 24K ₹1,79,010 | 22K ₹1,64,110 | 18K ₹1,20,330
  • चंडीगढ़: 24K ₹1,79,010 | 22K ₹1,64,110 | 18K ₹1,20,330

क्या यह खरीदारी का सही समय है?

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इतनी बड़ी गिरावट के बाद शादी-ब्याह की खरीदारी और लॉन्ग टर्म निवेश के लिए यह एक अच्छा मौका हो सकता है। हालांकि, कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, इसलिए निवेश से पहले बाजार पर नजर रखना जरूरी है।

सोना-चांदी क्यों टूटे?

विशेषज्ञों के अनुसार डॉलर में मजबूती, ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली, ब्याज दरों को लेकर संकेत| वैश्विक ट्रेड टेंशन में नरमी जैसे कारणों ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया। रिकॉर्ड तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू किया, जिससे भाव तेजी से नीचे आए।

भारत में सोने-चांदी के दाम कैसे तय होते हैं?

देश में सोने और चांदी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, आयात शुल्क, टैक्स, MCX वायदा कारोबार और घरेलू मांग पर निर्भर करती हैं। इसके अलावा शादी का सीजन, ज्वेलरी डिमांड और वैश्विक आर्थिक हालात भी रेट तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

डिस्क्लेमर: यह खबर केवल जानकारी के उद्देश्य से है। सोना-चांदी या ETF में निवेश से पहले किसी वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।

खराब फॉर्म के बावजूद इतिहास रच सकते हैं संजू सैमसन,टी20 विश्व कप में शतक की भविष्यवाणी,सुरेश रैना ने जताया भरोसा

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स्पोर्ट्स डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:-  टी20 विश्व कप के इतिहास में भारतीय बल्लेबाजों के नाम एक खास रिकॉर्ड दर्ज है। 2007 से 2024 तक खेले गए 9 टी20 विश्व कप संस्करणों में अब तक सिर्फ एक भारतीय बल्लेबाज ही इस टूर्नामेंट में शतक जड़ सका है—और वह नाम है सुरेश रैना

अब पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना ने खुलासा किया है कि उनके इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड की बराबरी कौन कर सकता है। हैरानी की बात यह है कि रैना ने जिस खिलाड़ी का नाम लिया है, वह इस समय खराब फॉर्म से जूझ रहा है। रैना के मुताबिक, संजू सैमसन अगले भारतीय बल्लेबाज हो सकते हैं, जो टी20 विश्व कप में शतक लगाने का कारनामा कर दिखाएं।

2026 टी20 विश्व कप में कर सकते हैं कमाल

सुरेश रैना का मानना है कि संजू सैमसन में वह सभी गुण मौजूद हैं, जो उन्हें 2026 टी20 विश्व कप में एक ऐतिहासिक पारी खेलने में सक्षम बना सकते हैं।

रैना के अनुसार संजू के पास बेहद नैचुरल टैलेंट है| उनका आक्रामक खेल अंदाज बड़े मुकाबलों के लिए उपयुक्त है| वे अकेले दम पर मैच का रुख पलटने की क्षमता रखते हैं|

रैना ने कहा कि विश्व कप जैसे बड़े मंच पर सफलता के लिए जिस निडर और विस्फोटक बल्लेबाजी की जरूरत होती है, वह संजू सैमसन के खेल में साफ नजर आती है।

टीम का भरोसा सबसे अहम

हालांकि रैना ने यह भी साफ किया कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए टीम मैनेजमेंट का समर्थन बेहद जरूरी होगा।
उनका कहना है कि अगर संजू को लगातार मौके मिलते हैं और वे सही समय पर अपनी लय पकड़ लेते हैं, तो वे भारतीय क्रिकेट इतिहास में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं।

मौजूदा फॉर्म चिंता का विषय

गौरतलब है कि न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली जा रही पांच मैचों की टी20 सीरीज में संजू सैमसन का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है।

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शुरुआती तीन मैचों में वे सस्ते में आउट हुए, चौथे मुकाबले में उन्होंने अच्छे शॉट्स लगाए, लेकिन बड़ी पारी नहीं खेल सके| अब सवाल यह है कि क्या टीम मैनेजमेंट संजू सैमसन पर भरोसा बनाए रखेगा या फिर उन्हें प्लेइंग इलेवन से बाहर किया जा सकता है।

चहल ने भी उठाए सवाल

संजू की लगातार खराब फॉर्म को लेकर भारतीय स्पिनर युजवेंद्र चहल ने भी सवाल उठाए हैं। इससे यह साफ है कि संजू के लिए आने वाले मैच बेहद अहम होने वाले हैं।

क्या दोहराया जाएगा इतिहास?

जहां एक ओर संजू सैमसन की मौजूदा फॉर्म चिंता बढ़ा रही है, वहीं सुरेश रैना जैसे दिग्गज का भरोसा उनके लिए बड़ी राहत है। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या संजू सैमसन खुद को साबित कर टी20 विश्व कप में इतिहास रचने में कामयाब हो पाते हैं या नहीं।

एपस्टीन फाइल्स से फिर हड़कंप, नई सूची में ट्रंप की बेटी इवांका, एलन मस्क समेत कई बड़े नाम शामिल

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- अमेरिका में जेफरी एपस्टीन से जुड़ी फाइलों ने एक बार फिर राजनीतिक और कॉरपोरेट गलियारों में हलचल मचा दी है। अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) ने एपस्टीन से संबंधित दस्तावेजों का नया और अंतिम बैच सार्वजनिक किया है, जिसमें कई हाई-प्रोफाइल नाम सामने आए हैं।

लाखों पन्नों का डेटा सार्वजनिक

न्याय विभाग की ओर से जारी इस नए बैच में करीब 30 लाख से अधिक पेज, 1.8 लाख तस्वीरें और लगभग 2000 वीडियो क्लिप्स शामिल हैं। ये सभी दस्तावेज एपस्टीन से जुड़े जांच रिकॉर्ड, ईमेल, गवाहियों और टिप्स का हिस्सा बताए जा रहे हैं। एपस्टीन की 2019 में जेल में मौत के बाद ये फाइलें FBI और न्याय विभाग के पास सुरक्षित थीं, जिन्हें बाद में पारदर्शिता कानून के तहत सार्वजनिक किया गया।

दस्तावेज क्या हैं एपस्टीन फाइल्स?

एपस्टीन फाइल्स उन जांच कागजात को कहा जाता है, जिनमें नाबालिगों के यौन शोषण और मानव तस्करी से जुड़े एक कथित नेटवर्क की जांच से संबंधित जानकारी दर्ज है। अधिकारियों के मुताबिक, इन दस्तावेजों में दर्ज कई बातें आरोप, दावे या असत्यापित सूचनाओं के रूप में मौजूद हैं, जिनकी पुष्टि होना जरूरी नहीं है।

किन-किन नामों का हुआ उल्लेख?

नई जारी फाइलों में कई जाने-माने नाम सामने आए हैं—

  • डोनाल्ड ट्रंप: दस्तावेजों में उनके नाम का उल्लेख एक पुराने आरोप से जुड़े बयान के संदर्भ में किया गया है। यह विवरण एक तीसरे पक्ष की रिपोर्ट पर आधारित बताया गया है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
  • इवांका ट्रंप: एक ईमेल के सब्जेक्ट लाइन में उनका नाम उनके पति जैरेड कुशर और एक किताब से जुड़े संदर्भ में दर्ज है।

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  • एलन मस्क: फाइलों में उनका नाम एपस्टीन से जुड़े संभावित संपर्क या यात्रा से जुड़े संदर्भ में आया है, हालांकि किसी आरोप का सीधा उल्लेख नहीं किया गया है।
  • बिल गेट्स: दस्तावेजों में उनके खिलाफ लगाए गए कुछ दावों का जिक्र है, जिन्हें पहले भी सार्वजनिक बहस का हिस्सा माना गया है।

अन्य चर्चित हस्तियां

इनके अलावा फाइलों में कई अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक नेताओं, उद्योगपतियों, कलाकारों और बुद्धिजीवियों के नाम भी दर्ज हैं। इनमें एहुद बाराक, लैरी समर्स, बिल रिचर्डसन, प्रिंस एंड्र्यू, सारा फर्ग्यूसन, माइकल जैक्सन, मिक जैगर, केविन स्पेसी, डायना रॉस, क्रिस टकर, वुडी एलन, रिचर्ड ब्रैनसन, पीटर थील, लेस वेक्सनर, नोम चॉम्स्की और स्टीफन हॉकिंग जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं।

अमेरिकी न्याय विभाग ने साफ किया है कि इन दस्तावेजों में दर्ज नामों का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति अपराध में शामिल हैं। कई जानकारियां जांच के दौरान मिली टिप्स, ईमेल या गवाहियों का हिस्सा हैं, जिनकी सत्यता की पुष्टि जरूरी नहीं है।

सुपरजेट डील के बाद बड़ा संकेत! क्या भारत के आकाश में दिखेगा दुनिया का सबसे चर्चित फाइटर जेट Su-57?

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- भारत और रूस के बीच नागरिक विमानन क्षेत्र में हुए एक अहम समझौते के बाद रक्षा गलियारों में नई अटकलें तेज हो गई हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) के बीच SJ-100 (सुखोई सुपरजेट 100) के भारत में निर्माण को लेकर करार हुआ है। इसी के साथ सवाल उठने लगा है कि क्या आने वाले समय में रूस का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट Su-57 भी भारतीय वायुसेना (IAF) के बेड़े में शामिल हो सकता है।

SJ-100 करार: सिर्फ नागरिक विमान नहीं, रणनीतिक संकेत भी

SJ-100 एक आधुनिक क्षेत्रीय यात्री विमान है। इसका भारत में निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को मजबूती देने के साथ-साथ देश के एयरोस्पेस इकोसिस्टम को नया आयाम दे सकता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल सिविल एविएशन तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में सैन्य विमानन सहयोग के लिए आधार तैयार कर सकता है।

रूसी दावे ने बढ़ाया सस्पेंस

रूस की एयरोस्पेस कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने संकेत दिया है कि भारत और रूस के बीच पांचवीं पीढ़ी के Su-57E फाइटर जेट के संयुक्त उत्पादन को लेकर तकनीकी स्तर पर बातचीत चल रही है। हालांकि, भारतीय अधिकारियों की ओर से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

यूएसी के सीईओ वादिम बदेखा ने हैदराबाद में आयोजित विंग्स इंडिया एयर शो के दौरान रूसी मीडिया से बातचीत में कहा कि दोनों देश ऐसे करार पर चर्चा के उन्नत चरण में हैं, जो आने वाले दशकों तक द्विपक्षीय सहयोग की दिशा तय कर सकते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि Su-30MKI के उत्पादन में उपयोग हो रही भारतीय सुविधाओं में Su-57 के लाइसेंस प्राप्त निर्माण की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।

Su-57 ‘Felon’: रूस की वायुशक्ति का चेहरा

Su-57 रूस का पहला ऑपरेशनल पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है। इसकी प्रमुख क्षमताएं इसे अत्याधुनिक बनाती हैं—

  • स्टील्थ तकनीक: दुश्मन के रडार से बचने की क्षमता
  • सुपरक्रूज: आफ्टरबर्नर के बिना सुपरसोनिक उड़ान
  • एडवांस्ड हथियार प्रणाली: इंटरनल वेपन बे में आधुनिक मिसाइलें

भारत और Su-57: पुराना रिश्ता, अधूरी कहानी

भारत पहले FGFA (फिफ्थ जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट) कार्यक्रम के तहत Su-57 परियोजना में शामिल था, लेकिन 2018 में इससे अलग हो गया। उस समय इंजन की तकनीक, स्टील्थ क्षमताओं और लागत व तकनीक हस्तांतरण से जुड़े मुद्दों पर भारत संतुष्ट नहीं था।

क्यों फिर चर्चा में आया Su-57?

SJ-100 समझौते के बाद Su-57 को लेकर अटकलों के पीछे तीन बड़े कारण माने जा रहे हैं—

  1. नया इंजन: Su-57 के लिए विकसित किया गया ‘स्टेज-2’ AL-51F1 इंजन, जो पहले की तकनीकी कमियों को दूर कर सकता है।
  2. युद्ध अनुभव: यूक्रेन संघर्ष में सीमित तैनाती से विमान की वास्तविक क्षमताओं का आकलन हुआ है।
  3. चीन की बढ़ती ताकत: चीन के J-20 जैसे स्टील्थ विमानों की संख्या बढ़ने से भारत के लिए पांचवीं पीढ़ी के फाइटर की जरूरत और अहम हो गई है।

आत्मनिर्भर भारत बनाम विदेशी विकल्प

भारत इस समय अपने स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान AMCA पर काम कर रहा है। ऐसे में Su-57 की संभावित खरीद AMCA परियोजना के बजट और प्राथमिकताओं को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा रूस के साथ बड़े रक्षा सौदों पर अमेरिका के CAATSA प्रतिबंधों का जोखिम भी बना रहता है।

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रूसी हथियार निर्यातक रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के सीईओ अलेक्जेंडर मिखीव पहले ही भारत को Su-57E की आपूर्ति, भारत में उत्पादन और AMCA के विकास में सहयोग की पेशकश कर चुके हैं।

आगे क्या?

कुल मिलाकर SJ-100 समझौता यह साफ संकेत देता है कि भारत-रूस औद्योगिक साझेदारी अभी भी मजबूत है। यदि रूस पूर्ण तकनीक हस्तांतरण और AMCA में वास्तविक सहयोग का भरोसा देता है, तो भविष्य में Su-57 भारतीय आसमान में उड़ता नजर आ सकता है। हालांकि फिलहाल वायुसेना का फोकस राफेल के अगले बैच और स्वदेशी विमानों पर ही बना हुआ है।

गाय को राज्यमाता घोषित किया जाए, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने की मांग

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:-  ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश सरकार से गौ माता को राज्यमाता का दर्जा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिस तरह महाराष्ट्र सरकार ने गाय को राज्यमाता घोषित किया है, उसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी यह फैसला लिया जाना चाहिए।

शंकराचार्य ने सरकार को 40 दिन का समय देते हुए चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में मांग पूरी नहीं की गई, तो 10 और 11 मार्च को लखनऊ में संत समागम आयोजित किया जाएगा। इस समागम में देशभर के साधु-संत शामिल होंगे और आगे की रणनीति तय की जाएगी।

सरकार पर उठाए सवाल

शुक्रवार को केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में आयोजित प्रेसवार्ता में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि प्रदेश सरकार ने उनसे उनके पद और परंपरा से संबंधित प्रमाण मांगे थे, जिसे उन्होंने सौंप दिया।

उन्होंने कहा,“हमारे द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को सरकार काट नहीं पाई। हिंदू होना केवल भाषण देने या भगवा पहनने तक सीमित नहीं है। इसकी असली परीक्षा गो-सेवा और धर्म-रक्षा है।”

गोवंश रक्षा पर सरकार को घेरा

शंकराचार्य ने कहा कि जो सरकार गोवंश की रक्षा करने में असमर्थ है, उसे स्वयं को सनातन हितैषी कहने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्र भारत में गोमाता की रक्षा और गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग को अपराध बना दिया गया है।

उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि
1966 में धर्मसम्राट स्वामी करपात्री महाराज सहित कई संतों पर इसी मांग को लेकर अत्याचार हुए थे। आज भी वही स्थिति दोहराई जा रही है और गौभक्तों को प्रताड़ित किया जा रहा है।

महाराष्ट्र और नेपाल का उदाहरण

शंकराचार्य ने सवाल उठाया कि “जब महाराष्ट्र में गाय को राज्यमाता का दर्जा दिया जा सकता है, तो श्रीकृष्ण की भूमि उत्तर प्रदेश में ऐसा क्यों नहीं हो सकता?”

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उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल में गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा प्राप्त है, फिर भारत जैसे सनातन परंपरा वाले देश में इसे लेकर उदासीनता क्यों है।

निर्यात के नाम पर गोहत्या का आरोप

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मांस निर्यात को लेकर भी सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत के कुल मांस निर्यात में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने तीखा सवाल किया-“क्या रामराज्य का सपना गायों के रक्त से कमाई गई विदेशी मुद्रा पर आधारित होगा?”